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मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में किया प्रतिभाग

The Chief Minister participated in the program organized on the occasion of World Minority Rights Day.
The Chief Minister participated in the program organized on the occasion of World Minority Rights Day.

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र, नींबूवाला, देहरादून में विश्व अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय के मेधावी छात्रों को सम्मानित एवं विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। बड़ी संख्या में आई मुस्लिम महिलाओं ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी एक भाई के रूप में प्रदेश और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए कार्य कर रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन भारत की एकता और अखंडता के संरक्षण के लिए हमारे मौलिक कर्तव्यों को याद करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में सदियों से  समानता और सभी धर्मों तथा समुदायों के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। भारत में अनेकों संस्कृतियों, परंपराओं, भाषाओं और खान-पान की विविधता के बावजूद एकता की भावना रही हैं। उन्होंने कहा वसुधैव कुटुम्बकम के महान सिद्धांत को आत्मसात करते हुए भारत ने हमेशा समूची दुनिया को एक परिवार के रूप में माना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ सभी समुदायों को आगे बढ़ाया जा रहा है। आज जन-धन योजना, उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना, मुफ्त राशन योजना जैसी अनेकों योजनाओं के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के सभी लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में करतारपुर साहिब कॉरिडोर का निर्माण, लंगर से सभी प्रकार के करों को हटाना, जियो पारसी योजना, बौद्ध सर्किट का विकास, जैन अध्ययन केंद्र की स्थापना, हज यात्रा की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने एवं तीन तलाक जैसी कुप्रथा का अंत जैसे निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के माध्यम से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में स्कूल, कॉलेज, छात्रावास, आईटीआई, स्वास्थ्य केंद्र और कौशल विकास संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा नए वक़्फ़ कानूनों में सुधार के माध्यम से वक़्फ़ संपत्तियों के पारदर्शी, उत्तरदायी की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं, ताकि इन संपत्तियों का वास्तविक लाभ समाज के गरीब, जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों तक पहुँच सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक प्रोत्साहन योजना के माध्यम से  अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए प्रोत्साहन राशि दे रही है। पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को वार्षिक छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा जनता से किए वादे के अनुसार हमने राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का काम किया है। हमने समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में पूरे देश को एक नई दिशा दिखाने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक क्षेत्रों में मांग के अनुरूप आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास को गति देने के लिए अल्पसंख्यक विकास निधि की स्थापना भी की गई है। जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष 4 करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री हुनर योजना के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को  रोजगार से जोड़ा जा रहा है। अल्पसंख्यक स्वरोजगार योजना के अंतर्गत स्वरोजगार के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी के साथ 10 लाख रुपये तक का ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। मौलाना आज़ाद एजुकेशन ऋण योजना के अंतर्गत अल्पसंख्यक वर्ग के गरीब छात्र-छात्राओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त शिक्षा ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके अंतर्गत पिछले 4 वर्षों में 169 लाभार्थियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में नया अल्पसंख्यक शिक्षा कानून लागू किया है। ये कानून किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के सभी अल्पसंख्यक समुदायों सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और मुस्लिमों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और संवैधानिक अधिकार प्रदान करेगा। जिसके अंतर्गत सभी मदरसों सहित सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सभी धर्मों की स्वायत्तता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून भी लागू किया है। ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रलोभन या छल से होने वाले धर्मांतरण को रोका जा सके और सामाजिक सौहार्द बना रहे। मुख्यमंत्री ने कहा विश्व के कई अन्य देशों में अल्पसंख्यक समुदायों को भेदभाव, उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने विश्व अल्पसंख्यक दिवस के अवसर पर सभी अल्पसंख्यको से आह्वान करते हुए कहा कि सभी सोशल मीडिया के माध्यम से उन देशों में हो रहे अत्याचार और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम, पद्मश्री डॉ. आर.के जैन, हेमकुंड साहिब  ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, अध्यक्ष वक्फ बोर्ड शादाब शम्स, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए राजस्व वसूली बढाने के निर्देश

The Chief Minister instructed officials to increase revenue collection.
The Chief Minister instructed officials to increase revenue collection.

