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मुख्यमंत्री ने विजय दिवस पर शहीद स्मारक में पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि

The Chief Minister paid tribute to the brave martyrs by laying a wreath at the Martyrs' Memorial on Vijay Diwas (Victory Day).
The Chief Minister paid tribute to the brave martyrs by laying a wreath at the Martyrs' Memorial on Vijay Diwas (Victory Day).

– भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा का दिन है विजय दिवस
देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विजय दिवस के अवसर पर गांधी पार्क, देहरादून में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सम्मान समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने 1971 के युद्ध के सैनिकों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सैनिक कल्याण निदेशालय और जिला सैनिक कल्याण कार्यालय (डीडीहाट, हरबर्टपुर, पिथौरागढ़ एवं हरिद्वार) इन सभी पाँच कार्यालयों में सरकारी वाहन दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजय दिवस की शुभकामनाएं देते हुए सभी वीर बलिदानियों को समस्त प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों ने अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान से 1971 के युद्ध में राष्ट्र की अखंडता और स्वाभिमान की रक्षा की। आज भारतीय सेना के शौर्य, त्याग और अटूट राष्ट्रनिष्ठा की गौरवगाथा को स्मरण करने का दिन है, जो हमारे इतिहास के पन्नों पर स्वर्णाक्षरों में अंकित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1971 में पाकिस्तान के लगभग 93 हजार सैनिकों ने हमारी सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में वीरभूमि उत्तराखंड के 248 बहादुर सपूतों ने भी अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे प्रदेश के 74 सैनिकों को अपने अदम्य साहस और शौर्य के लिए विभिन्न वीरता पदकों से सम्मानित भी किया गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लगभग प्रत्येक परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जवानों का मनोबल बढ़ाने के साथ ही सेना को अत्याधुनिक तकनीक और हथियारों से सुसज्जित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत रक्षा सामग्री का निर्यात करने वाले शीर्ष देशों की सूची में शामिल हो गया है। ऑपरेशन सिंधु के माध्यम से भारत ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारे सैनिकों के साथ-साथ हमारे स्वदेशी हथियार भी किसी से कम नहीं हैं। इस अभियान में भारत में निर्मित आकाश मिसाइल, डिफेंस सिस्टम और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे स्वदेशी हथियारों ने पूरे विश्व में भारत का डंका बजा दिया। आज दुश्मन की एक-एक गोली का जवाब गोलों से दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत है, जो दुश्मनों की हर नापाक हरकत का करारा जवाब देता है और उन्हें उनके ठिकानों में ही नेस्तनाबूद कर देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वीर जवानों के हित में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। वन रैंक वन पेंशन योजना हो, नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि कर सैनिकों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करना हो, या बॉर्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना—ऐसे अनेक कार्य किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार भी सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। सेना में परमवीर चक्र से लेकर मेंशन इन डिस्पैच तक सभी वीरता पुरस्कारों से अलंकृत सैनिकों को दी जाने वाली एकमुश्त तथा वार्षिकी राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। परमवीर चक्र से अलंकृत सैनिक को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रुपये किया गया है। अशोक चक्र की राशि 30 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये, महावीर चक्र और कीर्ति चक्र की राशि 20 लाख से बढ़ाकर 35 लाख रुपये तथा वीर चक्र और शौर्य चक्र की एकमुश्त राशि 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की अवधि भी 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है। प्रदेश में बलिदानियों के आश्रितों को नौकरी पूर्व प्रशिक्षण तथा पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएँ भी संचालित की जा रही हैं। राज्य में वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों हेतु सरकारी बसों में यात्रा की निःशुल्क व्यवस्था के साथ-साथ सेवारत व पूर्व सैनिकों के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। देहरादून के गुनियाल गाँव में ‘‘भव्य सैन्य धाम’’ का निर्माण भी किया जा रहा है। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि 1971 के युद्ध के दौरान करीब 4 हज़ार सैनिक शहीद हुए थे, जिनमें उत्तराखंड राज्य के 248 शहीद सैनिक शामिल थे। करीब 9 हज़ार सैनिक घायल हुए थे। उत्तराखंड के 74 सैनिकों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए, जो हमारे राज्य के लिए गौरव की बात है। सैनिकों का सम्मान हर देशवासी का कर्तव्य है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सैनिकों के कल्याण के लिए कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलने वाली सम्मान राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया है। सैनिकों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, सचिव सैनिक कल्याण दीपेन्द्र चौधरी, मेजर जनरल (से.नि.) सम्मी सबरवाल तथा पूर्व सैनिक और वीरांगनाएँ उपस्थित थीं।

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के शोधकर्ताओं ने भारत के क्लीन एनर्जी मिशन को बढ़ावा देने के लिए, लिक्विड हाइड्रोजन के सुरक्षित परिवहन का नया तरीका खोज निकाला

Researchers at MIT-WPU have discovered a new method for the safe transportation of liquid hydrogen, which could boost India's clean energy mission.
Researchers at MIT-WPU have discovered a new method for the safe transportation of liquid hydrogen, which could boost India's clean energy mission.

