
रिया सोलीवाल, भिकियासैंण
अल्मोड़ा। उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड सरकार की महत्वाकांक्षी देवभूमि उद्यमिता योजना के अंतर्गत एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (EDII), अहमदाबाद द्वारा जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी अल्मोड़ा के ग्रामीण तकनीकी परिसर में आयोजित तीन दिवसीय आवासीय उद्यमिता बूट कैंप का सफलता पूर्वक समापन हुआ।
तीन दिनों तक चले इस बूट कैंप का उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशील सोच विकसित करना, स्वरोजगार एवं स्टार्टअप के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा व्यावसायिक विचारों को व्यवहारिक उद्यम में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम के सफल संचालन एवं विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में महेंद्र सिंह रौतेला, प्रोजेक्ट ऑफिसर अल्मोड़ा-बागेश्वर तथा भूपेंद्र सिंह मेहरा प्रोजेक्ट ऑफिसर, नैनीताल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों अधिकारियों ने पूरे तीन दिवसीय कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों एवं गतिविधियों का समन्वय एवं संचालन किया तथा विद्यार्थियों को उद्यमिता, व्यवसायिक अवसरों, स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों एवं स्वरोजगार की संभावनाओं के संबंध में महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक विचारों को बेहतर ढंग से समझने और उन्हें व्यवहारिक रूप देने में सहायता मिली।
बूट कैंप के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों को उद्यमिता मानसिकता एवं अभिविन्यास, आइडिया जनरेशन एवं डिजाइन थिंकिंग, मार्केट रिसर्च, आइडिया वैलिडेशन एवं अवसर मूल्यांकन, बिजनेस मॉडल एवं बिजनेस प्लानिंग, कानूनी एवं नियामकीय अनुपालन, वित्तीय प्रबंधन, लागत एवं मूल्य निर्धारण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग, सरकारी योजनाओं एवं फंडिंग सहायता तथा व्यवसाय विकास एवं विस्तार रणनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
बूट कैंप के दौरान विद्यार्थियों को जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर का भ्रमण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों एवं स्थानीय तकनीकों पर आधारित विभिन्न स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विद्यार्थियों ने पिरूल से हैंडमेड कागज निर्माण, हाइड्रोपोनिक तकनीक से उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट, इंटीग्रेटेड मछली पालन, फूलों की खेती सहित विभिन्न तकनीकी एवं व्यावसायिक गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विशेषज्ञों द्वारा इन तकनीकों की प्रक्रिया, उपयोगिता, संभावित बाजार तथा इन्हें छोटे एवं व्यवहारिक उद्यम के रूप में विकसित करने की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। इस भ्रमण ने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए व्यावहारिक प्रेरणा प्रदान की।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को पिचिंग एवं प्रेजेंटेशन स्किल्स विकसित करने के लिए व्यावहारिक गतिविधियां कराई गईं। विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों एवं उद्यमियों के साथ संवाद तथा अनुभव साझा करने के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक व्यवसायिक परिस्थितियों को समझने का अवसर मिला। प्रतिभागियों ने अपने व्यावसायिक विचारों को प्रस्तुत करते हुए उन्हें बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने का अभ्यास किया।
समापन अवसर पर विद्यार्थियों के बिजनेस प्लान एवं उद्यमिता संबंधी विचारों का प्रस्तुतिकरण कराया गया तथा चयनित विद्यार्थियों को आगामी EDP एवं सीड फंड की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। विद्यार्थियों ने बूट कैंप को अपने व्यावसायिक विचारों को दिशा देने वाला उपयोगी एवं प्रेरणादायक अनुभव बताया।
इस तीन दिवसीय आवासीय बूट कैंप में GDC रानीखेत, द्वाराहाट, मासी, स्याल्दे, भिकियासैंण, भतरोंजखान, दन्या, अल्मोड़ा, गरुड़ाबांज एवं जैंती सहित विभिन्न महाविद्यालयों के लगभग 50 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों के नोडल अधिकारी एवं प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। इनमें जैंती कॉलेज से डॉ. पूनम, भतरोंजखान कॉलेज से डॉ. केतकी, स्याल्दे से डॉ. ममता, शीतलाखेत से डॉ. वसुंधरा, भिकियासैंण से डॉ. राजीव कुमार तथा द्वाराहाट कॉलेज से डॉ. अशोक शामिल रहे।
तीन दिवसीय बूट कैंप के सफल आयोजन से विद्यार्थियों में उद्यमिता, नवाचार एवं स्वरोजगार के प्रति उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी बनने”* के लिए प्रेरित किया गया।
















