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एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, शिमला बाईपास रोड पर अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर

MDDA takes major action, bulldozer runs on illegal plotting on Shimla bypass road
MDDA takes major action, bulldozer runs on illegal plotting on Shimla bypass road

-प्राधिकरण शहर में बिना स्वीकृति के हो रहे किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगाः बंशीधर तिवारी

देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा शहर में अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जारी है। प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत शिमला बाईपास रोड के विभिन्न स्थानों पर किये गये अवैध आवासीय निर्माणों और प्लॉटिंग पर ध्वस्तीकरण एवं सीलिंग की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई संयुक्त सचिव गौरव चटवाल के आदेशों पर संपन्न हुई। एमडीडीए की टीम ने बाला जी इन्क्लेव, शिमला बाईपास रोड में अवैध निर्माण और भूखंड विभाजन (प्लॉटिंग) के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए कई जगहों पर बुलडोज़र चलाया और सीलिंग की कार्रवाई की। महेश उपाध्याय, सतीश एवं अन्य द्वारा लगभग 10 बीघा भूमि में की गई अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। इखलाक एवं अन्य द्वारा निर्मित अवैध आवासीय भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। शैकीन द्वारा किए गए अवैध आवासीय निर्माण को भी सील किया गया। कार्यवाही के दौरान सहायक अभियंता विजय सिंह रावत, अवर अभियंता जितेन्द्र कुमार एवं सुपरवाइजर मौके पर मौजूद रहे।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण शहर में बिना स्वीकृति के हो रहे किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगा। विकास मानकों और भवन उपविधियों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि यह अभियान जनहित में है और इसका उद्देश्य शहर के सुनियोजित विकास को सुनिश्चित करना है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने स्पष्ट किया कि एमडीडीए पारदर्शी शासन व्यवस्था के अंतर्गत कार्य कर रहा है और किसी भी शिकायत पर त्वरित जांच व आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। एमडीडीए ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य से पूर्व प्राधिकरण से स्वीकृति प्राप्त करें, अन्यथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई तय है।
बिना स्वीकृति के निर्माण कार्य प्रारंभ न करेंः मोहन सिंह बर्निया-एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध कॉलोनी या अनधिकृत निर्माण कार्य को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों ने बिना स्वीकृति के प्लॉटिंग या भवन निर्माण किया है, उनके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एमडीडीए का उद्देश्य देहरादून को एक सुनियोजित और व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है। इस दिशा में निरंतर निगरानी और कार्रवाई जारी है। आम नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी व्यक्ति या संस्था के बहकावे में आकर बिना स्वीकृति के निर्माण कार्य प्रारंभ न करें। ऐसा करने पर प्राधिकरण को भवन सील करने और ध्वस्तीकरण की कार्यवाही करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

दुबई परफ्यूम्स से मैहका विरासत

Maihka Heritage from Dubai Perfumes
Maihka Heritage from Dubai Perfumes

विरासत मेले में जहाँ एक ओर अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों की झलक देखने को मिलती है, वहीं दूसरी ओर दुबई परफ्यूम्स का स्टॉल अपनी खास खुशबुओं के कारण लोगों का ध्यान खींच रहा है। यह स्टॉल पिछले कई वर्षों से विरासत मेले का हिस्सा रहा है और हर बार की तरह इस बार भी लोगों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।

विक्रेता ने बताया कि देहरादून के लोगों का रिस्पॉन्स हमेशा से बहुत अच्छा रहा है। यहाँ आने वाले लोग न केवल परफ्यूम और इत्तर की खुशबुओं को पसंद करते हैं, बल्कि उनकी क्वालिटी और लंबे समय तक टिकने वाले सुगंध के लिए दोबारा भी खरीदारी करने आते हैं।
स्टॉल पर अरबी ऊद की गहरी खुशबू से लेकर हल्के फ्लोरल और फ्रूटी नोट्स तक, हर तरह की वैरायटी मौजूद है। विक्रेता के अनुसार इस साल भी भीड़ काफी अच्छी रही है और लोगों में परफ्यूम्स के प्रति खास उत्साह देखने को मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि देहरादून की भीड़ बहुत सभ्य और उत्साही है, और यही कारण है कि वे हर साल विरासत में हिस्सा लेने के लिए उत्सुक रहते हैं। इस स्टॉल की वजह से लोगों को दुबई की खुशबूओं का अनुभव यहीं, देहरादून में मिल जाता है। वास्तव में, दुबई परफ्यूम्स स्टॉक विरासत मेले की उन खास झलकियों में से एक है, जो लोगों को बार-बार अपनी ओर आकर्षित करती है।

विरासत की संध्या में कुमाऊनी गीतों का जादू बोला श्रोताओं के सिर चढ़कर

The magic of Kumaoni songs captivated the audience at the Virasat evening.
The magic of Kumaoni songs captivated the audience at the Virasat evening.

