Home उत्तराखंड ₹16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं टिक पाया: आर्येंद्र शर्मा

₹16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं टिक पाया: आर्येंद्र शर्मा

Bridge worth ₹16 crore could not last even 16 days Aryendra Sharma
Bridge worth ₹16 crore could not last even 16 days Aryendra Sharma

प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष आर्येंद्र शर्मा ने सहसपुर के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी के पास टोंस नदी पर बने पुल के क्षतिग्रस्त होने को धामी सरकार के भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और घटिया निर्माण कार्य का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया है।

आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि लगभग ₹16 करोड़ की लागत से पुल का जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन जनता के लिए खोले जाने के मात्र 16 दिन के भीतर ही उसकी अप्रोच रोड का हिस्सा ढह गया। यह घटना स्पष्ट करती है कि भाजपा सरकार के लिए विकास नहीं, बल्कि कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार प्राथमिकता बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि 7 जुलाई को अस्थायी मार्ग टूटने के बाद उन्होंने स्वयं निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएँ और गुणवत्ता संबंधी भारी खामियाँ सामने आई थीं। संभावित दुर्घटना की आशंका को देखते हुए उन्होंने तत्काल इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया तथा सरकार और प्रशासन को सचेत किया, लेकिन अहंकार में डूबी भाजपा सरकार और स्थानीय विधायक ने इस गंभीर चेतावनी की पूरी तरह अनदेखी कर दी। आज उसी लापरवाही का खामियाज़ा सहसपुर की जनता भुगत रही है।

आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि पुल क्षतिग्रस्त होने से सहसपुर क्षेत्र की हजारों जनता प्रभावित हुई है। आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। स्थानीय लोगों को दैनिक कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है और अनेक छात्र-छात्राएँ कॉलेज तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। यह स्थिति सरकार की संवेदनहीनता और प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गुणवत्ता की अनदेखी करते हुए 12 जुलाई को जल्दबाजी में पुल को आम जनता के लिए खोल दिया। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये की लागत से बना यह पुल कुछ ही दिनों में जवाब दे गया। यह केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी का गंभीर मामला है।

आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार लगातार संस्थागत रूप लेता जा रहा है। जनता के टैक्स का पैसा घटिया निर्माण कार्यों और कमीशनखोरी की भेंट चढ़ रहा है, जबकि ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती।

उन्होंने सरकार से निम्नलिखित प्रश्नों का तत्काल उत्तर देने की मांग की—

* ₹16 करोड़ खर्च होने के बावजूद पुल 16 दिन भी क्यों नहीं टिक पाया?
* निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किसने की और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

* जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये की इस बर्बादी का जवाब कौन देगा?

आर्येंद्र शर्मा ने कहा कि यह घटना केवल एक पुल के क्षतिग्रस्त होने की नहीं, बल्कि धामी सरकार के तथाकथित विकास मॉडल के पूरी तरह ध्वस्त हो जाने का प्रमाण है। सहसपुर की जनता इस भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनविरोधी कार्यशैली का लोकतांत्रिक तरीके से उचित जवाब देगी।