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होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने दिसम्बर 2025 में 4.46 लाख यूनिट बिक्री के साथ मजबूत प्रगति दर्ज की।

Honda Motorcycle and Scooter India recorded strong growth in December 2025 with sales of 4.46 lakh units.
Honda Motorcycle and Scooter India recorded strong growth in December 2025 with sales of 4.46 lakh units.

ग्राहकों के विश्वास और प्रतिबद्धता से 45% वार्षिक वृद्धि दर्ज की।

देहरादून- 06 जनवरी 2026: होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने दिसम्बर 2025 में कुल 4,46,048 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो मजबूत मांग और कंपनी के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है मिलियन ग्राहकों के लिए गतिशीलता को सुरक्षित, स्वच्छ और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में। इसमें 3,92,306 यूनिट्स घरेलू बिक्री और 53,742 यूनिट्स निर्यात शामिल हैं।

एचएमएसआई ने दिसम्बर 2024 की तुलना में 45% वर्ष-दर-वर्ष (YOY) वृद्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में एचएमएसआई के उत्पाद पोर्टफोलियो की मजबूत मांग को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल–दिसम्बर 2025) की Year-to-Date (YTD) अवधि में एचएमएसआई ने कुल 46,78,814 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। इसमें 42,04,420 यूनिट्स घरेलू बिक्री और 4,74,394 यूनिट्स निर्यात शामिल हैं। दिसम्बर 2024 की तुलना में यह 3% YOY वृद्धि को दर्शाता है।

एचएमएसआई दिसम्बर 2025 की प्रमुख उपलब्धियाँ:

सड़क सुरक्षा: ‘सेफ़्टी फॉर एवरीवन’ की अपनी दृष्टि के अनुरूप, एचएमएसआई ने नई दिल्ली, जयपुर, सोलापुर, मेरठ, भोपाल, रांची, राजकोट, गोवा, कालीकट, राजमुंदरी, लुधियाना, समस्तीपुर और हासन सहित विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान आयोजित किए। इन अभियानों का उद्देश्य जिम्मेदार राइडिंग को प्रोत्साहित करना और सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना था, ताकि सभी के लिए सुरक्षित सड़कों का निर्माण हो सके।

इसके अतिरिक्त, एचएमएसआई ने रायपुर में रोड सेफ्टी कन्वेंशन आयोजित किया, जिसमें शिक्षकों को जोड़ा गया ताकि वे बच्चों में सुरक्षित राइडिंग आदतें विकसित कर सकें और प्रारंभिक अवस्था से ही सुरक्षा की संस्कृति का निर्माण हो।

नेटवर्क विस्तार: होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने औरैया, बेंगलुरु, दिल्ली और झारग्राम में नए अधिकृत डीलरशिप खोलकर अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है। इन डीलरशिप्स को विशेष रूप से प्रशिक्षित सेल्स और सर्विस टीम का सहयोग प्राप्त है, जो ग्राहकों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करती है। यह एचएमएसआई की ग्राहक-केंद्रित मोबिलिटी समाधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आगे बढ़ते हुए, कंपनी का ध्यान स्पष्ट है ऐसी मोबिलिटी प्रदान करना जो ग्राहकों को सशक्त बनाए, सुरक्षा को प्राथमिकता दे और एक सतत भविष्य में योगदान करे।

आईआईटी रुड़की ने ‘एहेड2025’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से स्वास्थ्य और विकास पर वैश्विक विमर्श को दी नई दिशा

IIT Roorkee has given a new direction to the global discourse on health and development through the 'AHEAD2025' international conference.
IIT Roorkee has given a new direction to the global discourse on health and development through the 'AHEAD2025' international conference.