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सचिवालय में वित्तीय वर्ष 2025-26 की राजस्व प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि राजस्व वसूली बढ़ाने पर विशेष ध्यान देते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरे किये जाएं।  संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं जिलाधिकारियों द्वारा जनपदों में इसकी नियमित निगरानी की जाए। कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। निबंधन एवं रजिस्ट्रेशन से संबंधित सभी कार्यों का डिजिटाइजेशन किया जाए। सब रजिस्ट्रार कार्यालयों का जिलाधिकारियों एवं संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए। रजिस्ट्री के दौरान संपति का उचित मूल्य दर्ज हो इसकी जाँच के लिए संपतियों का स्थलीय निरीक्षण भी किया जा जाए।   प्रदेश से बाहर के वाहनों से ग्रीन सेस लेने की कार्यवाही में लेटलतीफी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने परिवहन विभाग को ग्रीन सेस की वसूली जल्द शुरू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखते हुए राज्य के हित में वन संपदा का सही उपयोग किया जाए। तराई क्षेत्रों में कमर्शियल प्लांटेशन तथा जड़ी-बूटियों के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के समग्र विकास के लिए राजस्व में बढोतरी करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “इस दशक को उत्तराखंड का दशक” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए संसाधन वृद्धि को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है। साथ ही, खनन सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य को ₹200 करोड़ की केंद्रीय प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है, जो राज्य के सही दिशा में बढ़ने का परिचायक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए ₹24,015 करोड़ का कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक 62 प्रतिशत से अधिक प्राप्ति हो चुकी है। उन्होंने संबंधित विभागों से आगामी अवधि में लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए समन्वित और सक्रिय प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दीर्घकालिक आर्थिक सुदृढ़ता के लिए पूंजीगत निवेश पर विशेष बल दे रही है। पूंजीगत व्यय में 34 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिलेगी और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक और उत्तरदायी बनाने के लिए नीति सुधार, नवाचार तथा नई तकनीकों पर निरंतर ध्यान दिया जाना जरूरी है। पारदर्शिता, जवाबदेह और जनहित में ठोस परिणाम देने वाला प्रशासन हमारा उद्देश्य है। जिसके लिए सभी अधिकारियों को कड़े वित्तीय अनुशासन, बेहतर प्रबंधन और सामूहिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य में जुटे रहना होगा। बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, एल. फैनई, सचिव दिलीप जावलकर, युगल किशोर पंत, सी. रविशंकर, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. रंजन कुमार मिश्रा अपर सचिव अहमद इकबाल, सोनिका, हिमांशु खुराना, अनुराधा पाल, डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट, मनमोहन मैनाली, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से सभी जिलाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के नेतृत्व में उत्तराखंड के छात्रों को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता 2025 में सम्मानित किया गया

Students from Uttarakhand, under the guidance of THDC India Limited, were honored at the National Energy Conservation Painting Competition 2025.
Students from Uttarakhand, under the guidance of THDC India Limited, were honored at the National Energy Conservation Painting Competition 2025.

ऋषिकेश, 18 दिसंबर, 2025: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड और उत्तराखंड राज्य के लिए यह गर्व का क्षण रहा, जब राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस-2025 के अवसर राष्ट्रीय स्तर की चित्रकला प्रतियोगिता में राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले चार छात्र एवं छात्राओं को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह उपलब्धि न केवल टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड (उत्तराखंड राज्य की नोडल एजेंसी) की युवा पीढ़ी के मध्य ऊर्जा संरक्षण जागरूकता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को उजागर करती है, बल्कि संगठन और राज्य को प्रतिष्ठा और पहचान भी दिलाती है।

यह प्रतियोगिता भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के तहत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) द्वारा आयोजित की गई थी। भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार(एनईसीए)- 2025 और ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता-2025 के विजेताओं को सम्मानित किया।

सभा को संबोधित करते हुए, भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण ऊर्जा का सबसे पर्यावरण के अनुकूल और विश्वसनीय स्रोत है। ऊर्जा संरक्षण सिर्फ एक विकल्प नहीं है, बल्कि आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ऊर्जा की बचत करने का अर्थ सिर्फ कम उपयोग करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा का बुद्धिमानी से, जिम्मेदारी से और कुशलता से उपयोग करना है।

माननीय केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी कार्य मंत्री, श्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है, जो वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°सी से नीचे रखने के लक्ष्य के अनुरूप है। उन्होंने ऊर्जा दक्षता में सुधार की प्रभावशाली दर के साथ भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।

माननीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री, श्री श्रीपाद नाइक ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कारों ने ऊर्जा संरक्षण में अनुकरणीय प्रयासों को पहचानने की एक सुदृढ़ परंपरा को बढ़ावा दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा संरक्षण केवल प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यवहार में बदलाव के बारे में भी है।

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के सचिव, श्री पंकज अग्रवाल ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व ने ऊर्जा दक्षता और संरक्षण को भारत की विकास रणनीति के केंद्र में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित विकास और विकसित भारत 2047 का विजन केवल विवेकपूर्ण ऊर्जा उपयोग से ही प्राप्त किया जा सकता है।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री सिपन कुमार गर्ग ने इस उपलब्धि पर विजेताओं और उत्तराखंड राज्य को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता जैसी पहल ऊर्जा संरक्षण के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता फैलाने के लिए असरदार प्लेटफॉर्म का काम करती हैं, साथ ही बच्चों को हरित भविष्य के लिए सततता का एंबेसडर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

