
रिया सोलीवाल, भिकियासैण
(अल्मोड़ा)। पहाड़ के 03 गांवों की फिर एक जैसी मजबूरी सामने आई है । कहीं चारपाई से तो कहीं डोली से मरीज को अस्पताल पहुंचाया गया। 6 और 7 जून की इन मामलों ने सुदूर गांवों में विकास की आधारभूत सुविधाओं पर फिर कई प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए है।
इसी क्रम मे सल्ट विकास खंड के उप तहसील मछोड़ के जाख ग्राम सभा अतर्गत पणचुरा तोक से खबर सामने आई है । जहा सड़क न होने के कारण गंभीर रूप से बीमार 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को ग्रामीणों को चारपाई के सहारे तीन किमी दुर्गम रास्ते से होकर रोड हैड तक लाना पड़ा। सड़क न होने से आये दिन समय पर इलाज नही मिल पाता, जिस कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाता है।
वहीं दूसरी ओर चमोली जनपद से खबर है, जहां रविवार को प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला गोमती देवी को ग्रामीणों ने डंडी से पांच किलोमीटर पैदल चलकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया। महिला को डोली के सहारे लोगों ने किसी तरह से अस्पताल तक पहुंचाया। जनपद के ही डाव गांव मे भी शनिवार को गांव के रणजीत सिंह (36) अचानक बीमार हो गए। ऐसे में ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई के सहारे 06 किमी पैदल चलकर मुख्य सड़क खेतगदेरा तक पहुंचाया। इसके बाद वह 108 की मदद से कर्णप्रयाग उपजिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है, और उसकी अपनी चुनौतिया होती है। मगर राज्य निर्माण की रजत जयंती पूर्ण हो चुकी है। 25 वर्षों की यात्रा मे तलहटी के क्षेत्रों ने खूब विकास देखा। पर्यटकों ने पहाड़ की न जाने कितनी तस्वीरे खींची। मगर कुछ अगर अनछुआ सा रहा गया तो वह है,ग्रामीण परिवेश। मुख्यधारा से बिखरे हुए गाँव मूलभूत सुविधाओं के हाशिये मे ही रहे।
विडंबना की बात यह है की राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी चमोली जनपद के ही गैरसैंण मे स्थित है। जिसकी दूरी इन ग्रामीण क्षेत्रों से उतनी अधिक नही है जितनी की देहरादून शहर से है। आज आलम यह है,कि शासन प्रशासन विकास के कई दावे पेश करता है,लेकिन कई गांव आज भी विकास की मुख्य धारा से बंचित हो रहे है।
