रुड़की)।    भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने दिसंबर 2025 में स्वास्थ्य और विकास पर केंद्रित ‘एहेड2025’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और पाँच-दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया। इस सम्मेलन ने साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, नीति-निर्माण और सामाजिक प्रभाव को जोड़ने वाले अकादमिक प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान की। आईआईटी रुड़की की एहेड लैब, जिसे डॉ. प्रताप सी. मोहंती ने स्थापित किया है, ने इस सातवें प्रमुख शैक्षणिक आयोजन की मेज़बानी की। सम्मेलन का विषय था “स्वास्थ्य और विकास में वैश्विक व्यवधान: चुनौतियाँ, नवाचार और इक्कीसवीं सदी के लिए मार्ग”, जिसमें स्वास्थ्य प्रणालियों की लचीलापन क्षमता, जलवायु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य, वित्तपोषण, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, प्रौद्योगिकीय रूपांतरण और क्षेत्रीय असमानताओं जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
सम्मेलन में दस विषयगत ट्रैक शामिल थे—जिनमें स्वास्थ्य वित्तपोषण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य, लैंगिक असमानताएँ, वृद्धावस्था और कल्याण, पोषण और मानव पूंजी, डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियाँ आदि प्रमुख रहे। उद्घाटन सत्र को प्रो. वी. सी. श्रीवास्तव (आईआईटी रुड़की), प्रो. भानु दुग्गल (एम्स ऋषिकेश) और प्रो. स्मिता झा (आईआईटी रुड़की) ने संबोधित किया।
मुख्य भाषण प्रो. साबु पद्मदास (यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथैम्प्टन, यू.के ), डॉ. मार्गरेट त्रियाना (विश्व बैंक), डॉ. सुमन सेठ (यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स, यू.के), प्रो. प्रकाश सी. कांडपाल और प्रो. दिब्येंदु मैती (दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स) ने दिए। सम्मेलन में विश्व बैंक, यूनिवर्सिटी ऑफ़ नोट्रे डेम (यूएसए), आईआईटी कानपुर, जेएनयू और बीएचयू जैसे संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही।
सभी शोध पत्रों की कठोर सहकर्मी-समीक्षा की गई और सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार डॉ. बसंत के. पांडा (जनसंख्या परिषद, भारत) तथा तनिषा (लैंकेस्टर विश्वविद्यालय, यू.के) को प्रदान किए गए।
सम्मेलन के पूरक के रूप में, “स्वास्थ्य और कल्याण में बड़े-पैमाने के डेटा विश्लेषण” पर पाँच-दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका संयोजन डॉ. मनीष के. अस्थाना ने किया। इसने युवा शोधकर्ताओं को डेटा-आधारित नीति विश्लेषण की नई क्षमताएँ प्रदान कीं।
समापन सत्र में घोषणा की गई कि एहेड2026 का आयोजन 14–16 दिसंबर 2026 को आईआईटी रुड़की में होगा। इस प्रकार, आईआईटी रुड़की ने स्वास्थ्य और विकास के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय ज्ञान साझेदार और वैश्विक शैक्षणिक मंच के रूप में अपनी भूमिका को और मज़बूत किया।

प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं: मुख्य सचिव

Due to the fact that a major portion of the state is covered with forests, the state has immense potential for eco-tourism Chief Secretary
Due to the fact that a major portion of the state is covered with forests, the state has immense potential for eco-tourism Chief Secretary

