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“स्मार्ट सिटीज” के साथ “ग्रीन सिटीज़” की परिकल्पना से ही संभव है सतत विकास : राज्यपाल

Sustainable development is possible only through the concept of “Green Cities” along with “Smart Cities” Governor

देहरादून।   राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने रविवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में प्रतिभाग किया। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए प्रख्यात विद्वानों ने विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन और असमान विकास जैसी चुनौतियों के स्थायी समाधान और नई दिशा की तलाश में है। ऐसे समय में यह सम्मेलन केवल एक अकादमिक विमर्श नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक चेतना, साझी जिम्मेदारी और पर्यावरणीय जागरूकता का सशक्त आह्वान है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि पूरक बनाना ही सच्चा सतत विकास है।
राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज केवल वैज्ञानिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व का प्रश्न बन चुका है। अनियोजित शहरीकरण, अंधाधुंध वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अति-दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि इस संकट से निपटने के लिए केवल नीतियाँ या तकनीक पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि हमें जीवनशैली में परिवर्तन, जनसहभागिता और प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहकर नीतियां बनानी होगी।
राज्यपाल ने कहा कि हमारे पर्वतीय राज्यों के लिए पर्यावरणीय चुनौतियाँ और भी संवेदनशील हैं। भूस्खलन, मृदा क्षरण, नदियों का कटाव और वन्य जीवों के आवासों में कमी जैसे मुद्दे अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी, वैज्ञानिक और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय तथा जनजागरूकता और शिक्षा तीनों को एक साथ जोड़ना आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि शहरीकरण आर्थिक प्रगति का वाहक है, परंतु अनियोजित शहरीकरण असमानता, प्रदूषण और संसाधनों की कमी का कारण बन रहा है। उन्होंने कहा कि हमें “स्मार्ट सिटीज” के साथ-साथ “ग्रीन सिटीज” की भी परिकल्पना करनी होगी, जहाँ भवन ऊर्जा-कुशल हों, परिवहन स्वच्छ हो और हरित आवरण पर्याप्त हो। सतत विकास का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना है।
राज्यपाल ने युवाओं से कहा कि वे केवल भविष्य के विद्यार्थी नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माता हैं। उनके विचार, शोध और संवेदना ही हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत की दिशा तय करेंगे। उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि यह सम्मेलन ज्ञान, संवाद और नीति-चिंतन का उत्कृष्ट मंच बना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ हुए मंथन से निकले विचार हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास के लिए नई दिशा प्रदान करेंगे।
इस अवसर पर कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एस. महेंद्र देव, नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति सचिन चतुर्वेदी, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर, दून विश्वविद्यालय राजेंद्र पी. ममगाईं, एसोसिएट प्रोफेसर, दून विश्वविद्यालय डॉ. स्वाति बिष्ट एवं मानव विकास एवं संचार संस्थान की सीईओ प्रियंका त्यागी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण उपस्थित रहे।

विरासत महोत्सव में आज सुपर बाइक रैली का भव्य आयोजन किया गया।

A grand super bike rally was organised today in the Heritage Festival.
A grand super bike rally was organised today in the Heritage Festival.

देहरादून-12 अक्टूबर, 2025- विरासत महोत्सव के प्रातः कालीन कार्यक्रम के अंतर्गत आज सुपर बाइक रैली का आयोजन किया गया जिसमें इंजनों की गर्जना और रोमांच के साथ जीवंत हो उठी जब 26 बाइकर्स ने एक जोशीली राइड में हिस्सा लिया। यह आयोजन सुबह 10:00 बजे विरासत स्थल से शुरू हुआ और देहरादून कैंट, दिलाराम चौक, राजपुर रोड से होते हुए जाखन, मसूरी डायवर्जन से वापस बीआर अंबेडकर स्टेडियम, कॉलागढ़ रोड देहरादून विरासत के प्रांगण में समाप्त हुआ।

इस राइड में देहरादून के उत्साही मोटरसाइकिल सवार एक साथ आए और अपनी शक्ति और भाईचारे का प्रदर्शन किया। इन प्रतिभागियों में सबसे प्रमुख थे शशांक ढोबल, जो समूह की सबसे उच्च-प्रदर्शन वाली बाइकों में से एक, कावासाकी निंजा 1400 आरआर चला रहे थे। उनके साथ कॉन्टिनेंटल जीटी 650 सीसी बाइक्स के साथ कई राइडर्स भी थे, जिनके बेड़े में क्लासिक एवं आकर्षण विविधता से भरे सुपर बाइक्स शामिल रहे।

बाइक रैली न केवल बाइकिंग के शौकीनों की एकता का प्रतीक रहा बल्कि स्वतंत्रता, संस्कृति और एकजुटता का जश्न मनाने वाली विरासत की भावना को भी दर्शाया।

विरासत महोत्सव में आयोजित हुई क्विज प्रतियोगिता में ओक ग्रोव स्कूल बना विजेता

Oak Grove School emerged victorious in the quiz competition held during the Heritage Festival.
Oak Grove School emerged victorious in the quiz competition held during the Heritage Festival.

महाभारत काल की पौराणिक “चक्रव्यूह” संरचना का नाट्य मंचन देखने को उमड़ी भीड़, हुए सभी आश्चर्यचकित

नाट्य मंचन में अभिमन्यु के अद्भुत एवं बेहतरीन साहस को देख सभी रह गए दंग

विरासत में गूंजे लोक संगीत के ख्याति प्राप्त दो सगे गायक कश्यप भाइयों के आकर्षक सुर संगीत

प्रसिद्ध गायिका डॉ.एन राजम की वायलिन प्रस्तुति से महक उठा विरासत

विरासत सांस्कृतिक संध्या में आज मुख्य अतिथि के रुप में श्री सुभाष कुमार, पूर्व सीएमडी, ओएनजीसी मौजूद रहे।

श्रीमती गीता पुष्कर धामी के आने से विरासत की महफिल में लग गए चार चांद

देहरादून,11 अक्टूबर 2025 – विरासत महोत्सव में आज आयोजित हुई क्विज प्रतियोगिता में भिन्न भिन्न स्कूलों के बच्चों ने उत्साह पूर्वक प्रतिभाग किया, जिसमें ओक ग्रोव स्कूल ने प्रथम स्थान हासिल करके विरासत में भी अपना नाम दर्ज कर दिया है I आज की शुभ प्रातः काल में विरासत महोत्सव के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें देहरादून के 18 प्रतिष्ठित विद्यालयों ने अपनी अपनी तैयारी के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तरी की शुरुआत एक लिखित परीक्षा से हुई, जिसके बाद क्विज़ मास्टर डॉ. सरगम मेहरा ने उत्तरों पर चर्चा की I क्विज प्रतियोगिता के मूल्यांकन के बाद केवल चार विद्यालय ही चरण-चरण के लिए अर्हता प्राप्त कर पाए और दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस), समर वैली स्कूल, और ओक ग्रोव स्कूल (ओक ग्रोव की दो टीमों ने क्वालीफाई किया)।

प्रतियोगिता में पाँचवें और अंतिम दौर सहित कई चुनौतीपूर्ण लम्हों के बाद ओक ग्रोव स्कूल विरासत प्रश्नोत्तरी 2025 का विजेता बना। विजेता टीम में आयुषी गुप्ता (कक्षा 12), चार्वी प्रताप सिंह (कक्षा 12) शामिल रहीं। जबकि दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस) ने उपविजेता का स्थान प्राप्त किया, जिसका प्रतिनिधित्व ऐश्वर्या प्रताप सिंह (कक्षा 12) और आद्या राय (कक्षा 12) ने किया। इस क्विज़ ने न केवल छात्रों के भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के ज्ञान का परीक्षण किया, बल्कि उनके उत्साह और टीम वर्क को भी उजागर किया। आयोजित इस महत्वपूर्ण क्विज प्रतियोगिता में देश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों से संबंधित प्रश्न करते हुए उनके उत्तर हासिल किए गए I उत्तराखंड से संबंधित भी अनेक स्थानों के विषय में क्विज़ प्रतियोगिता में प्रश्नोत्तरी की गई I कार्यक्रम के अंत में विरासत की समन्वयक सुश्री राधा चटर्जी ने विजेताओं और उपविजेता टीमों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और उनकी प्रतिभा और प्रयासों की प्रशंसा की। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागी स्कूलों की सराहना और तालियों के साथ हुआ, जिससे विरासत हेरिटेज क्विज़ 2025 बुद्धिमत्ता, विरासत और युवा ऊर्जा का एक यादगार उत्सव बन गया।