उत्तराखंड से ग्रुप-ए से कुमारी पीहू रानी और मास्टर रिदम दास और ग्रुप-बी से कुमारी इशिता कुमारी और कुमारी शताक्षी वत्स, को समारोह के दौरान सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

इस मौके पर श्री नीरज वर्मा, कार्यपालक निदेशक (प्रभारी, एनसीआर, कार्यालय), डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा. केन्द्रीय संचार), श्री ए. के. विश्वकर्मा, उप महाप्रबंधक (मा.सं.) (नोडल ऑफिसर-उत्तराखंड) के साथ टीएचडीसीआईएल, विद्युत मंत्रालय एवं अन्य पीएसयू के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

सहकारी बैंकों में एनपीए वसूली को चलायें विशेष अभियान: डॉ धन सिंह रावत

Launch a special campaign for NPA recovery in cooperative banks Dr. Dhan Singh Rawat
Launch a special campaign for NPA recovery in cooperative banks Dr. Dhan Singh Rawat

सहकारिता मेलों की तैयारी को अधिकारियों को दिये निर्देश

देहरादून, 18 दिसम्बर 2025

माननीय सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने आज सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय कार्यप्रणाली की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य सहकारी बैंक के बढ़ते एनपीए (Non-Performing Assets) को गंभीर विषय बताते हुए मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बड़े एनपीए खातों की शीघ्र बैठक आयोजित कर प्रभावी वसूली की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

बैठक के दौरान मंत्री ने 21 सहकारी समितियों से संबंधित एसआईटी जांच के आदेशों के क्रम में अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत जानकारी ली और जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

माननीय मंत्री ने आगामी दिनों में देहरादून, ऊधम सिंह नगर एवं टिहरी जनपद में आयोजित होने वाले सहकारिता मेलों की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी व्यवस्थाएं समय से पूर्ण की जाएं तथा इन तीनों जनपदों में सहकारिता मेले भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप में आयोजित किए जाएं, जिससे सहकारिता आंदोलन की उपलब्धियां आमजन तक प्रभावी रूप से पहुंच सकें।

डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता विभाग राज्य की आर्थिक एवं ग्रामीण विकास व्यवस्था की रीढ़ है और विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, अनुशासन एवं जनविश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई तथा सहकारिता गतिविधियों को सुदृढ़ बनाना सरकार की प्राथमिकता है।

बैठक में निबंधक सहकारिता डॉ मेहरबान सिंह बिष्ट, अपर निबंधक श्रीमती ईरा उप्रेती श्री आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल, एम पी त्रिपाठी, उप निबंधक रमिंद्री मंदरवाल, प्रबंध निदेशक प्रदीप महरोत्रा, अनु सचिव सुरेंद्र दत्त बेलवाल सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी एवं सहकारिता संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

पॉली किड्स बालावाला का वार्षिक समारोह “धरोहर” धूम धाम से मनाया गया

Poly Kids Balawala celebrated its annual function Dharohar with great pomp and show.
Poly Kids Balawala celebrated its annual function Dharohar with great pomp and show.

देहरादून – 18 दिसंबर 2025- द पॉली किड्स बालावाला का वार्षिक समारोह ‘विविधता में एकता’ सर्वे ऑफ इंडिया ऑडिटोरियम, हाथीबरकला में आयोजित किया गया। यह एक शानदार आयोजन था जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों की रंगीन संस्कृतियों को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में मनमोहक प्रस्तुतियाँ और प्रदर्शन हुए जिन्होंने प्रत्येक राज्य के सार को समेट लिया। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण सरस्वती वंदना, पंजाबी भांगड़ा, गुजराती डांडिया, हमारो उत्तराखंड और साउथर्न वाइब्स थे जिन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

बलावाला शाखा की निदेशक श्रीमती शालिनी नेगी ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। सभा को संबोधित करते हुए द पॉली किड्स के चेयरमैन कैप्टन मुकुल महेंद्रू ने स्कूल की रचनात्मकता, शिक्षा और विकास की सराहना की।

वार्षिक समारोह में संस्थापक निदेशक श्रीमती रंजना महेंद्रू, निदेशक श्री रोहित सिंह, श्रीमती नंदिता सिंह, श्री सिद्धार्थ चंदोला, श्री आलोक छेत्री, श्रीमती वंदना छेत्री, श्रीमती शिप्रा आनंद, कार्यक्रम समन्वयक श्रीमती दीप्ति सेठी, प्रधानाध्यापिका श्रीमती पारुल, श्रीमती पूनम निगम और श्रीमती संगीता मल्होत्रा ​​और  द पॉली किड्स के सभी कर्मचारी उपस्थित थे।

बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाकर ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान को सशक्त बनाता है एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेज़ इंडिया

SOS Children's Villages India strengthens the 'Child Marriage Free India' campaign by spreading awareness against child marriage.
SOS Children's Villages India strengthens the 'Child Marriage Free India' campaign by spreading awareness against child marriage.

