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677.75 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को मंजूरी, आजीविका सशक्तिकरण पर फोकस

Annual action plan worth Rs 677.75 crore approved, focus on livelihood empowerment
Annual action plan worth Rs 677.75 crore approved, focus on livelihood empowerment

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में ग्रामीण वेग वृद्धि परियोजना (REAP) की उच्चाधिकार एवं मार्गदर्शन समिति की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में सचिव डी.एस. गब्रियल द्वारा वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना के सापेक्ष प्रगति एवं अनुपालन रिपोर्ट तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट का प्रस्तुतीकरण किया गया। समिति ने वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु 677.75 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना एवं बजट को अनुमोदित किया। प्रस्तावित कार्ययोजना में स्वरोजगार, आजीविका संवर्धन, आय सृजन गतिविधियों, स्थानीय संसाधन विकास, कृषि एवं सहायक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने संबंधी कार्यक्रमों को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई।
2.5 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य, योजनाओं में कन्वर्जेंस पर जोर :  मुख्य सचिव ने वर्ष 2026-27 के लिए 2.5 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने निर्देश दिए कि REAP परियोजना से लाभान्वित महिलाओं को अन्य विभागीय एवं केंद्र/राज्य योजनाओं से भी जोड़ा जाए तथा सभी योजनाओं का समेकित विवरण संकलित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लाभार्थियों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण हेतु विभिन्न योजनाओं के साथ प्रभावी कन्वर्जेंस सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण परिवारों को सतत रूप से ऊपर उठाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने और गहन होमवर्क करने के निर्देश भी दिए गए।
समान प्रकृति के स्वयं सहायता समूहों की पहचान, महिला किसान वर्ष 2026 पर विशेष रणनीति:    मुख्य सचिव ने समान कार्य प्रकृति वाले महिला स्वयं सहायता समूहों की पहचान कर उन्हें आजीविका एवं स्वरोजगार की दृष्टि से बेहतर सहयोग देने की रणनीति तैयार करने को कहा। वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में देखते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि ‘लखपति दीदी’ योजना के अंतर्गत महिलाओं को विशेष वित्तीय, तकनीकी, पूंजीगत एवं संस्थागत प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की विस्तृत कार्ययोजना बनाई जाए। सभी जनपदों में स्वयं सहायता समूहों एवं हितधारकों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित कर उनके मुद्दों को समझते हुए समाधान आधारित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
अनउपयोगी ग्रोथ सेंटर होंगे सक्रिय, पलायन रोकथाम पर फोकस :   मुख्य सचिव ने ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ग्रोथ सेंटर की पहचान करने के निर्देश दिए, जिनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इन अनउपयोगित ग्रोथ सेंटरों को ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के माध्यम से प्रभावी रूप से उपयोग में लाने हेतु ठोस योजना तैयार की जाए।
विदित है कि ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना (ग्रामोत्थान) राज्य के सभी जनपदों में ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुदृढ़ करने और पलायन की रोकथाम के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत कृषि, गैर-कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण जैसे लघु उद्यमों को वित्तीय सहायता एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। वर्ष 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष घोषित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में इस वित्तीय वर्ष महिला सशक्तिकरण पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
इस दौरान बैठक में अपर सचिव गिरधारी सिंह रावत, नवनीत पांडेय, झरना कमठान व संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

शिक्षा मंत्री डा. रावत के नेतृत्व में एक्सपोजर विजिट पर जायेंगे विधायक-अधिकारी

Legislators and officials will go on an exposure visit under the leadership of Education Minister Dr. Rawat.
Legislators and officials will go on an exposure visit under the leadership of Education Minister Dr. Rawat.

दिल्ली व आंध्र प्रदेश में शिक्षा से जुड़ी सफल योजनाओं का करेंगे अध्ययन

देहरादून, 24 फरवरी 2026
सूबे के उच्च शिक्षा एवं विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में विधायकों व संबंधित विभागीय अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल विभिन्न राज्यों में एक्सपोजर विजिट पर जायेगा। अध्ययन भ्रमण के तहत दिल्ली में विद्यालयी शिक्षा जबकि आंध्र प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संचालित विभिन्न सफल योजनाओं एवं नवाचारों का अध्ययन किया जायेगा, ताकि भविष्य में प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में बेहतर योजनाओं को लागू किया जा सके।

कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी एक बयान में बताया कि राज्य सरकार प्रदेश के समग्र विकास को लेकर निंरतर प्रयासरत है और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को केन्द्र में रखकर योजनाएं बनाई जा रही है ताकि प्रत्येक व्यक्ति को योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में लागू सफल शिक्षा माॅडल का अध्ययन के लिये सरकार द्वारा विधायकों व अधिकारियों को एक्सपोजर विजिट पर भेजने का निर्णय लिया गया है, ताकि ऐसी योजनाओं को प्रदेश में लागू कर सरकारी विद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता एवं दक्षता में सुधार किया जा सके।

इसी कड़ी में विद्यायली शिक्षा के अंतर्गत डा. रावत की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विधायक व अधिकारियों का दल दिल्ली के एक्सपोजर विजिट पर जायेगा। जिसके लिये सरकार द्वारा धर्मपुर विधायक विनोद चमोली, हरिद्वार ग्रामीण विधायक अनुपमा रावत, खानपुर विधायक उमेश कुमार सहित विद्यालयी शिक्षा सचिव रविनाथ रमन व महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा दीप्ती सिंह को नामित किया गया है। यह दल दिल्ली सरकार द्वार शिक्षा के क्षेत्र में संचालित सफल योजनाओं, सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता एवं दक्षता सुधार तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करेगा।

इसी प्रकार उच्च शिक्षा के अंतर्गत विभागीय मंत्री डा. रावत की अध्यक्षता में विधायकों व विभागीय अधिकारियों का पांच सदस्यीय दल आंध्र प्रदेश जायेगा। यह दल वहां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किये गये नवाचारों, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों का अध्ययन करेगा। भ्रमण के दौरान दल आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) का दौरा करेगा, जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइसं, क्लाउड तथा अन्य आधुनिक तकनीकों में 4 लाख छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा रतन टाटा इनोवेशन हब अमरावती, एनवीडिया आंध्र प्रदेश यूनिवर्सिटी तथा क्वांटम वैली का भी अध्ययन भ्रमण किया जायेगा। इस दल के लिये टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, चकराता विधायक प्रीतम सिंह तथा यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल सहित उच्च शिक्षा सचिव डाॅ. रंजीत कुमार सिन्हा तथा निदेशक आईटीडीए आलोक पाण्डेय को नामित किया गया है। डाॅ. रावत ने बताया कि सरकार द्वारा नामित विधायकों व अधिकारियों के इस एक्सपोजर विजिट की तिथि शीघ्र निर्धारित की जायेगी। इस अध्ययन भ्रमण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, नवाचारों के विस्तार तथा छात्र-छात्राओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाये जायेंगे।

एआई डेटा सेंटर, स्टील प्लांट्स और शहरीकरण से भारत की ऊर्जा मांग बढ़ेगी — उत्सर्जन नियंत्रण में इंजीनियरों की अहम भूमिका, एमआईटी-डब्ल्यूपीयू में वैश्विक नेताओं की राय

AI data centers, steel plants, and urbanization will drive India's energy demand — engineers play a key role in controlling emissions, global leaders at MIT-WPU
AI data centers, steel plants, and urbanization will drive India's energy demand — engineers play a key role in controlling emissions, global leaders at MIT-WPU

एआई डेटा सेंटर, उद्योगों और तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण भारत में बिजली की खपत बड़े पैमाने पर बढ़ने की संभावना है।
भारत के 2070 तक के ‘नेट-ज़ीरो’ (शून्य उत्सर्जन) लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्बन कैप्चर, डिजिटल मॉनिटरिंग और कुशल इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
देहरादून – 24 फरवरी 2026: भारत में मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित डिजिटल प्रणालियों का विस्तार तेज़ी से हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप अगले दो दशकों में देश की बिजली मांग लगभग दोगुनी होने की संभावना है। हालांकि, केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन (प्रदूषण) को नियंत्रित करना वास्तविक चुनौती होगी, ऐसा मत उद्योग जगत के विशेषज्ञों ने व्यक्त किया। यह महत्वपूर्ण संदेश पुणे स्थित एमआईटी-डब्ल्यूपीयू में आयोजित 29वें ‘एनुअल इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट इंटरएक्शन प्रोग्राम’ (एआईआईआईपी-26) के दौरान दिया गया।
एसपीई एमआईटी-डब्ल्यूपीयू स्टूडेंट चैप्टर द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में विश्व की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से बीपी, एक्सॉनमोबिल, बेकर ह्यूजेस, शेवरॉन और कोरम सॉफ्टवेयर के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस अवसर पर “रिस्किल. रिवायर. रीइग्नाइट: कम कार्बन उत्सर्जन के लिए कुशल इंजीनियर” विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई।