विरासत महोत्सव में आज के खास मेहमान मुख्य अतिथि ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सुभाष कुमार रहे I उन्होंने विरासत की संध्या का विधिवत शुभारंभ किया और विरासत के आयोजन को बखूबी सराहा एवं प्रशंसा की I इस अवसर पर उनके साथ विरासत आयोजन के मुख्य आयोजक रीच संस्था के संरक्षण आरके सिंह व संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी मुख्य रूप से मौजूद रहीं I

 

महाभारत काल की पौराणिक “चक्रव्यूह” संरचना का नाट्य मंचन देखने को उमड़ी भीड़, हुए सभी आश्चर्यचकित

नाट्य मंचन में अभिमन्यु के अद्भुत एवं बेहतरीन साहस को देख सभी रह गए दंग

विरासत महोत्सव में आज शनिवार को पौराणिक एवं ऐतिहासिक महाभारत काल के चक्रव्यूह नाट्य मंचन की आकर्षक एवं भव्य प्रस्तुति की गई, जिसे देखकर यहां उमड़ी हज़ारों की भीड़ आश्चर्य चकित रह गई I यह नाट्य मंचन मशहूर कलाकार पंकज कुमार नैथानी के निर्देशन में हुआ और उसकी पटकथा विद्याधर के श्रीकाल, श्रीनगर (गढ़वाल) के निर्देशक प्रो. डीआर पुरोहित द्वारा की गयी I

महाभारत में वर्णित सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संरचनाओं में से एक “चक्रव्यूह” की सदियों पुरानी कथा को विद्याधर के श्रीकाल (श्रीनगर, गढ़वाल) द्वारा विरासत कला एवं विरासत महोत्सव 2025 में प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया। इस प्रस्तुति में अभिमन्यु के महान साहस को दर्शाया गया, जो वीरता, बलिदान और धर्म एवं शक्ति के बीच शाश्वत संघर्ष का प्रतीक है। इस चक्रव्यूह की पौराणिक एवं ऐतिहासिक धार्मिक दृष्टि से जो कहानी सामने है उसके अनुसार, चक्रव्यूह एक सर्पिलाकार युद्ध संरचना विरोधियों को फँसाने के लिए रचा गया था। कुरुक्षेत्र युद्ध के तेरहवें दिन युवा योद्धा अभिमन्यु, हालाँकि केवल सोलह वर्ष के थे, पांडव सेना की रक्षा के लिए इस संरचना में प्रवेश कर गए। केवल प्रवेश करना सीखा था, लेकिन बाहर निकलना नहीं, इसलिए उन्होंने द्रोण,कर्ण, दुर्योधन और अन्य शक्तिशाली योद्धाओं के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया, इससे पहले कि उन्हें घेर लिया गया और मार डाला गया। उनकी वीरता भारतीय महाकाव्यों की सबसे मार्मिक कथाओं में से एक है।

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थानीय परंपराएँ अक्सर पांडवों से जुड़ी मानी जाती हैं। पांडव लीला और पांडव नृत्य जैसे अनुष्ठान प्रदर्शनों के माध्यम से इन पौराणिक कथाओं को रंगमंच और भक्ति दोनों की अभिव्यक्ति के रूप में पुनर्जीवित किया जाता है। श्रीकाला द्वारा चक्रव्यूह का प्रदर्शन इस विरासत को समकालीन दर्शकों से जोड़ता है, जिसमें क्षेत्रीय संगीत,कथा और अनुष्ठानिक प्रतीकात्मकता का सम्मिश्रण होता है I सांस्कृतिक कार्यकर्ता विद्याधर द्वारा स्थापित श्रीकाला अनुसंधान,प्रशिक्षण और सजीव प्रदर्शन के माध्यम से गढ़वाली लोक रंगमंच के संरक्षण के लिए समर्पित है। गढ़वाली अनुष्ठानिक नाट्य अध्ययन के प्रोफेसर डीआर पुरोहित के मार्गदर्शन में श्रीकाला ने चक्रव्यूह जैसी पारंपरिक कहानियों को पुनर्जीवित किया है,जिसमें प्रमाणिकता और कलात्मकता का सम्मिश्रण है। चक्रव्यूह की संरचना का शानदार एवं अदभुत मंचन करने वाले कलाकारों में क्रमशः जयद्रथ की भूमिका में पंकज नैथानी, द्रोणाचार्य भूमिका में गौरव नेगी, दुशासन की भूमिका में रॉबिन असवाल तथा कर्ण की भूमिका में गणेश बलूनी रहे I इसके अलावा लक्ष्मण की भूमिका में किरदार निभाने वाले अभिषेक, शल्य की भूमिका तुषार द्वारा निभाई गई I इस अद्भुत नाट्य मंचन में 41 कलाकारों ने अपनी शानदार एवं अद्भुत भूमिका का निर्वहन कर सभी को आश्चर्य चकित कर दिया,अन्य प्रतिभागी कलाकारों में कृपाचार्य-अर्जुन राणा, अश्वत्थामा-अभिषेक सेमवाल, शकुनि-रवीन्द्र सिंह, दुर्योधन-हरीश पुरी, ध्वजवाहक-आदित्य, मानक वाहक-अतुल, कागाली-मुकेश पंत,भगवान श्रीकृष्ण-प्रवेश, अभिमन्यु-अंकित भट्ट, युधिष्ठिर-अंकित उछोली के शामिल होने के साथ-साथ भीम की भूमिक विनोद कुमेड़ी ने की I जबकि अर्जुन-सुधीर डंगवाल, नकुल-शिवांक नौटियाल, सहदेव-नमित, द्रौपदी-साक्षी पुंडीर,उत्तरा-श्रेया उनियाल, सात्यकि-जतिन भट्ट,धृष्टद्युम्न- दिशान्त धनै,पंडित-मदनलाल डंगवाल, पंडित-बद्रीश छाबड़ा, पंडित-गणेश खुशशाल ‘गनी’, व ध्वजवाहक की भूमिका में अनुराग रहे I इसी श्रृंखला में फिल्मी संगीत समूह और वाद्य यंत्रवादक में संजय पांडे व शैलेन्द्र मैठाणी-संगीतकार, मनीष खाली-संगीतकार, सुधीर डंगवाल-संगीतकार, आरसी जुयाल-हुड़का, कैलाश ध्यानी-बांसुरी, हरीश लाल-ढोल और दमाऊ, किशोरी लाल-ढोल और दमाऊ, सुनील कोटियाल- भंकोरे (टक्कर दल), रोशन-भंकोरे (टक्कर पहनावा), लता तिवारी पांडे-स्वर का सहयोग रहा I मुख्य बात यह है कि नाट्य मंचन में प्रत्येक कलाकार ने पूरी ईमानदारी से योगदान देकर महाभारत के सार को मंच पर जीवंत कर दिया। गढ़वाली लोक नाट्य, पारंपरिक संगीत और नाटकीय कथावाचन के सम्मिश्रण के माध्यम से इस प्रस्तुति ने अभिमन्यु की अदम्य वीरता और हिमालयी क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह बताना भी आवश्यक है कि चक्रव्यूह महाकाव्य युद्ध पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं ने गढ़वाल क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया है, और ऐसी ही एक अमूल्य सांस्कृतिक विरासत पांडव नृत्य है, जिसे पांडव लीला के नाम से भी जाना जाता है। यह परंपरा मुख्य रूप से रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की मंदाकिनी और अलकनंदा घाटियों में विस्तृत धार्मिक नृत्यों और नाट्य प्रदर्शनों के माध्यम से मनाई जाती है। उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड के दौरान, गढ़वाल के छोटे-छोटे गाँवों के निवासी पांडव नृत्य का अभ्यास करके सक्रिय रहते हैं। यह औपचारिक नृत्य पांडवों की यात्रा का स्मरण कराता है और उत्तराखंड के घरों और गाँवों में खुशियाँ लाता है। पांडव नृत्य का गढ़वाल की पौराणिक कथाओं और इतिहास में एक विशेष स्थान है। यह नृत्य पाँच पांडव भाइयों की कहानी बताता है, उनके जन्म से लेकर उनकी स्वर्गारोहिणी यात्रा (स्वर्ग की यात्रा) की शुरुआत तक। उनकी यात्रा के विभिन्न पहलुओं को ढोल की थाप पर प्रदर्शित किया जाता है। उत्तराखंड की पांडव लीला महाभारत के “धर्मयुद्ध” का अनुकरण करती है। यह नृत्य विभिन्न विषयों को छूता है, जिनमें कीचक वध (कीचक का वध), नारायण विवाह (भगवान विष्णु का विवाह), चक्रव्यूह (गुरु द्रोण द्वारा रचित एक सैन्य रणनीति) और गेंदा वध (एक नकली गैंडे की बलि) शामिल हैं। चक्रव्यूह में पाँचों पांडवों युधिष्ठिर,भीम,अर्जुन,नकुल और सहदेव भव्य चित्रण करने वाले कलाकारों ने ढोल-दमाऊ और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य किया। इसमें कौरवों ने एक चतुर युद्धनीति का उपयोग करके अभिमन्यु का वध किया। चक्रव्यूह प्रस्तुत करने वाले समूह का नेतृत्व प्रोफेसर दाताराम पुरोहित ने किया। गढ़वाली लोक कलाकारों की उनकी टीम ने चक्रव्यूह का शानदार चित्रण किया और उपस्थित विशाल दर्शकों का मन मोह लिया। इस चक्रव्यूह की पहली प्रस्तुति 2001 में गांधारी गाँव में हुई थी। आज की प्रस्तुति में, प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा चक्रव्यूह का विस्तृत रूप से निर्माण और चित्रण किया गया। जौनसार से आए रणसिंह वादन दल में (अनिल वर्मा और चंदन पुंडीर) शामिल थे, जबकि (धाड़ संस्था) के अध्यक्ष अखिलेश दास भी उपस्थित रहे I “चक्रव्यूह” के आयोजन में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के महंत देवेन्द्र दास जी और विश्वविद्यालय के छात्रों का विशेष योगदान रहा।

