देहरादून। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय (VMSB-UTU) के पांच परिसर संस्थानों में निदेशक पदों पर भर्ती का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। 23 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निदेशक पदों को केवल प्रतिनियुक्ति यानी ‘Deputation Only’ के आधार पर भरे जाने को लेकर राज्य सरकार, AICTE और तकनीकी विश्वविद्यालय से जवाब मांगा है।
मामला विश्वविद्यालय की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी विज्ञापन संख्या 1093/VMSB-UTU/2026 से जुड़ा है। विज्ञापन के जरिए पांच संस्थानों में निदेशक पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इनमें पिथौरागढ़, देहरादून, बौन उत्तरकाशी, गोपेश्वर और टनकपुर स्थित संस्थान शामिल हैं। भर्ती को विज्ञापन में ‘On Deputation Basis’ बताया गया है।
भर्ती के नियमों में बदलाव बना मुख्य सवाल
हाईकोर्ट में दायर याचिका में पूर्व में जारी निदेशक भर्ती के विज्ञापनों का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया में किए गए बदलाव पर सवाल उठाया गया है। याचिका के मुताबिक वर्ष 2018, 2023 और 2024 में निदेशक पदों के लिए जारी विज्ञापनों में केवल सरकारी अधिकारियों तक भर्ती को सीमित नहीं किया गया था।
ऐसे में सवाल उठाया गया है कि वर्ष 2026 में निदेशक पदों को केवल प्रतिनियुक्ति के जरिए भरने का निर्णय किस नियम, शासनादेश या सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर लिया गया।
15 साल की सेवा समेत कई शर्तें
वर्तमान विज्ञापन में प्रतिनियुक्ति के लिए केंद्र या राज्य सरकार, PSU, सरकारी विश्वविद्यालय/संस्थान अथवा मान्यता प्राप्त शोध संस्थान में कार्यरत होने जैसी शर्तें रखी गई हैं। इसके साथ समान पद पर नियमित सेवा अथवा AICTE मानकों के अनुसार 15 वर्ष की नियमित सेवा की शर्त भी निर्धारित की गई है।
उम्मीदवारों के लिए NOC, Cadre Clearance और Vigilance/Integrity Certificate जैसी औपचारिकताएं भी रखी गई हैं।
याचिका में इन शर्तों को लेकर यह तर्क दिया गया है कि इससे AICTE के मानकों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अनुभव रखने वाले ऐसे अभ्यर्थी भी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं, जो निजी तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों अथवा अन्य संस्थानों में कार्यरत हैं।
2023 के कार्यपरिषद के फैसले का भी जिक्र
याचिका में VMSB-UTU की कार्यपरिषद के वर्ष 2023 के निर्णय का भी हवाला दिया गया है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि पहले निदेशक पदों पर व्यापक पात्रता के आधार पर नियुक्ति की व्यवस्था होने के बाद इसे ‘Deputation Only’ में बदलने का निर्णय किस सक्षम प्राधिकारी ने लिया।
याचिका में यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि भर्ती व्यवस्था में किए गए इस बदलाव को राज्य सरकार या तकनीकी शिक्षा विभाग सहित संबंधित वैधानिक संस्था से आवश्यक मंजूरी मिली थी या नहीं।
AICTE के नियमों को लेकर भी मांगा स्पष्टीकरण
याचिका में AICTE के 1 मार्च 2019 के विनियमों का हवाला देते हुए निदेशक पद के लिए निर्धारित योग्यता और अनुभव का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट के समक्ष यह सवाल भी रखा गया है कि जब AICTE की ओर से पद के लिए योग्यता एवं अनुभव के मानक निर्धारित हैं, तो भर्ती को प्रतिनियुक्ति तक सीमित करने के लिए अतिरिक्त पात्रता शर्तों का आधार क्या है।
25 सितंबर को प्रस्तावित है इंटरव्यू
इस बीच सूत्रों के अनुसार, पांच निदेशक पदों के लिए 25 सितंबर 2026 को साक्षात्कार प्रस्तावित है। जानकारी के मुताबिक करीब 7-8 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष हुई। हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से भर्ती प्रक्रिया के आधार और ‘Deputation Only’ व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट के समक्ष आने वाले जवाब से यह स्पष्ट होगा कि पांचों संस्थानों में निदेशक भर्ती के लिए अपनाई गई प्रतिनियुक्ति आधारित व्यवस्था का वैधानिक आधार क्या है।
📄 हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका की प्रति—VMSB-UTU में निदेशक भर्ती की ‘Deputation Only’ व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवाल।