….और प्रसिद्ध गायिका शकुन्तला रमोला के गीत चंदना म्यार पहाड़ आए….. पर झूम उठा विरासत

देहरादून – 17 अक्टूबर 2025- विरासत महोत्सव की संध्या में आज कुमाऊनी गीतों की झड़ी लगी, जिसकी शुरुआत जय नंदा सुनंदा….. के साथ भव्य एवं आकर्षक रूप में हुई I यह गीत मुख्य गायक गिरीश सनवाल पहाड़ी व प्रसिद्ध गायिका शकुन्तला रमोला की जोड़ी ने गाकर सभी का हृदय और मन जीत लिया I इस कुमाऊनी गीत में साथ देने वाली गायिका टीम में दल के अन्य सह गायन कलाकारों में मीना नेगी, शिवम् सनवाल, सत्यम सनवाल शामिल रहे I जबकि ढोलक पर अनुज, ऑक्टोपैड पर आशीष नेगी का साथ रहा तथा इस नृत्य में रजनी नेगी, ममता, वंशिका, किरन,रवि शाह, राजीव और नीरज ने साथ दिया I

विरासत की संध्या में यह प्रथम प्रस्तुति सभी के लिए मनोरंजन के साथ-साथ बेहतरीन मन को मोहने वाली रही I विरासत के मंच पर “संस्कृति एक सामाजिक संस्था” की टीम में दल की नायिका वन्दना सनवाल रहीं I जबकि आज के मुख्य गायक गिरीश सनवाल “पहाड़ी”रहे I गीतों की प्रस्तुति में देवी देवताओं का संगम रहा I आज की इस सांस्कृतिक विरासत महोत्सव की संध्या में छप शैली में भी नृत्य प्रस्तुत किया गया I आज की इस शुरुआती आकर्षक प्रस्तुति की श्रृंखला में जय नंदा सुनंदा….. के पश्चात् मुख्य चांचरी में चकोटैकी की पावती के क्रम में अन्य कई बेहतरीन कुमाऊनी गीतों का सिलसिला चला, जिनमें क्रमशः रंगीली बिंदी घागर काई…..गीत ने विरासत की महफिल में चार चांद लगा दिए I जबकि प्रसिद्ध गायिका शकुन्तला रमोला के गीत “चंदना म्यार पहाड़ आए”….. पर सभी झूम उठे I सर्ग तारा जुनयाली राता….. गीत की प्रस्तुति ने भी विरासत में अपनी महक छोड़ी I
इसी दौरान श्रृंकार/छोलिया नृत्य की प्रस्तुति से भी श्रोता गदगद हो उठे I इन सभी कुमाऊनी गीतों ने श्रोताओं को अपने गीतों में मदमस्त कर दिया I

यूपीईएस यूनिवर्सिटी में “जगजीत सिंह का जीवन और ग़ज़लें” पर आयोजित हुआ टॉक शो

Talk show on Jagjit Singh's Life and Ghazals organised at UPES University
Talk show on Jagjit Singh's Life and Ghazals organised at UPES University

……जगजीत सिंह के दिल को छू लेने वाले गीतों के यादगार लम्हों को सुनकर वातावरण हुआ भावुक और मदहोश

देहरादून- 16 अक्टूबर 2025 I उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के यूपीईएस यूनिवर्सिटी में विरासत की ओर से आयोजित हुए “जगजीत सिंह का जीवन और ग़ज़लें” विषय पर टॉक शो से वातावरण बेहतरीन आकर्षक एवं भव्य बना रहा है I