भारत वर्तमान में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है। भारत ने 2070 तक ‘नेट-ज़ीरो’ (शून्य उत्सर्जन) प्राप्त करने और 2005 की तुलना में उत्सर्जन स्तर को 45 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। दूसरी ओर, इस्पात, सीमेंट, परिवहन और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र तेज़ी से विस्तार कर रहे हैं। ऐसे में केवल सरकारी नीतियां पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि नई तकनीकों और इंजीनियरिंग नवाचारों की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होगी।

बीपी में ‘टेक्निकल सॉल्यूशंस इंडिया’ की प्रमुख सुश्री मोली क्रोमा ने इस परिवर्तन की जटिलता स्पष्ट करते हुए कहा: “दुनिया को ऊर्जा के सभी रूपों की आवश्यकता है। कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रणालियों की ओर बढ़ने की गति हर क्षेत्र में अलग-अलग होगी। उत्सर्जन में कमी की शुरुआत कार्यक्षमता में सुधार से होती है। मूल सिद्धांत बदले नहीं हैं; महत्वपूर्ण यह है कि हम अपने वर्तमान ज्ञान का उपयोग इस प्रकार करें जिससे पर्यावरण पर प्रभाव कम हो और कार्य की गुणवत्ता बेहतर हो।”

एक्सॉन मोबिल के इयान मैकफी ने ‘कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज’ को पारंपरिक इंजीनियरिंग कौशल का विस्तार बताते हुए कहा: “कम कार्बन समाधानों के लिए आवश्यक कौशल मूल रूप से पारंपरिक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता पर आधारित हैं। कार्बन भंडारण के लिए वही ‘रिज़र्वॉयर इंजीनियरिंग’ और ‘जियोसाइंस’ कौशल आवश्यक हैं, जो तेल और गैस उत्पादन में उपयोग किए जाते हैं। इसलिए हमारे प्रशिक्षण ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, क्योंकि मूल सिद्धांत आज भी समान हैं।”

बेकर ह्यूजेज़ के प्रदीप शुक्ला ने सेवा और तकनीकी दृष्टिकोण से कार्बन कैप्चर परियोजनाओं के प्रति बढ़ती रुचि पर प्रकाश डाला। इसमें भू-यांत्रिक अध्ययन और CO₂ भंडारण के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए कुओं का निर्माण शामिल है। “मूल कौशल वही हैं। परिवर्तन केवल उनके उपयोग में हुआ है—चाहे वह कार्बन कैप्चर हो, दक्षता में सुधार हो या उत्सर्जन में कमी। तकनीक वही है, बस उसका उद्देश्य बदल गया है।”

सीहेवरॉन के चेतन चव्हाण ने संपूर्ण वैल्यू चेन में ‘कार्बन साक्षरता’ के महत्व पर बल दिया।
“इंजीनियरों को यह समझना होगा कि कार्बन उत्सर्जन कहां से हो रहा है, उसे ट्रैक करने की तकनीकें क्या हैं, नियामक आवश्यकताएं क्या हैं और कमी के उपाय कौन से हैं। मजबूत इंजीनियरिंग आधार के साथ डिजिटल साक्षरता और सिस्टम्स थिंकिंग भी आवश्यक है।”

कोरम सॉफ्टवेयर की तितिक्षा मुखर्जी ने कार्बन उत्सर्जन कम करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर विचार रखते हुए कहा: “जिन तरीकों से हम यहां तक पहुंचे हैं, वे हमें आगे नहीं ले जाएंगे। एआई प्रक्रियाओं को तेज़ कर सकती है, लेकिन यह ऑटोपायलट नहीं है। इंजीनियरों को एआई एजेंट्स का प्रबंधन करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा विकसित समाधान वास्तविक संदर्भ में प्रभावी हों।”

