Home उत्तराखंड भूस्खलन मानचित्रण पर जियो-हैकाथॉन का सफल आयोजन

भूस्खलन मानचित्रण पर जियो-हैकाथॉन का सफल आयोजन

Successful Organization of Geo-Hackathon on Landslide Mapping
Successful Organization of Geo-Hackathon on Landslide Mapping

रिया सोलीवाल, भिकियासैंण

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। डॉ. प्रताप बिष्ट राजकीय महाविद्यालय भिकियासैंण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020) के अंतर्गत नवाचार प्रदर्शनी की गतिविधियों के क्रम में जियो-हैकाथॉन का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक एवं भौगोलिक उपकरणों के माध्यम से स्थानीय आपदाओं, विशेष रूप से भूस्खलन की पहचान एवं मानचित्रण के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य एवं कार्यक्रम निदेशक प्रो. शर्मिला सक्सेना ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नंदन सिंह बिष्ट तथा विशिष्ट अतिथि श्री मठपाल रहे। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वीएन पाण्डेय द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का स्वागत किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों से उपस्थित अतिथियों एवं विद्यार्थियों को विस्तार पूर्वक अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. परितोष उप्रेती ने विद्यार्थियों को भूस्खलन मानचित्रण की विभिन्न तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने सर्वप्रथम विद्यार्थियों को भिकियासैंण क्षेत्र के भौगोलिक परिवेश से परिचित कराया तथा स्थानीय भू-आकृतिक परिस्थितियों को समझने के महत्व पर प्रकाश डाला।
अपने व्याख्यान में उन्होंने गूगल अर्थ जैसे डिजिटल उपकरणों के उपयोग के माध्यम से भूस्खलन एवं बाढ़ जैसी आपदाओं के मानचित्रण की प्रक्रिया समझाई। विद्यार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार उपग्रह छवियों का अध्ययन कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है, तथा उनका क्षेत्रफल और विभिन्न आयाम निर्धारित किए जा सकते हैं।
जियो-हैकाथॉन के व्यावहारिक पक्ष के अंतर्गत बासोट रोड पर हुए एक बड़े भूस्खलन का उदाहरण लिया गया। विद्यार्थियों को इस भूस्खलन का अध्ययन कर उसकी मैपिंग करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके अंतर्गत भूस्खलन के क्षेत्रफल, क्राउन, विभिन्न आयामों एवं अन्य प्रमुख भू-आकृतिक घटकों की पहचान तथा उनके मानचित्रण की जानकारी दी गई।
डॉ. उप्रेती ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि भूस्खलन के अध्ययन के लिए केवल डिजिटल मैपिंग ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि क्षेत्र भ्रमण, फील्ड ऑब्जर्वेशन, ढाल की पहचान एवं मापन तथा भूस्खलन के कारणों का प्रत्यक्ष अध्ययन भी आवश्यक है। उन्होंने भूस्खलन के विभिन्न प्राकृतिक एवं मानवीय कारणों पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से सहभागिता का अवसर दिया गया। विद्यार्थियों से यह सुझाव भी लिए गए कि जियो-हैकाथॉन और नवाचार की अवधारणा को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय स्तर पर भूस्खलन, बाढ़ तथा अन्य भौगोलिक घटनाओं की मैपिंग के लिए किस प्रकार के नवीन प्रयोग किए जा सकते हैं। विद्यार्थियों की राय एवं सुझावों ने कार्यक्रम को संवादात्मक एवं नवाचारपरक स्वरूप प्रदान किया।
मुख्य अतिथि नंदन सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में इस प्रकार के कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए नवाचार एवं अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम का सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन डॉ. वीएन पाण्डेय द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के विभिन्न चरणों को क्रमबद्ध रूप से संचालित करते हुए मुख्य वक्ता, अतिथियों एवं विद्यार्थियों के बीच प्रभावी संवाद स्थापित किया।
कार्यक्रम में अजय पांडेय, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. दया कृष्ण, डॉ. इंदिरा तथा हेम कबडवाल सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
अंत में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. वीएन पाण्डेय ने मुख्य अतिथि नंदन सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि मठपाल, मुख्य वक्ता डॉ. परितोष उप्रेती, प्राचार्य एवं कार्यक्रम निदेशक प्रो. शर्मिला सक्सेना, उपस्थित शिक्षकगण तथा विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के नवाचार आधारित कार्यक्रम विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष के ज्ञान को वास्तविक जीवन की समस्याओं से जोड़ने तथा आधुनिक तकनीकों के प्रयोग के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को भौगोलिक ज्ञान, डिजिटल तकनीक और स्थानीय आपदा प्रबंधन को एक साथ जोड़कर व्यावहारिक रूप से सीखने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया। जियो-हैकाथॉन के माध्यम से विद्यार्थियों में स्थानीय समस्याओं की पहचान, वैज्ञानिक विश्लेषण, डिजिटल मैपिंग तथा नवाचार के प्रति रुचि विकसित करने की दिशा में सार्थक पहल हुई।