आकर्षण का केंद्र बने इस टॉक शो में महान ग़ज़ल उस्ताद की विरासत का जश्न मनाया गया। प्रथम सत्र में दो प्रतिष्ठित पैनलिस्ट श्री राजेश बादल और श्री शशि केसवानी शामिल हुए, जिन्होंने जगजीत सिंह के जीवन और करियर से जुड़े कुछ रोचक किस्से और अनसुनी कहानियों का जिक्र किया I इस बेहद आकर्षक कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर गजल गायक जगजीत सिंह के पहले डिजिटल एल्बम, जिसे लंदन में रिकॉर्ड किया गया था, को लेकर यादगार रूप में की गई I इस अवसर पर एक मैजिक के बारे में बातचीत से हुई। वक्ताओं ने इसके निर्माण के पीछे के समर्पण और जुनून पर ज़ोर दिया और बताया कि कैसे टीम अक्सर रात भर काम करती थी, सुबह तक हर सुर को सुनती और निखारती थी। श्री शशि केसवानी ने जगजीत सिंह की मशहूर गजल पर लिखी गई “कहाँ तुम चले गए”…… पुस्तक के बारे में बात कार्यक्रम में साझा की और कहा कि यह न केवल जगजीत सिंह की संगीत यात्रा का वृत्तांत है, बल्कि जीवन के बहुमूल्य सबक भी देती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक जानकारी से कहीं आगे बढ़कर संगीत और भावनाओं के माध्यम से एक सार्थक जीवन जीने का तरीका सिखाती है। कार्यक्रम के टॉक शो में श्री राजेश बादल ने जगजीत सिंह के शुरुआती जीवन के बारे में दिल को छू लेने वाले किस्से सुनाए। सिख परिवार में जन्मे जगजीत सिंह का पालन-पोषण एक अनुशासित माहौल में हुआ जहाँ चाय और मांसाहारी भोजन की अनुमति नहीं थी। उनके पिता ने उन्हें गुरुद्वारे में बानी गाते और अरदास करते हुए एक गायक के रूप में देखा था। श्री बादल ने कहा कि कैसे जगजीत सिंह ने अपने गुरु से संगीत सीखा I अपने पिता की शुरुआती अस्वीकृति के बावजूद जगजीत के समर्पण ने उन्हें अपना प्रशिक्षण जारी रखने के लिए प्रेरित किया। एक यादगार घटना साझा की गई जब उनके गुरु बॉलीवुड की एक धुन गाने पर उनसे नाराज़ हो गए थे, एक ऐसा क्षण जिसने युवा कलाकार की जिज्ञासा और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाया I टॉक शो में एक प्रस्तुति दिखाई गई, जिसमें उनके जन्मस्थान, उनके पहले सार्वजनिक प्रदर्शन और गीतकार सुदर्शन फ़कीर के साथ उनके सहयोग को दर्शाया गया। चर्चा में जगजीत सिंह के निजी जीवन पर भी चर्चा हुई, जिसमें उनकी युवावस्था की भी एक मार्मिक कहानी शामिल थी, जिसमें एक लड़की के बारे में बताया गया था जिसे वे कभी बहुत पसंद करते थे और कैसे उनके संगीत समारोह में हुई एक नोकझोंक उनके प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने पर प्रशंसा में बदल गई। फिर बातचीत उनकी भावी पत्नी चित्रा सिंह से उनकी मुलाकात पर केंद्रित हो गई। श्री बादल ने बताया कि कैसे जगजीत सिंह ने अपने एल्बम लॉन्च के लिए एचएमवी के साथ काम करने के लिए मुंबई आने पर अपनी पगड़ी और दाढ़ी हटा दी थी। इस फैसले ने शुरुआत में उनके पिता के साथ मतभेद पैदा कर दिए थे। हालाँकि, वर्षों बाद, उनकी सफलता और विनम्रता ने उनके रिश्ते को फिर से पटरी पर ला दिया। वक्ताओं ने चित्रा सिंह के प्रारंभिक जीवन, कम उम्र में देबू दत्ता से उनके विवाह और अंततः उनके अलगाव ने उन्हें जगजीत सिंह के साथ संगति और संगीतमय सामंजस्य कैसे प्राप्त करने में मदद की, इस पर भी चर्चा की। साथ मिलकर, उन्होंने “बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी” और “समवन समव्हेयर” जैसे कालातीत एल्बम बनाए, जो 1980 के दशक में भारतीय संगीत में मील के पत्थर बन गए।

टॉक शो का समापन एक भावुक क्षण में हुआ, जिसमें देहरादून के ही दून स्कूल में जगजीत सिंह के अंतिम प्रदर्शन पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद उनकी दुखद मृत्यु हो गई और बाद में वे कोमा में चले गए। उनके निधन ने एक गहरा शून्य छोड़ दिया I खासकर एक कार दुर्घटना में अपने बेटे को खोने के बाद !

कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की मनमोहक प्रस्तुति से विरासत में छाई भक्ति की लहर

A captivating performance by Kuchipudi dancer Arunima Kumar sparks a wave of devotion in Virasat.
A captivating performance by Kuchipudi dancer Arunima Kumar sparks a wave of devotion in Virasat.

कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की मनमोहक प्रस्तुति से विरासत में आज भक्ति की लहर दौड़ गई I उन्होंने सूर्य स्तुति, अर्धनारीश्वर, देव देवम भजे, कलिंग नर्तनम, शिव तरंगम व दुशासन वध गीतों की प्रस्तुति देकर मन मोह लिया I अर्धनारीश्वर नृत्य कि प्रस्तुति राग मालिका में ताल मालिका से हुई। उसके बाद उनकी अगली प्रस्तुति कलिंग नारायणम एक थिल्लाना रहा जिसमें बाल कृष्ण को कालिया सर्प को पराजित करते हुए तथा उसके सिर पर नृत्य करते हुए दर्शाया गया है। कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति में शामिल कलाकारों में क्रमशः कोर्नेलिया, बिद्या, अरुणिमा कुमार रहे I

भारतीय शास्त्रीय संगीत में अनमोल सितारा माने जाने वाली आरुणिमा कुमार कुचिपुड़ी के लिए 2008 के संगीत नाटक अकादमी युवा पुरस्कार विजेता हैं। मात्र 9 साल की छोटी बच्ची के रूप में उन्होंने बैले आम्रपाली में अभिनय किया और कुचिपुड़ी नृत्य अकादमी ने उन्हें औपचारिक रूप से वर्ष 1995 में लॉन्च किया, जहाँ उन्होंने नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में अपना अरंगेत्रम प्रस्तुत किया I उन्हें संगीत नाटक अकादमी (भारत गणराज्य द्वारा स्थापित भारत की राष्ट्रीय अकादमी) द्वारा 2008 का प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । वर्तमान में वह लंदन में रहती हैं और एरिसेंट समूह में मानव संसाधन सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं I हैरानी की बात यह है कि अरुणिमा ने 7 साल की उम्र में कुचिपुड़ी सीखना शुरू कर दिया था और पद्म भूषण श्रीमती स्वप्ना सुंदरी से प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह पद्मश्री गुरु जयराम राव और वनश्री राव की वरिष्ठ शिष्या हैं और 15 वर्षों से अधिक समय से नृत्य प्रस्तुत कर रही हैं। इस अरुणिमा ने प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोहों और स्थलों पर कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ दीं। उन्होंने कई बैले में भी प्रदर्शन किया है, जैसे चित्रांगदा बैले, जहाँ उन्होंने चित्रांगदा की भूमिका निभाई I नल दमयंती, जहाँ उन्होंने दमयंती की भूमिका निभाई। अरुणिमा को 1998 में नृत्य के लिए साहित्य कला परिषद छात्रवृत्ति और 2001 में सुर श्रृंगार संसद द्वारा श्रृंगारमणि उपाधि से भी सम्मानित किया गया। वह आईसीसीआर के साथ एक स्थापित कलाकार के रूप में सूचीबद्ध हैं। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, विदेश मंत्रालय की सदस्य और आकाशवाणी एवं दूरदर्शन की ए ग्रेड कलाकार हैं। वह युवाओं के बीच कला को बढ़ावा देने, छोटे शहरों और गाँवों में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए आउटरीच के क्षेत्र में परियोजनाओं की संकल्पना और कार्यान्वयन, आर्ट्स एक्सटेंड की अवधारणा और कार्यान्वयन के लिए अपना स्वयं का कला फाउंडेशन बना रही हैं।

सुविख्यात कत्थक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी के नृत्य-राग से भक्ति में झूमा विरासत

Renowned Kathak dancer Shinjini Kulkarni's dance-melody brings devotional heritage to life
Renowned Kathak dancer Shinjini Kulkarni's dance-melody brings devotional heritage to life