देहरादून – 18 दिसंबर 2025 : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के समर्थन में, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेज़ इंडिया ने अपने विभिन्न विलेज स्थानों पर बाल विवाह की रोकथाम को लेकर एक जागरूकता अभियान चलाया।

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम को लेकर समुदाय की समझ को सुदृढ़ करना और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के महत्व को उजागर करना था। समुदाय के सदस्यों को विवाह की कानूनी न्यूनतम आयु के बारे में जागरूक किया गया—लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष। सत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि उचित आयु में विवाह करने से बेहतर शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है, बच्चों को अपना बचपन जीने, शिक्षा जारी रखने और आत्मविश्वासी एवं आत्मनिर्भर व्यक्ति बनने का अवसर मिलता है। सत्रों के अंत में, सभी प्रतिभागियों ने बाल विवाह को रोकने की शपथ ली। ये सत्र फैमिली स्ट्रेंथनिंग प्रोग्राम, फैमिली लाइक केयर प्रोग्राम और किनशिप केयर प्रोग्राम के संयुक्त प्रयास के तहत आयोजित किए गए।

एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेज़ इंडिया के सीईओ, सुमंत कर ने कहा, “हमारे विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर बच्चों ने भारत में बाल विवाह को समाप्त करने के उद्देश्य से आयोजित इस जागरूकता अभियान में भाग लिया, जो केंद्र सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के अनुरूप है। इसमें शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभिभावकों, समुदाय के सदस्यों और हितधारकों को समान उत्साह के साथ आगे आना चाहिए ताकि सही संदेश बच्चों तक पहुँचे। हमें सभी को मिलकर बच्चों के अधिकारों और कल्याण की वकालत करनी चाहिए तथा बाल विवाह के किसी भी मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए।”

गुवाहाटी में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने सत्र में भाग लिया, जो सभी स्थानों में सर्वाधिक भागीदारी रही। अलीबाग में 52 महिला प्रतिभागियों ने जागरूकता अभियान में हिस्सा लिया, जिसके बाद एक जागरूकता गतिविधि आयोजित की गई। वाराणसी में 45 प्रतिभागियों के साथ एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम लागू किया गया, जबकि भोपाल सत्र में एसओएस चिल्ड्रन्स विलेज की 40 लड़कियों के साथ फैमिली स्ट्रेंथनिंग प्रोग्राम की 10 लड़कियाँ और किनशिप केयर प्रोग्राम की 10 लड़कियाँ शामिल हुईं। फरीदाबाद के ग्रीनफील्ड्स विलेज में आयोजित जागरूकता अभियान में 28 बच्चों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

गुवाहाटी में आयोजित सत्र को अमिनगांव की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट का सहयोग प्राप्त हुआ और इसे जिला बाल संरक्षण अधिकारी एवं समन्वयक द्वारा संचालित किया गया, जिसमें फैमिली लाइक केयर प्रोग्राम के राज्य निदेशक श्री अमर ज्योति सरमा की उपस्थिति रही। वाराणसी में, डीसीपीओ सुश्री निरुपमा सिंह और ग्राम प्रधान श्री मनोज यादव द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में बाल विवाह के कानूनी ढांचे, उसके दुष्परिणामों और प्रारंभिक चेतावनी संकेतों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसके बाद जागरूकता चार्ट तैयार किए गए और दानियालपुर व दुबकिया में रैली निकाली गई। भोपाल में, पिपलानी थाना के अधिकारियों ने सत्र में भाग लिया और कानूनी प्रावधानों, सुरक्षा दिशानिर्देशों तथा वास्तविक मामलों के बारे में जानकारी दी, साथ ही एक एकांकी नाटक प्रस्तुत किया गया जिसने खुले संवाद को प्रोत्साहित किया। फरीदाबाद के ग्रीनफील्ड्स में आयोजित सत्र, जिसे चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर सुश्री कोमल चौधरी ने संचालित किया, ने बच्चों को संरक्षण से जुड़े मुद्दों को समझने का अवसर प्रदान किया, जबकि बवाना में सम्भावना आर्ट्स एंड कल्चर टीम के सहयोग से प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए, जिससे बाल विवाह समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सार्थक सामुदायिक संवाद शुरू हुआ। विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री हरिकृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को पीआरएसआई द्वारा ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशन कॉन्फ्रेंस-2025 में सोशल मीडिया के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए नेशनल अवार्ड्स से सम्मानित किया गया

THDC India Limited was honored with National Awards by PRSI for the best use of social media at the All India Public Relations Conference-2025.
THDC India Limited was honored with National Awards by PRSI for the best use of social media at the All India Public Relations Conference-2025.

