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नर्सिंग भर्ती को लेकर युवाओं को गुमराह न करे विपक्षः डॉ. धन सिंह रावत

Opposition should not mislead the youth regarding nursing recruitment Dr. Dhan Singh Rawat
Opposition should not mislead the youth regarding nursing recruitment Dr. Dhan Singh Rawat

विभागीय नियमावली के तहत ही होगी नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती

देहरादून, 4 दिसम्बर 2025
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती को लेकर विपक्ष प्रदेश के युवाओं को गुमराह कर रहा है। जबकि उक्त विभागों में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमवाली, 2022 में निहित प्राविधानों के अनुरूप राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से की betosfer जा रही है।

विपक्षी दलों द्वारा लगाये गये आरोपों पर पलटवार करते हुये सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत कहा कि विपक्षी दलों ने हमेशा प्रदेश के युवाओं को बरगलाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की रोजगारपरक नीतियों से विपक्षी दल परेशान हैं, जिसके चलते वह अब युवाओं को गुमराह करने में जुटे हैं। डॉ. रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के बेराजगार युवाओं को सरकारी नौकरियों में लगातार अवसर दे रही है। जिसे क्रम में स्वास्थ्य विभाग में 103 तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग में 587 पदों पर राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती निकाली गई है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती उत्तराखंड अधीनस्थ नर्सिंग (अराजपत्रित) सेवा (संशोधन) नियमवाली, 2022 में निहित प्राविधानों के अनुरूप पारदर्शी तरीके से की जायेगी। पूर्व में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों में की गई नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती के लिये राज्य सरकार ने तत्कालीन आवश्यकताओं व लंबे समय से विभाग में भर्ती न होने उपजी परिस्थितियों तथा युवाओं की मांग पर लिखित परीक्षा में छूट के लिये एकबार शिथिलता प्रदान की गई थी। जिसके तहत लिखित परीक्षा के स्थान पर वर्षवार मेरिट के आधार पर पारदर्शिता से भर्ती की गई। जिसमें प्रदेश के युवाओं का चयन हुआ था न कि बाहरी राज्यों के व्यक्तियों का।डॉ रावत ने बताया कि यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार के लिये की गई। जबकि अब आगे की नर्सिंग भर्ती परीक्षा पूर्व की भांति नियमावली के अनुरूप आयोजित की जायेगी। उन्होंने बताया कि युवाओं की मांग पर ही चयन बोर्ड को नई भर्ती का अधियाचन भेजा गया है।

विरोध की बजाय अपने कार्यकाल की उपलब्धि गिनायें विपक्षः डॉ. रावत
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के उस बयान को निराशा एवं हताशा का द्योतक बताया जिसमें वह नर्सिंग अधिकारी भर्ती को लेकर सरकार पर बिना जानकारी के मनगढ़ंत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं के पास जनता के सामने अपनी उपलब्धि गिनाने के लिये कुछ भी नहीं है लिहाजा विपक्ष सरकार की उपब्धियों से बौखलाकर युवाओं के साथ ही आम जनता को भी गुमराह कर सत्ता पर काबिज होना चाहती है। डॉ. रावत ने कहा कि इतिहास गवाह है कि कोई भी राजनैतिक दल बिना अपनी किसी उपलब्धि के सत्तापक्ष की आलोचना करके अपने मकसद में कामयाब नहीं हुआ है। उन्होंने विपक्षी दलों को ललकारते हुये कहा कि अगर वह सही मायने में उत्तराखंड की जनता के हितैषी हैं तो पृथक राज्य गठन के बाद कांग्रेस सरकार द्वारा किये गये कार्यों को जनता के समक्ष रख कर स्वस्थ राजनीति का उदाहरण पेश करें। डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश की जनता काफी समझदार और शिक्षित है जो भती-भांति जानती है कि कौन राजनीतिक दल उनका हितैषी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के जनकल्याणकारी नितियों व विकास कार्यों से घबरा गया है ऐसे में झूटे आरोप लगाना विपक्ष की नियति बन गई है।

मां कालिंका मेले की व्यवस्थाओं को लेकर महाराज ने दिये जिलाधिकारी को निर्देश

Maharaj gave instructions to the District Magistrate regarding the arrangements for Maa Kalinka Fair.
Maharaj gave instructions to the District Magistrate regarding the arrangements for Maa Kalinka Fair.

