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दिल्ली के हृदय में भव्य रूप से संपन्न हुआ राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026

The National Uttarayani Festival 2026 was grandly celebrated in the heart of Delhi.
The National Uttarayani Festival 2026 was grandly celebrated in the heart of Delhi.

हजारों दर्शकों की मौजूदगी में संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश
नई दिल्ली | 14 जनवरी 2026
दिल्ली के हृदय स्थल सेंट्रल पार्क, राजीव चौक, कनॉट प्लेस में आयोजित राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव 2026 का 14 जनवरी को भव्य, गरिमामय एवं ऐतिहासिक समापन हुआ। वर्ष 2005 से निरंतर संचालित उत्तरायणी अभियान की यह कड़ी इस वर्ष राजधानी में राष्ट्रीय स्वरूप के साथ आयोजित की गई, जिसने उत्तराखंड की संस्कृति को देश की राजधानी में नई पहचान दी।
यह सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चेतना से प्रेरित आयोजन पर्वतीय लोक विकास समिति एवं सुखी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। पर्वतीय लोक विकास समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर सूर्य प्रकाश सेमवाल जी ने मंच संचालन की प्रथम एवं प्रमुख भूमिका निभाते हुए पूरे कार्यक्रम को सशक्त दिशा प्रदान की।
कार्यक्रम की संकल्पना, राजनीतिक समन्वय एवं मार्गदर्शन में पर्वतीय लोक विकास समिति के परामर्शदाता श्री राजेश्वर पैन्यूली जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजनीति की मुख्यधारा से जुड़े श्री पैन्यूली जी के सक्रिय संपर्क, सानिध्य और निरंतर प्रयासों के कारण ही राष्ट्रीय स्तर के जनप्रतिनिधियों की सहभागिता इस सांस्कृतिक मंच पर सुनिश्चित हो सकी। उनके समन्वय से गढ़वाल लोकसभा सांसद श्री अनिल बलूनी जी, दिल्ली की सांसद श्रीमती बांसुरी स्वराज जी तथा दिल्ली सरकार के पीडब्ल्यूडी मंत्री श्री प्रवेश वर्मा जी ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की।
मुख्य अतिथियों ने उत्तरायणी महोत्सव को उत्तराखंड की संस्कृति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का सशक्त माध्यम बताते हुए ऐसे आयोजनों को भविष्य में और अधिक भव्य रूप देने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने आयोजक संस्थाओं, कलाकारों एवं सामाजिक संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए निरंतर सहयोग का आश्वासन भी दिया।
महोत्सव का सबसे प्रमुख और आकर्षक केंद्र पौराणिक नाट्य-रूपांतरण “पांडव कथा – चक्रव्यूह” रहा। इस प्रस्तुति में महाभारत के युद्ध के तेरहवें दिन घटित वीर अभिमन्यु की चक्रव्यूह में प्रवेश, संघर्ष और वीरगति की घटनाओं को शुद्ध पौराणिक गढ़वाली संवादों, आधुनिक ध्वनि एवं प्रकाश तकनीक के साथ प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया।
इस नाट्य-रूपांतरण के मुख्य संचालक डॉ. राकेश भट्ट जी के सान्निध्य में 30 से अधिक कलाकारों ने इस प्रस्तुति को अत्यंत सहज, भावनात्मक और प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को महाभारत काल के युद्ध दृश्य का जीवंत अनुभव कराया।
इसके अतिरिक्त माँ नन्दा देवी की डोली यात्रा, विभिन्न राज्यों की मातृशक्ति द्वारा लोकनृत्य एवं लोकगीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और अधिक भव्य बना दिया। सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को राष्ट्र गौरव, दिल्ली गौरव एवं हिमालय गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।
आयोजकों के अनुसार इस महोत्सव में हजारों की संख्या में दर्शकों ने सहभागिता की और पूरे दिन सेंट्रल पार्क, कनॉट प्लेस में सांस्कृतिक उल्लास का वातावरण बना रहा।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी राजनीतिक प्रतिनिधियों एवं गणमान्य अतिथियों ने एक स्वर में कहा कि राष्ट्रीय उत्तरायणी महोत्सव को भविष्य में और अधिक व्यापक, भव्य एवं समावेशी स्वरूप दिया जाएगा। साथ ही आयोजन से जुड़े सभी संस्थाओं, कलाकारों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी संगठनों के प्रति धन्यवाद एवं साधुवाद व्यक्त किया गया।

उच्च शिक्षा विभाग में 268 असिस्टेंट प्रोफसर के स्थायीकरण को सरकार की मंजूरी

The government has approved the permanent appointment of 268 assistant professors in the Higher Education Department.
The government has approved the permanent appointment of 268 assistant professors in the Higher Education Department.

विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने स्थायीकरण प्रस्ताव किया अनुमोदित

द्विवर्षीय परवीक्षा अवधि संतोषजनक पूर्ण कर चुके हैं असिस्टेंट प्रोफेसर

देहरादून, 15 जनवरी 2026
उच्च शिक्षा विभाग के 268 असिस्टेंट प्रोफसर के स्थायीकरण को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। विभागीय मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने विभाग द्वारा प्रस्तुत स्थायीकरण प्रस्ताव को अपना अनुमोदन दे दिया है। प्रदेशभर के विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में तैनात विभिन्न विषयों के इन असिस्टेंट प्रोफेसर ने दो वर्ष की परवीक्षा अवधि संतोषजनक पूर्ण कर दी है। समयबद्ध स्थायीकरण होने पर असिस्टेंट प्रोफेसरों ने विभागीय मंत्री व राज्य सरकार का आभार जताया।

प्रदेश की उच्च शिक्षा में शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार, प्रयोगात्मक व शोधात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती से लेकर उनके प्रशिक्षण को लेकर भी सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में तैनात 268 असिस्टेंट प्रोफसर के द्वारा द्विवर्षीय परवीक्षा अवधि पूर्ण करने पर उनके स्थायीकरण को मंजूरी दे दी है। स्थायीकरण का लाभ लेने वाले असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति विभागान्तर्गत वर्ष 2020 से वर्ष 2022 में हुई है। जिन्हें सरकार द्वारा उत्तराखण्ड सरकारी सेवकों की स्थायीकरण नियमावली-2002 के तहत लाभान्वित किया गया है। 13 विभिन्न विषयों के इन असिस्टेंट प्रोफेसर में राजनीति विज्ञान के 71, शिक्षा शास्त्र 26, संस्कृत 35, हिन्दी 71, समाजशास्त्र 5, इतिहास 4, भूगोल व भौतिक विज्ञान 2-2, अर्थशास्त्र 35, गृह विज्ञान 13 तथा रसायन विज्ञान, जन्तु विज्ञान व अंग्रेजी में 1-1 असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल है। उच्चतर शिक्षा (समूह ‘क’) सेवा नियमावली-2003 के तहत ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति को स्थायी करने का प्रावधान है, जिनका कार्य और आचरण अच्छा हो, उनकी सत्यनिष्ठा प्रमाणित हो और नियुक्ति प्राधिकारी को यह समाधान हो कि शिक्षक को स्थायी करना उपयुक्त है। राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि शिक्षकों को सुरक्षित, स्थायी एवं सम्मानजनक सेवा वातावरण उपलब्ध कराना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियाद है। प्राध्यापकों के स्थायीकरण से न केवल उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक निरंतरता और अकादमिक गुणवत्ता भी और अधिक मजबूत होगी।

बयान
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत अपनी परवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले 268 प्राध्यापकों के स्थायीकरण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह निर्णय उच्च शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने किया उत्तरकाशी के ऐतिहासिक माघ मेले का विधिवत् शुभारंभ

The Chief Minister formally inaugurated the historic Magh Mela in Uttarkashi.
The Chief Minister formally inaugurated the historic Magh Mela in Uttarkashi.