चर्चा के दौरान डिजिटल अवसंरचना के प्रभावों पर भी विचार हुआ। क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन डेटा सेंटरों को 24×7 निरंतर बिजली आपूर्ति और उन्नत कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है। परिणामस्वरूप, वे वैश्विक स्तर पर बिजली की उच्चतम खपत वाले क्षेत्रों में तेजी से शामिल हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति भविष्य की ऊर्जा योजना पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेगी।

सभी वक्ताओं की इस बात पर सहमति रही कि ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तन चरणबद्ध तरीके से होगा। इसके लिए केवल एक स्रोत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हाइड्रोकार्बन, सौर और पवन ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा), हाइड्रोजन, भू-तापीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर तकनीकों का संयुक्त उपयोग आवश्यक होगा। ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए उत्सर्जन में कमी लाने के संतुलन में इंजीनियरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

इस सत्र में छात्रों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही, जहां भविष्य के करियर और आवश्यक कौशलों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि वे इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों के साथ डेटा साइंस, ऑटोमेशन और पर्यावरण प्रबंधन जैसे विषयों का भी समन्वय करें।

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से भेंट कर हरिद्वार महाकुंभ 2027 की तैयारियों  चर्चा की

Chief Minister Dhami met the Union Water Power Minister and discussed the preparations for Haridwar Mahakumbh 2027.
Chief Minister Dhami met the Union Water Power Minister and discussed the preparations for Haridwar Mahakumbh 2027.

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल से शिष्टाचार भेंट कर वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ की तैयारियों तथा नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री ने हरिद्वार कुंभ 2027 के सफल, सुव्यवस्थित एवं पर्यावरणीय दृष्टि से सतत आयोजन को सुनिश्चित करने हेतु राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत ₹408.82 करोड़ की परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जनवरी से अप्रैल 2027 तक आयोजित होने वाले इस महाआयोजन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है, जिसके दृष्टिगत गंगा की निर्मलता, स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों हेतु ₹253 करोड़ के प्रस्तावों की स्वीकृति, जल जीवन मिशन के अंतर्गत अतिरिक्त राशि जारी करने करने के साथ ही इकबालपुर नहर प्रणाली, कनखल एवं जगजीतपुर नहर की क्षमता विस्तार का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे असिंचित भूमि की सिंचाई के लिए 665 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो सकेगा। जिससे हरिद्वार जिले के भगवानपुर और लक्सर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। परियोजना से लगभग 13 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का अनुमान है।
साथ ही क्षेत्र में पेयजल समस्या के समाधान भी होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से हरिद्वार कुंभ 2027 को दिव्य, भव्य एवं ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया जाएगा तथा गंगा संरक्षण के लक्ष्य को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

रोपवे परियोजनाओं को गति देने हेतु प्रथम बोर्ड बैठक आयोजित  

First board meeting held to expedite ropeway projects
First board meeting held to expedite ropeway projects

देहरादून।  मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में उत्तराखंड में रोपवे परियोजनाओं के विकास, क्रियान्वयन, संचालन एवं रखरखाव से संबंधित विभागों, हितधारकों तथा पीपीपी कंपनियों के साथ प्रथम बोर्ड बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न जनपदों में गतिमान एवं प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित जिलाधिकारियों से भी परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था व मोबिलिटी के लिए रोपवे परियोजनाएं अहम:   मुख्य सचिव ने रोपवे परियोजनाओं को प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, मोबिलिटी एवं समग्र विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इनके कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि विजिबिलिटी स्टडी जैसी प्रक्रियाओं को प्रारंभिक चरण में ही हाई पावर कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, जिससे परियोजनाओं के सभी पक्षों पर समय रहते विस्तृत विचार-विमर्श संभव हो सके।
साथ ही, रोपवे से संबंधित प्रस्तावों की गहन व त्वरित स्क्रूटनी कर सभी मुद्दों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि अनावश्यक विलंब से बचा जा सके।
समन्वय, समयबद्धता और पीपीपी परियोजनाओं पर विशेष जोर:   मुख्य सचिव ने पीपीपी मोड पर बनने वाली रोपवे परियोजनाओं के तकनीकी, वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमोदनों सहित सभी औपचारिकताओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्धारित टाइमलाइन के अनुसार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। देहरादून–मसूरी रोपवे परियोजना में हो रही देरी पर संज्ञान लेते हुए इसकी प्रगति में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
उन्होंने जिला प्रशासन, सरकारी निर्माण एजेंसियों, लोक निर्माण विभाग, सुरक्षा एजेंसियों (पुलिस) के  मध्य बेहतर समन्वय स्थापित कर स्थानीय स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान करने को कहा। साथ ही, जिन मुद्दों को हाई पावर कमेटी अथवा बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है, उन्हें समय से प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज पांडेय, धीरज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव अभिषेक रूहेला, एनएचएलएमएल से प्रशांत जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा के लिए बनेगी एसओपी : सीएम धामी