पौड़ी। प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने जिलाधिकारी पौड़ी से दूरभाष पर वार्ता कर विकासखण्ड बीरोंखाल के अन्तर्गत मां कालिंका मन्दिर में 06 दिसम्बर, 2025 को होने वाले मेले की व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये हैं।

प्रदेश पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री एवं चौबट्टाखाल विधायक सतपाल महाराज ने गुरुवार को जिलाधिकारी पौड़ी से दूरभाष पर वार्ता कर विकासखण्ड बीरोंखाल के अन्तर्गत मां कालिंका मन्दिर में 06 दिसम्बर, 2025 को होने वाले मेले की व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने के साथ-साथ मेडिकल टीम, ऐम्बुलेंस पेयजल की समुचित व्यवस्थाएं और मोटर मार्गो को चुस्त दुरुस्त करने को कहा है।
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श्री महाराज ने जिलाधिकारी से मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पौड़ी, रामनगर, कोटद्वार, धूमाकोट और बैजरों आदि क्षेत्रों से बसों की पर्याप्त व्यवस्था करावाने के भी निर्देश दिए हैं।

अर्धसैनिक बल के जवान वीरता, साहस और देशभक्ति के प्रतीक : मुख्यमंत्री

Paramilitary personnel are symbols of valour, courage and patriotism Chief Minister
Paramilitary personnel are symbols of valour, courage and patriotism Chief Minister
हल्द्वानी।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल कैंप मुख्यालय हल्द्वानी में आयोजित पूर्व अर्धसैनिक बलों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों के वीर जवानों ने कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से अरुणाचल तक हर मोर्चे पर अदम्य साहस, शौर्य और समर्पण के साथ देश की सेवा की है। तिरंगे की शान को बढ़ाने में इन वीर सपूतों का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अर्द्धसैनिक बल के जवानों को वीरता, साहस और देश भक्ति का प्रतीक बताते हुए उन्हें राष्ट्र की शान बताया।

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 इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अर्द्धसैनिक बलों के कल्याण के लिए घोषणा की कि भविष्य में प्रेजिडेन्ट पुलिस मेडल-गैलेन्ट्री वीरता पदक से अलंकृत होने वाले अर्द्धसैनिक को एकमुश्त 05 लाख रूपये की अनुदान राशि दी जायेगी, पूर्व अर्द्धसैनिक एवं अर्द्धसैनिक की वीर नारी, जिसके पास स्वयं की कोई अचल सम्पत्ति नहीं है, को उत्तराखण्ड राज्य में जीवनकाल में एक बार अचल सम्पत्ति क्रय किये जाने में स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत तक की छूट दी जायेगी, उत्तराखण्ड राज्य अर्द्धसैनिक बल कल्याण परिषद् को क्रियाशील किया जायेगा और परिषद् के लिए पुलिस मुख्यालय में एक कार्यालय कक्ष आवंटित किया जायेगा, सैनिक कल्याण निदेशालय में उपनिदेशक (अर्द्धसैनिक) एवं बड़े जिलों के जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों में सहायक जिला सैनिक कल्याण अधिकारी (अर्द्धसैनिक) के एक-एक पद स्वीकृत किये जायेंगे, जिसमें पूर्व अर्द्धसैनिक संविदा में नियुक्त किये जायेंगे, जो अर्द्ध सैनिक बलों के बच्चे हैं, उनको शादी हेतु हमारे सैनिकों के भांति धनराशि प्रदान की जाएगी तथा मुख्यमंत्री ने सीजीएचएस भवन निर्माण हेतु तत्काल प्राथमिकता देते हुए भूमि चयन करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक कभी भी ‘भूतपूर्व’ नहीं होता, वह जीवनपर्यंत सैनिक ही रहता है। उन्होंने बताया कि वे स्वयं एक सैनिक परिवार से आते हैं और सैनिकों व उनके परिवारों की चुनौतियों को नजदीक से समझते हैं। शहीदों की शहादत की कोई कीमत नहीं हो सकती और राज्य सरकार का दायित्व है कि उनके परिवारों को किसी प्रकार की कठिनाई न होने पाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों और शहीदों के परिजनों के सम्मान हेतु अनुग्रह राशि को 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया है। अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से अलंकृत वीरों की पुरस्कार राशि एवं वार्षिक अनुदान में भी महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। शहीदों की स्मृति में स्मारक एवं शहीद द्वार निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इस वर्ष 10 वीर बलिदानियों की स्मृति में नए स्मारकों की स्वीकृति दी गई है। साथ ही शहीदों के परिजनों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी में समायोजित करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में सेना का आधुनिकीकरण तेजी से हुआ है। भारत आज रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनते हुए कई देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत के स्वदेशी हथियारों की क्षमता को विश्व स्तर पर सिद्ध किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध बसावट और अन्य गलत गतिविधियों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है। 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि कब्जामुक्त कराई गई है तथा 550 से अधिक अवैध संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। राज्य में समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा-रोधी कानून और भू-कानून लागू कर सामाजिक समरसता एवं आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड वीरभूमि भी है, और यहां की धरोहर, संस्कृति तथा परंपरा की रक्षा करना सभी का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों के कल्याण हेतु निरंतर दृढ़ता से कार्य कर रही है।
इस अवसर पर मेयर हल्द्वानी गजराज सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दीपा दरमवाल, विधायक राम सिंह कैड़ा, दायित्व धारी डॉ. अनिल डब्बू, शंकर कोरंगा, रेनू अधिकारी, आई जी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीआईजी शंकर दत्त पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ मंजूनाथ टीसी, पूर्व अर्धसैनिक संगठन उत्तराखंड के अध्यक्ष एस.एस. कोटियाल, सेवानिवृत्त आईजी एम.एल. वर्मा, एच.आर. सिंह, भानु प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दिव्यांग जन दिव्यांग नहीं, समाज के दिव्य-अंग हैं :  मुख्यमंत्री 