– देवभूमि की संस्कृति के साथ छेड़–छाड़ की किसी को भी इजाजत नहीं : मुख्यमंत्री
उत्तरकाशी(आरएनएस)। मकर संक्रांति के पर्व पर उत्तरकाशी में सुप्रसिद्ध माघ मेला (बाड़ाहाट कू थौलू) आज से शुरू हो गया है। पौराणिक माघ मेले का उद्घाटन बाड़ाहाट पट्टी के आराध्य कंडार देवता तथा बाड़ागड्डी क्षेत्र के हरि महाराज की डोली के सानिध्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में किया गया। जनपद के रामलीला मैदान में सप्ताह भर चलने वाला बाड़ाहाट का थौलू के नाम से प्रचलित यह पौराणिक  मेला जनपद की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का संवाहक है।
आज माघ मेला में भाग लेने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण लोक देवताओं की डोलियों और धार्मिक प्रतीकों के साथ उत्तरकाशी पहॅुंचे। भागीरथी नदी में पर्व स्नान करने के बाद कंडार देवता व हरि महाराज सहित अनेक देवडोलियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने बाड़ाहाट (उत्तरकाशी नगर का पुरातन क्षेत्र) स्थित चमाला की चौंरी पर पहॅुचकर डोलीनृत्य व रासो-तांदी नृत्य कर बाड़ाहाट के थौलू (मेला) की अनूठी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की छटा बिखेरी।
अपराह्न में रामलीला मैदान में कंडार देवता व हरि महाराज की आगवानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दीप प्रज्जवलित कर माघ मेला का औपचारिक शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मेला पांडाल में घण्डियाल देवता, खंडद्वारी देवी, राज-राजेश्वरी देवी, त्रिपुर सुंदरी,नाग देवता व दक्षिण काली सहित अनेक देवडोलियों व धार्मिक प्रतीकों की भी उपस्थिति रही। उद्घाटन समारोह में त्रृषिराम शिक्षण संस्थान की छात्राओं ने स्वागत गान एवं नृत्य प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी को मकर संक्रांति और माघ मेले की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि आज उन्हें बाबा विश्वनाथ की नगरी और मां भागीरथी की पावन धरा पर आयोजित पौराणिक और ऐतिहासिक धार्मिक मेले के शुभारम्भ में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। यह एक लोक आस्था का महाकुंभ है और आज के दिन से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। आज उत्तरकाशी जनपद अपनी एक आध्यात्मिक पहचान बना रहा है। वहीं विकास के पथ पर भी अग्रसर है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सरकार की नीतियां सिर्फ फ़ाइलों तक सीमित नहीं है सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित है और विकास भी सुनिश्चित हो रहा है एवं पर्यटन के क्षेत्र में आजीविका के नए अवसर बनाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तरकाशी जनपद में 1000 करोड़ से अधिक की लागत से सड़कों का निर्माण, मरम्मत और सुधारीकरण के कार्य किए जा रहे हैं। उत्तरकाशी में ही रू. 23 करोड़ की लागत से 50 बेड का क्रिटिकल केयर यूनिट बनाया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पुरोला का उच्चीकरण कर रू. 46 करोड़ की लागत से उपजिला अस्पताल बनाया जा रहा है। सिल्क्यारा टनल का ब्रेकथ्रू भी हो चुका है जल्द ही इस टनल का कार्य पूर्ण होने से क्षेत्रवासियों सहित पर्यटकों को भी सहूलियत मिलेगी। इस टनल के निर्माण से यमुनोत्री और गंगोत्री के मध्य लगभग 25 किमी की दूरी भी कम होगी। यमनोत्री में हैलीपेड निर्माण, सिंचाई योजनाएं, भटवाड़ी में बाढ़ सुरक्षा कार्य सहित विकास के अन्य कार्य किए जा रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा आज सरकार 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन कार्यक्रम पर कार्य कर रही है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से भी पर्यटन को नया आयाम दिया जा रहा है। जादुंग में उत्सव मैदान का निर्माण किया जा रहा है। आज उत्तरकाशी जनपद में 12 हजार लखपति दीदी बन चुकी है। जो आत्मनिर्भर उत्तराखंड की तस्वीर को प्रदर्शित करती है। सतत् विकास लक्ष्य इंडेक्स में भी आज उत्तराखंड