विरासत में गूंजे लोक संगीत के ख्याति प्राप्त दो सगे गायक कश्यप भाइयों के आकर्षक सुर संगीत

भारतीय शास्त्रीय संगीत की विश्व विख्यात मधुर सुर संगीत के संसार में अपनी गायकी को लोकप्रिय बनाने वाले मशहूर कलाकारों प्रभाकर कश्यप व दिवाकर कश्यप के सुर-संगीतोंं से विरासत की महफिल मनमोहक हो उठी I कश्यप बंधु ने झपताल में राग बिहाग से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की और एक ताल बंदिश ‘काहे मोरे मन बतानी’ में परिवर्तित हो दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद उन्होंने राग मेघ में एक बंदिश पेश की, ‘गगन गरज दमकत दामिनी..’ भव्य विरासत की इस महफिल में कश्यप बंधु के साथ तबले पर मशहूर पं. शुभ महाराज, हारमोनियम पर सुमित मिश्रा और तानपुरा पर पद्माकर कश्यप व पीयूष मिश्रा रहे I

इस अनूठी और आकर्षण का केंद्र बनी रहने वाली दो सगे भाइयों की जोड़ी कश्यप बंधु ने बचपन में ही अपने माता-पिता, पं. रामप्रकाश मिश्र और श्रीमती मीरा मिश्र से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने बनारस घराने के गुरुओं, पद्मभूषण पं. राजन मिश्र और पं. साजन मिश्र के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया। बनारस गायकी वाली यह जोड़ी अपनी उत्कृष्ट लयकारी और बेजोड़ मधुरता के लिए जानी जाती है।

कश्यप बंधु की आवाज़ प्रभावशाली और भावपूर्ण है, जो तीनों सप्तकों में समान सहजता से प्रवाहित होती है। कश्यप बंधु के पास ख़याल के साथ-साथ ठुमरी, दादरा, टप्पा और भजनों में मधुर “बंदिशों” का एक समृद्ध संग्रह है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन के शीर्षस्थ कलाकार भी हैं। उन्हें संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली द्वारा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही आईसीसीआर, भारत सरकार के वे कलाकार भी हैं। वे स्पिकमैके और सुर श्रृंगार संसद, मुंबई द्वारा सुरमणि के पैनलबद्ध कलाकार हैं।

कश्यप बंधु ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी है, जिनमें सवाई गंधर्व भीमसेन महोत्सव, पुणे, सप्तक संगीत समारोह, अहमदाबाद, उस्ताद अमीर खां संगीत समारोह, इंदौर और कई अन्य शामिल हैं I देश-विदेश में विभिन्न प्रतिष्ठित पुरस्कारों के विजेता डॉ. प्रभाकर कश्यप वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और डॉ. दिवाकर कश्यप इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़, छत्तीसगढ़ में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

प्रसिद्ध गायिका डॉ.एन राजम की वायलिन प्रस्तुति से महक उठा विरासत

विरासत की महफिल में कई भारतीय शास्त्रीय संगीत के कलाकार इस बार अपनी-अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां अब तक दे चुके हैं, जो कि एक तरह से शास्त्रीय संगीत की दुनिया के अनमोल रत्न कहे कह जाएं तो उसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी I ऐसा ही एक अनमोल रत्न महिला वायलिन वादक डॉ. एन राजम हैं I डॉ. एन. राजम अपनी पोती रागिनी शंकर के साथ वायलिन वादन की और पंडित मिथिलेश झा ने उन्हें तबले पर संगत दी। वह राग दरबारी कानडा से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की उसके बाद उन्होंने एक सुन्दर भजन “ठुमक चलत रामचन्द्र बाजत पीड़ानिया” बजाया I

वे अपने शास्त्रीय संगीत से पिछले अनेक दशकों में अपनी कला का जादू भिन्न-भिन्न जगह पर बिखेर चुकी हैं I पद्म भूषण श्रीमती एन राजम शास्त्रीय संगीत की एक ऐसी हस्ती हैं जिन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है। वह एक ख्याति प्राप्त भारतीय वायलिन वादक हैं जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत करती हैं। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में संगीत की प्रोफेसर थीं, और अंततः विभागाध्यक्ष और विश्वविद्यालय के प्रदर्शन कला संकाय की डीन बनीं।

उन्हें संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया, जो भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी, संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रदर्शन कला का सर्वोच्च सम्मान है। एन. राजम को भारत सरकार से पद्मश्री और पद्म भूषण की प्रतिष्ठित उपाधियाँ प्राप्त हो चुकी हैं I उन्होंने कर्नाटक संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की। उन्होंने मुसिरी सुब्रमण्यम अय्यर से भी प्रशिक्षण लिया और गायक ओंकारनाथ ठाकुर से राग विकास की शिक्षा ली। अपने पिता ए. नारायण अय्यर के मार्गदर्शन में राजम ने गायकी अंग (गायन शैली) विकसित की।

एन. राजम के साथ रागिनी शंकर भी मौजूद रही। रागिनी एक भारतीय वायलिन वादक हैं जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत और फ्यूजन प्रस्तुत करती हैं। वह प्रसिद्ध पद्मभूषण डॉ. एन. राजम की पोती और स्वयं एक प्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. संगीता शंकर की पुत्री हैं।

शायरी से गुल….. गुलज़ार….. और महक….. उठा विरासत महोत्सव

“मुशायरे की महफिल” से सजा विरासत का चप्पा-चप्पा और पदमश्री शीन क़ाफ़ निज़ाम ने बना दिया सभी को दीवाना

