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September 19, 2026
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उत्तराखंड

मातृशक्ति के योगदान से समाज और राष्ट्र सशक्त:  सीएम  धामी

Society and nation are empowered by the contribution of women power CM Dhami

देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर, देहरादून में विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशभर से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। मुख्यमंत्री धामी ने अपने बचपन और निजी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनका जीवन किसी विशेष सुविधा से नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व प्रारंभ से ही समझा। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना उनके निर्णयों का आधार रही है। धामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान सर्वोच्च है और मातृशक्ति परिवार की धुरी है। यदि परिवार सशक्त होगा तो समाज और राष्ट्र भी सशक्त होंगे। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम एवं माता कौशल्या, भगवान श्रीकृष्ण एवं माता यशोदा तथा छत्रपति शिवाजी महाराज एवं माता जीजाबाई के उदाहरण देते हुए कहा कि इन महान विभूतियों के व्यक्तित्व निर्माण में मातृसंस्कारों की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि माता द्वारा दिए गए संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र, विचार और व्यवहार की नींव रखते हैं। धामी ने आधुनिक जीवनशैली और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों का स्वरूप सीमित हुआ है और एकल परिवारों का प्रचलन बढ़ा है, जिससे संवाद और आत्मीयता प्रभावित हुई है। विवाह-विच्छेद की बढ़ती घटनाओं को उन्होंने सामाजिक बदलाव का संकेत बताया और ‘कुटुंब प्रबोधन’ की अवधारणा को समय की मांग कहा। कार्यक्रम में गीता धामी ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे बच्चों को प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ संवेदना, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व का पाठ भी पढ़ाएँ। परिवार को उन्होंने पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माताएँ ही घर की सांस्कृतिक धुरी होती हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सप्त मातृ शक्ति सम्मान के तहत सात महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और प्रदेशभर से आई महिलाएँ उपस्थित रहीं।

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