ऋषिकेश-17 दिसंबर 2025: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, विद्युत् क्षेत्र की प्रमुख पीएसयू, को 47वें ऑल इंडिया पब्लिक रिलेशन कांफ्रेन्स-2025 में ‘कॉर्पोरेट कैंपेन में सोशल मीडिया के सर्वश्रेष्ठ उपयोग’ और ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट रिपोर्ट’ कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार प्रदान किये गए। यह पुरस्कार पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (PRSI) द्वारा होटल एमराल्ड, देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित कॉन्फ्रेंस में प्रदान किये गए |

श्री सिपन कुमार गर्ग, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने इस उपलब्धि पर टीम टीएचडीसीआईएल को बधाई दी और कहा कि यह सम्मान संगठन के पारदर्शी, सुसंगत और परिणाम-उन्मुख कम्युनिकेशन फ्रेमवर्क को दिखाती है। श्री गर्ग ने कहा कि टीएचडीसी द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म का रणनीतिक इस्तेमाल और सस्टेनेबिलिटी पहलों पर इसके फोकस्ड कम्युनिकेशन ने संगठन को अपनी डेवलपमेंट कहानी को प्रभावी ढंग से बताने में मदद की है, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा के प्रति इसकी मज़बूत प्रतिबद्धता और भारत के पहले 1000 मेगावाट वेरिएबल स्पीड टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट में इसके अग्रणी प्रयास शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का भरोसेमंद और ज़िम्मेदार कम्युनिकेशन स्टेकहोल्डर का भरोसा बढ़ाता है और राष्ट्र निर्माण में टीएचडीसी की भूमिका को मज़बूत करता है।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की ओर से ये अवॉर्ड डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (मा. सं.एवं प्रशा. और केन्द्रीय संचार) ने प्राप्त किए। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि यह राष्ट्रीय पहचान एक सामूहिक संस्थागत प्रयास और ज़िम्मेदार कम्युनिकेशन के प्रति एक स्ट्रक्चर्ड अप्रोच को दिखाती है। उन्होंने कहा कि निगम का डिजिटल आउटरीच सिर्फ़ विज़िबिलिटी के लिए नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और लगातार स्टेकहोल्डर जुड़ाव के लिए एक भरोसेमंद माध्यम के तौर पर डिज़ाइन किया गया है।
यह सम्मान टीएचडीसी द्वारा सोशल मीडिया के प्रभावी इस्तेमाल को मान्यता देता है, जिसके ज़रिए कंपनी अपनी संगठनात्मक उपलब्धियों, प्रोजेक्ट के अहम पड़ावों, सस्टेनेबिलिटी पहलों और जनहित की जानकारी को एक व्यापक और पारदर्शी सस्टेनेबल डेवलपमेंट रिपोर्ट के साथ साझा करती है, जो संगठन की पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG) प्रतिबद्धताओं को दर्शाती है, जिससे उसकी कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा और पहुंच बढ़ती है।

ऊर्जा संरक्षण दिवस पर दून इंटरनेशनल स्कूल में हुआ पोस्टर मेकिंग कंपटीशन, 26 छात्रों को मिला आकर्षक पुरस्कार

On Energy Conservation Day, a poster making competition was held at Doon International School, and 26 students received attractive prizes.
On Energy Conservation Day, a poster making competition was held at Doon International School, and 26 students received attractive prizes.