Disabled people are not disabled, they are divine parts of the society Chief Minister
Disabled people are not disabled, they are divine parts of the society Chief Minister
हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर समाज कल्याण विभाग द्वारा हल्द्वानी एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार वितरण समारोह में दिव्यांगजन प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देहरादून में ₹905.13 लाख की लागत से बनने वाले आयुक्त दिव्यांगजन उत्तराखण्ड, उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम लिमिटेड तथा समाज कल्याण आईटी सेल के बहुउद्देशीय कार्यालय भवन का शिलान्यास तथा प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र, नैनीताल (एलिम्को) का लोकार्पण किया।
मुख्यमंत्री ने सभी दिव्यांगजनों को विश्व दिव्यांग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उन असाधारण व्यक्तियों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने चुनौतियों को अवसर और संघर्षों को प्रेरणा में बदलकर समाज को दिशा दी है। उन्होंने कहा कि “दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, लेकिन सपनों में नहीं”, और आज हमारे दिव्यांग भाई-बहन प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन दिव्यांग नही समाज के दिव्य अंग है।
उन्होंने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चैनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया तथा बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियन बनीं शीतल देवी जैसे प्रेरक उदाहरण साझा किए। मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम द्वारा कोलंबो में टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप-2025 जीतने पर भी गर्व व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज केन्द्र और राज्य सरकार दोनों दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमामय जीवन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नए भवनों, अस्पतालों व बस अड्डों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं। कई पुराने भवनों में भी सुगम्यता हेतु आवश्यक परिवर्तन किए गए हैं। साथ ही “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार और दिव्यांगजन हितैषी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन भी सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को ₹1500 मासिक पेंशन, दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को ₹700 मासिक भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली विशेष दिव्यांग पेंशन योजना व बौना पेंशन योजना के तहत ₹1200 मासिक पेंशन के साथ ही सरकारी नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए क्षैतिज आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत किये जाने, दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति तथा कृत्रिम अंगों हेतु ₹7000 अनुदान, दिव्यांग से विवाह करने पर ₹50,000 प्रोत्साहन राशि, दिव्यांग छात्रों के लिए सिविल सेवा परीक्षा की निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग सुविधा उपलब्ध कराते हुए जिला दिव्यांग पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से उन्हें सभी योजनाओं का एकीकृत लाभ प्रदान किया जा रहा है।
इसके साथ ही देहरादून स्थित आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय में ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था तथा ऊधमसिंह नगर में मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए पुनर्वास गृह का निर्माण किया गया है। देहरादून में राज्य का पहला “प्रधानमंत्री दिव्यांशा केंद्र” भी प्रारंभ किया गया है। राज्य गठन के बाद पहली बार दिव्यांग सर्वेक्षण भी प्रारंभ किया गया है, जिससे दिव्यांगजनों की वास्तविक संख्या व आवश्यकताओं का सही आकलन हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य के “यंग इनोवेटिव माइंड्स” से अपील की कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को विशेष स्थान दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित कर दिव्यांगजनों के जीवन को और सुगम बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे युवाओं को आवश्यक सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा 41 प्रतिभाशाली दिव्यांगजनों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने सभी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनका मनोबल भी बढ़ाया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, राम सिंह कैड़ा, दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट, सचिव समाज कल्याण श्रीधर बाबू अदांगी, आईजी रिद्धिम अग्रवाल, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने किया एम्स ऋषिकेश में हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ 