SOP will be made for the security of government offices CM Dhami
SOP will be made for the security of government offices CM Dhami

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर अधिकारी- कर्मचारी और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भेंट कर, 21 फरवरी को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के साथ ही हाल के समय में अन्य स्थानों पर सरकारी अधिकारी- कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए, ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार कार्मिकों के मान – सम्मान और सुरक्षा को लेकर हमेशा गंभीर रही है।  मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन कर, अधिकारी,  कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, साथ ही इस तरह की घटनाओं पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए, उन्होंने एसएसपी देहरादून को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।  इस मौके पर राज्य औषधीय पादप बोर्ड के उपाध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार, उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक मोर्चा के अध्यक्ष राम सिंह चौहान, महामंत्री मुकेश बहुगुणा एवं अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को केयरएज ईएसजी रेटिंग्स से “केयरएज-ईएसजी 1+” ईएसजी रेटिंग प्राप्त हुई और बैंक को ईएसजी कार्य-निष्पादन हेतु ‘लीडरशीप’ श्रेणी में रखा गया

From village soil to city markets Meghalaya farmers find a new platform and a renewed sense of confidence
From village soil to city markets Meghalaya farmers find a new platform and a renewed sense of confidence

देहरादून – 23 फरवरी, 2026: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया गर्व से घोषणा करता है कि उसे केयरएज ईएसजी रेटिंग्स द्वारा “केयरएज-ईएसजी 1+” ईएसजी रेटिंग दी गई है, जिससे बैंक को उसके सुदृढ़ पर्यावरणीय, सामाजिक और अभिशासन (ईएसजी) कार्य-निष्पादन हेतु “लीडरशीप” श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है.

केयरएज-ईएसजी 1+ रेटिंग केयरएज द्वारा प्रदान किए जाने वाले सर्वोच्च ईएसजी सम्मानों में से एक है और यह संवहनीय बैंकिंग प्रथाओं, उत्तरदायी अभिशासन और सामाजिक रूप से समावेशी पहलों के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को दर्शाती है. यह सम्मान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा अपने कारोबार परिचालन, जोखिम प्रबंधन ढांचे और कार्यनीतिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में ईएसजी सिद्धांतों के एकीकरण हेतु किए गए सक्रिय उपायों को प्रदर्शित करता है.

यह रेटिंग निम्नलिखित क्षेत्रों में बैंक के निरंतर प्रयासों को उजागर करती है

पर्यावरण के अनुकूल ऋण पद्धतियों को अपनाना

वित्तीय समावेशन और सामुदायिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना

सुदृढ़ अभिशासन संरचना और पारदर्शी प्रकटीकरण

उद्यम-व्यापी जोखिम प्रबंधन में ईएसजी पहलुओं का एकीकरण

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया अपनी संवहनीयता रूपरेखा को आगे बढ़ाने और भारत के व्यापक ईएसजी एजेंडा में सार्थक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है.

गांव की मिट्टी से शहर के बाजार तक: मेघालय के किसानों को मिला नया मंच और भरोसे की नई ताकत

From village soil to city markets Meghalaya farmers find a new platform and a renewed sense of confidence
From village soil to city markets Meghalaya farmers find a new platform and a renewed sense of confidence

देहरादून – 23 फरवरी, 2026: शिलांग की व्यस्त शहर-ज़िंदगी के बीच हाल ही में गांवों की खुशबू और मेहनत की कहानी भी सजी। ‘मासिक किसान बाजार’ में मेघालय के अलग-अलग जिलों से आए किसान अपने खेतों में उगाई गई संतरे, कद्दू, काली मिर्च, शहद और अन्य स्थानीय उत्पादों के साथ शहरवासियों के सामने खड़े थे। इनमें से कई किसानों के लिए यह पहला अवसर था जब वे बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ रहे थे।