गज़ब की शायरी और सुर आवाज़ में अगर कमाल का जादू हो तो, यकीनन वह महफ़िल महक उठेगी और उस बेहद ही सुगन्धित महक से कोई भी श्रोता अथवा प्रशंसक मेहरूम नहीं रहना चाहेगा I जी हां, विरासत महोत्सव में आज की शानदार मुशायरे की महफिल की महक कुछ इसी तरह घंटों तक बनी रही I मुशायरा का रस विरासत की महफिल में इतना घुला कि कोई भी श्रोता अथवा प्रशंसक अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हुआ और खचाखच भरे विरासत पंडाल में तथा उसके बाहर प्रांगण में लोग भरपूर आनंद शायरी एवं गजलों का लेते रहे I सबसे पहले पदम श्री से विभूषित हो चुकीं मशहूर शायर शीन क़ाफ़ निज़ाम की गज़ब की शायरी ने सभी को दीवाना बनाया तो वहीं, विरासत की महफिल में शायरी की ख़ुशबू फैलाने में अन्य मशहूर शायरों फरहत एहसास, मदन मोहन दानिश, शकील आज़मी और रश्मि सबा ने भी शायरी व ग़ज़लों की महकती हुई बौछारों से सभी पर जादू किए रखा I

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया से जुड़े हुए आज के आकर्षण एवं भव्य मुशायरे के प्रसिद्ध कलाकारों ने यकीनन लोगों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ते हुए उनके दिल गजलों तथा शायरी से बाग़-बाग़ कर दिए I आज की मन और हृदय को छू लेने वाली शायरी ने विरासत महोत्सव का गार्डन महकाने में कोई कमी नहीं छोड़ी I मशहूर शायर फरहत एहसास एक प्रख्यात और सम्मानित उर्दू कवि और लेखक हैं, जो साहित्य, पटकथा लेखन व समसामयिक विषयों पर टिप्पणी के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कौमी आवाज़ और बीबीसी की उर्दू सेवा के संपादक के रूप में काम किया है I आकाशवाणी और टेलीविजन के लिए लेखन भी किया,उन्हें प्रसिद्ध मुशायरों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति देने के लिए भी जाना जाता है। पद्मश्री शिव किशन बिस्सा, जिनका उपनाम शीन काफ़ निज़ाम है, जोधपुर से हैं और एक उर्दू कवि और साहित्यकार हैं। उन्होंने प्रसिद्ध उर्दू कवि मीराजी और मुनीर नियाज़ी सहित देवनागरी में कई कविताओं का संपादन किया है।

निज़ाम के कविता संग्रह “गुमशुदा दैरे की गूंजती घंटियाँ” को उर्दू में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। जबकि मदन मोहन दानिश एक समकालीन उर्दू कवि हैं जो प्रेम, जीवन और मृत्यु के विषयों पर अपने गहन दोहों और नवीन अभिव्यक्ति के लिए जाने जाते हैं। विभिन्न मुशायरों में उनकी उपस्थिति उन्हें एक लोकप्रिय शायर बनाती है।

उनका कविता संग्रह “आसमान फुर्सत में है” काफी लोकप्रिय रहा है। वे ग्वालियर के रहने वाले हैं, उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के साथ काम किया है और मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार प्राप्त किया है। विरासत में आज की अजीम शख्सियत शकील आज़मी भी (जन्म 20 अप्रैल, 1971) एक भारतीय गीतकार और कवि हैं। भारत के आजमगढ़ में जन्मे वे उर्दू भाषा में लिखते हैं और मुख्य रूप से बॉलीवुड में एक फिल्म गीतकार के रूप में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। उनकी अधिकांश कविताएँ ग़ज़लों पर केंद्रित हैं, जो उर्दू शायरी की एक विधा है। वे एक गीतकार हैं, उनके कई कविता संग्रह हैं, लेकिन उनकी पुस्तक, “पोखर में सिंघाड़े, बचपन की जीवनी” एक लोकप्रिय पुस्तक रही है।

रश्मि शर्मा सबा का नाम भी बड़े अदब से लिया जाता है और वे अर्थशास्त्र और अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं, लेकिन उनका जुनून उर्दू और हिंदी कविता में है। पिछले 30 वर्षों से वह कविता, ग़ज़ल, गद्य और नज़्म लिख रही हैं और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कवि सम्मेलनों और मुशायरों में प्रस्तुति दे रही हैं। उनका ग़ज़ल संग्रह ‘रात ने कहा मुझसे….., समकालीन साहित्य की एक प्रसिद्ध कृति रही है। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी ने भी उन्हें ‘शिफा ग्वालियारी सम्मान’ से सम्मानित किया है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया 840 राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में संचालित वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के  केन्द्रीयकृत स्टूडियो का  शुभारंभ

Chief Minister Dhami inaugurated the centralized studio for virtual and smart classes to be conducted in hybrid mode in 840 government schools.
Chief Minister Dhami inaugurated the centralized studio for virtual and smart classes to be conducted in hybrid mode in 840 government schools.

देहरादून)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, ननूरखेड़ा (देहरादून) में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए समग्र शिक्षा उत्तराखण्ड द्वारा विद्यालयी शिक्षा में आई.सी.टी. योजना के अंतर्गत 840 राजकीय विद्यालयों में हाइब्रिड मोड में संचालित वर्चुअल एवं स्मार्ट कक्षाओं के केन्द्रीयकृत स्टूडियो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से वर्चुअल माध्यम से संवाद भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की इस ऐतिहासिक पहल के हम सभी साक्षी बन रहे हैं, जिससे प्रदेश के बच्चों का भविष्य उज्जवल होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल तकनीक, वर्चुअल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से अनेक संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इन नवाचारों के माध्यम से पाठ्यक्रम अधिक रोचक और सरल बन रहा है तथा दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विशेषज्ञों और शिक्षकों से सीधे संवाद कर पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 226 विद्यालयों को पीएम विद्यालय के रूप में स्थापित किया गया है तथा 500 विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब विद्यार्थी ‘उत्तराखंड वर्चुअल लर्निंग एप्लीकेशन’ के माध्यम से घर बैठे आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। इसके माध्यम से बच्चे स्वयं अपना मूल्यांकन भी कर सकेंगे। इस ऐप के जरिए विद्यार्थियों को देश और राज्य के जाने-माने शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक ऑनलाइन शिक्षा पहुँचाने के लिए 5-पीएम ई-विद्या चौनल भी संचालित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कक्षा 6 से 12 तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत लाभ दिया जा रहा है। राज्य के प्रत्येक विकासखंड के 10वीं एवं 12वीं के मेधावी छात्रों को भारत भ्रमण पर भेजा जा रहा है। राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में 8 ट्रेडों में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गई है, जिससे 42 हजार से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य में पहली बार 12वीं के व्यावसायिक छात्रों के लिए रोजगार मेलों का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से 146 विद्यार्थियों का चयन प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है। इस पहल की सराहना केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहाँ बुनियादी शिक्षा के लिए राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा तैयार की गई है। विद्यालयों में ‘बस्तारहित दिवस’ को शामिल किया गया है। सरकार द्वारा स्थानीय भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण हेतु गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं में पुस्तकें तैयार की गई हैं। थारू, बोक्सा और रवांल्टी भाषाओं में शब्दकोश भी बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘हमारी विरासत’ पुस्तक के माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को भारत की संस्कृति, लोक परंपरा और महान विभूतियों के बारे में अवगत कराया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। आईसीटी योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षण संसाधनों और वर्चुअल कक्षाओं के माध्यम से आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड राज्य ने देश में सर्वप्रथम राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की। इसके अंतर्गत वर्ष 2022 में ‘बाल वाटिका’ की शुरुआत की गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एन.सी.ई.आर.टी. की पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य की गई हैं तथा राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्रों को निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, अपर सचिव शिक्षा रंजना राजगुरु, महानिदेशक शिक्षा सुश्री दीप्ति सिंह, शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी तथा वर्चुअल माध्यम से राज्यभर के विद्यालयों के विद्यार्थी एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।

हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड में ऐसा कोई सिरप न बिके, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने :  मुख्यमंत्री

Our aim is that no such syrup should be sold in Uttarakhand which poses a threat to the health of children: Chief Minister
Our aim is that no such syrup should be sold in Uttarakhand which poses a threat to the health of children: Chief Minister