Governor inaugurated Helicopter Emergency Medical Service Training Programme at AIIMS Rishikesh
Governor inaugurated Helicopter Emergency Medical Service Training Programme at AIIMS Rishikesh
देहरादून।  एम्स ऋषिकेश में आज हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने किया। फ्रेंच एकेडमी ऑफ मेडिसिन तथा एयरबस फाउंडेशन के सहयोग से तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की आज से शुरुआत हुई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, तकनीशियनों और पायलटों को उच्च स्तरीय आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। राज्यपाल ने इसे उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए “जीवनरक्षक पहल” और “एक नई आशा” बताया।
     राज्यपाल ने कहा कि किसी भी आपदा या दुर्घटना के पश्चात् ‘गोल्डन आवर’ में चिकित्सा सहायता मिलना जीवन बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क मार्ग बाधित होने, भूस्खलन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उपचार में कठिनाई रहती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में हेलीकॉप्टर मेडिकल सर्विस उत्तराखण्ड के लिए एक वरदान सिद्ध होगी।
     राज्यपाल ने कहा कि हेलीकॉप्टर में उपचार देना अत्यधिक जटिल कार्य है, जिसके लिए विशेष दक्षता और त्वरित निर्णय क्षमता की आवश्यकता होती है। यह प्रशिक्षित दल भविष्य में अनगिनत जिंदगियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने फ्रेंच एकेडमी ऑफ मेडिसिन तथा एयरबस फाउंडेशन द्वारा भारत के साथ किए गए सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह ज्ञान-साझेदारी भारत के स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत बनाएगी तथा डॉक्टरों और छात्रों को वैश्विक मानकों का अनुभव प्रदान करेगी।
    राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य सेवाओं की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए एआई आधारित निदान, ड्रोन के माध्यम से दवाओं का परिवहन, टेलीमेडिसिन तथा हेली एंबुलेंस जैसी नवाचार-आधारित सेवाएं भविष्य में स्वास्थ्य तंत्र को और मजबूत करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सेवा न केवल उत्तराखण्ड बल्कि पूरे देश के लिए आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगी।
    उन्होंने एम्स ऋषिकेश द्वारा ‘प्रोजेक्ट संजीवनी’ के अंतर्गत निःशुल्क हेलीकॉप्टर इमरजेंसी मेडिकल सर्विस शुरू करने को “मानवता की सच्ची सेवा” कहा। उन्होंने केंद्र सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय तथा उत्तराखण्ड सरकार के समन्वित सहयोग की सराहना की।
     इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश की निदेशक डॉ. मीनू सिंह, डीन अकादमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, फ्रेंच एकेडमी ऑफ मेडिसिन के महासचिव रिचर्ड विलेट, डॉ. कमर आजम, डॉ. मधुर उनियाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

नारी-बाल निकेतन महत्वपूर्ण संस्थान, बेसहारा महिलाओं और बच्चों के लिए जरूरी है अतिरिक्त समर्थन : डीएम

