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October 13, 2026
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85 वर्ष की राधिका अम्मा का निधन, अंतिम इच्छा के अनुसार किया देहदान, संघर्ष, साहस और सामाजिक चेतना की बनीं मिसाल

85-year-old Radhika Amma passes away; body donated in accordance with her final wish; she became an embodiment of struggle, courage, and social consciousness.

रिया सोलीवाल, भिकियासैंण

भिकियासैंण/अल्मोड़ा। “राधिका अम्मा” और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय “सास-बहू की गुफ्तगू” के नाम से पहचानी जाने वाली श्रीमती राधिका तिवारी का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका पार्थिव शरीर आज सोबन सिंह जीना मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा को चिकित्सा शिक्षा एवं शोध कार्य के लिए समर्पित किया गया।

राधिका तिवारी का जीवन संघर्ष, आत्मबल और सामाजिक जागरूकता का प्रेरक उदाहरण रहा। जब वह मात्र 21 वर्ष की थीं, तभी चौखुटिया विकासखंड के ग्राम घुंघोली, बसभीड़ा निवासी उनके पति धाराबल्लभ तिवारी का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने अकेले खेती-किसानी कर अपने इकलौते पुत्र ललित तिवारी का पालन-पोषण किया, उन्हें शिक्षित किया और सरकारी सेवा के योग्य बनाया। लेकिन 27 जुलाई 1988 को एक दुर्घटना में पुत्र का भी असमय निधन हो गया।

जीवन के इस कठिन दौर में उनकी बहू, शिक्षिका एवं लेखिका दीपा तिवारी उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं। दुःख के इस साझा सफर ने सास-बहू के रिश्ते को दोस्ती में बदल दिया। दोनों की आत्मीय बातचीत और जीवन से जुड़े अनुभवों ने सोशल मीडिया पर “राधिका अम्मा और सास-बहू की गुफ्तगू” के रूप में लाखों लोगों का स्नेह और सम्मान प्राप्त किया।

राधिका तिवारी सामाजिक सरोकारों से भी गहराई से जुड़ी रहीं। 2 फरवरी 1984 को बसभीड़ा से शुरू हुए “नशा नहीं, रोजगार दो” आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई और हर वर्ष आंदोलन की वर्षगांठ पर मंच से बेबाकी के साथ अपनी बात रखती थीं।

पारंपरिक ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी राधिका अम्मा ने सामाजिक रूढ़ियों और अंधविश्वासों को पीछे छोड़ते हुए अपनी बहू दीपा तिवारी की प्रेरणा से देहदान का संकल्प लिया था। निधन के बाद उनकी इसी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए परिवार ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को समर्पित कर दिया।

परिवार की ओर से बताया गया है कि राधिका अम्मा की इच्छा के अनुरूप कोई पारंपरिक क्रिया-कर्म आयोजित नहीं किया जाएगा। उनके परिवार में बहू दीपा तिवारी, पोते अनिरुद्ध एवं अभिषेक हैं।

राधिका तिवारी अपने पीछे संघर्ष, साहस, सामाजिक चेतना और मानव सेवा की ऐसी विरासत छोड़ गई हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उनके निधन पर
कई राजनैतिक संगठनो ने शोक व्यक्त किया है।

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