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सख्त दिशा-निर्देशों पर उत्तराखंड में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर औषधि विभाग ने बड़ा अभियान हुआ छेड़ा है। औषधि विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी जिलों में छापेमारी का सिलसिला तेज कर दिया है। प्रदेशभर में कफ सिरप की गुणवत्ता और उसकी वैधानिकता की जांच के लिए मेडिकल स्टोर्स, होलसेल डिपो, फार्मा इंडस्ट्री और बच्चों के अस्पतालों पर औचक निरीक्षण लगातार जारी हैं। देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और बागेश्वर सहित अन्य जिलों में औषधि निरीक्षकों की टीमों ने औचक निरीक्षण अभियान चलाया। अब तक 350 से अधिक सैंपल जांच के लिए लिए जा चुके हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। कई अन्य को कड़ी चेतावनी दी गई है। प्रदेश सरकार ने सभी बाल चिकित्सकों से अपील की है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न लिखें। इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग स्वयं स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार कर रहे हैं, जो प्रतिदिन टीमों से फीडबैक लेकर कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त (एफडीए) ताजबर सिंह जग्गी कर रहे हैं, जिनके दिशा-निर्देशों में राज्यभर की औषधि निरीक्षक टीमें सक्रिय हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

देहरादून में औषधि विभाग की कार्रवाई
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए औषधि विभाग ने शहरभर में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। आयुक्त और अपर आयुक्त (एफडीए) के निर्देशों पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने पलटन बाजार, घंटाघर, ऋषिकेश रोड, जॉलीग्रांट, अजबपुर और नेहरू कॉलोनी क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेताओं की जांच की। निरीक्षण के दौरान बच्चों की सर्दी-खांसी की कुछ दवाएं अलग से भंडारित पाई गईं, जिन्हें मौके पर सील कर दिया गया और बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई। अधिकांश विक्रेताओं ने प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही बंद कर दी थी, जबकि जहां स्टॉक मिला, उसे पेटियों में डालकर सील किया गया। कार्रवाई के दौरान एक मेडिकल स्टोर को बंद किया गया और 11 औषधियों के नमूने जांच के लिए लिए गए। टीम ने बताया कि SYP. Coldrif, SYP. Respifresh-TR और SYP. Relife जैसी दवाएँ स्टोर्स पर नहीं मिलीं। औषधि निरीक्षकों विनोद जागुड़ी और निधि रतूड़ी की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई को आगे भी जारी रखा जाएगा।

ऋषिकेश में बड़ी कार्रवाई, कफ सिरप भंडारण पर रोक
औषधि निरीक्षक निधि रतूड़ी ने ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित राजकीय एसपीएस चिकित्सालय देहरादून रोड और जॉलीग्रांट के आसपास मेडिकल स्टोर्स का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ स्टोर्स में बच्चों की सर्दी-खांसी की दवाइयाँ (सिरप) अलग से भंडारित थीं। टीम ने मौके पर ही इन दवाओं को सील कर दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली आदेश तक इनकी बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। औषधि निरीक्षक के अनुसार अधिकांश मेडिकल स्टोर्स ने शासन के आदेशों का पालन करते हुए प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही रोक दी है। निरीक्षण के दौरान कुल 06 औषधियों के नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।

हल्द्वानी में सात मेडिकल स्टोर्स की जांच
हल्द्वानी मुखानी क्षेत्र में औषधि विभाग की टीम ने सात मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। इस दौरान दो कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए। टीम ने सभी विक्रेताओं को शासन-प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।

अल्मोड़ा और बागेश्वर में भी हुई जांच
अल्मोड़ा जिले में औषधि विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण के दौरान एक मेडिकल स्टोर से कफ सिरप का एक नमूना परीक्षण के लिए लिया। वहीं, बागेश्वर जिले के गरुर क्षेत्र में दो मेडिकल स्टोर्स पर जांच की गई, जहाँ से दो बाल चिकित्सा सिरप के नमूने गुणवत्ता परीक्षण हेतु संकलित किए गए।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मेडिकल स्टोर, अस्पताल और फार्मा यूनिट की जांच सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड में ऐसा कोई सिरप न बिके, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने। यह सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।

स्वास्थ्य मंत्री की अपील, डॉक्टर जिम्मेदारी निभाएं
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के सभी डॉक्टरों से अपील की है कि वे बच्चों के लिए दवा लिखते समय विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न दी जाए। डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की सेहत को सर्वोपरि रखें।

स्वास्थ्य सचिव की सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त (FDA) डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत हर जिले की टीम से प्रतिदिन रिपोर्ट ली जा रही है, और जहाँ लापरवाही पाई जाएगी, वहाँ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह अभियान न केवल मेडिकल स्टोर्स और होलसेल दवा डिपो तक सीमित है, बल्कि फार्मा कंपनियों और बाल चिकित्सालयों तक भी विस्तारित किया गया है।

चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा अभियान
अपर आयुक्त (एफडीए) ताजबर सिंह जग्गी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। राज्यभर में बच्चों के लिए असुरक्षित दवाओं की बिक्री और भंडारण पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। अपर आयुक्त (एफडीए)  ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है राज्य के नागरिकों, विशेषकर बच्चों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां ही मिलें।

उत्तराखंड में औषधि विभाग की यह कार्रवाई राज्य सरकार के उस सुरक्षित स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाइयाँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने साफ किया है यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रदेश से असुरक्षित औषधियों का पूर्ण उन्मूलन नहीं हो जाता।

राजभवन में हुआ  मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

देहरादून।  शनिवार को राजभवन में मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वंडरवेल फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने पैनल चर्चा की। पैनल चर्चा में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, विधि विशेषज्ञों और वित्तीय परामर्शदाताओं ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र से गहराई से संबंधित है।
इस अवसर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच मानसिक शांति बनाए रखना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। यदि मन अस्थिर है तो शरीर भी स्वस्थ नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि आत्मचिंतन और आत्मसंवाद से ही हम अपने भीतर की शक्ति को पहचान सकते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि हमें छोटी-छोटी बातों में खुश रहना सीखना चाहिए। जीवन की वास्तविक खुशी बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति में नहीं, बल्कि छोटी-छोटी खुशियों के अनुभव में छिपी होती है। उन्होंने कहा कि “वर्तमान क्षण को जीना ही मानसिक संतुलन और खुशी का सबसे बड़ा आधार है। राज्यपाल ने कहा कि हमें जीवन जीने की कला ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ सीखना जरूरी है। यह केवल ध्यान या योग का अभ्यास नहीं, बल्कि एक जीवन दृष्टि है जिसमें हम हर परिस्थिति में सकारात्मक बने रहना, दूसरों के प्रति सहानुभूति रखना और भीतर की शांति को बनाए रखना सीखते हैं।
राज्यपाल ने वंडरवेल फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, संवेदनशीलता और संवाद की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर वंडरवेल फाउंडेशन की संस्थापक और मनोचिकित्सक डॉ. याशना बाहरी सिंह ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में बताया। वरिष्ट पत्रकार श्री सतीश शर्मा, डॉ. विपुल कण्डवाल, श्री टी. एस. बिन्द्रा, श्री विरेन्द्र कालरा और श्री दुर्गा वर्मा ने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर मानसिक स्वास्थ्य के बारे में पैनल चर्चा की। इस अवसर पर विधि परामर्शी श्री राज्यपाल श्री कौशल किशोर शुक्ल, श्री इन्द्रजीत सिंह नामधारी, श्री सुरजीत कौर, श्री वरुण वासन, श्री रवि बाहरी सहित चिकित्सक, शिक्षाविद, एनजीओ प्रतिनिधि, विद्यार्थी एवं राजभवन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

विरासत महोत्सव में आयोजित हुई क्विज प्रतियोगिता में ओक ग्रोव स्कूल बना विजेता

Oak Grove School emerged victorious in the quiz competition held during the Heritage Festival.
Oak Grove School emerged victorious in the quiz competition held during the Heritage Festival.