Nari-Bal Niketan is an important institution, additional support is needed for destitute women and children DM
Nari-Bal Niketan is an important institution, additional support is needed for destitute women and children DM
देहरादून। जिलाधिकारी सविन बंसल ने केदारपुरम अवस्थित राजकीय नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने सबसे पहले परिसर का भ्रमण किया और यहां पर आवास, सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य, साफ, सफाई एवं शौचालय संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निकेतन में निवासरत महिलाओं, बालिकाओं एवं अधिकारियों से यहां की आवश्यकताओं और समस्याओं की जानकारी ली।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि संस्थान में निवासरत महिलाओं, बालक एवं बालिकाओं को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण मिल सके, इसके लिए अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करना सुनिश्चित करें। इस दौरान जिलाधिकारी ने बढ़ती ठंड को देखते हुए निकेतन की महिलाओं, बालिकाओं और शिशुओं को स्वायटर, टोपी इत्यादि गर्म कपडे प्रदान करते हुए मिठाई बांटी। केदारपुरम स्थित निकेतन में 173 बेसहारा, परित्यक्त व शोषित महिलाएं निवासरत है। वहीं बालिका निकेतन में 19 और बाल गृह व शिशु सदन 23 बच्चे रह रहे है। जिन्हें सामाजिक सुरक्षा, आश्रय और अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही है।
जिलाधिकारी ने कहा कि नारी निकेतन, बालिका निकेतन, बाल गृह एवं शिशु सदन हमारे बहुत महत्वपूर्ण संस्थान है। यहां पर बेसहारा, परित्यक्त, शोषित व खास वर्ग के महिलाएं व बच्चे रहते है, जिनको मुख्यधारा मे लाने के लिए अतिरिक्त देखभाल और सलाह की आवश्यकता रहती है। ये लोग किसी न किसी सदमे से प्रभावित हुए है। एक्सपर्ट की मदद से इनको सदमे से बाहर लाते हुए इनके व्यवहार में परिवर्तन कर मुख्यधारा में लाया जा रहा है। निकेतन में इन्फ्रास्ट्रेक्चर, सीवर लाइन, डोरमेट्री से लेकर जो भी आवश्यकताएं है, उसको जिला प्लान और खनन न्यास से पूरा किया जा रहा है। निकेतन की महिलाओं और बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच से लेकर संतुलित डाइट भी सुनिश्चित की जा रही है। जिलाधिकारी ने कहा कि निकेतन में निवासरत बेसहारा एवं शोषित महिलाओं व बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे है। जिलाधिकारी ने कहा कि पिछले निरीक्षण के दौरान निकेतन में डोर मैट्री भवन स्वीकृत किया गया था, जिसका निर्माण कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है और अगले दो महीनों के भीतर भवन निकेतन को विधिवत् समर्पित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि बालिका निकेतन में निवासरत बालिकाओं के सर्वागीण विकास के लिए खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों निर्देश दिए कि बालिका निकेतन परिसर में एक समुचित खेल मैदान का निर्माण किया जाए। कहा कि खेल मैदान का डिजाइन इस तरह से तैयार किया जाए जिसमें खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन और योग गतिविधियां हो सके। वहीं जिलाधिकारी ने ठंड को ध्यान में रखते हुए शिशु निकेतन के सभी कमरों में ऑयल हीटर लगाने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने नारी निकेतन की सुरक्षा व्यवस्थाओं और सुदृढ़ करने के लिए नारी निकेतन में दो अतिरिक्त होमगार्ड की तैनाती तुरंत प्रभाव से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नारी निकेतन में दो अतिरिक्त नर्सों की नियुक्ति करने और निकेतन के लिए तैनात डॉक्टर को नियमित रूप से निकेतन का विजिट सुनिश्चित कराने को कहा। ताकि महिलाओं की समय-सयम पर स्वास्थ्य जांच हो सके। जिलाधिकारी ने कहा कि निकेतन में बालिकाओं और शिशुओं के समुचित स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण स्थिति की जांच तथा समय-समय पर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिया कि आरबीएसके टीम नियमित अंतराल पर निकेतन पहुंचकर बच्चों का संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण करे और किसी भी बीमारी या कमी की पहचान कर त्वरित उपचार व आवश्यक रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित करे। इस दौरान जिलाधिकारी ने नारी निकेतन में महिलाओं व बच्चों के आधार कार्ड बनाने के लिए 11 मोबाइल फोन और सिम की मौके पर ही स्वीकृति प्रदान की।
जिलाधिकारी ने नारी निकेतन परिसर का निरीक्षण करते हुए ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्माणाधीन अतिरिक्त भवन के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि नारी निकेतन में रहने वाली महिलाओं, बालिकाओं एवं शिशुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसलिए निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अतिरिक्त भवन तैयार होने से नारी निकेतन की क्षमता और सुविधाओं में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
नारी निकेतन में काउंसलिंग कक्ष के समक्ष शौचालय व स्नानागार, डायनिंग एरिया के शौचालय सुदृढीकरण, मंदिर के चारों ओर ग्रिल कार्य, जिम और प्रयोगात्मक क्षेत्र का समतलीकरण, छत मरम्मत, अलमीरा, रसोई के पीछे फर्स, लॉडरी रूम व नए भवन के पीछे फैसिंग, आलम्बन भवन के मुख्य द्वार का अनुरक्षण, डबल बैटर इनवर्टर लगाने को काम किया जा रहा है। वहीं बालिका निकेतन में अधीक्षक का कार्यालय, स्टोर कक्ष, आंगन, आधुनिक किचन, खिडकियों पर सरिया, गेट, लोहे के दरवाजे, डबल बैटरी इन्वर्टर, समर सेविल हेतु विद्युत संयोजन, भण्डारण कक्ष, छत व फर्स मरम्मत, टिन शेड का काम चल रहा है। शिशु व बाल गृह में कक्ष का पार्टीशन, शौचालय, स्टोर रूम, पार्क के तीनों तरफ सीढियां, तीनों संस्थान को जोड़ने का रास्ता, पार्किंग, फैंसिंग, परिसर में स्थायी मंच निर्माण सहित बच्चों के लिए 20 रजाई, 10 लोहे के बैड, 10 डबल गद्दे आदि काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को संचालित सभी कार्याे को जल्द से जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।
इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, उप जिलाधिकारी सदर हरिगिर, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, सहायक निदेशक सूचना बद्री चंद, एसीएमओ डा वंदना सेमवाल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति नमिता ममगाई आदि सहित ग्रामीण निर्माण विभाग व पेयजल के अधिकारी मौजूद थे।

डीएम  बंसल ने किया स्मार्ट सिटी लि0 परियोजना अन्तर्गत निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग का निरीक्षण