यह पहल राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा के नेतृत्व में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इस मासिक किसान बाजार का आयोजन 1917 iTEAMS द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से किया जा रहा है, जिसे मेघालय किसान (सशक्तिकरण) आयोग का भी समर्थन प्राप्त है। पहले ही आयोजन में कई स्टॉल का सामान पूरी तरह बिक गया, लेकिन इससे भी बड़ी उपलब्धि किसानों के चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास रहा।

‘पहचान’ का मंच बना किसान बाजार
ईस्ट खासी हिल्स के पुरींग गांव की किसान पिनहुनलांग मिंसोंग के लिए यह अनुभव बेहद भावुक रहा। उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गांव से निकलकर सार्वजनिक बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर उनके लिए गर्व का क्षण है। “यहां लोग हमसे पूछ रहे थे कि हम खेती कैसे करते हैं। हमारे उत्पादों में उनकी रुचि देखकर विश्वास बढ़ा है कि आने वाले समय में हमें और बड़े मंच मिलेंगे,” उन्होंने कहा।

वेस्ट जैंतिया हिल्स के नोंगक्यनरिह गांव की थेरीस सिंगकों ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह जैविक खेती करती हैं और किसी रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करतीं। “पहले लगता था कि इतनी मेहनत का क्या लाभ होगा, लेकिन आज जब लोग हमारे उत्पादों को सराह रहे हैं, तो आगे बढ़ने का हौसला मिला है,” उन्होंने कहा।

समूहों के लिए भी खुल रहे नए रास्ते
मावशुन, पिनुर्सला ब्लॉक की विक्टोरिया टोंगपर ‘इआत्रेइलांग वन धन विकास केंद्र (VDVK)’ का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें लगभग 300 सदस्य जुड़े हैं। वर्ष 2021 में बने इस समूह ने सरकार के सहयोग से राज्य के बाहर आयोजित ‘सरस मेले’ और प्रदर्शनियों में भी भाग लिया है।

विक्टोरिया कहती हैं, “शिलांग का यह बाजार हमारे लिए खास है क्योंकि यह हमारे घर और उपभोक्ताओं के ज्यादा करीब है। जब लोग जैविक उत्पादों का महत्व समझते हैं, तो उसका लाभ हम सभी किसानों को मिलता है।” उनके समूह के सुपारी, झाड़ू घास, संतरा, शहद और काली मिर्च जैसे उत्पाद अब गांव की सीमाओं से बाहर पहचान बना रहे हैं।

मेघालय किसान (सशक्तिकरण) आयोग के अध्यक्ष पी.एस. थांगखिएव ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण विक्रेताओं को बाजार तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव से मासिक किसान बाजार की अवधारणा सामने आई।
उन्होंने कहा, “हमने सोचा कि एक ऐसा मंच तैयार किया जाए, जहां दूर-दराज के किसान हर महीने आकर अपने उत्पाद बेच सकें। भविष्य में इसे अन्य जिला मुख्यालयों तक भी विस्तार दिया जाएगा, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल पूरी तरह किसान-केंद्रित रहेगी और स्थानीय प्लेटफॉर्म ‘सोमोई’ जैसे डिजिटल माध्यमों का सहयोग भी लिया जा रहा है, जिससे उत्पादों की पहुंच और बढ़ सके।

कम हुई दूरी, बढ़ा सम्मान
मासिक किसान बाजार केवल खरीद-बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि यह गांव और शहर के बीच की दूरी कम करने का माध्यम बन रहा है। बिचौलियों पर निर्भरता घटने से किसानों को उचित मूल्य मिल रहा है और उनकी मेहनत को सम्मान भी।
मेघालय सरकार की यह पहल बताती है कि यदि सही नीयत और नीति के साथ बाजार तक सीधी पहुंच दी जाए, तो किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी बन सकते हैं।
शिलांग पहुंचे कई किसानों के लिए यह दिन किसी अंत की नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की तरह था—आत्मविश्वास की, जुड़ाव की और इस भरोसे की कि उनकी मिट्टी से जुड़ी मेहनत को अब शहर में भी उचित स्थान मिल रहा है।

सीएम धामी ने किया संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में प्रतिभाग

CM Dhami participated in the Sanskrit Student Talent Honor Program
CM Dhami participated in the Sanskrit Student Talent Honor Program