देहरादून।  मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में वन विभाग के अंतर्गत इको टूरिज्म के संबंध में उच्च अधिकार प्राप्त समिति की बैठक संपन्न हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश का अधिकतर भूभाग वनाच्छादित होने से प्रदेश में इको टूरिज्म की अत्यधिक सम्भावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इको टूरिज्म की सम्भावनाओं को तलाशते हुए ऐसे स्पॉट चिन्हित कर विकसित किए जाएं जो इको टूरिज्म के लिए इको सिस्टम तैयार करें।  मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग के लिए पॉलिसी तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रैकिंग और माउंटेनियरिंग की एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी 15 जनवरी तक फाइनल करते हुए शासन को प्रस्तुत किए जाने की बात कही। कहा कि पॉलिसी तैयार किए जाने से पूर्व प्राईवेट स्टैक होल्डर्स से भी संवाद कर लिया जाए, ताकि पॉलिसी बनने के बाद आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से बचा जा सके। मुख्य सचिव ने ट्रैकिंग के लिए नई चोटियां खोले जाने की दिशा में कार्य किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्यावरण ऑडिट सहित अन्य सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कर ली जाएं। उन्होंने शीघ्र ही इसकी एसओपी भी जारी किए जाने की बात भी कही है।  मुख्य सचिव ने चौरासी कुटिया के जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को समय से कार्य पूर्ण करने हेतु सभी कार्यों की टाइम लाइन निर्धारित किए जाने की बात कही। कहा कि कार्य समय से पूर्ण हो सके इसके लिए कार्यदायी संस्था को लक्ष्य दिए जाएं। मुख्य सचिव ने इको टूरिज्म के लिए जबरखेत मॉडल को अन्य चिन्हित इको टूरिज्म स्थलों पर भी लागू किए जाने की बात कही। कहा कि इनको  और ससमय पूर्ण किए जाने के लिए संभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) को टास्क प्रदान किए जाएं कि वे किस प्रकार से अपने क्षेत्र में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने 10 चिन्हित साइट्स का प्लान एक माह में तैयार करके शासन को भेजे जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने वन क्षेत्र के अंतर्गत पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए मैकेनिज्म तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इनके संचालन की जिम्मेदारी इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसका गठन ही इसी उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने इसके लिए इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड को मजबूत करने, मैन पावर बढ़ाने एवं बजट में प्रावधान किए जाने की बात भी कही। उन्होंने अपर सचिव वन को ईटीडीबी के लिए नया हैड खोले जाने के निर्देश भी दिए, ताकि यूटीडीबी की भांति ईटीडीबी को भी ग्रांट दी जा सके। इको टूरिज्म साइट्स के इको टूरिज्म डेवेलपमेंट बोर्ड के माध्यम से संचालन हेतु शीघ्र ही एमओयू भी किया जाए। मुख्य सचिव ने ईको टूरिज्म से सम्बन्धित हाईपावर समिति की बैठक प्रत्येक माह आयोजित कराए जाने की बात भी कही। उन्होंने प्रदेशभर में पर्यटन के लिए फॉर्मल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेशन को एक ही जगह एंकर किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रशिक्षण प्रमाणीकरण के लिए पर्यटन विभाग को जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही। कहा कि उच्च शिक्षा विभाग से भी इसके लिए सुझाव लिए जाएं। इस अवसर पर सचिव दीपेन्द्र कुमार चौधरी, पीसीसीएफ रंजन कुमार मिश्रा, सीसीएफ ईको टूरिज्म पी.के. पात्रो एवं अपर सचिव हिमांशु खुराना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड में सड़क कनेक्टिविटी सुधार के लिए होंगे 19 हजार करोड़ के काम

Works worth Rs 19,000 crore will be undertaken to improve road connectivity in Uttarakhand.
Works worth Rs 19,000 crore will be undertaken to improve road connectivity in Uttarakhand.

– केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की हुई समीक्षा
देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग, ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित राज्य के अनेक महत्वपूर्ण मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए राज्य के प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।  बैठक में राज्य की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा में बताया गया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा। अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है।
ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। उत्तराखण्ड की सड़कें केवल तीर्थाटन और पर्यटन को ही नहीं, बल्कि उद्योग, सीमावर्ती सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही हैं। यह परिवर्तन केवल सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और स्पष्ट विज़न का परिणाम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सतत प्रयासों से उत्तराखण्ड सुगम, सुरक्षित, आधुनिक और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के साथ विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखण्ड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।
सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने  कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर समुचित कार्यवाही की जाएगी । उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जाए।    बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एक जीवन बचाने से लेकर अपना जीवन फिर से पाने तक: उन्नत की-होल हर्निया सर्जरी से मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने लिवर डोनर को दिया नया स्वास्थ्य

From saving a life to regaining one's own life Advanced keyhole hernia surgery at Manipal Hospital EM Bypass gives a liver donor a new lease on health.
From saving a life to regaining one's own life Advanced keyhole hernia surgery at Manipal Hospital EM Bypass gives a liver donor a new lease on health.

देहरादून- 5 जनवरी 2026: भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क में से एक, मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप की इकाई मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास ने त्रिपुरा के अगरतला की 45 वर्षीय महिला मरीज के बड़े और जटिल इन्सीजनल हर्निया का सफल इलाज आधुनिक मिनिमली इनवेसिव यानी की-होल सर्जरी के माध्यम से किया है। मरीज नूपुर सरकार, जो पेशे से एक स्कूल शिक्षिका हैं, ने मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास के सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी – रोबोटिक, एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक, बैरिएट्रिक और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सर्जरी विभाग के डॉ. सुमंत डे की देखरेख में लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी करवाई।

