
स्याल्दे/भिकियासैंण। धनगढ़ी पुल संघर्ष समिति ने धनगढ़ी पुल के उद्घाटन समारोह में आंदोलनकारियों एवं समिति के पदाधिकारियों को आमंत्रित न किए जाने पर रोष व्यक्त किया है। समिति का कहना है कि जब धनगढ़ी के गधेरे में कई लोगों की जान गई, अनेक लोग घायल हुए और वर्षों तक आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, तब इस पुल की आवश्यकता को लेकर किसी मंत्री या विधायक ने गंभीर पहल नहीं की।
समिति ने बताया कि 04 सितंबर 2023 को ग्राम सभा सेरा में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके उपरांत धनगढ़ी पुल संघर्ष समिति का केंद्रीय कार्यालय इकुखेत, सल्ट विधानसभा अल्मोड़ा में स्थापित किया गया।
इसके बाद 09 सितंबर 2023 से प्रथम चरण में कुमाऊँ क्षेत्र तथा 10 अक्टूबर 2023 से द्वितीय चरण में गढ़वाल क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क एवं जनआंदोलन चलाया गया।
05 नवंबर 2023 को धनगढ़ी के गधेरे में विशाल धरना आयोजित किया गया। आंदोलन के दौरान सात विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों तथा तीन लोकसभा सांसदों से धरना स्थल पर आकर समर्थन देने का आग्रह तो किया , लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि धरना स्थल पर नहीं पहुँचा। हालांकि तत्कालीन जिलाधिकारी नैनीताल ने मामले का संज्ञान लिया।
धरना स्थल पर राष्ट्रीय राजमार्ग हल्द्वानी के सहायक अभियंता कपिल कुमार ने उपस्थित होकर पुल निर्माण के लिए 18 माह का समय मांगा। जनता के हित और प्रशासन के आश्वासन का सम्मान करते हुए समिति ने धरना स्थगित किया। इसके बाद समिति लगातार संबंधित विभाग के संपर्क में रही तथा निर्माण कार्य की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखती रही।
समिति ने स्पष्ट किया कि धनगढ़ी पुल का निर्माण किसी एक व्यक्ति या संगठन की उपलब्धि नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता, आंदोलनकारियों, सामाजिक संगठनों तथा सभी सहयोगियों के संयुक्त संघर्ष, धैर्य और जन एकजुटता का परिणाम है। समिति जनआंदोलन में सहयोग देने वाले प्रत्येक नागरिक के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करती है।
समिति ने सरकार से मांग की है कि मोहान–मरचूला- पन्याली नाले पर भी शीघ्र सेतु निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। यदि इस जनहित की मांग की उपेक्षा की गई, तो क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
उद्घाटन समारोह में आंदोलनकारियों की उपेक्षा पर रोष व्यक्त करने वालों में समिति के अध्यक्ष सुनील टम्टा, संरक्षक राजेन्द्र नेगी, सह-संरक्षक भूपाल सिंह रावत, महासचिव चन्द्र सिंह रावत, सचिव विजय उनियाल, उपाध्यक्ष इन्द्र नेगी, कोषाध्यक्ष आनन्द रमोला तथा राजू चौधरी, मदन सिंह, जगत रावत, आनन्द राम, बलबीर सिंह और राम सिंह सहित अनेक आंदोलनकारी एवं क्षेत्रवासी शामिल रहे।
















