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September 27, 2026
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उत्तराखंड

भारत का पहला वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज प्लांट: टीएचडीसी का 1000 मेगावाट का टिहरी पीएसपी कमीशनिंग के आखिरी चरण में पहुंचा

India's first variable speed pumped storage plant THDC's 1000 MW Tehri PSP reaches final stage of commissioning

ऋषिकेश, 25-11-2025: टिहरी पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (पीएसपी)-1000 मे.वा., जो भारत की सबसे स्ट्रेटेजिक रूप से महत्वपूर्ण हाइड्रोपावर बैलेंसिंग फैसिलिटी में से एक है, कमीशनिंग के अपने आखिरी चरण में पहुँच गया है, इसकी चार में से दो यूनिट पहले से ही वाणिज्यिक प्रचालित घोषित कर दी गई हैं। शेष दो यूनिट यानी यूनिट-3 और यूनिट-4 जल्द ही कमीशन होने वाली हैं, जो उत्तरी ग्रिड में 1000 मे.वा. की आवश्यक पीकिंग क्षमता में वृद्धि के लिए परिकल्पित की गई परियोजना का अंतिम चरण है ।betovis

पीएसपी संयंत्र मौजूदा टिहरी और कोटेश्वर जलाशय को अपने ऊपरी और निचले बेसिन के रूप में उपयोग करता है, जिससे एक क्लोज्ड-लूप “वॉटर रीसाइक्लिंग” ऑपरेशन संभव होता है। ऑफ-पीक घंटों के दौरान, रिवर्सिबल मशीनें निचले जलाशय से ऊपरी जलाशय में जल को पंप करती हैं, पीक डिमांड के दौरान, वही यूनिट उस स्टोर किए गए जल को प्रवाहित कर विद्युत का उत्पादन करती हैं। यह मॉडल ऐसी फ्लेक्सिबिलिटी देता है जो आंतरायिक रूप से मिलने वाले नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अकेले नहीं दे सकते, और यह प्रणाली प्रचालक को लोड बैलेंस करने, फ्रीक्वेंसी को स्थिर करने और शाम की पीक डिमांड की पूर्ति करने के लिए एक भरोसेमंद प्रणाली उत्पन्न करता है।
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भागीरथी नदी के बाएं किनारे पर स्थित भूमिगत विद्युत गृह में प्रत्येक 250-मे.वा. क्षमता के साथ चार रिवर्सिबल यूनिट है, यह परियोजना लगभग 90 मीटर के हेड वेरिएशन वाले हाई-हेड ऑपरेशन के लिए परिकल्पित की गई है। एक बार पूरी तरह से कमीशन होने के पश्चात टिहरी पीएसपी 1000 मे.वा. की पीकिंग विद्युत उत्पादित करेगा एवं मौजूदा टिहरी और कोटेश्वर संयंत्र के साथ, पीएसपी के पूरा होने से टिहरी हाइड्रो पावर कॉम्प्लेक्स की कुल क्षमता 2,400 मे.वा. हो जाएगी।

आखिरी यूनिट पर कार्य शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ रहा है, कार्य प्रगति के अनुसार यह परियोजना कमीशनिंग के करीब है, यह एक ऐसी उपलब्धि है जो अवश्य ही विद्युत क्षेत्र के विशेलेषको, नीति निर्माता एवं ग्रिड नियोजकों का ध्यान खींचेगी। जैसे-जैसे भारत की नवीकरणीय क्षमता में वृद्धि हो रही है, टिहरी पीएसपी को जैसे ग्रिड- बैलेंसिंग एसेट्स को ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखा जा रहा है। शेष यूनिटों की फ़ाइनल कमीशनिंग से न सिर्फ़ एक तकनीकी रूप से जटिल परियोजना पूर्ण होगी, बल्कि विद्युत प्रणाली में बदलाव को व्यवस्थित करने की देश की क्षमता में भी बहुत अधिक वृद्धि होगी।

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