महाभारत काल की पौराणिक “चक्रव्यूह” संरचना का नाट्य मंचन देखने को उमड़ी भीड़, हुए सभी आश्चर्यचकित

नाट्य मंचन में अभिमन्यु के अद्भुत एवं बेहतरीन साहस को देख सभी रह गए दंग

देहरादून,11 अक्टूबर 2025 – विरासत महोत्सव में आज आयोजित हुई क्विज प्रतियोगिता में भिन्न भिन्न स्कूलों के बच्चों ने उत्साह पूर्वक प्रतिभाग किया, जिसमें ओक ग्रोव स्कूल ने प्रथम स्थान हासिल करके विरासत में भी अपना नाम दर्ज कर दिया है I

आज की शुभ प्रातः काल में विरासत महोत्सव के अंतर्गत प्रश्नोत्तरी 2025 का आयोजन किया गया, जिसमें देहरादून के 18 प्रतिष्ठित विद्यालयों ने अपनी अपनी तैयारी के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रश्नोत्तरी की शुरुआत एक लिखित परीक्षा से हुई, जिसके बाद क्विज़ मास्टर डॉ. सरगम मेहरा ने उत्तरों पर चर्चा की I क्विज प्रतियोगिता के मूल्यांकन के बाद केवल चार विद्यालय ही चरण-चरण के लिए अर्हता प्राप्त कर पाए और दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस), समर वैली स्कूल, और ओक ग्रोव स्कूल (ओक ग्रोव की दो टीमों ने क्वालीफाई किया)।

प्रतियोगिता में पाँचवें और अंतिम दौर सहित कई चुनौतीपूर्ण लम्हों के बाद ओक ग्रोव स्कूल विरासत प्रश्नोत्तरी 2025 का विजेता बना। विजेता टीम में आयुषी गुप्ता (कक्षा 12), चार्वी प्रताप सिंह (कक्षा 12) शामिल रहीं। जबकि दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस) ने उपविजेता का स्थान प्राप्त किया, जिसका प्रतिनिधित्व ऐश्वर्या प्रताप सिंह (कक्षा 12) और आद्या राय (कक्षा 12) ने किया। इस क्विज़ ने न केवल छात्रों के भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के ज्ञान का परीक्षण किया, बल्कि उनके उत्साह और टीम वर्क को भी उजागर किया। आयोजित इस महत्वपूर्ण क्विज प्रतियोगिता में देश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों से संबंधित प्रश्न करते हुए उनके उत्तर हासिल किए गए I उत्तराखंड से संबंधित भी अनेक स्थानों के विषय में क्विज़ प्रतियोगिता में प्रश्नोत्तरी की गई I कार्यक्रम के अंत में विरासत की समन्वयक सुश्री राधा चटर्जी ने विजेताओं और उपविजेता टीमों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और उनकी प्रतिभा और प्रयासों की प्रशंसा की। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागी स्कूलों की सराहना और तालियों के साथ हुआ, जिससे विरासत हेरिटेज क्विज़ 2025 बुद्धिमत्ता, विरासत और युवा ऊर्जा का एक यादगार उत्सव बन गया।

 

विरासत महोत्सव में आज शनिवार का दिन रहा विरासत प्रेमियों के लिए विशेष और महत्वपूर्ण

महाभारत काल की पौराणिक “चक्रव्यूह” संरचना का नाट्य मंचन देखने को उमड़ी भीड़, हुए सभी आश्चर्यचकित

नाट्य मंचन में अभिमन्यु के अद्भुत एवं बेहतरीन साहस को देख सभी रह गए दंग

विरासत महोत्सव में आज शनिवार को पौराणिक एवं ऐतिहासिक महाभारत काल के चक्रव्यूह नाट्य मंचन की आकर्षक एवं भव्य प्रस्तुति की गई, जिसे देखकर यहां उमड़ी हज़ारों की भीड़ आश्चर्य चकित रह गई I यह नाट्य मंचन मशहूर कलाकार पंकज कुमार नैथानी के निर्देशन में हुआ और उसकी पटकथा विद्याधर के श्रीकाल, श्रीनगर (गढ़वाल) के निर्देशक प्रो. डीआर पुरोहित द्वारा की गयी I

महाभारत में वर्णित सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संरचनाओं में से एक “चक्रव्यूह” की सदियों पुरानी कथा को विद्याधर के श्रीकाल (श्रीनगर, गढ़वाल) द्वारा विरासत कला एवं विरासत महोत्सव 2025 में प्रभावशाली ढंग से जीवंत किया गया। इस प्रस्तुति में अभिमन्यु के महान साहस को दर्शाया गया, जो वीरता, बलिदान और धर्म एवं शक्ति के बीच शाश्वत संघर्ष का प्रतीक है। इस चक्रव्यूह की पौराणिक एवं ऐतिहासिक धार्मिक दृष्टि से जो कहानी सामने है उसके अनुसार, चक्रव्यूह एक सर्पिलाकार युद्ध संरचना विरोधियों को फँसाने के लिए रचा गया था। कुरुक्षेत्र युद्ध के तेरहवें दिन युवा योद्धा अभिमन्यु, हालाँकि केवल सोलह वर्ष के थे, पांडव सेना की रक्षा के लिए इस संरचना में प्रवेश कर गए। केवल प्रवेश करना सीखा था, लेकिन बाहर निकलना नहीं, इसलिए उन्होंने द्रोण,कर्ण, दुर्योधन और अन्य शक्तिशाली योद्धाओं के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया, इससे पहले कि उन्हें घेर लिया गया और मार डाला गया। उनकी वीरता भारतीय महाकाव्यों की सबसे मार्मिक कथाओं में से एक है।