देहरादून – 16 दिसंबर 2025 : एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी-डब्ल्यूपीयू) के शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजन के परिवहन के लिए बेहद सुरक्षित और किफायती टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो भारत के क्लीन एनर्जी के सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को कार्बन मुक्त बनाने में हाइड्रोजन की भूमिका सबसे अहम होगी। शोधकर्ताओं की टीम ने लिक्विड ऑर्गेनिक हाइड्रोजन कैरियर सिस्टम बनाने में कामयाबी हासिल की, जिसके ज़रिये हाइड्रोजन का स्टेबल लिक्विड रूप में आसानी से परिवहन किया जा सकता है, जिसमें आग लगने और विस्फोट होने का खतरा नहीं है, साथ ही इसे सामान्य तापमान और दबाव पर आसानी से संभाला जा सकता है। यह नई खोज भारत में हाइड्रोजन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में सबसे बड़ी रुकावटों में से एक को दूर करती है।

इस मौके पर, प्रो. (डॉ.) राजीब कुमार सिन्हाराय, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, ने कहा: “शुरुआत के पचास दिनों में हमें कोई नतीजा नहीं दिखा, पर हमने हार नहीं मानी। लगभग दस महीनों में सौ बार ट्रायल करने के बाद, हमने ऐसी बड़ी कामयाबी हासिल की जो पहले कहीं नहीं मिली। पूरा काम शुरू से करना मुश्किल तो था, लेकिन इससे साबित हुआ कि साइंस में सच्ची लगन से लगातार किया गया काम हमेशा सफल होता है।”

इस इनोवेशन की शुरुआत तब हुई, जब ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड की टीम एक ऐसी समस्या के समाधान के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के पास पहुँची, जिसका हल आईआईटी सहित देश के कई बड़े संस्थान नहीं निकाल पाए थे। दुनिया में कहीं भी इसे तैयार करने का पहले से कोई लिखित तरीका मौजूद नहीं था, इसलिए रिसर्च टीम ने पूरा कॉन्सेप्ट तैयार किया और शुरू से अंत तक की प्रक्रिया विकसित की। प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, प्रो. (डॉ.) राजीब कुमार सिन्हाराय ने शुरुआती महीनों को सब्र का इम्तिहान बताया, क्योंकि लगभग पचास दिनों के एक्सपेरिमेंट के बाद भी हमें कोई नतीजा नहीं मिला। लेकिन, साइंटिफिक तरीके से सच्ची लगन के साथ की गई मेहनत का फल मिला, और लगभग दस महीनों में सौ बार ट्रायल करने के बाद टीम ने बड़ी कामयाबी हासिल की। ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड ने इंटरनेशनल पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लिहाजा इस प्रोप्राइटरी मेथड की जानकारी गोपनीय रखी जाएगी।

ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड के फाउंडर, श्री सिद्धार्थ मयूर ने बताया, “इस इनोवेशन की शुरुआत तब हुई, जब h2e पावर ग्रुप की कंपनी, ओम क्लीनटेक प्राइवेट लिमिटेड एक अनसुलझी समस्या के समाधान के लिए एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के पास पहुँची। भारत में इसे तैयार करने का पहले से कोई लिखित तरीका मौजूद नहीं होने की वजह से, रिसर्च टीम और ओसीपीएल की टीम ने साथ मिलकर पूरा कॉन्सेप्ट तैयार किया और शुरू से अंत तक की प्रक्रिया विकसित की। इस तरह हासिल की गई कामयाबी हाइड्रोजन के सुरक्षित तरीके से परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो इनोवेटिव और किफायती है, साथ ही इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे इंटरनेशनल पेटेंट फाइलिंग की हमारी कोशिशें को भी मजबूती मिली है। यह रिसर्च नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है, और ओसीपीएल इसे आगे ले जाकर एक कमर्शियल प्रोडक्ट बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।”

वैसे तो हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी के सबसे बेहतर विकल्पों में एक है, फिर भी बहुत ज़्यादा एक्सप्लोसिव होने और परिवहन के लिए ज़रूरी एक्सट्रीम कंडीशन की वजह से ही हाइड्रोजन को एनर्जी सिस्टम में इंटीग्रेट करना मुश्किल रहा है। फिलहाल, हाइड्रोजन को या तो एटमोस्फेरिक प्रेशर से सैकड़ों गुना ज़्यादा हाई-प्रेशर सिलेंडर में कम्प्रेस किया जाता है, या फिर माइनस 253 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान पर उसे लिक्विड बनाया जाता है। दोनों ही तरीकों में बहुत जटिल इन्फ्रास्ट्रक्चर, बहुत अधिक सुरक्षा और ज़्यादा इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है, और इन सब पर होने वाला बहुत अधिक खर्च ही हाइड्रोजन परिवहन के सप्लाई चेन में सबसे रुकावट बन जाता है।

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू का एलओएचसी इनोवेशन, दो चरणों वाले केमिकल प्रोसेस की मदद से इस समस्या को दूर करता है। हाइड्रोजनेशन फेज़ में, हाइड्रोजन को खास तौर पर डिज़ाइन किए गए एक ऑर्गेनिक लिक्विड के साथ जोड़ा जाता है, जिससे ये गैस बिल्कुल सुरक्षित लिक्विड में बदल जाती है, जिसे रखना और कहीं भी ले जाना बेहद आसान होता है। डीहाइड्रोजनेशन फेज़ में, हाइड्रोजन को उसकी मंजिल पर रिलीज़ किया जाता है, जबकि कैरियर लिक्विड दोबारा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहता है। इस हाइड्रोजन वाले लिक्विड को संभालना आसान है, जिसका मतलब है कि इसे मौजूदा फ्यूल टैंकरों, स्टोरेज कंटेनरों और यहाँ तक कि स्टैंडर्ड पाइपलाइन नेटवर्क से भी ले जाया जा सकता है, जिससे इन सब पर होने वाला खर्च और परिवहन का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