नूपुर की साहसिक यात्रा तीन साल पहले शुरू हुई थी, जब उनके पति को लिवर सिरोसिस का पता चला और लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ी। उस समय एकमात्र उपयुक्त डोनर होने के कारण नूपुर ने अपने पति की जान बचाने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया। उनके पति अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। हालांकि, नूपुर ने बहुत कम आराम के साथ अपनी पेशेवर और घरेलू जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा। समय के साथ, पहले हुए ऑपरेशन के स्थान पर उन्हें एक बड़ा इन्सीजनल हर्निया हो गया, जो धीरे-धीरे जटिल होता गया और उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगा।

एक और बड़ी ओपन सर्जरी से डर के कारण उन्होंने मिनिमली इनवेसिव इलाज के विकल्प तलाशने शुरू किए और विशेषज्ञ इलाज के लिए अगरतला से कोलकाता पहुंचीं। विस्तृत जांच के बाद, मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास की सर्जिकल टीम ने पुष्टि की कि हर्निया की जटिलता और पूर्व सर्जरी के इतिहास के बावजूद, इसका इलाज उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों से संभव है।

दिसंबर की शुरुआत में, मरीज की लगभग तीन घंटे तक चलने वाली लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई। यह अत्यधिक विशेषीकृत प्रक्रिया डॉ. सुमंत डे द्वारा अनुभवी एनेस्थेटिस्ट और कुशल ओटी टीम के सहयोग से पूरी तरह की-होल तकनीक के जरिए की गई, जिससे बड़े चीरे से बचा गया और सर्जिकल ट्रॉमा काफी कम हुआ।

इस मामले पर बात करते हुए डॉ. सुमंत डे ने कहा, “मरीज पहले बड़ी पेट की सर्जरी से गुजर चुकी थीं, जिसके बाद इतना बड़ा और जटिल इन्सीजनल हर्निया होना हमेशा तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीकों की मदद से हम कम सर्जिकल ट्रॉमा के साथ पेट की दीवार का सफल पुनर्निर्माण कर पाए। एनेस्थीसिया से जागने के बाद उनका पहला सवाल था, ‘क्या यह लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से हुआ है?’ जब हमने हां कहा, तो उनके चेहरे पर जो राहत और खुशी थी, वही एक सर्जन के लिए सबसे बड़ा संतोष होता है।”

सर्जरी के बाद उनकी रिकवरी बहुत ही सहज और लगभग बिना दर्द के रही। वे चार घंटे के भीतर चलने लगीं और अगले ही दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पंद्रह दिन बाद फॉलो-अप में वे पूरी तरह स्वस्थ पाई गईं और आत्मविश्वास के साथ अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आईं।

अपना अनुभव साझा करते हुए नूपुर सरकार ने कहा, “अपने पति की जान बचाने के लिए लिवर दान करने के बाद मैं मानसिक और शारीरिक रूप से एक और सर्जरी, खासकर ओपन सर्जरी, से बहुत डर रही थी। मैं पहले ही बहुत कुछ झेल चुकी थी। मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास में कदम रखते ही डॉक्टरों ने सिर्फ मेरा इलाज ही नहीं किया, बल्कि मुझे हिम्मत और भरोसा भी दिया। यह जानकर कि मेरी सर्जरी लैप्रोस्कोपिक तरीके से हुई है, मुझे बहुत राहत मिली। मैं उसी दिन चल पाई और अगले दिन घर लौट गई। मैं डॉ. सुमंत डे और पूरी टीम की हमेशा आभारी रहूंगी, जिन्होंने इतनी संवेदनशीलता और देखभाल के साथ मुझे स्वस्थ किया।”

यह सफल मामला यह दर्शाता है कि उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी जटिल पेट संबंधी बीमारियों के इलाज में, यहां तक कि पहले बड़ी सर्जरी करा चुके मरीजों में भी, कितनी प्रभावी है। साथ ही, यह मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास की रोगी-केंद्रित, मिनिमली इनवेसिव और उच्च गुणवत्ता वाली सर्जिकल देखभाल के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने किया शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पंचम सत्र ‘धर्मरक्षक धामी’ में प्रतिभाग

Chief Minister Dhami participated in the fifth session of the 'Shabdotsav' program, titled 'Dharmarakshak Dhami'.
Chief Minister Dhami participated in the fifth session of the 'Shabdotsav' program, titled 'Dharmarakshak Dhami'.