DM Bansal inspected the green building under construction under the Smart City Ltd. project.
DM Bansal inspected the green building under construction under the Smart City Ltd. project.
देहरादून।  जिलाधिकारी सविन बंसल ने हरिद्वार रोड स्थित स्मार्ट सिटी लि0 परियोजना अन्तर्गत निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने ग्रीन बिल्डिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कार्यों को निर्धारित समयसीमा जून 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्रीन बिल्डिंग मा0 मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेेक्ट पर इसमें किसी भी प्रकार की कोताही क्षम्य नही होगी। उन्होंने निर्माण स्थल पर उपलब्ध समस्त सुविधाओं, सामग्री, श्रमिकों की संख्या एवं कार्य गति का विस्तृत अवलोकन किया। जिलाधिकारी ने पाया कि कार्य में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिस पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अगले 06 माह के भीतर पूरी परियोजना को पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि समयसीमा में कार्य पूर्ण न होने की स्थिति में विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता, पर्यावरण अनुकूल तकनीक एवं सुरक्षा मानकों का विशेष रूप से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्य प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था सीपीडब्लूडी के अधिकारियों से वर्तमान में कार्यरत श्रमिकों की संख्या पूछने पर बताया कि वर्तमान में 140 श्रमिक कार्य कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने लेबर चार्ट के बारे में पूछने पर अधिकारियों ने बताया कि 300 लेबर होनी चाहिए जिसपर नाराजगी व्यक्त करते हुए डीएम ने लेबर बढाते हुए 3 शिफ्ट में कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही पर्ट चार्ट (प्रोग्राम इवैल्यएशन एंड रिव्यू टेक्नीक) बनाने के भी निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से लेबर प्लान, मटिरियल प्लान, प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने मटीरियल टैस्टिंग  लैब की जानकारी लेने पर मुख्य अभियंता सीपीडब्लूडी ने बताया कि 90 प्रतिशत् टैस्टिंग साईट पर अवस्थित टैस्टिंग लैब से तथा 10 प्रतिशत् बाहर से कराये जाते है। जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक सप्ताह थर्ड पार्टी गुणवत्ता रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
निरीक्षण के दौरान अपर मुख्यकार्यकारी अधिकारी तीरथपाल सिंह, मुख्य अभियंता सीपीडब्ल्यूडी, स्मार्ट सिटी लि0 कृष्णा चमोला सहित कार्यदायी संस्था सीपीडब्लूडी के सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहे।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने काशीपुर स्थित औद्यानिक परीक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र का किया निरीक्षण

Agriculture Minister Ganesh Joshi inspected the Horticulture Testing and Training Centre located in Kashipur.
Agriculture Minister Ganesh Joshi inspected the Horticulture Testing and Training Centre located in Kashipur.

काशीपुर, 03 दिसम्बर। प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को काशीपुर स्थित औद्यानिक परीक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र (राजकीय उद्यान काशीपुर) का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उद्यान में विकसित विभिन्न फसलों, फलों एवं सब्जियों के उत्पादन की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि राजकीय प्रजनन उद्यान, काशीपुर में आम, अमरूद, लीची, अनार, नीबू सहित विभिन्न पौध प्रजातियों के ग्राफ्टेड पौधे तैयार किए जाते हैं। उद्यान में आम की रंगीन प्रजातियाँ जैसे—पूसा अरुणिमा, अरुणिका, पूसा लालिमा, श्रेष्ठ, केसर, अम्बिका आदि तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा मल्लिका और आम्रपाली जैसी लोकप्रिय प्रजातियों के ग्राफ्टेड पौधे भी तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं।

अधिकारियों ने यह भी अवगत कराया कि उद्यान में आलू को ब्रीडर सीड से फाउंडेशन सीड में विकसित किया जाता है, जबकि किसानों को प्याज पौध बिना लाभ–हानि के आधार पर उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में केंद्र में 30,000 ग्राफ्टेड पौध, 25,00,000 प्याज पौध तथा लगभग 1000 क्विंटल आलू बीज उत्पादन का कार्य प्रगति पर है।

कृषि मंत्री जोशी ने आलू फॉर्म का भी अवलोकन किया और वहां अपनाई जा रही उन्नत कृषि तकनीकों की सराहना की। विभागीय अधिकारियों द्वारा फलों व सब्जियों के उत्पादन, अनुसंधान एवं भविष्य की योजनाओं पर पावर प्वॉइंट प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री गणेश जोशी ने आम की ‘लालिमा’ प्रजाति के पौधे का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं पौध उत्पादन को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने उद्यान की कार्यप्रणाली पर संतोष व्यक्त करते हुए अनुसंधान और प्रशिक्षण गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

स्कूलों में छात्र-छात्राओं के सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम

There will be strong arrangements for the safety of students in schools.
There will be strong arrangements for the safety of students in schools.

