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शिक्षक विद्यार्थियों के भविष्य के साथ राष्ट्र का निर्माण करते हैंः डॉ. धन सिंह रावत

Teachers build the nation alongside the future of students Dr. Dhan Singh Rawat
Teachers build the nation alongside the future of students Dr. Dhan Singh Rawat

शिक्षक दिवस पर 19 शिक्षक-शिक्षिकाओं को मिला शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने किया सम्मानित, शिक्षकों के योगदान को बताया अनुकरणीय

देहरादून, 05 सितम्बर 2026

शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोक भवन में आयोजित ‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार-2025’ सम्मान समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 19 शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने सम्मानित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थी का जीवन नहीं संवारता, बल्कि राष्ट्र का चरित्र गढ़ता है। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा पहचानकर उनमें आत्मविश्वास जगाएं और उन्हें बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने का साहस दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है।

समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन होना उनके उत्कृष्ट कार्य, समर्पण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में शिक्षक सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

डॉ. रावत ने कहा कि शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के समर्पण और सेवाभाव की पहचान है। प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर दिया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

उन्होंने कहा कि शैलेश मटियानी ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की। उनके साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में उनकी प्रमुख कृतियों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थी उत्तराखंड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें।

डॉ. रावत ने कहा कि आज का शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विद्यार्थियों में रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक मूल्यों और आत्मविश्वास का निर्माण कर रहा है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन दें।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण एवं रोजगारपरक बनाया जाए। तकनीक और नवाचार के साथ शिक्षक की संवेदनशीलता का समन्वय ही भविष्य की शिक्षा को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी लोकसंस्कृति, पर्यावरण और हिमालयी विरासत से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण दायित्व है।

इस अवसर पर अपर सचिव राज्यपाल श्रीमती रीना जोशी, अपर सचिव शिक्षा श्रीमती नमामि बंसल, महानिदेशक शिक्षा श्रीमती आकांक्षा कोंडे सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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इन शिक्षकों को मिला सम्मान

प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी:
श्री विष्णुपाल सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल), श्री लखपत सिंह रावत (चमोली), श्री पृथ्वी सिंह रावत (उत्तरकाशी), श्री वीरेंद्र सिंह रावत (देहरादून), श्री रोबिन कुमार (हरिद्वार), श्री महेश्वर प्रसाद सेमवाल (टिहरी), श्री शशिकांत नौटियाल (रुद्रप्रयाग), श्री जहीर अब्बास (चंपावत), श्री नौ सिंह (ऊधमसिंह नगर), डॉ. श्वेता मजगांई (नैनीताल), श्री विक्रम सिंह परिहार (पिथौरागढ़) एवं श्री त्रिलोक सिंह अधिकारी (अल्मोड़ा)।

माध्यमिक शिक्षा श्रेणी:
श्री नरेंद्र सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल), डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा (चमोली), डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (देहरादून), श्रीमती कमलेश पंवार (हरिद्वार), श्री नवीन चंद्र पंत (चंपावत) एवं श्री विशन सिंह मेहता (नैनीताल)।

प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी:
डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट (उत्तरकाशी)।

विशेष सम्मान—राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025:
श्रीमती मंजूबाला (चंपावत)।