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उत्तराखंड

मणिपाल अस्पताल में न्यूनतम आक्रामक तकनीक से लंबे समय से चल रहे गंभीर सिरदर्द का सफल उपचार

Successful Treatment of Chronic, Severe Headaches Using Minimally Invasive Techniques at Manipal Hospital

देहरादून- 31 मार्च 2026: एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी मामले में मणिपाल अस्पताल ने जादवपुर निवासी 47 वर्षीय प्रवीर गुहा का सफलतापूर्वक निदान और उपचार किया, जो पिछले ढाई महीने से लगातार और तेज सिरदर्द से पीड़ित थे। तंत्रिका रोग विभाग के निदेशक एवं प्रमुख डॉ. जयंता रॉय की देखरेख में इस बीमारी को स्पॉन्टेनियस इंट्राक्रैनियल हाइपोटेंशन (एसआईएच) के रूप में पहचाना गया। यह समस्या मस्तिष्क और मेरुदंड की सुरक्षा करने वाले द्रव के दबाव में कमी आने के कारण होती है, जो मेरुदंड में रिसाव होने से होता है।
रोगी का उपचार एक न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया, जिसे ऑटोलॉगस एपिड्यूरल ब्लड पैच कहा जाता है। इस प्रक्रिया में रोगी के अपने रक्त की थोड़ी मात्रा को मेरुदंड में रिसाव वाले स्थान के पास डाला जाता है, जिससे वह स्थान बंद हो जाता है, द्रव का रिसाव रुकता है और तेजी से राहत मिलती है। यह प्रक्रिया डॉ. इंद्रनील घोष, परामर्शदाता – न्यूरोएनेस्थीसियोलॉजी, न्यूरो इंटेंसिव केयर, दर्द एवं पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ द्वारा की गई। साथ ही, मस्तिष्क में जमा रक्त को निकालने के लिए शल्यक्रिया डॉ. दीपेंद्र कुमार प्रधान, क्लिनिकल लीड एवं वरिष्ठ परामर्शदाता – न्यूरोसर्जरी द्वारा की गई।
पिछले ढाई महीने से अधिक समय तक रोगी तेज सिरदर्द से जूझते रहे, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया था। उनके लिए बैठना, काम करना और सामान्य कार्य करना भी कठिन हो गया था। उन्होंने कोलकाता में विभिन्न विशेषज्ञताओं के लगभग 13 चिकित्सकों से परामर्श लिया और कई बार सीटी तथा एमआरआई जाँच करवाई, लेकिन सभी रिपोर्ट सामान्य आईं। शुरुआत में उनका उपचार माइग्रेन के रूप में किया गया, पर उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
डॉ. जयंता रॉय के साथ विस्तृत परामर्श के दौरान एक महत्वपूर्ण संकेत सामने आया—लेटने पर दर्द कम हो जाता था, जबकि बैठने या खड़े होने पर बढ़ जाता था। इस असामान्य स्थिति ने किसी अन्य समस्या की संभावना जताई और आगे जाँच की गई। रोगी ने यह भी बताया कि लंबे समय तक भारी बैग उठाने के बाद उनके लक्षण शुरू हुए थे।
आगे की जाँच में मेरुदंड की बाहरी सुरक्षा परत में एक छोटा सा छेद पाया गया, जिसके कारण मस्तिष्क और मेरुदंड को सहारा देने वाला द्रव बाहर निकल रहा था। इस द्रव की कमी से सिर के अंदर का दबाव कम हो गया, जिससे मस्तिष्क थोड़ा नीचे की ओर खिसक गया और आसपास की नसों तथा रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ा, जिससे लगातार और तेज सिरदर्द होने लगा। इसके साथ ही मस्तिष्क के दोनों ओर रक्तस्राव भी हुआ, जिससे स्थिति और जटिल हो गई।
सटीक निदान के बाद पहले शल्यक्रिया द्वारा मस्तिष्क में जमा रक्त को निकाला गया। इसके बाद ऑटोलॉगस एपिड्यूरल ब्लड पैच प्रक्रिया की गई, जिसमें रोगी के अपने रक्त से उस छेद को बंद किया गया। रक्त जमकर उस स्थान को सील कर देता है, जिससे द्रव का रिसाव रुक जाता है और दबाव सामान्य हो जाता है, जिससे मरीज को काफी राहत मिलती है।
उपचार का परिणाम बहुत तेजी से सामने आया। प्रक्रिया के दो दिन के भीतर ही रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में वे नियमित जांच और दवा के तहत हैं और पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन और कार्य में वापस लौट चुके हैं।
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए डॉ. जयंता रॉय ने कहा, “सिरदर्द को अक्सर सामान्य समस्या मानकर माइग्रेन के रूप में उपचार किया जाता है, खासकर जब प्रारंभिक जांच सामान्य होती है। लेकिन यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे और सामान्य उपचार से ठीक न हो, तो गहराई से जांच करना आवश्यक होता है। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण संकेत दर्द का स्थिति के अनुसार बदलना था—लेटने पर कम और बैठने या खड़े होने पर बढ़ना, जो सामान्य सिरदर्द में नहीं होता। इस तरह की स्थितियां दुर्लभ होती हैं और आसानी से नजरअंदाज हो सकती हैं। इसलिए सही समय पर सही कारण की पहचान करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे प्रभावी उपचार और शीघ्र स्वस्थता संभव होती है।” समय पर पहचान न होने पर यह स्थिति खतरनाक और जानलेवा भी हो सकती है।
अपना अनुभव साझा करते हुए प्रवीर गुहा ने कहा, “ढाई महीने के दौरान मैंने शहर के लगभग 13 चिकित्सकों से परामर्श लिया, लेकिन मेरी समस्या का कारण पता नहीं चल पाया। मेरी पहले की रिपोर्ट सामान्य थीं, फिर भी डॉ. जयंता रॉय ने महसूस किया कि कुछ ठीक नहीं है और आगे जांच की सलाह दी। उनके समय पर किए गए प्रयास से सही समस्या का पता चला और मुझे उचित उपचार मिला। आज मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं और सामान्य जीवन जी रहा हूं। मैं डॉ. रॉय और मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर की पूरी टीम का दिल से आभारी हूं। मैं अभी भी नियमित जांच और दवा ले रहा हूं और अच्छा महसूस कर रहा हूं।”

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