विभागीय मंत्री के निर्देश पर निदेशक ने जारी किये आदेश

समय-समय पर राज्य स्तर पर भी होगी सुरक्षा समीक्षा

देहरादून, 3 दिसम्बर 2025
चमोली जनपद में छात्र-छात्राओं के यौन शोषण एवं छेड़छाड़ की घटना को देखते हुये प्रदेशभर के सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को सख्त कदम उठाये गये हैं। विभागीय मंत्री डॉ रावत के निर्देशों के क्रम में सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने को जनपद स्तर पर निगरानी व सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्ती से लागू करने को कहा गया है। साथ ही राज्य स्तर पर भी समय-समय पर इसकी समीक्षा की जायेगी।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने चमोली जनपद के राजकीय इण्टर कॉलेज गौणा में अतिथि शिक्षक यूनुस अंसारी द्वारा छात्र-छात्राओं के यौन शोषण व छेड़छाड़ की घटना को दुखद व चिंताजनक बताया। उन्होंने बताया कि विभागीय मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर उक्त प्रकरण में सख्त कार्यवाही की जा रही है। साथ ही ऐसे घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिये निगरानी व सुरक्षा प्रोटोकॉल को विद्यालयों में सख्ती से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों को विद्यालयों में सुरक्षा मानकों की कड़ाई से निगरानी करने तथा विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने जनपदों के विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने को कहा गया है, जिसकी समय-समय पर राज्य स्तर पर भी समीक्षा की जायेगी।

डॉ. सती ने बताया कि विद्यालयी शिक्षा विभाग द्वारा राज्य के माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (एलटी) एवं प्रवक्ता के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति होने तक शिक्षण कार्य बाधित न हो, इसके लिये सरकार द्वारा अतिथि शिक्षकों की तैनाती की व्यवस्था की गयी है। इसी क्रम में विभिन्न जनपदों एवं विकासखण्डों में गठित चयन समितियों के माध्यम से अतिथि शिक्षक नियुक्त किये गये थे। उन्होंने बताया कि चमोली जनपद में विकासखण्ड स्तर पर गठित समिति द्वारा अगस्त 2015 में राजनीति विज्ञान विषय में प्रवक्ता पद पर यूनुस अंसारी का चयन किया गया था तथा उनकी तैनाती राजकीय इण्टर कॉलेज ईराणी, दशोली में की गयी थी। उक्त विद्यालय में नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने पर आरोपी अतिथि शिक्षक प्रभावित हो गया था, जिसके चलते फरवरी 2020 में उन्हें राजकीय इण्टर कॉलेज गौणा में तैनाती दी गई।

डॉ. सती ने बताया कि हाल ही में यूनुस अंसारी द्वारा विद्यालय में छात्र-छात्राओं के यौन शोषण व छेड़छाड़ करने की गंभीर शिकायतें संज्ञान में आयीं। बच्चों की सुरक्षा एवं हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग द्वारा उनके अतिथि शिक्षक अनुबन्ध को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि चयन के समय यूनुस अंसारी द्वारा स्थाई निवास प्रमाण पत्र, पटवारी क्षेत्र प्रमाण पत्र तथा उत्तराखण्ड राज्य के अन्य पिछड़ा वर्ग का वैध जाति प्रमाण पत्र आवेदन के साथ प्रस्तुत किया गया था। ये सभी प्रमाण पत्र अन्य विभागों/प्राधिकरणों द्वारा निर्गत किये जाते हैं और नियुक्ति/तैनाती की प्रक्रिया में विभाग द्वारा इन्हीं अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है।

बयान-

विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभागीय अधिकारियों को विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के स्पष्ट निर्देश दे दिये गए हैं। साथ ही सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को प्रत्येक विद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा कर, प्रधानाचार्यों को आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा गया है।

मिज़ोरम के 78 वर्षीय व्यक्ति का मणिपाल अस्पताल में दुर्लभ न्यूनतम इनवेसिव एओर्टिक रिपेयर

78-Year-Old Man from Mizoram Undergoes Rare Minimally Invasive Aortic Repair at Manipal Hospital
78-Year-Old Man from Mizoram Undergoes Rare Minimally Invasive Aortic Repair at Manipal Hospital

देहरादून- 03 दिसम्बर 2025: मिज़ोरम के 78 वर्षीय एक भद्रपुरुष, जो कई महीनों से लगातार पेट और पीठ के दर्द से पीड़ित थे, ने हाल ही में मणिपाल अस्पताल, ईएम बाईपास में मुख्य धमनी में बने खतरनाक सूजन के उपचार हेतु एक अत्यंत जटिल एंडोवेस्कुलर एओर्टिक रिपेयर, अर्थात् न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया से उपचार कराया। यह जटिल प्रक्रिया मणिपाल अस्पताल, ईएम बाईपास के कैथ लैब निदेशक, वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट, डिवाइस एवं स्ट्रक्चरल हार्ट विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कुमार और उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई।bahismore