शिंजिनी ने अपनी मनमोहक एवं आकर्षक प्रस्तुति से जीता सभी श्रोताओं का दिल

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में मशहूर कत्थक नृत्यांगना शिंजिनी कुलकर्णी ने अपने राग एवं कथक की मधुर नृत्य से सभी श्रोताओं का हृदय जीत लिया I उन्होंने अपनी भाव भंगिमाओं और लयबद्ध निपुणता से सभी का मन मोह लिया I उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत वंदना से की I उनके साथ संगत संगीत मंडली में तबले पर पंडित शुभ महाराज व पंडित योगेश गंगानी, स्वर और हारमोनियम पर जयवर्धन दाधीच, पखावज पर सलमान वारसी, सारंगी पर जनाब वारिस खान व पद्धांत पर आर्यव आनंद ने बेहतरीन साथ देकर विरासत की महफिल को और भी खुशनुमा और भक्तिमय बना दिया I कालका बिंदादीन वंश की नौवीं पीढ़ी में जन्मी शिंजिनी कुलकर्णी कथक के महानायक पंडित बिरजू महाराज की पोती हैं। तीन साल की उम्र से ही शिंजिनी ने अपने दादा के संरक्षण में कथक का प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था, उनके अनुसार, हमारे घर में सीखना एक संस्कार है। शिंजिनी की पहली गुरु उनकी मौसी ममता महाराज थीं, जिन्होंने परिवार के सभी बच्चों को बुनियादी शिक्षा दी। बाद में बिरजू महाराज उनके गुरु बने और उनके बाद उनके सबसे बड़े भाई पंडित जयकिशन जी महाराज उनके गुरु बने। वह इस विशाल विरासत का भार बड़ी खूबसूरती से उठाती हैं, लेकिन उनका कहना है कि उनकी विरासत एक व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी है, पूरा कथक जगत उनकी विरासत को संभाल रहा है। उन्होंने खजुराहो नृत्य महोत्सव, संकट मोचन समारोह, ताज महोत्सव, चक्रधर समारोह, कालिदास महोत्सव, कथक महोत्सव आदि जैसे प्रतिष्ठित समारोहों में प्रस्तुति दी है। उन्होंने भारत और विदेश के विभिन्न शहरों जैसे न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को आदि में कई एकल और समूह प्रस्तुतियाँ दी हैं, और अपने करियर के छोटे से समय में ही दर्शकों से स्नेहपूर्ण प्रशंसा और आशीर्वाद प्राप्त किया है। खास बात यह है कि उनका बॉलीवुड से भी नाता रहा है, और अपने नाना की तरह यह रिश्ता भी छोटा ही रहा है। उन्होंने मुजफ्फर अली की फिल्म जांनिसार, बंगाली फिल्म हर हर ब्योमकेश और रवि किशन के साथ एक भोजपुरी फिल्म में अभिनय किया है। शिंजिनी नवगठित शुद्ध शास्त्रीय संगीत पर आधारित तालवाद्य बैंड-लयाकारी की भी सदस्य हैं। उन्हें अपने दादाजी की नृत्यकलाओं जैसे नृत्य केलि, संपादन, होली उत्सव, कृष्णयान और लोहा आदि का हिस्सा बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। उन्हें तराना फाउंडेशन का युवा प्रतिभा पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय कटक नृत्य महोत्सव में नृत्य शिरोमणि की उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्हें संगीत कला निकेतन, जयपुर द्वारा परंपरा सम्मान प्रदान किया गया। दूसरे खंड में शिंजिनी ने “लक्ष्य” नामक एक विशेष प्रस्तुति दी, जो सूर्य की खोज को दर्शाती एक नृत्य रचना है।
प्रस्तुति का समापन अभिनय खंड के साथ हुआ, जहाँ उन्होंने भाव पक्ष अभिव्यक्ति परक पहलू में एक ठुमरी का सुंदर प्रदर्शन किया, जिससे श्रोता उनकी भावपूर्ण अभिव्यक्ति और सूक्ष्म कलात्मकता से मंत्रमुग्ध हो गए।
शिंजिनी ने अपनी नृत्य प्रस्तुति में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों पंडित राजन साजन मिश्र, डागर बंधु, पंडित जसराज और कई अन्य महान कलाकारों की भक्ति रचनाओं को सम्मिलित किया।

मुख्यमंत्री ने किया 20.89 करोड़ रुपये की लागत से खटीमा मेलाघाट सड़क पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास

The Chief Minister laid the foundation stone for the reconstruction of the Khatima Melaghat road at a cost of Rs 20.89 crore.
The Chief Minister laid the foundation stone for the reconstruction of the Khatima Melaghat road at a cost of Rs 20.89 crore.