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यान चंद स्टेडियम में आयोजित ‘शब्दोत्सव’ कार्यक्रम के पंचम सत्र ‘धर्मरक्षक धामी’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखण्ड की मूल सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक समरसता और विधिसम्मत शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकारी भूमि पर सुनियोजित रूप से अवैध कब्जा करने वाले समूहों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक 10,000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि 01 जुलाई, 2026 के बाद केवल वही मदरसे संचालित हो सकेंगे जो राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करेंगे। शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अब तक 250 से अधिक ऐसे मदरसों को बंद किया जा चुका है, जो नियमों और मानकों का पालन नहीं कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसी भी प्रकार की कट्टरवादी मानसिकता को पनपने नहीं दिया जाएगा और शिक्षा के मंदिर स्थापित किए जाएंगे। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राज्य की विभिन्न योजनाओं की पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन भी जुड़ा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आयुष्मान योजना के तहत अनुमानित व्यय से कहीं अधिक खर्च सामने आया, जिससे सत्यापन की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पहले ही राशन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर कार्ड के सत्यापन की प्रक्रिया प्रारंभ की जा चुकी है और इसका उद्देश्य किसी विशेष वर्ग को लक्षित करना नहीं, बल्कि प्रणाली को दुरुस्त करना है। ‘धर्मरक्षक धामी’ विषय पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किए गए सभी कार्य पूरी तरह विधिसम्मत हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 600 अवैध ढांचों को हटाया गया है, जिनमें किसी प्रकार के वैध अवशेष नहीं पाए गए। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण के प्रयासों को सख्ती से रोका गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि के देवत्व और मूल स्वरूप की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता और व्यक्तिगत संकल्प है। आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में संगठन और सरकार निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून तथा मदरसा बोर्ड को समाप्त कर नया अधिनियम लागू किए जाने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केंद्र और राज्य सरकार की दो लाख से अधिक विकास योजनाएं संचालित हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति आयोग द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) इंडेक्स में उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में राज्य ‘अचीवर्स’ श्रेणी में रहा है। भारत सरकार के स्टेट माइनिंग रेडीनेस इंडेक्स में उत्तराखण्ड को देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। सिंगल विंडो सिस्टम को भी टॉप अचीवर्स श्रेणी में सम्मानित किया गया है। पर्यटन क्षेत्र में राज्य की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखण्ड को बेस्ट वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन और बेस्ट एडवेंचर डेस्टिनेशन के राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार 2024 में जाखोल, हर्षिल, गुंजी और सूपी गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव घोषित किया गया। मानसखण्ड कॉरिडोर और कालनेमि से जुड़े प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारखण्ड और मानसखण्ड दोनों क्षेत्रों में तीर्थस्थलों का समग्र विकास किया जा रहा है। चारधाम ऑल वेदर रोड, बदरीनाथ मास्टर प्लान, ‘भव्य केदार, दिव्य केदार’ परियोजना, हेमकुण्ड साहिब एवं केदारनाथ रोपवे जैसी परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के पुनर्निर्माण, सौंदर्यीकरण और कनेक्टिविटी पर कार्य किया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून कनेक्टिविटी पर मुख्यमंत्री ने बताया कि एलीवेटेड रोड परियोजना लगभग पूर्ण हो चुकी है और इसके चालू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी लगभग 2 से 2.5 घंटे में तय की जा सकेगी। देहरादून शहर में यातायात समस्या के समाधान के लिए रिंग रोड और आंतरिक एलीवेटेड रोड परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है, जिसमें केंद्र सरकार का सहयोग प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सही नीयत, दृढ़ संकल्प और पारदर्शी शासन के माध्यम से अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा सकता है और राज्य सरकार इसी लक्ष्य के साथ कार्य कर रही है।

अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह में शामिल हुए  मुख्यमंत्री

The Chief Minister attended the Pride Movement awards ceremony organized by Arpit Foundation.
The Chief Minister attended the Pride Movement awards ceremony organized by Arpit Foundation.

देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में अर्पित फाउंडेशन द्वारा आयोजित प्राइड मूवमेंट सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों एवं जवानों का सम्मान करते हुए उनके साहस, समर्पण और राष्ट्र सेवा भावना की सराहना की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशस्त्र सीमा बल ने पिछले छह दशकों से आंतरिक सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद, नक्सलवाद तथा आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अदम्य साहस और समर्पण के साथ कार्य करते हुए देश की सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि एस.एस.बी. के जवान जहां एक ओर राष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा में दिन-रात तत्पर रहते हैं, वहीं खेल, सामाजिक सरोकारों और आपदा राहत कार्यों में भी उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज भारत रक्षा सामग्री निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत के स्वदेशी हथियारों की शक्ति को विश्व ने देखा और सराहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए लगातार नए निर्णय ले रही है। शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है, वहीं वीरता पदक से अलंकृत जवानों को मिलने वाली सम्मान राशि में भी वृद्धि की गई है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के अंतर्गत हमारे सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। जिससे न केवल सीमांत क्षेत्रों में आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि पर्यटन, व्यापार और सामरिक विकास को भी नई मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि मोदी जी स्वयं सीमांत क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय नागरिकों और सुरक्षा बलों के साथ संवाद स्थापित करते हैं, उनकी समस्याओं को समझते हैं और विकास की दिशा में निर्णायक कदम उठाते हैं। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य कैलाशानन्द जी महाराज, डी.आई.जी एस.एस.बी सुधांशु नौटियाल, अर्पित फाउण्डेशन से  हनी पाठक एवं एस.एस.बी के जवान मौजूद थे।

सीएम धामी ने की  डी.बी.टी. के माध्यम से समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं की दिसंबर माह की पेंशन किश्त की जारी

Chief Minister Dhami released the December installment of various pension schemes of the Social Welfare Department through DBT (Direct Benefit Transfer).
Chief Minister Dhami released the December installment of various pension schemes of the Social Welfare Department through DBT (Direct Benefit Transfer).

   – 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन की गई जारी।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय से समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों में डी.बी.टी. प्रणाली के माध्यम से दिसंबर माह की पेंशन किश्त का भुगतान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 09 लाख 43 हजार 964 लाभार्थियों के खातों में कुल 140 करोड़ 26 लाख 97 हजार रुपये की राशि ऑनलाइन जारी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर वर्गों, वृद्धजनों, विधवाओं, दिव्यांगजनों एवं निराश्रितों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पारदर्शी शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी प्रकार के भुगतान अब डी.बी.टी. प्रणाली से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किए जा रहे हैं, जिससे समयबद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए 60 साल की आयु होते ही राज्य के जो लोग पात्रता की श्रेणी में आ रहे हों, उनका 59 साल की आयु से ही चिन्हीकरण कर लिया जाय, ताकि पात्रता की श्रेणी में आने पर उन्हें शीघ्र पेंशन का भुगतान किया जा उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि समाज के प्रत्येक पात्र लाभार्थी को किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना योजनाओं का लाभ मिले। उन्होंने निर्देश दिए कि पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे, इसके लिए नियमित सत्यापन एवं निगरानी की प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनहित की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के  लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है।  इस असवर पर निदेशक समाज कल्याण डॉ. संदीप तिवारी, अपर सचिव प्रकाश चन्द्र एवं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

क्यों आज भी लाखों लोग आंतरिक शांति के लिए परमहंस योगानंद की ओर मुड़ते हैं – विधि बिरला

Why do millions of people still turn to Paramahansa Yogananda for inner peace today - Vidhi Birla
Why do millions of people still turn to Paramahansa Yogananda for inner peace today - Vidhi Birla

“बाक़ी सब कुछ प्रतीक्षा कर सकता है, लेकिन ईश्वर की खोज प्रतीक्षा नहीं कर सकती।”

इस सरल किंतु गहन स्मरण के साथ परमहंस योगानंद ने मानवता को जीवन के केंद्र में आत्म-साक्षात्कार की खोज रखने का आह्वान किया। जैसे-जैसे संसार उनकी 133वीं जयंती का स्मरण करता है, उनका जीवन और शिक्षाएँ संस्कृतियों, आस्थाओं और पीढ़ियों के पार गूंजती रहती हैं—शांति, स्पष्टता और दिव्य प्रेम का कालातीत संदेश देते हुए।

5 जनवरी 1893 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे परमहंस योगानंद में बचपन से ही आध्यात्मिक सत्य की तीव्र प्यास थी। यही आकांक्षा उन्हें उनके पूज्य गुरु, स्वामी श्री युक्तेश्वर गिरि के चरणों तक ले गई, जिनके दृढ़ किंतु करुणामय मार्गदर्शन में उन्होंने सर्वोच्च आध्यात्मिक साक्षात्कार प्राप्त किया। 1915 में वे भारत के प्राचीन स्वामी संन्यास-आदेश में प्रविष्ट हुए और 1920 में, एक दिव्य आह्वान के प्रत्युत्तर में, आधुनिक विश्व के साथ भारत की ईश्वर-साक्षात्कार की प्राचीन विद्या साझा करने हेतु संयुक्त राज्य अमेरिका गए।