रोगी ने प्रारम्भ में मिज़ोरम के एक स्थानीय अस्पताल में अपने लक्षणों के बढ़ने पर परामर्श लिया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें एओर्टिक एन्यूरिज़्म नामक स्थिति से पीड़ित पाया, यह महाधमनी (एओर्टा) में होने वाली गुब्बारे जैसी सूजन है, जो हृदय से पूरे शरीर में रक्त पहुंचाती है। यह सूजन समय के साथ चुपचाप बढ़ सकती है और अनुपचारित रहने पर फटने का जोखिम होता है, जिससे जानलेवा आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है। स्थिति की गंभीरता और जटिलता को देखते हुए, रोगी को विशेष उपचार के लिए मणिपाल अस्पताल, ईएम बाईपास में डॉ. दिलीप कुमार के पास भेजा गया।

पारंपरिक रूप से, इस स्थिति के उपचार के लिए पेट में बड़े चीरे लगाकर ओपन सर्जरी की आवश्यकता होती थी, जिसमें लंबा रिकवरी समय लगता था। लेकिन एंडोवेस्कुलर एओर्टिक रिपेयर एक अधिक सुरक्षित और तेज़ विकल्प है। इस तकनीक में जांघ के पास छोटे छिद्रों के माध्यम से स्टेंट-ग्राफ्ट (कपड़े और धातु से बना नलीनुमा उपकरण) को कमजोर हिस्से को सहारा देने और रक्त प्रवाह को सामान्य करने के लिए डाला जाता है, जिससे खुले पेट की सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती।

इस विशेष मामले में, डॉ. दिलीप कुमार और उनकी टीम ने रोगी की जांघ में दो फ़ेमोरल एक्सेस पॉइंट—२०F और १८F का उपयोग कर बाइफरकेटेड एओर्टिक ग्राफ्ट को इलिएक एक्सटेंशन्स सहित स्थापित किया। प्रक्रिया के अंत में पारंपरिक सर्जिकल टांकों की जगह पाँच क्लोज़र डिवाइसेस—चार प्रोग्लाइड और एक एंजियो-सील का उपयोग किया गया। इस उन्नत तकनीक से अत्यंत कम रक्तस्राव, तेज़ उपचार और असाधारण रूप से शीघ्र रिकवरी संभव हुई। उल्लेखनीय रूप से, रोगी अगले दिन ही चलने-फिरने लगे और उन्हें छुट्टी दे दी गई—यह संभवतः भारत का पहला मामला है जिसमें इतने बड़े-बोर एक्सेस रिपेयर के बाद पाँच क्लोज़र डिवाइसेस का उपयोग कर उसी दिन गतिशीलता और डिस्चार्ज संभव हुआ।

मामले के बारे में डॉ. दिलीप कुमार ने कहा, “यह अत्यंत उच्च जोखिम वाला मामला था, क्योंकि रोगी की मुख्य धमनी खतरनाक रूप से सूज चुकी थी और फटने का जोखिम था। पहले ऐसे मामलों में ओपन सर्जरी करनी पड़ती थी, लेकिन आधुनिक एंडोवेस्कुलर तकनीकों की मदद से अब हम बड़े चीरे की जगह छोटे छिद्रों से ही उपचार कर सकते हैं। इस मामले को विशेष बनाता है—दोनों ग्रोइन में बड़े कैथेटर डालने के बाद उन्हें बंद करने के लिए पाँच क्लोज़र डिवाइसेस का उपयोग। रोगी अगले दिन ही चल पाए और घर जा सके—यह हमारे लिए और रोगी के परिवार के लिए अत्यंत संतोषजनक है।”

प्रक्रिया के बाद रोगी की रिकवरी अत्यंत सहज रही और उन्होंने पूरी चिकित्सा टीम द्वारा दिए गए देखभाल और आश्वासन के लिए आभार व्यक्त किया। वह अब स्वस्थ हैं और अपनी स्थिति की निगरानी के लिए नियमित फॉलो-अप जारी रखेंगे।
यह सफल मामला दर्शाता है कि मणिपाल अस्पताल, ईएम बाईपास में उन्नत तकनीक और न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रियाओं की मदद से जटिल कार्डियोवैस्कुलर एवं वैस्कुलर विकारों का उपचार उच्च सटीकता, सुरक्षा और करुणा के साथ किया जा सकता है, जिससे रोगी शीघ्र स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकते हैं।

Congress submitted a memorandum to SP City regarding traffic arrangements.

अपनी शादी के लिए दून पहुंचे क्रिकेटर कुलदीप यादव

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देहरादून।  स्टार क्रिकेटर कुलदीप यादव गुरुवार को अपनी शादी समारोह के लिए दून पहुंच गए हैं। वह कुछ देर रायपुर स्थित सरबजीत कंपलेक्स हाथी...
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