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October 11, 2026
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राज्यपाल ने एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया

The Governor participated in the national conference and policy dialogue on TB held at AIIMS Rishikesh.

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को एम्स ऋषिकेश में आयोजित टीबी पर राष्ट्रीय सम्मेलन एवं नीति संवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल चिकित्सा और दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए समय पर जांच, सही उपचार, पोषण, जनजागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि टीबी के विरुद्ध लड़ाई में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रभावी उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक मरीज को समय पर सही उपचार मिल सके।

राज्यपाल ने कहा कि टीबी एक चिकित्सकीय समस्या होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। इसका प्रभाव मरीज के स्वास्थ्य के साथ उसके परिवार, आजीविका और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए टीबी से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान, निक्षय पोषण योजना, निक्षय मित्र पहल और टीबी मुक्त पंचायत जैसे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी ही टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी शक्ति है।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे हिमालयी राज्य में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, लंबी दूरियां और मौसम संबंधी चुनौतियां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को प्रभावित करती हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक इन बाधाओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने एम्स ऋषिकेश द्वारा दूरस्थ क्षेत्रों में टीबी की दवाएं पहुंचाने के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग को एक प्रेरक पहल बताते हुए कहा कि चिकित्सा विज्ञान, तकनीक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाई जा सकती है।

राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की सफलता का आकलन केवल जांचों की संख्या या मशीनों की उपलब्धता से नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि मरीज की सही पहचान कितनी जल्दी हुई और उसका उपचार कितनी शीघ्रता से शुरू हो सका। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे लोगों का जीवन सुरक्षित और बेहतर बने।

उन्होंने टीबी उन्मूलन में आशा एवं अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये लोग समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच मजबूत कड़ी हैं। उन्होंने टीबी से जुड़े सामाजिक कलंक और भ्रांतियों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि टीबी से पीड़ित व्यक्ति को दूरी और भेदभाव नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और सहयोग की आवश्यकता है।

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श ठोस कार्ययोजना और प्रभावी नीतियों में बदलना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स ऋषिकेश इस दिशा में महत्वपूर्ण नेतृत्व प्रदान कर सकता है और यहां विकसित प्रभावी स्वास्थ्य मॉडल देश के अन्य पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्री सुबोध उनियाल, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. मीनू सिंह, पॉलिसी रेजीलेंस फाउंडेशन के निदेशक श्री नंदीश आर पैठानी, ऑर्गेनाइजिंग चेयरपर्सन डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. गिरीश सिंधवानी सहित अन्य चिकित्सकगण उपस्थित रहे।

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