पश्चिम में योग के अग्रदूत दूत के रूप में, योगानंद ने लाखों लोगों को क्रिया योग से परिचित कराया—ध्यान की वह वैज्ञानिक विधि जो महावतार बाबाजी, लाहिड़ी महाशय और स्वामी श्री युक्तेश्वर की अखंड परंपरा से सुरक्षित रही है। इस पावन साधना के बारे में वे कहते थे, “क्रिया योग और भक्ति—यह गणित की तरह काम करता है; यह असफल नहीं हो सकता।” ध्यान के माध्यम से, उन्होंने सिखाया कि मनुष्य अपने ही चैतन्य में ईश्वर को शांति, आनंद और मार्गदर्शक प्रज्ञा के रूप में प्रत्यक्ष अनुभव कर सकता है।

उनकी आध्यात्मिक कृति ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी सर्वकालिक सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक पुस्तकों में से एक है। पचास से अधिक भाषाओं में अनूदित यह ग्रंथ दुनिया भर के पाठकों को प्रेरित करता रहा है—तकनीकी अग्रणी स्टीव जॉब्स सहित, जिन्होंने इसे प्रतिवर्ष पुनः पढ़ा और व्यापक रूप से भेंट किया—साथ ही रजनीकांत और विराट कोहली जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्वों को भी। असंख्य साधकों के लिए यह पुस्तक ध्यान की ओर प्रवेश-द्वार और जीवन के आध्यात्मिक उद्देश्य की गहरी समझ का माध्यम बनी है।

अपने शिष्यों के लिए परमहंस योगानंद, सर्वोपरि, दिव्य प्रेम के शिक्षक थे। ‘प्रेमावतार’—अर्थात प्रेम के साकार रूप—के रूप में वर्णित, वे अपनी ऊष्मा, करुणा और आध्यात्मिक स्पष्टता से अपने सान्निध्य में आने वाले सभी को उन्नत करते थे। ईश्वर के साथ उनका संबंध अत्यंत अंतरंग और व्यक्तिगत था, जो दिव्य माता के प्रति भक्ति में व्यक्त होता था—जिन्हें वे स्नेहमयी, प्रत्युत्तरशील और सदैव उपस्थित के रूप में अनुभव करते थे।

फिर भी उनका प्रेम सदा शक्ति और विवेक से संतुलित था। वे बल देते थे कि सच्चा धर्म व्यावहारिक होना चाहिए—केवल विश्वास पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष आंतरिक अनुभव पर आधारित। आध्यात्मिकता, उनके अनुसार, जीवन से पलायन नहीं, बल्कि साहस, संतुलन और आनंद के साथ जीने का मार्ग है—चाहे कोई गृहस्थ हो या संन्यासी।

उनका मिशन सरल और गहन था: हर हृदय में ईश्वर-प्रेम को जाग्रत करना और यह दिखाना कि दैनिक जीवन की जिम्मेदारियों के बीच भी आध्यात्मिक साक्षात्कार संभव है। ध्यान, सदाचारपूर्ण जीवन, निःस्वार्थ सेवा और भक्ति—यही उनकी शिक्षाओं की आधारशिला थी।

1917 में परमहंस योगानंद ने भारत में योगदा सत्संग सोसाइटी (YSS) की स्थापना की, जो आज भी आश्रमों, ध्यान केंद्रों, शिविरों और प्रकाशनों के माध्यम से देशभर में उनकी शिक्षाओं का प्रसार कर रही है। क्रिया योग सहित योगदा ध्यान-पद्धति के द्वारा, भारत और विश्व के साधक उनके मार्गदर्शन से प्रेरणा पाते हुए अंतःस्थ शांति और दिव्य संयोग की रूपांतरकारी शक्ति का अनुभव कर रहे हैं।

यद्यपि उनका प्रभाव लाखों तक पहुँचा, योगानंद के जीवन का सार विनम्र और अत्यंत व्यक्तिगत रहा: ईश्वर से प्रेम करना और दूसरों को उसी प्रेम की खोज में सहायता करना। अपने शिष्यों के साथ इस पावन बंधन को व्यक्त करते हुए उन्होंने एक बार कहा: “मैं तुमसे ईश्वर में तुम्हारे आनंद के अतिरिक्त कुछ नहीं चाहता। और तुम मुझसे ईश्वर की प्रज्ञा और आनंद के अतिरिक्त कुछ नहीं चाहते।”