देहरादून 17th दिसंबर। आज दून इंटरनेशनल स्कूल सीनियर विंग में भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के “जिज्ञासा” कार्यक्रम के अंतर्गत सीएसआईआर – भारतीय पेट्रोलियम संस्थान एवं सोसाइटी फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट इन साइंस टेक्नोलॉजी एंड अग्री के संयुक्त तत्वावधान में ऊर्जा संरक्षण पर एक पोस्टर मेकिंग कंपटीशन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विभिन्न स्कूल्स के छात्र छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
आयोजन में विभिन्न स्कूल्स के 26 छात्रों को आकर्षण इनाम के साथ मोमेंटो एवं अवॉर्ड सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय पैट्रोलियम संस्थान के निदेशक डॉ हरेंद्र सिंह बिष्ट ने छात्रों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार वितरण के बाद अपने ओजस्वी उद्बोधन में उपस्थित छात्र- छात्राओं की ऊर्जा के विभिन्न रूपों के बारे में समझाया और जीवन में ऊर्जा संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन प्रधानाचार्य डॉ दिनेश बर्थवाल द्वारा प्रेषित किया गया। पोस्टर मेकिंग कंपटीशन के ज्यूरी सदस्य डीएवी कॉलेज के प्रो हरिओम शंकर, एसजीआरआर यूनिवर्सिटी की डॉ नेहा सक्सेना एवं डीआईएस की सुश्री अनीता देवी ने विजेताओं के नाम घोषित किए। पोस्टर मेकिंग कंपटीशन में दो वर्गों में छात्रों ने भाग लिया, पहले वर्ग में कक्षा 6 से 8 के छात्र दूसरे वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों ने प्रतिभाग किया। पुरस्कृत छात्रों की कृति को दून इंटरनेशनल स्कूल में आगामी होने वाली पीटीएम के दिन प्रदर्शित किया जाएगा।
कार्यक्रम का संचालन दून स्कूल समन्वयक सुश्री काजल क्षेत्री द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आयोजन सचिव डॉ कुँवर राज अस्थाना, जिज्ञासा कार्यक्रम की समन्वयक डॉ आरती तथा टीम के सदस्य डॉ ज्योति पोरवाल, डॉ कमल कुमार, अंजलि भटनागर, सपना पैन्यूली, संजय कुमार , गोकुल कुमार व पंकज भास्कर उपस्थित थे।

समकालीन अध्यात्म और कथा-साहित्य का सशक्त संवाद: नई दिल्ली में कार्तिकेय वाजपेयी की पुस्तक ‘द अनबिकमिंग’ का लोकार्पण

A powerful dialogue between contemporary spirituality and fiction Kartikeya Vajpayee's book 'The Unbecoming' launched in New Delhi.
A powerful dialogue between contemporary spirituality and fiction Kartikeya Vajpayee's book 'The Unbecoming' launched in New Delhi.

पद्म विभूषण से सम्मानित, दार्शनिक और राजनेता डॉ. कर्ण सिंह, पद्म विभूषण से सम्मानित, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी, वैष्णवाचार्य और धर्मगुरु आचार्य श्री पुंडरीक महाराज और तिब्बत हाउस के निदेशक गेशे दोरजी दामदुल लेखक के साथ पुस्तक विमोचन में शामिल हुए।

देहरादून- 17 दिसंबर 2025: नई दिल्ली के साहित्यिक परिदृश्य में एक स्मरणीय क्षण रचते हुए, प्रथम उपन्यासकार कार्तिकेय वाजपेयी ने अपने बहुप्रतीक्षित उपन्यास ‘द अनबिकमिंग’ का गरिमामय लोकार्पण किया। प्रभा खेतान फाउंडेशन की प्रतिष्ठित पुस्तक‑पहल ‘किताब’ के अंतर्गत आयोजित इस सुसंवेदनशील और विचारोत्तेजक संध्या ने साहित्य प्रेमियों, विद्वानों और संवादधर्मियों को एक साथ लाकर गहन विमर्श, आत्मचिंतन और रचनात्मक आदान‑प्रदान का समृद्ध अवसर प्रदान किया।

इस आयोजन में लेखक, विद्वान और उत्साही पाठक एक साथ आए और उपन्यास में निहित दार्शनिक विषयों पर संवाद किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति रही, जिससे एक ऐसी शांत और आत्ममंथनपूर्ण वातावरण की रचना हुई, जो उपन्यास की दार्शनिक गहराई को प्रतिबिंबित करता था।

इस पुस्तक में परम पावन दलाई लामा और स्वामी सर्वप्रियानंद की भूमिकाएँ (फॉरवर्ड) शामिल हैं। संध्या के दौरान उनके योगदानों का उल्लेख पुस्तक की आध्यात्मिक और दार्शनिक प्रामाणिकता के प्रमाण के रूप में किया गया, जिससे ‘द अनबिकमिंग’ को आत्म-चिंतन और करुणा की एक जीवंत परंपरा के भीतर स्थापित किया गया।

विमोचन के अवसर पर बोलते हुए लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा,“द अनबिकमिंग’ इस समझ पर आधारित है कि हमारे अधिकांश दुःख का कारण उन पहचानों से चिपके रहना है, जो भय और अपेक्षाओं से गढ़ी जाती हैं। मूलतः यही वह एकमात्र तत्व है जो हमें एक व्यक्ति के रूप में सीमित करता है। इसलिए निराकार बनिए, विचारों से मुक्त रहिए और अपनी स्वयं-निर्मित छवि तथा दूसरों द्वारा थोपे गए दृष्टिकोणों से स्वयं को मुक्त कीजिए। ‘अनबिकमिंग’ एक शांत वापसी है—जीवन को अपना उद्देश्य स्वयं प्रकट करने देने का निमंत्रण, न कि उस पर कोई उद्देश्य थोपने का प्रयास। आधुनिक जीवन में आत्म-मंथन  अत्यंत आवश्यक है। यह हमें स्पष्टता के साथ कर्म करने में सहायक होता है, साथ ही उपस्थिति और सजगता में स्थिर बनाए रखता है।”