लैब ट्रायल के दौरान मिले नतीजों से जाहिर है कि, अब भारत भी एलओएचसी तकनीक को विकसित करने में सबसे आगे है। एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की टीम ने केवल दो घंटे में हाइड्रोजन स्टोरेज का काम पूरा किया, जो दुनिया भर की दूसरी रिसर्च में बताए गए अठारह घंटों के मुकाबले काफ़ी तेज़ है। आमतौर पर इसके लिए 170 डिग्री सेल्सियस तापमान की ज़रूरत होती है, लेकिन यह प्रक्रिया केवल 130 डिग्री सेल्सियस पर पूरी हुई, और दबाव भी 56 बार जितना कम रखा गया। हाइड्रोजनेटेड लिक्विड की मदद से, सिर्फ़ 15.6 लीटर के कैरियर में लगभग 11,000 लीटर हाइड्रोजन को स्टोर करना संभव हो पाया। डीहाइड्रोजनेशन के परीक्षणों में, टीम ने स्टोर किए गए हाइड्रोजन का 86 प्रतिशत वापस निकालने में कामयाबी हासिल की, और अब इससे बेहतर परिणाम के लिए आगे की रिसर्च की जा रही है।

प्रो. दत्ता दांडगे, रिसर्च एडवाइजर, ने कहा: “किसी भी दूसरे इंडस्ट्रियल लिक्विड की तरह हाइड्रोजन को आसानी से ले जाने के इस तरीके से सुरक्षा और सरकारी नियमों से जुड़ी पुरानी अड़चनें अब दूर हो जाएँगी। यह कामयाबी देश के लिए पूरे हाइड्रोजन मिशन की रफ्तार बढ़ाने वाली है, साथ ही इससे ट्रांसपोर्ट और बड़े उद्योगों के लिए क्लीन-एनर्जी लॉजिस्टिक्स को नया रूप मिल सकता है।”

प्रो. दत्ता दांडगे, रिसर्च एडवाइजर, ने बताया कि यह टेक्नोलॉजी भारत में क्लीन एनर्जी लॉजिस्टिक्स को पूरी तरह से बदलने वाली है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि, हाइड्रोजन को किसी भी दूसरे इंडस्ट्रियल लिक्विड की तरह ले जाने की क्षमता से सुरक्षा और सरकारी नियमों से जुड़ी पुरानी अड़चनें अब दूर होंगी। इस तरह, यह आने वाले समय में परिवहन और बड़े उद्योगों के लिए ईंधन के तौर पर आसानी से उपलब्ध होगा।

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की अत्याधुनिक सुविधाओं वाली हाइड्रोजन लैब में यह रिसर्च की गई, जिसमें लगा ऑटोक्लेव सिस्टम 350 डिग्री सेल्सियस तापमान और 200 बार तक के दबाव पर काम कर सकता है। लैब में मिली इस कामयाबी को उद्योगों में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए सुलभ बनाना ही इस टीम का लक्ष्य है, जिसके लिए पूरी प्रक्रिया को और बेहतर बनाया जा रहा है।

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू में प्रोजेक्ट फेलो और पीएचडी के छात्र, निशांत पाटिल ने बताया: “इतनी बड़ी कामयाबी देश के लिए काफी मायने रखती है, जिसमें काम करने का अनुभव मेरे लिए बेहद खास रहा है। इससे भारत के क्लीन-एनर्जी भविष्य को नया रूप देने वाले इनोवेशन में योगदान देने का मेरा इरादा और मज़बूत हुआ।”

इस टेक्नोलॉजी को विकसित करने में योगदान देने वाले, प्रोजेक्ट फेलो निशांत पाटिल के लिए यह प्रोजेक्ट बेहद खास रहा है, जिससे उन्हें काफी कुछ सीखने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि, देश के लिए काफी मायने रखने वाली इतनी बड़ी कामयाबी पर काम करने से भारत के बदलते क्लीन एनर्जी माहौल में इनोवेशन को आगे बढ़ाने का उनका इरादा और मजबूत हुआ।

155 बार रक्तदान हेतु अनिल वर्मा “रक्तदान महर्षि उत्तराखंड गौरव सम्मान- 2025” से विभूषित

Anil Verma, who has donated blood 155 times, was honored with the Blood Donation Maharishi Uttarakhand Gaurav Samman - 2025 award.
Anil Verma, who has donated blood 155 times, was honored with the Blood Donation Maharishi Uttarakhand Gaurav Samman - 2025 award.

विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ० नि:शंक ने किया सम्मानित
देहरादून में आयोजित 47वीं ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशंस कॉन्फ्रेंस के भव्य वार्षिक राष्ट्रीय महासम्मेलन में आयोजित सम्मान समारोह में रक्तदान के क्षेत्र में 155 बार रक्तदान कर चुके रक्तदाता शिरोमणि डॉ० अनिल वर्मा, नेशनल काउंसिल मेम्बर पीआरएसआई को रक्तदान महर्षि उत्तराखंड गौरव सम्मान-2025 ” से विभूषित किया गया।
इसके साथ ही समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री एवं वन मंत्री सुबोध उनियाल, लोकप्रिय विधायक रायपुर क्षेत्र श्री उमेश शर्मा “ काऊ” तथा पी आर एस आई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अजित पाठक ने रक्तदाता शिरोमणि डॉ० अनिल वर्मा को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया ।
समारोह की मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खंडूड़ी , विशिष्ट अतिथि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड डॉ० रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, डी जी सूचना बंशीधर तिवारी , पी०आर०एस०आई० के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० अजित पाठक, सेक्रेटरी जनरल पीएलके मूर्ति, विख्यात आर्थोपेडिक व स्पाइन सर्जन पद्मश्री डॉ० बी के संजय ने श्री अनिल वर्मा द्वारा सन् 1971 से अब तक कुल 155 बार रक्तदान करके स्वास्थ्य जागरूकता एवं समाज सेवा के प्रति समर्पण की भावना को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें “रक्तदान महर्षि उत्तराखंड गौरव सम्मान- 2025” से नवाजा।
इस अवसर पर सांसद नरेश बंसल रूस से आये प्रतिनिधि माईकल मस्लोव,दाव्यदेंको यूलिया , अन्ना तलालीना, डीजी यूकॉस्ट डॉ0 दुर्गेश पंत , स्वास्थ्य सचिव उत्तराखंड डॉ०आर राजेश कुमार, पीआरएसआई देहरादून चैप्टर के अध्यक्ष रवि बिजारनिया,सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश भट्ट, पूर्व अध्यक्ष विमल डबराल, पूर्व अध्यक्ष अमित पोखरियाल सहित भारत के विभिन्न प्रदेशों से आये प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री धामी दक्षेश्वर महादेव मंदिर में की पूजा-अर्चना, सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी मंदिर कें भी किए दर्शन

Chief Minister Dhami offered prayers at Daksheshwar Mahadev Temple and also visited the Siddhapeeth Hanumangarhi Temple.
Chief Minister Dhami offered prayers at Daksheshwar Mahadev Temple and also visited the Siddhapeeth Hanumangarhi Temple.

-मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रगति एवं खुशहाली के साथ ही आगामी कुंभ मेले के सफल आयोजन की कामना की
देहरादून।  मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कनखल-हरिद्वार में दक्षेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना करने के साथ ही सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी मंदिर के भी दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने दक्षेश्वर महादेव मंदिर में दुग्धाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर  प्रदेश की प्रगति एवं खुशहाली के साथ ही आगामी कुंभ मेले को दिव्य, भव्य ढंग से आयोजित करने की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न अखाड़ों के पदाधिकारियों एवं साधु-संतो से भेंटकर उनका आशीर्वाद लिया।
मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2027 में हरिद्वार में कुंभ मेला का आयोजन प्रदेश के लिए बहुत बड़ा सुअवसर है। देश व दुनिया में कुंभ मेला एवं कुंभ नगरी हरिद्वार का अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है। राज्य सरकार कुंभ मेला के दिव्य एवं भव्य आयोजन के लिए ठोस कार्य कर रही है। कुंभ मेला क्षेत्र को विस्तार देने तथा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगमता और सुरक्षा को लेकर प्रभावी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही है। ताकि देश-दुनिया से आने वोल लोग यहां से बेहतर अनुभव लेकर लौट सकें। मुख्यमंत्री ने साधु-संतो से प्रदेश सरकार को मिल रहे आशीर्वाद के लिए आभार व्यक्त करते हुए आगामी कुंभ मेले को सफलतापूर्वक आयोजित करने हेतु सांधु-संतों और स्थानीय लोगों से निरंतर समर्थन व सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया।
इस अवसर पर  पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने संस्कृति के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह  द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए कहा कि दिव्य एवं भव्य कुंभ आयोजन के लिए संत समाज द्वारा राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग दिया जाएगा।
इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत राजेंद्र दास, दिगंबर अखाड़े के वैष्णो दास, निर्वाणी अखाड़े के श्रीमहंत मुरलीदास, निर्मल अखाड़े के कोठारी जसविंदर सिंह, बड़ा उदासीन अखाड़े के राघवेंद्र दास, नया अखाड़े से जगतार मुनि, अटल अखाड़े के सत्य गिरी, मनोज गिरी सहित अनेक साधु-संत मौजूद रहे।
इसके पश्चात मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कनखल स्थित सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी मंदिर के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की।
इस दौरान विधायक हरिद्वार मदन कौशिक, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा, पूर्व विधायक स्वामी यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता, संजय गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, दायित्वधारी सुनील सैनी, ओमप्रकाश जमदग्नि, जयपाल सिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष लव शर्मा, आशु चौधरी, आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

ठोउड़ा नृत्य सांस्कृतिक महोत्सव में तीसरे दिन भी गढ़वाली, कुमाऊनी एवं जौनसारी प्रस्तुतियां ने समां बाद दिया

On the third day of the Thoda Dance Cultural Festival, Garhwali, Kumaoni, and Jaunsari performances captivated the audience.
On the third day of the Thoda Dance Cultural Festival, Garhwali, Kumaoni, and Jaunsari performances captivated the audience.