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थानीय परंपराएँ अक्सर पांडवों से जुड़ी मानी जाती हैं। पांडव लीला और पांडव नृत्य जैसे अनुष्ठान प्रदर्शनों के माध्यम से इन पौराणिक कथाओं को रंगमंच और भक्ति दोनों की अभिव्यक्ति के रूप में पुनर्जीवित किया जाता है। श्रीकाला द्वारा चक्रव्यूह का प्रदर्शन इस विरासत को समकालीन दर्शकों से जोड़ता है, जिसमें क्षेत्रीय संगीत,कथा और अनुष्ठानिक प्रतीकात्मकता का सम्मिश्रण होता है I सांस्कृतिक कार्यकर्ता विद्याधर द्वारा स्थापित श्रीकाला अनुसंधान,प्रशिक्षण और सजीव प्रदर्शन के माध्यम से गढ़वाली लोक रंगमंच के संरक्षण के लिए समर्पित है। गढ़वाली अनुष्ठानिक नाट्य अध्ययन के प्रोफेसर डीआर पुरोहित के मार्गदर्शन में श्रीकाला ने चक्रव्यूह जैसी पारंपरिक कहानियों को पुनर्जीवित किया है,जिसमें प्रमाणिकता और कलात्मकता का सम्मिश्रण है। चक्रव्यूह की संरचना का शानदार एवं अदभुत मंचन करने वाले कलाकारों में क्रमशः जयद्रथ की भूमिका में पंकज नैथानी, द्रोणाचार्य भूमिका में गौरव नेगी, दुशासन की भूमिका में रॉबिन असवाल तथा कर्ण की भूमिका में गणेश बलूनी रहे I इसके अलावा लक्ष्मण की भूमिका में किरदार निभाने वाले अभिषेक, शल्य की भूमिका तुषार द्वारा निभाई गई I इस अद्भुत नाट्य मंचन में 41 कलाकारों ने अपनी शानदार एवं अद्भुत भूमिका का निर्वहन कर सभी को आश्चर्य चकित कर दिया,अन्य प्रतिभागी कलाकारों में कृपाचार्य-अर्जुन राणा, अश्वत्थामा-अभिषेक सेमवाल, शकुनि-रवीन्द्र सिंह, दुर्योधन-हरीश पुरी, ध्वजवाहक-आदित्य, मानक वाहक-अतुल, कागाली-मुकेश पंत,भगवान श्रीकृष्ण-प्रवेश, अभिमन्यु-अंकित भट्ट, युधिष्ठिर-अंकित उछोली के शामिल होने के साथ-साथ भीम की भूमिक विनोद कुमेड़ी ने की I जबकि अर्जुन-सुधीर डंगवाल, नकुल-शिवांक नौटियाल, सहदेव-नमित, द्रौपदी-साक्षी पुंडीर,उत्तरा-श्रेया उनियाल, सात्यकि-जतिन भट्ट,धृष्टद्युम्न- दिशान्त धनै,पंडित-मदनलाल डंगवाल, पंडित-बद्रीश छाबड़ा, पंडित-गणेश खुशशाल ‘गनी’, व ध्वजवाहक की भूमिका में अनुराग रहे I इसी श्रृंखला में फिल्मी संगीत समूह और वाद्य यंत्रवादक में संजय पांडे व शैलेन्द्र मैठाणी-संगीतकार, मनीष खाली-संगीतकार, सुधीर डंगवाल-संगीतकार, आरसी जुयाल-हुड़का, कैलाश ध्यानी-बांसुरी, हरीश लाल-ढोल और दमाऊ, किशोरी लाल-ढोल और दमाऊ, सुनील कोटियाल- भंकोरे (टक्कर दल), रोशन-भंकोरे (टक्कर पहनावा), लता तिवारी पांडे-स्वर का सहयोग रहा I मुख्य बात यह है कि नाट्य मंचन में प्रत्येक कलाकार ने पूरी ईमानदारी से योगदान देकर महाभारत के सार को मंच पर जीवंत कर दिया। गढ़वाली लोक नाट्य, पारंपरिक संगीत और नाटकीय कथावाचन के सम्मिश्रण के माध्यम से इस प्रस्तुति ने अभिमन्यु की अदम्य वीरता और हिमालयी क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह बताना भी आवश्यक है कि चक्रव्यूह महाकाव्य युद्ध पर आधारित है। धार्मिक मान्यताओं ने गढ़वाल क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया है, और ऐसी ही एक अमूल्य सांस्कृतिक विरासत पांडव नृत्य है, जिसे पांडव लीला के नाम से भी जाना जाता है। यह परंपरा मुख्य रूप से रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों की मंदाकिनी और अलकनंदा घाटियों में विस्तृत धार्मिक नृत्यों और नाट्य प्रदर्शनों के माध्यम से मनाई जाती है। उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड के दौरान, गढ़वाल के छोटे-छोटे गाँवों के निवासी पांडव नृत्य का अभ्यास करके सक्रिय रहते हैं। यह औपचारिक नृत्य पांडवों की यात्रा का स्मरण कराता है और उत्तराखंड के घरों और गाँवों में खुशियाँ लाता है। पांडव नृत्य का गढ़वाल की पौराणिक कथाओं और इतिहास में एक विशेष स्थान है। यह नृत्य पाँच पांडव भाइयों की कहानी बताता है, उनके जन्म से लेकर उनकी स्वर्गारोहिणी यात्रा (स्वर्ग की यात्रा) की शुरुआत तक। उनकी यात्रा के विभिन्न पहलुओं को ढोल की थाप पर प्रदर्शित किया जाता है। उत्तराखंड की पांडव लीला महाभारत के “धर्मयुद्ध” का अनुकरण करती है। यह नृत्य विभिन्न विषयों को छूता है, जिनमें कीचक वध (कीचक का वध), नारायण विवाह (भगवान विष्णु का विवाह), चक्रव्यूह (गुरु द्रोण द्वारा रचित एक सैन्य रणनीति) और गेंदा वध (एक नकली गैंडे की बलि) शामिल हैं। चक्रव्यूह में पाँचों पांडवों युधिष्ठिर,भीम,अर्जुन,नकुल और सहदेव भव्य चित्रण करने वाले कलाकारों ने ढोल-दमाऊ और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर नृत्य किया। इसमें कौरवों ने एक चतुर युद्धनीति का उपयोग करके अभिमन्यु का वध किया। चक्रव्यूह प्रस्तुत करने वाले समूह का नेतृत्व प्रोफेसर दाताराम पुरोहित ने किया। गढ़वाली लोक कलाकारों की उनकी टीम ने चक्रव्यूह का शानदार चित्रण किया और उपस्थित विशाल दर्शकों का मन मोह लिया। इस चक्रव्यूह की पहली प्रस्तुति 2001 में गांधारी गाँव में हुई थी। आज की प्रस्तुति में, प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा चक्रव्यूह का विस्तृत रूप से निर्माण और चित्रण किया गया। जौनसार से आए रणसिंह वादन दल में (अनिल वर्मा और चंदन पुंडीर) शामिल थे, जबकि (धाड़ संस्था) के अध्यक्ष अखिलेश दास भी उपस्थित रहे I “चक्रव्यूह” के आयोजन में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के महंत देवेन्द्र दास जी और विश्वविद्यालय के छात्रों का विशेष योगदान रहा।

महाराज ने डयूला में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने के दिये निर्देश

Maharaj instructed to set up cages to catch leopards in Dyula.
Maharaj instructed to set up cages to catch leopards in Dyula.

सतपुली (पौड़ी)। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने जिलाधिकारी पौड़ी और वन विभाग के अधिकारियों से बात कर एकेश्वर व पोखड़ा ब्लॉक के गुलदार प्रभावित गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए पर्याप्त संख्या में तत्काल पिंजरे लगाने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने शनिवार को जिलाधिकारी पौड़ी और वन विभाग के अधिकारियों से बात कर पोखड़ा विकासखण्ड के डयूला, देवकुंडई एवं आसपास के इलाकों और ऐकेश्वर ब्लॉक के गांवों में गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावित गांव में पर्याप्त संख्या में तत्काल पिंजरे लगाने के निर्देश दिए हैं।

क्षेत्रीय विधायक श्री महाराज का कहना है कि वन विभाग स्थिति पर पूरी तरह से नजर रखे हुए है और गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने के लिए वन विभाग के कार्मिकों को ट्रेंकुलाइजर गन दी गई हैं, गश्त बढ़ा दी गई है और गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरे भी लगाये जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने को कहा है।

निशीथ सकलानी
मीडिया सलाहकार, श्री सतपाल महाराज जी, माननीय कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार।

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Šajā rakstā apskatīsim, kā reģistrēties Fenikss Casino, lai saņemtu ekskluzīvus bonusus un priekšrocības. Es dalīšos ar savām personīgajām pieredzēm un sniegšu praktiskus padomus, lai jūs varētu maksimāli izmantot savas iespējas. Ja esat jauns spēlētājs vai vienkārši vēlaties uzzināt vairāk par fenikss kazino piedāvājumiem, esat nonākuši īstajā vietā! Iepazīstieties ar fenikss casino online un uzziniet, kā sākt savu ceļu uz laimestiem!

Kāpēc izvēlēties Fenikss Casino kā savu tiešsaistes spēļu platformu?

Fenikss Casino ir kļuvusi par vienu no populārākajām tiešsaistes spēļu platformām Latvijā, un tam ir daudz iemeslu. Pirmkārt, kazino piedāvā plašu spēļu klāstu, sākot no klasiskajām spēļu automātiem līdz pat mūsdienīgām galda spēlēm. Ja esat kazino entuziasts, atradīsiet visu, ko vēlaties, un pat vairāk. Turklāt Fenikss Casino regulāri atjaunina savu spēļu bibliotēku, tādējādi nodrošinot, ka spēlētāji vienmēr var izmēģināt kaut ko jaunu.

Otrkārt, Fenikss Casino piedāvā izcilu lietotāja pieredzi. Viņu mājas lapa ir viegli lietojama, un reģistrācija ir ātra un vienkārša. Tas ir ļoti svarīgi, jo spēlētāji nevēlas tērēt laiku, meklējot, kā piekļūt savām iecienītākajām spēlēm. Visbeidzot, Fenikss Casino ir pazīstams ar saviem dāsniem bonusiem un akcijām, kas padara spēlēšanu vēl pievilcīgāku.

Kā reģistrēties Fenikss Casino un sākt spēlēt?

Reģistrēšanās Fenikss Casino ir vienkārša un ātra. Pirmkārt, dodieties uz viņu oficiālo mājas lapu, kur jūs atradīsiet skaidri norādītas reģistrācijas procedūras. Jums būs jāizvēlas lietotājvārds un parole, kā arī jāpievieno savs e-pasta adrese, lai saņemtu apstiprinājumu. Pārliecinieties, ka visi dati ir precīzi, jo tie būs nepieciešami, lai veiktu izņemšanu un pārvaldītu savu kontu.

Pēc tam, kad esat aizpildījis reģistrācijas veidlapu, jums būs jāapstiprina e-pasta adrese, ko saņemsiet no kazino. Šis solis ir ļoti svarīgs, jo tas nodrošina jūsu konta drošību. Kad jūs būsiet apstiprinājis savu kontu, varat veikt pirmo depozītu un sākt spēlēt savas iecienītākās spēles. Neaizmirstiet, ka reģistrējoties, jūs varat pieteikties uz ekskluzīviem bonusiem, kas jūsu spēlēšanu padarīs vēl aizraujošāku.

