रिया सोलीवाल, भिकियासैंण
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। सुर सम्राट एवं प्रसिद्ध लोकगायक-रचनाकार हीरा सिंह राणा जी का 84वां जन्मदिन उनके पैतृक गांव डढोली में समारोहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एडवोकेट जीएस चौहान ने की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सल्ट की ब्लॉक प्रमुख श्रीमती कंचन रावत एवं कैप्टन केएस भाकुनी मौजूद रहे।
विशिष्ट अतिथियों के तौर पर वीरेंद्र सिंह बंगारी, भैरव दत्त पांडेय, मान सिंह बिष्ट, सुनील टम्टा, महेश उपाध्याय, तुला सिंह तड़ियाल, मदन कठायत, सूबेदार हीरा सिंह एवं छोटू प्रधान उपस्थित रहे। समारोह में क्षेत्र की बड़ी संख्या में जनता ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर सभी अतिथियों ने राणा जी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
समारोह में पहुंचे कलाकारों ने हीरा सिंह राणा जी के गीतों का गायन कर उन्हें भावपूर्ण ढंग से याद किया। दिल्ली से आए रंगमंच के कलाकार महेश उपाध्याय, ईश्वर चंद्र एवं चंद्रशेखर गहतोड़ी ने अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोह लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि हीरा सिंह राणा जी की रचनाओं में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेम और सामाजिक सरोकार भी दिखाई देते हैं। उनके गीतों के माध्यम से जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिलती है। उनकी रचना ‘लस्का कमर बांधा हिम्मत का साथा’ को इसी रूप में देखा जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि राणा जी ने अपनी रचनाओं में मानव जीवन के हर पहलू को छुआ और वे सचमुच एक कालजयी रचनाकार थे।
वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार ने उन्हें गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी भाषा अकादमी का उपाध्यक्ष बनाया, लेकिन अपने गृह राज्य उत्तराखंड में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।
संग्रहालय की व्यवस्थाओं को लेकर उठाई जांच की मांग:
समारोह में जनता की ओर से कई प्रस्ताव भी पारित किए गए। इनमें हीरा सिंह राणा जी के संग्रहालय की उच्चस्तरीय जांच की मांग प्रमुख रही। लोगों ने कहा कि लाखों रुपये की लागत से बना यह भवन अभी विभाग को हस्तांतरित भी नहीं हुआ है, लेकिन इसकी छत टपकने लगी है।
लोगों ने बताया कि एक कमरे में राणा जी की स्मृतियों को संजोकर रखने के लिए रैक बनाए गए हैं, लेकिन उन्हें शीशे से कवर नहीं किया गया है, जिसके कारण उनके स्मृति चिन्ह धूल से भरे पड़े हैं। जनता ने मांग की कि दोनों कमरों में बनाए गए रैक पर शीशे के फ्रेम लगाए जाएं, ताकि स्मृति चिन्ह सुरक्षित रह सकें।
इसके अलावा विभाग द्वारा संग्रहालय में स्थापित हीरा सिंह राणा जी की मूर्ति को बदलकर दूसरी मूर्ति स्थापित करने की मांग भी उठाई गई। लोगों का कहना था कि वर्तमान मूर्ति राणा जी के स्वरूप से मेल नहीं खाती है।
समारोह में जनता ने सरकार से हीरा सिंह राणा जी के जन्मदिन को सांस्कृतिक दिवस के रूप में मनाने की मांग भी की।
कार्यक्रम को एडवोकेट जीएस चौहान, कुंदन सिंह बिष्ट, कंचन रावत, महेश उपाध्याय, तुला सिंह तड़ियाल एवं मदन कठायत ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन खीम सिंह बंगारी ने किया।