देहरादून। परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित ठोउड़ा नृत्य एवं सांस्कृतिक महोत्सव में उत्तराखण्डी लोक संस्कृति पर आधारित ठोउड़ा महोत्सव के अंतिम दिन में आज मुख्य अतिथि विधायक सविता कपूर बतौर उपस्थित रही।
मुख्य अतिथि श्रीमती सविता कपूर ने कहां है कि हमारे उत्तराखंड की लोक संस्कृति को राष्ट्रीय ओर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। श्रीमती सविता कपूर ने कहा है कि इस कार्यक्रम को शुरू करने में हम सभी का सहयोग रहा है, इस प्रकार के कार्यक्रम समय की आवश्यकता है। ऐसे संस्कृति कार्यक्रम करने से आने वाली पीढ़ियों को संस्कार मिलते है।
इस अवसर पर सांस्कृतिक एवं ठोउड़ा नृत्य एवं सांस्कृतिक महोत्सव में अनेक कलाकारों द्वारा विशेष प्रस्तुतियां दी गई है। लोक नृत्य में। लोक नृत्य ठोउड़ा, जंग़बाजी, गुंडीया रासो, तादी के गीतों द्वारा समां बांधा गया है। जौनसार बाबर के लोक गायक नरेश बादशाह ने परदेशी आ…., पंद्रह गते फागुन ली.. गाने गाकर श्रोताओं को छूने पर मजबूर कर दिया। लोक गायक अरविंद राणा ने बैंकों जौनसार अ, के अलावा दी है। लोक गायक सनी दयाल ने महसू वंदना एवं अन्य प्रस्तुतियां देकर प्रोग्राम में चार चांद लगा दिया है। हिमाचल के लोक गायक कपिल शर्मा ने हिमाचली अनेक प्रस्तुतियां दी, लोक गायक अनूप चंगाटा ने लारा दारिये, व अनेक प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को खूब झुमाया, कलाकार जयवीर चौहान, विजय नेगी, वरिष्ठ लोक गायक सीताराम शर्मा, कुमाऊनी लोक कलाकार राकेश खंतवाल द्वारा कुमाऊनी लोक संगीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। इसके अलावा निकेश बंगानी एवं अन्य कलाकारों ने कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुत किया दी। कार्यक्रम में संगीत रोहित मोटका ने दिया।
इस अवसर पर ज्योति सिंह बिष्ट वरिष्ठ नेता भारतीय जनता पार्टी एवं वरिष्ठ पत्रकार हमारी चौपाल बलदेव भट्ट जी भी मौजूद रहे इनके साथ-साथ गजेन्द्र जोशी, बाबूराम शर्मा, चमन सिंह चौहान, जगत सिंह बिष्ट, श्रीमती उर्मिला चौहान, प्रभा तोमर, बबीता चौहान के अलावा जौनसार बावर पौराणिक लोक कला मंच एवं सामाजिक संस्था के अध्यक्ष कुंदन सिंह चौहान महासचिव प्रशांत नेगी सदस्य गंभीर चौहान राजवीर राणा, सुशील दयाल, मनोज खन्ना आदि लोगों उपस्थित रहे।

आईआईएससी बेंगलुरू में विज्ञान की बारीकियां सीखेंगे शिक्षक

Teachers will learn the intricacies of science at IISc Bengaluru.
Teachers will learn the intricacies of science at IISc Bengaluru.

प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय चरण में 95 विज्ञान शिक्षक लेंगे हिस्सा

आगामी 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

देहरादून 15 दिसम्बर 2025
सूबे के राजकीय विश्वविद्यालयों एवं शासकीय महाविद्यालयों में विज्ञान संवर्ग के शिक्षकों को इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस (आईआईएससी) बेंगलुरू में उन्न्त वैज्ञानिक प्रशिक्षण व विज्ञान की बारीकियां सिखाई जायेगी। उच्च विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये विभिन्न विषयों के अंतर्गत 95 शिक्षकों का चयन किया गया है। जिन्हें आगामी 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 तक आईआईएससी बेंगलुरू में प्रशिक्षण दिया जायेगा।

उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राजकीय विश्वविद्यालयों एवं शासकीय महाविद्यालयों में प्रयोगात्मक व शोधात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और सुदृढ़ करना है। जिस हेतु विभाग ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस बेंगलुरू के साथ एमओयू साइन किया है। जिसके तहत प्रदेश के विज्ञान शिक्षकों को आईआईएससी में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि विज्ञान संवर्ग के शिक्षकों के द्वितीय चरण का प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच आयोजित किया जायेगा। जिस हेतु प्रदेशभर के कुल 95 विज्ञान शिक्षकों का चयन किया गया है। जिसमें भौतिक विज्ञान के 25, रसायन विज्ञान 23, गणित 17, वनस्पति विज्ञान 15 तथा जन्तु विज्ञान के 15 शिक्षक शामिल है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को विज्ञान के गहन एवं सूक्ष्म पहलुओं, नवीन सिद्धांतों, आधुनिक प्रयोगों से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जायेगा। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि शासन स्तर से निदेशक उच्च शिक्षा एवं राज्याधीन विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को आपसी समन्यव स्थापित कर प्रतिभागी विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु निर्देश दे दिये गये हैं। विभाग का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसका लाभ विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को मिलेगा। इससे पहले प्रथम चरण में 84 विज्ञान शिक्षकों ने आईआईएससी में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उच्च शिक्षा सचिव डॉ. रणजीत कुमार सिन्हा ने बताया कि राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को निरंतर सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार शिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण एवं शोध गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा देशभर के सर्वोत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया जा रहा है। निश्चित तौर पर विभाग की दूरदर्शी पहलों का सकारात्मक प्रभाव निकट भविष्य में शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता, नवाचार और शोध परिणामों के रूप में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगी।