विमोचन के अवसर पर आयोजित चर्चा सत्र में डॉ. कर्ण  सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी,आचार्य श्री पुंडरिक महाराज और गेशे दोरजी दामदुल जैसे विशिष्ट वक्ताओं का पैनल शामिल था। पैनल ने पुस्तक में पिरोये गये  प्रमुख  विषयों—जैसे पहचान, आंतरिक स्पष्टता, उद्देश्य और ‘अनबिकमिंग’ की प्रक्रिया—पर अपने विचार साझा किए।यह चर्चा समकालीन महत्वाकांक्षा, जीवन में लचीलापन  और आधुनिक समय में अर्थ की तलाश जैसे विषयों पर केंद्रित थी। तेजी से बदलती और अशांत होती दुनिया में आत्ममंथन के महत्व को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। सत्र का संचालन कथक नृत्यांगना और पंडित बिरजू महाराज की पौत्री, शिंजिनी कुलकर्णी ने किया, जो प्रभा खेतान फाउंडेशन की ‘एहसास वुमन’ भी हैं। श्रोताओं की उत्साही सहभागिता से यह स्पष्ट हुआ कि चर्चा के विषय उनके भीतर गहराई तक प्रतिध्वनित हुए।

पुस्तक में सीखने और व्यक्तिगत विकास की यात्रा पर विचार करते हुए, डॉ. कर्ण सिंह ने उपन्यास के विषयों और भारत की दार्शनिक परंपरा के बीच निरंतरता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लोग अक्सर पूछते हैं कि सार्वजनिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन को कैसे जोड़ा जा सकता है. पिछले 75 वर्षों के मेरे अनुभव में यह पूरी तरह संभव है—बशर्ते व्यक्ति के भीतर के आत्मबोध और सार्वजनिक जीवन—दोनों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता हो. ‘द अनबिकमिंग’ में कार्तिकेय ने इन दोनों आयामों को अत्यंत सुंदर ढंग से संयोजित किया है. हर प्रथम उपन्यास की तरह, लेखक की उपस्थिति इसमें गहराई से महसूस होती है. यह पुस्तक बाहरी जीवन और आंतरिक साधना के सामंजस्य को प्रतिबिंबित करती है. मैं कार्तिकेय को उनके प्रथम उपन्यास के लिए बधाई देता हूँ और इसकी सफलता की कामना करता हूँ।”

लोकार्पण समारोह में बोलते हुए डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा,
“‘द अनबिकमिंग’ में कार्तिकेय ने दक्षता, प्रभावशीलता और एकाग्रता—इन तीनों को जीवन की एक विचारपूर्ण दर्शन-व्यवस्था में पिरोया है. प्राचीन ज्ञान से प्रेरणा लेकर और उसे क्रिकेट के अनुशासन के माध्यम से अभिव्यक्त करते हुए, यह पुस्तक दिखाती है कि जागरूकता के माध्यम से ही संतुलन प्राप्त होता है—जहाँ मौन शक्ति बन जाता है और आध्यात्मिकता आत्म-नियंत्रण का मार्ग।”

पुस्तक की सीख और व्यक्तिगत विकास में इसकी संलग्नता पर विचार करते हुए, आचार्य श्री पुंडरिक महाराज ने कहा , “यह पुस्तक पहचान पर विचार करने का एक विचारशील दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो केवल भूमिकाओं और उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, और यह हमें यह भी याद दिलाती है कि सच्चा सीखना एक अंदरूनी और सतत प्रक्रिया है।”

उपन्यास और महामहिम दलाई लामा के संदेश के बीच गहरे सामंजस्य पर प्रकाश डालते हुए गेशे दोरजी दामदुल ने कहा कि उपन्यास में स्पष्टता, करुणा और ईमानदार आत्म-बोध पर बल दिया गया जो  महामहिम की शिक्षाओं के मूल सार को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने बताया कि पुस्तक न केवल आध्यात्मिक संबंधों की पड़ताल करती है, बल्कि गुरु–शिष्य परंपरा को भी अत्यंत पवित्रता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है—जहाँ समर्पण, विश्वास और आंतरिक परिवर्तन की यात्रा स्वाभाविक रूप से उभरकर सामने आती है।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित ‘द अनबिकमिंग’ एक गहन और विचारोत्तेजक उपन्यास है, जो प्रसिद्ध क्रिकेटर सिद्धार्थ और उनके जीवन-मार्ग को दिशा देने वाले अनुभवी कोच अजय के बीच विकसित होते संबंध को केंद्र में रखता है। जब उनका वर्षों पुराना गुरु–शिष्य संबंध कठिन दौर से गुजरता है, तो दोनों ही अपनी पहचान के भ्रम, अनिश्चित भविष्य के भय और अपेक्षाओं के भारी दबाव से जूझने को मजबूर होते हैं। भावनात्मक सच्चाई और दार्शनिक आत्ममंथन को सहजता से जोड़ते हुए, यह उपन्यास विरासत में मिली पहचानों को छोड़कर अपने वास्तविक अस्तित्व की ओर लौटने की प्रक्रिया पर गहरा और संवेदनशील चिंतन प्रस्तुत करता है

