देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने टिहरी गढ़वाल के घनसाली निवासी 19 वर्षीय युवक में पल्मोनरी एल्वियोलर माइक्रोलिथियासिस (पीएएम) जैसी अत्यंत दुर्लभ बीमारी की पहचान की है। यह रोग इतना असामान्य है कि 1918 से अब तक विश्वभर में इसके केवल लगभग 1100 मामले दर्ज हुए हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि इसे सामान्य भाषा में “फेफड़ों की पथरी” कहा जा सकता है। दरअसल, फेफड़ों के सूक्ष्म वायु कोश (एल्वियोली) में कैल्शियम फॉस्फेट के महीन कण जमा होने लगते हैं, जो धीरे-धीरे फेफड़ों को कठोर बना देते हैं और ऑक्सीजन के आदान-प्रदान में बाधा उत्पन्न करते हैं।
इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई और अत्यधिक थकान शामिल हैं। कई चिकित्सक अपने पूरे करियर में इस रोग का एक भी मामला नहीं देख पाते। युवक की जांच में जब इस दुर्लभ बीमारी की पुष्टि हुई, तो उसके परिजन गहरे सदमे में चले गए। डॉक्टरों की टीम ने न केवल उपचार शुरू किया बल्कि परिवार को भावनात्मक संबल भी दिया।
युवक ने साहस दिखाते हुए कहा, “मैं लड़ूंगा और जीतूंगा।” उसकी यह दृढ़ता उसे नई उम्मीद देती है। प्राचार्य डॉ. गीता जैन, एमएस डॉ. आरएस बिष्ट और डीएमएस डॉ. विनम्र मित्तल ने पूरी टीम की सराहना की। इस घटना ने यह साबित किया कि सही समय पर रोग की पहचान और विशेषज्ञों की देखरेख से असाधारण परिस्थितियों में भी जीवन की नई किरण दिखाई जा सकती है।

