बयान
राज्य सरकार का संकल्प है कि शिक्षकों की अकादमिक एवं शोध क्षमता को निरंतर सशक्त किया जाय। आईआईएससी, बेंगलुरू जैसे देश के शीर्ष संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत विज्ञान शिक्षक अपने शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को विज्ञान की गहन समझ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की भावना से जोड़ सकेंगे। इससे छात्रों में तार्किक सोच, प्रयोगात्मक दक्षता तथा विज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोगों की समझ विकसित होगी, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। – डॉ. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड।

बॉक्स
आईआईएमसी के शैक्षणिक भ्रमण पर जायेंगे 50 छात्र-छात्राएं
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न राजकीय विश्वविद्यालयों एवं शासकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत विज्ञान वर्ग के 50 मेधावी छात्र-छात्राएं आईआईएससी, बेंगलुरू के शैक्षणिक भ्रमण पर जायेंगे। जिस हेतु प्रदेशभर से छात्र-छात्राओं का चयन कर दिया गया है। शैक्षिक भारत दर्शन योजना के तहत चयनित छात्र-छात्राओं को आगामी 28 दिसम्बर 2025 से 12 जनवरी 2026 की अवधि में तीन दिवसीय शैक्षिक भ्रमण पर भेजा जायेगा। जहां पर छात्र-छात्राओं को देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थान में चल रहे आधुनिक शोध कार्यों, प्रयोगशालाओं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान के प्रति रुचि एवं करियर संबंधी नई संभावनाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत पीएमजीएसवाई के तहत 179625.95 लाख के 11 मोटर मार्ग स्वीकृत

Under the PMGSY scheme, 11 motor roads worth ₹179625.95 lakh have been sanctioned in the Chaubattakhal assembly constituency.
Under the PMGSY scheme, 11 motor roads worth ₹179625.95 lakh have been sanctioned in the Chaubattakhal assembly constituency.

पौड़ी। प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज के प्रयासों से चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत पीएमजीएसवाई के तहत पाबौ, एकेश्वर, बीरोंखाल और पोखड़ा विकासखंड में 2025-26 के लिए 179625.95 लाख के लागत कुल 11 मोटर मार्ग स्वीकृत किये जाने पर क्षेत्र की जनता ने
प्रसन्नता व्यक्त करते श्री महाराज का आभार व्यक्त किया है।

प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज के प्रयासों से विधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल में लगातार सड़कों का निर्माण किया जा रहा है‌।पीएमजीएसवाई के अन्तर्गत स्टेज-4 के तहत 2025-26 के
लिए विकासखंड पाबौ के तहत 11 किमी झंगरबो-सिंवाल-पाली गांव मोटर मार्ग के लिए 2037.84 लाख, विकासखण्ड एकेश्वर में 6 किमी लम्बाई की 936.34 लाख की लागत की पिलखेरा-सगोडा मोटर मार्ग, 5.375 किमी लम्बाई की 829.66 लाख की रिठाखाल-कुलासू मोटर मार्ग, 04 किमी लम्बाई की 629.33 लाख की भंडारीगांव-मौन्दाड़ी-परयान मोटर मार्ग, विकासखण्ड बीरोंखाल के अन्तर्गत 609.65 की लागत की 3.91 किमी मैठाणाघाट-खिटौटिया मोटर मार्ग, 735.00 लाख की धनराशि की 4.70 किमी रसियामहादेव-नागणी मोटर मार्ग, 433.47 लाख की 2.63 किमी. खलधार-ठंगा और 883.49 लाख की धनराशि की 5.26 किमी घनियाखाला-बडियाना मोटर मार्ग के साथ-साथ विकासखण्ड पोखड़ा के अन्तर्गत 618. 52 लाख की 3.825 किमी धर्मपुर-डबरा मोटर मार्ग, 1708.54 लाख की 10.550 किमी बडोलीगांव-बडेथ-शल्ड-कटीगांव मोटर और 1058.65 लाख की लागत की 6.900 किमी कमलपुर-नौला-खेड़गांव मोटर मार्गो सहित कुल 179625.95 लाख की लागत की 11 मोटर मार्गो की स्वीकृति प्राप्त हुई है। बड़ी संख्या में मोटर मार्गो की स्वीकृति मिलने पर क्षेत्र की जनता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया है। श्री महाराज ने कहा कि जल्दी ही इन सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जायेगा।

“आरोग्य सखी स्वास्थ्य संवाद” के नया आयाम गढ़ने जा रहा है पैनेशिया हॉस्पिटल(रिस्पना पुल,देहरादून)…!!!