देहरादून।  मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को  जनपद ऊधम सिंह नगर के खटीमा मेलाघाट राज्य मार्ग (राज्य मार्ग संख्या 107) के पुनर्निर्माण कार्यों का विधिवत पूजा-अर्चना कर शिलान्यास किया। यह परियोजना ₹2089.74 लाख की लागत से बनाई जाएगी। इसके अंतर्गत 11.50 किलोमीटर लंबी सड़क का पुनर्निर्माण, केसी ड्रेनेज सिस्टम, सड़क सुरक्षा कार्य, रोड साइनएज की स्थापना, तथा टीबीएम एवं बीसी द्वारा सुदृढ़ीकरण कार्य शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सड़क केवल खटीमा क्षेत्र के विकास की धुरी नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल सीमावर्ती संपर्क का भी महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क के सुधारीकरण से खटीमा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को न केवल सुगम यातायात सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती व्यापार, पर्यटन और शिक्षा से जुड़े अवसरों को भी नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण कार्यों के साथ-साथ भू-कटाव रोकने और स्थानीय जल निकासी व्यवस्था के सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहे। उन्होंने कहा कि खटीमा अब शिक्षा का हब बन चुका है, जहाँ से प्रदेश ही नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थी भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तराखंड का हर क्षेत्र सुगम, सशक्त और समृद्ध बने। विकास की हर परियोजना जनता के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। खटीमादृमेलाघाट सड़क परियोजना भी इसी दृष्टि से एक मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के “कनेक्टिविटी ही विकास की रीढ़” के संकल्प को आगे बढ़ा रही है। इसी भावना के अनुरूप राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में सड़कों का विस्तार और आधुनिकीकरण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने सड़कों को गढ्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को आगामी दीपावली और अन्य त्योहारों की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि पर्वों के अवसर पर राज्य की सुरक्षा, सौहार्द और स्वच्छता बनाए रखना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद्र जोशी, दायित्वधारी  फरजाना बेगम, अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक ली

Governor Gurmeet Singh chaired a meeting of Vice Chancellors of State Universities
Governor Gurmeet Singh chaired a meeting of Vice Chancellors of State Universities

देहरादून।  कुलाधिपति एवं राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने गुरुवार को राजभवन में राजकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक ली। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग एवं शासन के अधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र न होकर राष्ट्र निर्माण के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो न केवल रोजगार प्राप्त करें, बल्कि समाज, राज्य और राष्ट्र के विकास में योगदान दें। राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके छात्र भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान और कौशल प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में शिक्षा को उद्योग जगत, नवाचार और प्रौद्योगिकी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय को प्रदेश की आवश्यकताओं, प्राकृतिक संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने पाठ्यक्रमों को अद्यतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों को उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप जगत से जोड़कर व्यावहारिक अनुभव दिया जाए ताकि वे भविष्य की तकनीकी और व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बन सकें।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से अपने अलुमनाई नेटवर्क को मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अलुमनाई किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी होती है और उनके अनुभव, मार्गदर्शन एवं संसाधन विश्वविद्यालय के विकास में अमूल्य योगदान दे सकते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विश्वविद्यालय में सक्रिय प्लेसमेंट सेंटर स्थापित हों जो उद्योग जगत से सतत संवाद बनाए रखें और छात्रों को इंटर्नशिप व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएं।
बैठक के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय संबद्धता से संबंधित मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानक पूरे नहीं करने वाले कॉलेजों को संबद्धता न दी जाए। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को अपने गोद लिए गए गाँवों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योगदान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थान केवल कैंपस तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के बीच जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आजीविका के क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
राज्यपाल ने कहा कि “वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च” के अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों द्वारा उत्कृष्ट शोध कार्य किया गया है। उन्होंने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि अब इस पहल के द्वितीय चरण में नए, प्रासंगिक और प्रभावशाली शोध विषयों का चयन किया जाए ताकि शोध कार्य प्रदेश और राष्ट्र की आवश्यकताओं से सीधे जुड़ सके। इस विषय पर बैठक में विस्तृत चर्चा भी हुई।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को एआई, नई प्रौद्योगिकियों और उभरते क्षेत्रों में अध्ययन और शोध को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के समुचित उपयोग से उत्तराखण्ड के युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है।
इस बैठक में कुलपतियों ने अपने-अपने विश्वविद्यालयों की उपलब्धियों, चुनौतियों और आवश्यकताओं की जानकारी राज्यपाल को दी। राज्यपाल ने सभी बिन्दुओं पर समाधान हेतु उचित सहयोग का आश्वासन दिया। राज्यपाल ने कहा कि वह यह देखकर संतुष्ट हैं कि सभी कुलपति अपने-अपने विश्वविद्यालयों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सकारात्मक परिवर्तन उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखण्ड को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
इस अवसर पर सचिव राज्यपाल  रविनाथ रामन, विधि परामर्शी कौशल किशोर शुक्ल, सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा, सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव  दीपेन्द्र चौधरी, सचिव  दीपक कुमार, अपर सचिव आनन्द वास्तव, कुलपति गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय प्रो. मनमोहन सिंह चौहान, कुलपति संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, कुलपति सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट, कुलपति उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय एवं एच.एन.बी. उत्तराखण्ड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, कुलपति देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय प्रो. एन.के. जोशी, कुलपति उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय प्रो. ओंकार सिंह, कुलपति वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखण्ड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार प्रो. परविंदर कुमार कौशल, कुलपति उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी एवं कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो. दीवान सिंह रावत आदि उपस्थित रहे।

