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हिमालय गंगा और उनके जलस्रोत: भारतीय जीवन का आधार विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

उत्तराखंड में धारे, मंगरौं का है सामाजिक, सांस्कृतिक महत्व: त्रिवेंद्र रावत
विकासनगर। वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति और मानव सभ्यता के लिए हिमालय, सदानीरा नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया। साथ ही पर्यावरण असंतुलन से हिमालय हो रहे नुकसान पर चिंता जताई। वीर शहीद केसरी चंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय डाकपत्थर में बुधवार को ‘ हिमालय गंगा और उनके जलस्रोत: भारतीय जीवन का आधार विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी का उद्घाटन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। पूर्व सीएम रावत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र के बाशिंदों के पेयजल के पारंपरिक साधन प्राकृतिक जलस्रोत ही होते हैं। हिमालयी क्षेत्र में जलस्रोतों के आसपास ही गांव विकसित हुए। इन जलस्रोतों को धारा, मंगरा कहा जाता है। बताया कि धारे मंगरों का सामाजिक, सांस्कृतिक महत्व भी है। इसीलिए विवाह और अवसरों पर इनकी पूजा की जाती है। बताया कि प्राकृतिक जल स्रोत सदियों से भारतीय संस्कृति में धार्मिक और सांस्कृतिक तौर पर महत्वपूर्ण रहे हैं। लिहाजा सदियों से ही इन्हें संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। श्रीदेव सुमन विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. पीपी ध्यानी ने कहा कि गंगा और हिमालय सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं। गंगा किनारे और हिमालय की तलहटियों में ही भारतीय संस्कृति पल्लवित हुई है। सनातन धर्मग्रंथों और भारतीय साहित्य में दोनों को ही बड़ा महत्व दिया गया है। कहा कि गंगा भारतीयों के लिए जीवनदायिनी और आस्था का ही केंद्र नहीं है, बल्कि पूरी भारतीय संस्कृति को समाहित किए हुए हैं। डा. दीपक भट्ट ने हिमालय और गंगा के भौगोलिक महत्व की जानकारी दी। विकासनगर विधायक मुन्ना चौहान ने हिमालयी क्षेत्र में हो रहे भौगोलिक परिवर्तन, ग्लेशियरों के बड़ी मात्रा में पिघलने और प्राकृतिक जलस्रोतों के समाप्त होने पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि मानव अभी भी नहीं संभला तो धरती से जीवन की समाप्ति हो जाएगी। उन्होंने हिमालय, गंगा, जलस्रोतों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयास पर जोर दिया। इस दौरान प्राचार्य प्रो. गोविंद राम सेमवाल, प्रो. दिनेश चंद्र नैनवाल, प्रो. संदीप शर्मा, डा. संतोष कुमार राय, प्रो. मधु थपलियाल, प्रो. आरएस गंगवार, डा. दीप्ति बगवाड़ी, प्रो. आनंद सिंह आदि मौजूद रहे।