Panacea Hospital (Rispa Bridge, Dehradun) is set to create a new dimension in the Arogya Sakhi Health Dialogue...!!!
Panacea Hospital (Rispa Bridge, Dehradun) is set to create a new dimension in the Arogya Sakhi Health Dialogue...!!!

स्त्री स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व पहल…!!!

देहरादून: 15 दिसंबर,2025: पैनेशिया हॉस्पिटल रिस्पना पुल,देहरादून ने डंगवाल मार्ग,
निकट गढ़वाल सभा मंदिर ,नेशविला रोड स्थित
भोर का तारा स्कूल (सेंट एग्नेस स्कूल) में छात्राओं व शिक्षकाओं के मध्य स्त्री स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर एक स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया।

इस अवसर पैनेशिया हॉस्पिटल (रिस्पना पुल, देहरादून) की स्त्री-प्रसुति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर स्वाति कोहली (MS Gynae) जी ने परिचर्चा में बतौर मुख्य वक्ता जानकारी प्रदत्त की।

उन्होंने छात्राओं को आयु की विभिन्न अवस्थाओं में महिलाओं को पेश आनेवाली विभिन्न समस्याओं से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में छात्राओं
को सही जानकारी न होने के कारण वे इन बीमारियों के बारे में किसी से बात नहीं करती और फिर मानसिक रूप से परेशान रहती हैं।

साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता होती है, अन्यथा आगे चलकर गर्भधारण में अथवा गर्भावस्था के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने छात्राओं को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखने पर बल दिया और दैनिक भोजन में फल, सब्जियां, दूध, आयरन, विटामिन सी और प्रोटीन से भरपूर पौष्टिक एवं संतुलित आहार को सम्मिलित करने की सलाह दी। साथ ही मैदे का सेवन कम से कम करने और फास्ट फूड, चिप्स, पैक्ड फूड, कोल्ड ड्रिंक्स और तैलीय भोजन से परहेज करने की भी सलाह दी। इस सबसे ऊपर उन्होंने नियमित रूप से छात्राओं को व्यायाम और योग करने पर जोर दिया।

इसके अलावा उन्होंने युवा पीढ़ी में नशे की बढ़ती लत के बारे में भी अवगत कराया और छात्राओं को धूम्रपान, मद्यपान और अन्य प्रकार के नशे से दूर रहने का परामर्श दिया।

“आरोग्य सखी स्वास्थ्य संवाद” कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर पैनेशिया हॉस्पिटल (रिस्पना पुल, देहरादून) के संस्थापक निदेशक श्री रणवीर सिंह चौहान जी ने कहा कि इस परिचर्चा का मुख्य उद्देश्य हमारी सम्मानित
मातृशक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा अधिक सजग कराना है।उन्होंने कहा कि स्वस्थ नारी ही मजबूत परिवार, समाज, राज्य और राष्ट्र की नींव होती है।

कार्यक्रम में पैनेशिया हॉस्पिटल से डॉक्टर भूमिका चौहान जी ने कहा कि महिलाओं में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी आज एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है। ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय समय पर जांच और जागरूकता ही है। उन्होंने छात्राओं से समाज में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने कई सवाल पूछे।

इस अवसर पर विद्यालय के सम्मानित शिक्षकों व कर्मचारियों के साथ साथ पैनेशिया हॉस्पिटल (रिस्पना पुल, देहरादून) से श्री विकास रावत जी,श्री सी. पी.नेगी जी व श्री रोहित चंदेल जी उपस्थित थे।

उत्तराखंड सहित पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं वैवाहिक अपराध

Marital crimes are increasing rapidly across the country, including in Uttarakhand.
Marital crimes are increasing rapidly across the country, including in Uttarakhand.

क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया, देहरादून में डिटेक्टिव देव गोस्वामी के खुलासों से दर्शक और विशेषज्ञ चौंके

देहरादून- 15 दिसंबर 2025- क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया के तृतीय संस्करण में आयोजित एक विशेष सत्र में उत्तराखंड सहित पूरे भारत में लगातार बढ़ते वैवाहिक अपराधों पर गंभीर, तथ्यात्मक और वास्तविक चर्चा की गई। यह सत्र “एक निजी जासूस की नज़र से वैवाहिक अपराध” विषय पर आधारित था, जिसमें तियानझू इन्वेस्टिगेटिव सर्विसेज के संस्थापक एवं निजी जासूस डिटेक्टिव देव गोस्वामी को बतौर पैनलिस्ट आमंत्रित किया गया।

यह कार्यक्रम राजपुर रोड स्थित एक होटल में संपन्न हुआ, जिसकी संचालनकर्ता (मॉडरेटर) सुप्रसिद्ध लेखिका रूबी गुप्ता रहीं। सत्र के दौरान डिटेक्टिव देव गोस्वामी ने अपने वर्षों के अनुभवों के आधार पर बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वैवाहिक धोखाधड़ी और वैवाहिक अपराधों के मामलों में तेज़ वृद्धि हुई है, और यही स्थिति अब लगभग पूरे देश में देखने को मिल रही है।