राशन, आयुष्मान का हक सिर्फ पात्र परिवारों को, हटेंगे सभी अपात्र  : डीएम

Only eligible families will have the right to ration and Ayushman, all ineligible will be removed DM
Only eligible families will have the right to ration and Ayushman, all ineligible will be removed DM

 – किसी भी दशा में पात्र लाभार्थियों के लिए धन, राशन, लाभ नहीं होने दिया जाएगा विचलित।
—  अब तक किए जा चुके है 3600 राशन व 10,000 फर्जी आयुष्मान कार्ड निरस्त।
 – लापरवाही पड़ी भारी, सत्यापन में ढिलाई पर डीएम ने कई पूर्ति निरीक्षक, एआरओ और एडीओ पंचायत का वेतन किया जब्त।
देहरादून।   जिले में राशन कार्ड एवं आयुष्मान कार्ड सत्यापन कार्याे को लेकर जिलाधिकारी सविन बंसल ने समीक्षा बैठक ली। उन्होंने जिला पूर्ति अधिकारी एवं सीएमओ को राशन एवं आयुष्मान कार्डाे का शत प्रतिशत सत्यापन कार्य तत्काल पूर्ण कराने के सख्त निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि अपात्र लाभार्थियों को हटाते हुए पात्र लाभार्थियों को जल्द से जल्द राशन एवं आयुष्मान कार्ड जारी किए जाए। इस दौरान जिलाधिकारी ने सीएमओ से अपात्र आयुष्मान कार्ड के बारे में विभागीय कार्रवाई की जानकारी भी ली।
मा0 मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, फर्जी राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड पर डीएम ने सख्ती दिखाते हुए सत्यापन अभियान को जल्द से जल्द शत प्रतिशत पूर्ण करने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि किसी भी दशा में पात्र लाभार्थियों के लिए धन, राशन, लाभ को विचलित नहीं होने दिया जाएगा। सत्यापन कार्यो में ढिलाई पर पूर्ति निरीक्षक, एआरओ और एडीओ पंचायत अधिकारियों को भारी पड गई। डीएम ने सभी का वेतन जब्त करने के निर्देश दिए है। डीएम ने 30 अक्टूबर तक 60 प्रतिशत सत्यापन कार्य पूर्ण न होने पर इन सबकी जवाबदेही तय की। हिदायत दी की कार्य पूर्ण न होने पर वेतन तो जब्त होगा ही साथ में प्रतिकूल प्रविष्ठि भी दी जाएगी। जिला प्रशासन के हरकत में आने पर अब तक 3600 राशन और 10000 फर्जी आयुष्मान कार्ड निरस्त किए जा चुके है। डीएम ने कहा कि राशन और आयुष्मान का हक सिर्फ पात्र परिवारों को मिलेगा। सभी अपात्र लोगों को हटाया जाएगा। जिला प्रशासन ने संगठित गिरोह को दबोचने और संगीन धाराओं में पिछले माह ही एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
जनपद के क्लेमेंन्टाउन, सहसपुर, विकास नगर, ऋषिकेश, डोईवाला, त्यूनी और कालसी के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में राशन कार्ड सत्यापन की धीमी प्रगति पर जिलाधिकारी ने कडी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित क्षेत्र के पूर्ति निरीक्षक, एआरओ और एडीओ पंचायत का वेतन आहरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। जिलाधिकारी ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि 30 अक्टूबर तक 60 प्रतिशत से अधिक राशन कार्डाे सत्यापन कार्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों का वेतन काटते हुए उनको प्रतिकूल प्रविष्टि की प्रबल संस्तुति भी की जाएगी। जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात सभी पूर्ति निरीक्षक यह सुनिश्चित करलें की अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण कर राशन पा रहे व्यक्तियों में जिन व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है, उनका सर्वे करें और पात्र व अपात्र लाभार्थियों की जांच कार्य त्रुटिरहित शीघ्र पूरा करें। इस कार्य में किसी भी दशा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला पूर्ति अधिकारी ने अवगत कराया कि जिले में कुल 383352 राशन कार्ड धारक है, जिसमें से 156815 राशन कार्ड का सत्यापन कार्य पूरा कर दिया गया है। राशन कार्ड सत्यापन का कार्य गतिमान है और अभी तक 40.91 प्रतिशत राशन कार्ड का सत्यापन किया जा चुका है। क्लेमेंटाउन में 25.40, सहसपुर में 38.07, विकासनगर में 27.21, ऋषिकेश में 23.52, डोईवाला में 20.99, कालसी में 38.55 और त्यूनी में 8.62 प्रतिशत ही सत्यापन कार्य हुआ है। अभी तक विभिन्न कारणों से 3617 कार्ड निरस्त भी किए जा चुके है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा आधार कार्ड से राशन कार्ड को डिजिटल रूप में सत्यापित करने के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी गतिमान है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अवगत कराया कि जिले में 126960 आयुष्मान कार्ड धारक है जिसका सत्यापन कार्य प्रगति पर है।
बैठक में एसडीएम अपूर्वा सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमके शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल सहित संबधित अधिकारी उपस्थित थे।