प्रथम स्थान हासिल किया है तथा राज्य में भी उत्तरकाशी तीन प्रमुख जिलों में शामिल है। आज राज्य में रिवर्स पलायन भी बढ़ रहा है लोग आज अपने पैतृक निवास की और लौट रहे है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी अतिथि देवो भव: की परम्परा है और देवभूमि की मर्यादा तोड़ने की किसी को अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने दंगा विरोधी कानून, धर्मांतरण कानून,लव जिहाद, लैंड जिहाद आदि कानून लागू किए हैं तथा 1000 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई है। राज्य में सख्त भू कानून लागू किया है तथा ऑपरेशन कालनेमी चलाकर सनातन धर्म को बदनाम करने वाले पाखंडियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। उत्तराखंड देश में समान नागरिक संहिता कानून लागू करने वाला प्रथम राज्य बना है, यूसीसी के लागू होने से आज सभी के लिए सबकी सुरक्षा और एक समान कानून लागू किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 27 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शिता के साथ नौकरी मिली है। युवाओं के भविष्य के लिए सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। अभी 2 हजार पुलिस भर्ती पर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद परिणाम घोषित किया गया है,जल्द ही इन 2000 युवाओं को नियुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रही है भ्रष्टाचार में लिप्त उच्च अधिकारियों सहित सभी पर कड़ी कार्यवाही की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार देवभूमि की संस्कृति के साथ किसी को भी छेड़–छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। देवभूमि में किसी भी प्रकार का जिहाद नहीं चलेगा। अंकिता भंडारी केस पर उन्होंने कहा कि हमने पहले भी जांच करवाकर अपराधियों को जेल पहुंचाने का काम किया है तथा स्वयं अंकिता भंडारी के माता पिता से मिलकर उनकी भावनाओं के अनुरूप सीबीआई जांच के आदेश दिए है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वो अंकिता भंडारी को पहले भी न्याय दिलाने के खड़े थे और आगे भी खड़े रहेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शक्ति मंदिर एवं बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, संतों के आशीर्वचनों के शिलापट्टों किया लोकार्पण
मुख्यमंत्री  ने अपने  जनपद भ्रमण के दौरान पौराणिक भगवान विश्वनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर में दर्शन के उपरांत महान संतों के आशीर्वचनों और उनके आध्यात्मिक संदेशों पर आधारित संकलन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड देवभूमि है और यहाँ के संतों का तप व ज्ञान हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने कहा कि संतों के दिव्य वचन समाज को सही मार्ग दिखाने के साथ-साथ हमारी युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने में सहायक हैं।
इस अवसर पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान, पुरोला विधायक दुर्गेशवर लाल,प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. स्वराज विद्वान, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान,जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, जिला अध्यक्ष भाजपा नागेन्द्र चौहान, दर्जाधारी राज्यमंत्री राम सुंदर नौटियाल, प्रताप सिंह पंवार, जगत सिंह चौहान, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट, ब्लॉक प्रमुख राजदीप परमार, ममता पंवार, पूर्व जिलाध्यक्ष सत्येंद्र राणा, जिला महामंत्री महावीर सिंह नेगी, परशुराम जगुडी, नगर पालिकाध्यक्ष भूपेन्द्र चौहान, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष हरेंद्र राणा, हरीश डंगवाल, शैलेन्द्र कोहली, गिरीश भट्ट, लोकेंद्र बिष्ट, सूरत राम नौटियाल,जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय , मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधिगण व बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