डिटेक्टिव देव गोस्वामी के अनुसार, आज वैवाहिक अपराध केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि इनमें फर्जी पहचान, पहले से हुई शादी को छुपाना, झूठी नौकरी व आय का दावा, आर्थिक ठगी, भावनात्मक शोषण, डिजिटल माध्यमों से धोखाधड़ी और योजनाबद्ध विवाह जैसे संगठित अपराध शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांत और सुरक्षित माने जाने वाले राज्य भी अब इन मामलों से अछूते नहीं रहे हैं, जो समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

इस सत्र में लोकप्रिय टीवी क्राइम शो “सावधान इंडिया” के निर्देशक अनिरबन भट्टाचार्य भी उपस्थित रहे। डिटेक्टिव देव गोस्वामी द्वारा सुनाई गई वास्तविक वैवाहिक अपराधों की कहानियाँ सुनकर वे भी हैरान और स्तब्ध नज़र आए।
उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “ऐसे मामलों को मैंने अपने धारावाहिक ‘सावधान इंडिया’ में भी नहीं दिखाया। मुझे अंदाज़ा नहीं था कि भारत में इस स्तर के संगठित और खतरनाक वैवाहिक अपराध वास्तव में हो रहे हैं।”

उनकी यह प्रतिक्रिया इस बात को दर्शाती है कि ज़मीनी हकीकत, टीवी और फ़िक्शन से कहीं अधिक भयावह होती जा रही है।

अपने संबोधन में डिटेक्टिव देव गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाह-पूर्व जांच (प्री-मैट्रिमोनियल जांच) पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सार्वजनिक अभिलेख, व्यवहारिक विश्लेषण और मैदानी सत्यापन के माध्यम से तथ्यों की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य विवाह से पहले सच्चाई सामने लाकर भविष्य में होने वाले बड़े अपराधों, कानूनी विवादों और मानसिक आघात से लोगों को सुरक्षित रखना है।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कानून विशेषज्ञों, सामाजिक शोधकर्ताओं और दर्शकों ने इस सत्र को आंखें खोलने वाला, साहसिक और सामाजिक रूप से अत्यंत आवश्यक बताया। वास्तविक घटनाओं और जमीनी सच्चाई पर आधारित इस चर्चा को श्रोताओं ने खूब सराहा।

क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल ऑफ इंडिया का यह सत्र न केवल अपराध साहित्य को नई दिशा देता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि सतर्कता, सत्यापन और जागरूक निर्णय आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं।

द पोली किड्स आईएसबीटी और नींबूवाला शाखा का वार्षिक समारोह धूम धाम से मनाया गया।

The annual function of The Polly Kids ISBT and Nimbuwala branches was celebrated with great pomp and show.
The annual function of The Polly Kids ISBT and Nimbuwala branches was celebrated with great pomp and show.

देहरादून – 15 दिसंबर 2025- द पोली किड्स आईएसबीटी शाखा का 19 वां वार्षिक समारोह विक्रम वेताल पहेलियों का सफर और द पोली किड्स नींबूवाला शाखा का 7 वा वार्षिक समारोह कालचक्र बड़ी धूम धाम से मनाया गया। इस दौरान स्कूल के बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रमों गीत, नाटक, और नृत्य के द्वारा दर्शकों का मन मोह लिया।

सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबड़‌कला, देहरादून के प्रेक्षागृह में कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती सविता कपूर जी तथा विशिष्ट अतिधि श्रीमती मीरा सकलानी जी एवं श्री पदम सिंह थापा , श्री सुभाष बर्थवाल जी द्वारा किया गया।

आईएसबीटी शाखा के कार्यक्रम में विक्रमादित्य और वेताल की कहानियों के साथ-साथ उनके नैतिक मूल्यों का भी सुन्दर चित्रण किया गया। और नींबूवाला शाखा के समारोह की शुरुआर गणेश वंदना से फिर युगो की गाथा – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर्युग ओर कलयुग, राधा कृष्णा डांस,महाभारत युद्ध डांस आदि को आकर्षक ढंग से दर्शाया गया।

समारोह में निदेशक श्रीमती (डा०) अन्तिम विश्नोई, श्रीमती रंजना महेंदु , श्री ऋषभ डोभाल, श्री चंदोला,  श्रीमती नन्दिता सिंह,  सुश्री शगुन बिश्नोई, श्रीमती गीतिका ,श्रीमती शिप्रा आनंद, श्रीमती माधवी भाटिया, श्री विनोद भट्ट , श्री आलोक छेत्री एवं श्रीमती वंदना छेत्री ,सिस्टम व अकादमिक हेड – श्रीमती दिव्या जैन, इवेंट व अकादमिक हेड – श्रीमती दीप्ति सेठी एवं हेडमिस्टेस – श्रीमति मीतू कुकरेजा, श्रीमती दिव्या अग्रवाल, श्री अनिल भट्ट, श्रीमती शिवानी मजारी,आदि मौजूद रहे।

Congress submitted a memorandum to SP City regarding traffic arrangements.

अपनी शादी के लिए दून पहुंचे क्रिकेटर कुलदीप यादव

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देहरादून।  स्टार क्रिकेटर कुलदीप यादव गुरुवार को अपनी शादी समारोह के लिए दून पहुंच गए हैं। वह कुछ देर रायपुर स्थित सरबजीत कंपलेक्स हाथी...
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