Ekskluzīvo bonusu veidi Fenikss Casino platformā

Fenikss Casino piedāvā dažādus bonusus, kas ir pieejami jauniem un esošajiem spēlētājiem. Viens no populārākajiem bonusiem ir sveiciena bonuss, kas tiek piedāvāts visiem jaunajiem spēlētājiem, veicot pirmo depozītu. Parasti šis bonuss ir procentuāla attiecība no jūsu pirmā depozīta, kas nozīmē, ka, ja iemaksājat 100 eiro, varat saņemt vēl 100 eiro bonusa naudu, lai spēlētu.

Bonusa veids Apraksts Prasības
Sveiciena bonuss Procentuāls bonuss no pirmā depozīta Minimālā iemaksa 10 eiro
Bezmaksas griezieni Griezieni noteiktos spēļu automātos Jāveic depozīts
Naudas atmaksa Atmaksa no zaudējumiem Noteiktas spēļu kategorijas

Turklāt Fenikss Casino piedāvā arī regulāras akcijas, kas ļauj spēlētājiem iegūt papildus bonusus, veicot depozītus vai spēlējot noteiktas spēles. Sekojiet līdzi viņu akcijām, jo tās var radīt lieliskas iespējas palielināt jūsu laimestus. Ja esat aktīvs spēlētājs, varat arī saņemt lojalitātes punktus, kas laika gaitā var pārvērsties par papildu bonusiem vai pat bezmaksas naudu.

Kā izmantot bonusus, lai palielinātu savus laimestus?

Bonusu izmantošana var būt ļoti izdevīga, taču ir svarīgi zināt, kā to darīt pareizi. Pirmkārt, izlasiet bonusu noteikumus un nosacījumus, jo katram bonusam ir savi noteikumi par likmju izpildi. Piemēram, ja saņemat bezmaksas griezienus, pārliecinieties, ka zināt, kuri spēļu automāti ir iekļauti akcijā, un kādi ir minimālie likmju nosacījumi.

  1. Izmantojiet bonusus, lai izmēģinātu jaunus spēļu automātus.
  2. Sadaliet savus bonusus vairākās spēlēs, lai palielinātu izredzes laimēt.
  3. Regulāri pārbaudiet kazino akcijas un jaunos piedāvājumus.
  4. Ievērojiet savus izdevumus un neieguldiet vairāk, nekā varat atļauties zaudēt.

Otrkārt, spēlējiet ar prātu un neļaujiet emocijām ietekmēt jūsu lēmumus. Bonusus var izmantot, lai izklaidētos, bet ir svarīgi atcerēties, ka spēlēšana ir risks, un nekad nav garantijas par laimestiem. Galu galā, ja jūs spēlējat atbildīgi un izmantojat bonusus gudri, jūs varat palielināt savus laimestus un izbaudīt kazino pieredzi.

Fenikss Casino: Drošība un spēļu godīgums

Spēlējot tiešsaistes kazino, drošība ir būtisks faktors. Fenikss Casino ir licencēts un regulēts, kas nozīmē, ka tas atbilst visiem nepieciešamajiem standartiem. Viņu tīmekļa vietne ir šifrēta, tādējādi nodrošinot, ka visi jūsu personas dati un maksājumi ir droši. Tas ir svarīgi, jo nevēlaties, lai jūsu informācija nokļūtu nepareizajās rokās.

Turklāt Fenikss Casino regulāri veic spēļu godīguma pārbaudes. Tas nozīmē, ka visi spēļu rezultāti ir nejauši un netiek manipulēti. Spēlētāji var būt droši, ka viņu laimesti ir atkarīgi tikai no veiksmes, nevis no negodīgām metodēm. Ja jūs joprojām šaubāties, varat apskatīt viņu licencēšanas informāciju un sertifikātus, kas apliecina spēļu godīgumu.

Biežāk uzdotie jautājumi par Fenikss Casino

Daudzi jaunie spēlētāji bieži jautā par reģistrācijas procesu un bonusiem Fenikss Casino. Vai reģistrācija ir bezmaksas? Jā, reģistrācija ir pilnīgi bezmaksas, un jūs varat to izdarīt dažu minūšu laikā. Turklāt, ja jūs saskaras ar problēmām, viņu klientu atbalsta komanda ir pieejama, lai palīdzētu jums.

Vēl viens izplatīts jautājums ir par to, kādi spēļu veidi ir pieejami. Fenikss Casino piedāvā plašu spēļu klāstu — no klasiskajiem spēļu automātiem līdz galda spēlēm un live kazino. Jūs noteikti atradīsiet kaut ko sev tīkamu, un, ja nezināt, ar ko sākt, varat izmēģināt bezmaksas spēles, pirms veicat reālus ieguldījumus.

सीएम धामी ने किया दून विवि में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

CM Dhami inaugurated the 24th International Conference of the Indian Association of Social Science Institutions organized at Doon University.
CM Dhami inaugurated the 24th International Conference of the Indian Association of Social Science Institutions organized at Doon University.

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के 24वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया।   मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन एसोसिएशन ऑफ सोशल साइंस इंस्टीट्यूशंस के वार्षिक अधिवेशन के विभिन्न सत्रों में सामाजिक कल्याण, अर्थशास्त्र, रोजगार, उद्योग, कृषि, तकनीकी, पर्यावरण और नगरीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर देश-विदेश के प्रख्यात विद्वानों द्वारा सार्थक विचार-विमर्श किया जाएगा। इस चिंतन-मंथन से सामाजिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जन-जन के कल्याण के लिए ठोस एवं व्यवहारिक उपायों का संकलन भी हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। उनके प्रधान सेवक बनने के बाद पिछले 11 वर्षों में अनेक नीतियों एवं योजनाओं के माध्यम से प्रत्येक वर्ग के कल्याण की दिशा में संकल्पपूर्वक प्रयास किए गए हैं। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देश के करोड़ों नागरिकों को प्राप्त हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नमामि गंगे अभियान और प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान जैसी योजनाएं पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन एवं सहयोग से राज्य सरकार भी प्रदेश में सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने के साथ सतत विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने के साथ ही पति-पत्नी दोनों को पेंशन देने तथा सभी पेंशन योजनाओं में त्रैमासिक के स्थान पर मासिक भुगतान की शुरुआत की गई है। राज्य सरकार ने प्रत्येक निर्णय में प्रदेश में सामाजिक न्याय स्थापित करने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ संकल्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य में आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्थिरता बनाए रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के साथ-साथ एक सुरक्षित व न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। राज्य सरकार ने इकोनॉमी और इकोलॉजी के संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए त्रि-स्तंभीय एवं नौ-सूत्रीय नीति की शुरुआत की है, जो सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, पेयजल एवं स्वच्छता, जन्म के समय लिंगानुपात, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी विकास, वित्तीय समावेशन और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। सरकार मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता प्रोत्साहन योजना, सौर ऊर्जा क्रांति अभियान, स्मार्ट सिटी मिशन और मुख्यमंत्री शहरी आजीविका योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से इन क्षेत्रों को सशक्त बनाने का कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति आयोग द्वारा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उत्तराखंड देश में प्रथम स्थान पर आया है। राज्य में जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, सतत कृषि और जल संसाधन प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सामाजिक विकास के क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों को सशक्त बनाने के लिए टाटा ट्रस्ट, नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के साथ तीन अत्यंत महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि टाटा ट्रस्ट के सहयोग से राज्य में जल प्रबंधन, पोषण, टेलीमेडिसिन, ग्रामीण आजीविका और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समग्र और सतत विकास को सशक्त किया जा रहा है, वहीं नैस्कॉम और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, पायथन, जनरेटिव एआई, कौशल विकास एवं स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में युवाओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी नवाचारों के माध्यम से उत्तराखंड को सस्टेनेबल डेवलपमेंट के एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद, कुलपति दून विश्वविद्यालय प्रो. सुरेखा डंगवाल, आईएएसएसआई के अध्यक्ष एवं नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, प्रो. आर.पी. ममगांई, प्रो. आई.सी. अवस्थी, प्रो. अलख शर्मा एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

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