अपने जन्म के एक शताब्दी से अधिक समय बाद भी, परमहंस योगानंद आधुनिक विश्व के आध्यात्मिक परिदृश्य में एक दीप्तिमान उपस्थिति बने हुए हैं—एक सौम्य किंतु शक्तिशाली स्मरण कि स्थायी शांति भीतर से आरंभ होती है, और दिव्य प्रेम दूर नहीं, बल्कि हर आत्मा में साकार होने की प्रतीक्षा कर रहा है।

लेखक: विधि बिरला

आपदा प्रबंधन में फर्स्ट एड‌ व रेस्क्यू का प्रशिक्षण महत्वपूर्ण – डॉ०अनिल वर्मा

Training in first aid and rescue is crucial in disaster management - Dr. Anil Verma
Training in first aid and rescue is crucial in disaster management - Dr. Anil Verma

यूथ रेडक्रास द्वारा जीजीआईसी अजबपुर कलां के एनएसएस शिविर में आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण

बाल भवन, रायपुर रोड में जारी राजकीय बालिका इंटर कॉलेज,अजबपुर कलां के सात दिवसीय एनएसएस शिविर के तहत यूथ रेडक्रास कमेटी के चीफ मास्टर ट्रेनर आपदा प्रबंधन डॉ० अनिल वर्मा द्वारा पांच दिवसीय विशेष आपदा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
डॉ० वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड आपदाओं के प्रति अति संवेदनशील है । राज्य में भूकंप , भूस्खलन,बादल फटना व त्वरित बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाएं आना स्वाभाविक है। यहां टेक्टोनिक प्लेटों के मध्य इतनी ऊर्जा स्टोर हो चुकी है कि 08 रिक्टर स्केल का भूकंप किसी भी क्षण आ सकता है। आपदाओं को रोका तो नहीं जा सकता परंतु आपदा पूर्व योजनाबद्ध तैयारियों के साथ ही बचाव सेवा व प्राथमिक चिकित्सा के गहन प्रशिक्षण से जीवन तथा सम्पत्ति की हानि को कम अवश्य किया जा सकता है।
ऐसी स्थिति में शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवा छात्र-छात्राएं दिवयांगों को सर्वाधिक उपयोगी साबित हो सकते हैं।
डॉ० वर्मा ने पांच दिवसीय सघन प्रशिक्षण में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत् इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू तकनीक में फ्री हैंड तथा रोप रेस्क्यू आदि के माध्यम से आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त भवनों में फंसे घायलों, रोगियों, गर्भवती महिलाओं,असहाय वृद्धजनों तथा दिवयांगों को सुरक्षित निकालकर ले जाने के टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट,फायरमैंस लिफ्ट,फोर एंड आर्ट मेथड,टो-ड्रैग आदि तथा रोप रेस्क्यू मेथड्स में बो-लाईन ड्रैग , ड्रा हिच , चेयर‌ नॉट एवं इम्प्रोवाईज्ड स्ट्रेचर आदि का प्रशिक्षण दिया।
इसके अतिरिक्त प्राथमिक चिकित्सा के तहत् घायल व‌ रोगियों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रीससिटेशन), सहित रक्तस्राव,हड्डी टूटने,घाव ,आग से जलने , डेंगू ,‌ टी० बी०, आदि का विधिवत् प्रशिक्षण दिया।
प्रशिक्षण के उपरांत एनएसएस की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती दीप्ति रावत के निर्देशन तथा टीम लीडरों , सुहानी, नेहा, अंकिता, पूजा, मानसी,,महक,साहिमा, मुस्कान, योगेश्वरी, आरूषि कोठियाल,काजल, अर्शी परवीन, वंशिका,सिमरन, प्रियांशी,सुशीला आदि ने रेस्क्यू मेथड्स व‌ सीपीआर का कुशल प्रदर्शन किया।

Sensation after woman's body found in ditch in Sudhowala

सुद्धोवाला में खाई से महिला का शव मिलने से सनसनी

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देहरादून।  बाला सुंदरी प्राचीन मंदिर के पास खाई में एक महिला का तीन-चार दिन पुराना शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव...
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