दुखयारी विधवा शोभा को बैंक ने लौटाए घर के कागजात,  परिवार सहित धन्यवाद देने कलेक्ट्रेट पंहुची शोभा

The bank returned the house documents to the grieving widow Shobha, who along with her family reached the collectorate to thank her.
The bank returned the house documents to the grieving widow Shobha, who along with her family reached the collectorate to thank her.

– विगत माह अपने शत-प्रतिशत  दिव्यांग बेटे व  बेटी सहित डीएम से मिल लगाई थी गुहार
देहरादून।    विगत माह शोभा रावत ने जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में जिलाधिकारी सविन बंसल से मिलकर अपनी व्यस्था सुनाते हुए बताया कि उनका बेटा शत्प्रतिशत् विकलांग है तथा 1 बेटी है जिसकी पढाई चल रही है। पति की पिछले वर्ष 2024 में मृत्यु हो गई थी। रोजगार का कोई साधन नही है। उन्होंने गुहार लगाते हुए बताया कि उन्होंने बैंक से 17 लाख का ऋण लिया था किन्तु  बैंक द्वारा पति की मृत्यु के उपरांत इंश्योरेंस की क्लेम कुल रू० 13,20,662/- की धनराशि को लोन की धनराशि में समायोजित किया गया तथा लगभग रू0 5,00,000/- की धनराशि जमा की जानी अवशेष है उनकी आर्थिक स्थिति खराब है ऋण किस्त जमा नही कर सकती है। जिस पर जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी को बैंक से समन्वय कर कार्यवाही के निर्देश दिए।
जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से  बैंक ने व्यथित विधवा शोभा रावत को उनके घर के कागज वापस मिल गए है, शोभा अपने परिवार संग आज कलेक्टेªट में जिलाधिकारी एवं उनकी टीम का धन्यवाद देने पंहुची है। जिला प्रशासन के इस प्रयास से जहां शोभा इतनी बड़ी कर्ज की राशि का बोझ उतर गया वहीं उनका घर भी बच गया। जिलाधिकारी ने शोभा के परिवार को राइफल क्लब से आर्थिक सहायता देने के भी निर्देश दिए।
जिला प्रशासन देहरादून अपने त्वरित एक्शन से जहां जनमानस में सरकार, शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढा है वहीं असहाय व्यथितों को न्याय मिल रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल के समक्ष आने वाले फरियादियों को शिक्षा, रोजगार, ऋणमाफी, सम्पति वापसी के साथ ही न्याय मिल रहा है।
डीएम के निर्देश पर एसडीएम न्याय निरंतर प्रकरण को फोलोअप कर रही थी डीएम का हस्तक्षेप एवं समन्वय तथा बैंक के सहयोग से  प्रताड़ित परिवार को नो ड्यूज के साथ ही सम्पत्ति के कागज वापस लौटाए हैं। जिला प्रशासन के असहाय जनमानस के की सहायता हेतु जिस तरह आगे आकर कार्यवाही की जा रही है। उससे जनमन का विश्वास सरकार शासन-प्रशासन के प्रति बढा है जिसमें शिक्षा से लेकर रोजगार, ऋणमाफी; सम्पति वापसी; एक के बाद एक कडे़ निर्णय से असहाय व्यथितों के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है।

After achieving success in Punjabi entertainment and television, Isha Sharma is set to make her debut in the South Indian film industry.

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