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने गार्गी बालिका संस्कृत छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति भी विद्यार्थियों को प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षा स्वाध्याय केन्द्र एवं ई-संस्कृत संभाषण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के त्रैमासिक पत्र संस्कृत वार्ता का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान ऊँचे पर्वतों और ऐतिहासिक मंदिरों से ही नहीं, बल्कि ज्ञान और आस्था की भाषा देववाणी संस्कृत से भी है। वेदों से लेकर उपनिषदों तक, रामायण से लेकर महाभारत तक, आयुर्वेद से लेकर खगोलशास्त्र तक, गणित से लेकर दर्शनशास्त्र तक हमारे ज्ञान की जड़ें संस्कृत में ही निहित हैं। संस्कृत हमारे अतीत की स्मृति मात्र नहीं, बल्कि हमारे भविष्य की संभावना भी है। संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसका वैज्ञानिक व्याकरण है। पाणिनि द्वारा रचित अष्टाध्यायी आज भी विश्व के भाषाविदों के लिए आश्चर्य का विषय है। आज विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में संस्कृत की वैज्ञानिकता पर विभिन्न प्रकार के शोध किए जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्धता के साथ निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संस्कृत को आधुनिक और व्यवहारिक भाषा के रूप में स्थापित करने के विशेष प्रयास किए गए हैं। संस्कृत साहित्य को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है। एआई के माध्यम से संस्कृत ग्रंथों को नए स्वरूप में सबके सामने रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से संस्कृत अध्ययन और शोध का केंद्र रही है। राज्य में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। सभी जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की स्थापना की गई है। उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। राज्य में पहली बार ‘गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति योजना’ की शुरुआत की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार के माध्यम से अखिल भारतीय शोध सम्मेलन, अखिल भारतीय ज्योतिष सम्मेलन, अखिल भारतीय वेद सम्मेलन, अखिल भारतीय संस्कृत कवि सम्मेलन, संस्कृत शिक्षक कौशल विकास कार्यशाला और संस्कृत छात्र प्रतियोगिता जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संस्कृत विद्यार्थियों के लिए सरकारी सहायता, शोध कार्यों में सहयोग एवं रोजगार के अवसर सुनिश्चित कर इसे नई पीढ़ी में लोकप्रिय बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किये हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सुविधाओं को बढ़ाया गया है। प्रत्येक जनपद में एक-एक संस्कृत ग्राम बनाये गये हैं। संस्कृत को बढ़ावा देने के अलग सिस्टम बनाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।
इस अवसर पर विधायक सविता कपूर, खजान दास, सचिव संस्कृत शिक्षा दीपक कुमार, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय, निदेशक संस्कृत शिक्षा कंचन देवराड़ी मौजूद थे।

आईटीबीपी महानिदेशक ने की मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट

ITBP Director General made a courtesy call on the Chief Minister
ITBP Director General made a courtesy call on the Chief Minister

– सीमांत क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा समन्वय पर सरकार का फोकस तेज
देहरादून। रविवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्य की सीमाओं की सुरक्षा, सीमांत क्षेत्रों में विकास कार्यों तथा आपदा प्रबंधन में समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में आईटीबीपी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती राज्य में आईटीबीपी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में तैनात जवान न केवल देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, बल्कि स्थानीय नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों में भी सहभागी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत जिलों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। सड़क, स्वास्थ्य, संचार और आधारभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और आईटीबीपी के बीच बेहतर समन्वय से सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी होगी।
डीजी आईटीबीपी शत्रुजीत कपूर ने मुख्यमंत्री को सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं, आधुनिक संसाधनों तथा बल की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा आईटीबीपी को दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी समन्वय बनाए रखने का आश्वासन दिया।   बैठक में आपदा प्रबंधन, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में आईटीबीपी की सक्रिय भूमिका पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के समय आईटीबीपी ने सदैव तत्परता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर प्रदेशवासियों का विश्वास जीता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सुरक्षित सीमा, सशक्त उत्तराखंड” के संकल्प के साथ राज्य सरकार सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य कर रही है, ताकि सीमांत क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास की त्रिस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने भविष्य में राज्य सरकार और आईटीबीपी  के मध्य नियमित संवाद एवं प्रभावी समन्वय की अपेक्षा की।

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