कार्तिकेय वाजपेयी एक अनुभवी वकील हैं और नई दिल्ली स्थित अपनी लॉ फर्म का सफलतापूर्वक संचालन करते हैं। राज्य स्तर पर क्रिकेट खेलने का अनुभव रखने वाले वाजपेयी वर्तमान में लॉयर्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में टीम इंडिया लॉयर्स का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। वे लंबे समय से ध्यान साधनाओं के अभ्यासकर्ता हैं और ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन, क्रिया योग, बौद्ध दर्शन तथा अद्वैत वेदांत के अध्ययन में उनकी गहरी रुचि रही है। आत्म-मंथन की उनकी सतत यात्रा उनके लेखन को विशिष्ट स्पष्टता, प्रामाणिकता और अनुभवजन्य गहराई प्रदान करती है, जिससे वे समकालीन भारतीय साहित्य में एक चिंतनशील विचारक और उभरती हुई प्रभावशाली आवाज़ के रूप में स्थापित होते हैं

पीएचसी शक्तिफार्म सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उच्चीकृतः डॉ. धन सिंह रावत

PHC Shaktifarm upgraded to Community Health Centre Dr. Dhan Singh Rawat
PHC Shaktifarm upgraded to Community Health Centre Dr. Dhan Singh Rawat
30 बेडेड सीएचसी के संचालन को विभिन्न संवर्ग में 32 पद स्वीकृत
कहा, ऊधमसिंहनगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को मिला विस्तार
देहरादून, 17 दिसम्बर 2025
ऊधमसिंह नगर जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूती देते हुये राज्य सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शक्तिफार्म को उच्चीकृत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बना दिया है। शासन स्तर से इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के संचालन के लिये आपईएचएस मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्साधिकारी, पैरामेडिकल स्टॉफ सहित प्राशसनिक संवर्ग के कुल 35 पदों का भी सृजन किया गया है।  शक्तिफार्म पीएचसी का सीएचसी में उच्चीकरण से स्थानीय स्तर पर आम लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधिकारियों ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार प्रदेश की सेहत को लेकर फिक्रमंद है। सरकार प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार के लिये लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में सरकार ने ऊधमसिंह नगर जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तार देते हुये प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शक्तिफार्म (टाईप-ए) को 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उच्चीकृत कर दिया है। जिसके शासन स्तर से शासनदेश भी जारी कर दिये गये हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रावत ने बताया कि 30 शैय्यायुक्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आईपीएचएस मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टॉफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य मेडिकल स्टॉफ की तैनाती को कुल 32 पद सृजित किये गये हैं। जिसमें 20 नियमित तथा 12 आउटसोर्स के पद शामिल हैं। सरकार द्वारा नवसृजित पदों में चिकित्सा अधीक्षक, पब्लिक हेल्थ स्पेश्लिस्ट, जनरल सर्जन, फिजिशियन, स्त्रीरोग विशेषज्ञ, बालरोग विशेषज्ञ, निश्चेतक, दंत शल्यक के एक-एक पद शामिल हैं जबकि पीएचसी में पूर्व में सृजित चिकित्सा अधिकारी के एक पद को सीएचसी में समायोजित किया गया है। इसके अलावा पैरामेडिकल संवर्ग में 08, प्रशासनिक संवर्ग में 03, तथा 12 आउटसोर्स के पदों को सृजित किया गया है। डॉ. रावत ने बताया कि उच्चीकृत चिकित्सा इकाई में आईपीएचएस मानकों के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय उपकरण मुहैया कराने एवं अवसंरचनात्मक कार्यों को नियत समय पर पूरा करने के लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने बताया कि शक्तिफार्म में अस्पताल के उच्चीकरण होने से स्थानीय स्तर पर आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेगी साथ ही स्थानीय लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे उपचार से राहत मिलेगी।
Congress submitted a memorandum to SP City regarding traffic arrangements.

अपनी शादी के लिए दून पहुंचे क्रिकेटर कुलदीप यादव

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देहरादून।  स्टार क्रिकेटर कुलदीप यादव गुरुवार को अपनी शादी समारोह के लिए दून पहुंच गए हैं। वह कुछ देर रायपुर स्थित सरबजीत कंपलेक्स हाथी...
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