सीएम धामी ने किया तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव का शुभारंभ

CM Dhami inaugurated the three-day Winter Tourism Conclave.
CM Dhami inaugurated the three-day Winter Tourism Conclave.

– शीतकालीन पर्यटन सम्मेलन औपचारिकता नहीं,उत्तराखंड को 12 महीने का टूरिज्म स्टेट बनाने का साझा प्रयास : मुख्यमंत्री
उत्तरकाशी(आरएनएस)।  शीतकालीन चारधाम यात्रा एवं पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा स्थानीय लोगों को वर्षभर रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तहत तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉनक्लेव का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभारंभ किया। कॉनक्लेव में एसोसिएशन ऑफ डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स ऑफ इंडिया के सहयोग से देश के विभिन्न राज्यों से आए 50 टूर ऑपरेटर्स ने प्रतिभाग किया। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर से 50 तथा स्थानीय स्तर से भी 50 टूर ऑपरेटर्स ने कॉनक्लेव में भाग लिया। कार्यक्रम में होटल एसोसिएशन उत्तरकाशी एवं बड़कोट, ट्रैकिंग संगठन उत्तरकाशी और सांकरी के पंजीकृत प्रतिनिधियों की भी सक्रिय सहभागिता रही। निम में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं पर मंथन किया गया तथा उत्तराखंड को वर्षभर पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। तीन दिवसीय विंटर टूरिज्म कॉन्क्लेव के तहत मां गंगा का शीतकालीन प्रवास मुखबा एवं मां यमुना का खरसाली तथा सांकरी में केदारकांठा ट्रैक बेस केम्प का देश भर के टूर ऑपरेटर भ्रमण करेंगे तथा शीतकालीन टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विंटर टूरिज्म कान्क्लेव को संबोधित करते हुए कहा कि शीतकालीन पर्यटन सम्मेलन केवल एक औपचारिक संवाद नहीं,बल्कि उत्तराखंड के पर्यटन को नई दिशा देने का एक साझा प्रयास है। उन्होंने टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंट्स, होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों, टैक्सी एवं ट्रांसपोर्ट यूनियन के प्रतिनिधियों, एडवेंचर टूरिज्म से जुड़े लोगों का स्वागत और उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के बड़े शहर प्रदूषण, बढ़ते तापमान, ट्रैफिक और तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड देश का एक “नेचुरल हीलिंग डेस्टिनेशन” बन सकता है और सरकार इसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वेलनेस, नेचर, एडवेंचर, कल्चर, योग, मेडिटेशन और सस्टेनेबल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।मुख्यमंत्री ने टूर ऑपरेटर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ट्रेंड बनाना और किसी डेस्टिनेशन को ब्रांड बनाना आप सभी के हाथ में है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तराखंड को केवल 4 या 6 महीने का नहीं, बल्कि 12 महीने का टूरिज्म स्टेट बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की शीतकालीन पर्यटन नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहाड़ खाली न रहें, होटल बंद न हों, टैक्सियां खड़ी न रहें, होमस्टे सूने न रहें और युवाओं को रोजगार के लिए पलायन न करना पड़े। जब 12 महीने पर्यटन सक्रिय रहेगा तो प्रदेश की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार होगा। मुख्यमंत्री ने टूरिज्म से जुड़े सभी हितधारकों से संवाद करते हुए कहा कि चाहे परमिशन हो, कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर या मार्केटिंग सपोर्ट—सरकार हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार है। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल अप्रूवल और निवेशकों के लिए फास्ट-ट्रैक सपोर्ट को और मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन का अर्थ केवल बड़े होटल नहीं,बल्कि जब गांव की महिला का होमस्टे भरे, स्थानीय युवा टैक्सी चलाएं, पहाड़ी युवक ट्रेकिंग गाइड बनें,लोक कलाकारों को मंच मिले और किसान के उत्पाद सीधे पर्यटक तक पहुंचें—तभी पर्यटन सार्थक होगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने होमस्टे नीति को सरल बनाया है, लखपति दीदी योजना से महिलाओं को जोड़ा है, लोकल गाइड ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं और “वोकल फॉर लोकल” को पर्यटन से जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और संस्कृति पर जोर देते हुए कहा कि सरकार विकास चाहती है, लेकिन विनाश की कीमत पर नहीं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति का संरक्षण और गांव के अंतिम व्यक्ति को पर्यटन से जोड़ना ही सरकार का रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म मॉडल है।उन्होंने सभी टूर ऑपरेटर्स से आग्रह किया कि वे अपने पर्यटन पैकेज में उत्तरकाशी, हर्षिल, मुखबा, नेलांग, चमोली, औली, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, चम्पावत, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग एवं सीमांत गांवों को शामिल करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि आप पैकेज बनाइए, सरकार आपके साथ खड़ी है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं और निवेशकों को संदेश देते हुए कहा कि उत्तराखंड निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है, क्योंकि यहां पर्यटन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि रोजगार का सबसे बड़ा इंजन है। उन्होंने कहा कि होटल मालिक, होमस्टे संचालक, टैक्सी चालक और ट्रैवल एजेंट—सभी को काम मिले और हर गांव को पहचान मिले, यही सरकार का लक्ष्य है।
इस अवसर पर गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान,पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल,दर्जा राज्य मंत्री रामसुंदर नौटियाल,जगत सिंह चौहान,प्रदेश उपाध्यक्ष भाजपा डॉ.स्वराज विद्वान,प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट,जिलाध्यक्ष भाजपा नागेंद्र चौहान,पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण,डीएम प्रशान्त आर्य,एसपी कमलेश उपाध्याय,सीडीओ जयभारत सिंह,रजिस्ट्रार निम विशाल रंजन,जिला पर्यटन विकास अधिकारी केके जोशी सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने खटीमा में किया 33 करोड़ 36 लाख 49 हजार की 9 विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास

The Chief Minister inaugurated and laid the foundation stone for 9 development projects worth ₹33 crore 36 lakh 49 thousand in Khatima.
The Chief Minister inaugurated and laid the foundation stone for 9 development projects worth ₹33 crore 36 lakh 49 thousand in Khatima.

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए ₹ 33 करोड़ 36 लाख 49 हजार की 9 विकास योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। जिसमें जिला विकास प्राधिकरण द्वारा 11 करोड़ 27 लाख 50 हजार की धनराशि से नवनिर्मित हाईटेक महाराणा प्रताप बस स्टेशन भी शामिल है।  मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नानकमत्ता में बाला जी मंदिर के सौंदर्यीकरण किया जाएगा। नानकमत्ता विधानसभा के अंतर्गत ब्राह्मदेव मंदिर लोहिया पुल खटीमा में सौंदर्यीकरण व पुनःनिर्माण कार्य किया जाएगा। नानकमत्ता विधानसभा के अंतर्गत देवभूमि धर्मशाला में कक्ष, हॉल एवं सौंदर्यीकरण कार्य किया जाएगा। नानकमत्ता विधानसभा के अंतर्गत सोनूखरी – किशनपुर – बरकीडांडी – कैथुला – टुकड़ी मार्ग का हॉटमिक्स सड़क का कार्य किया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने हाईटेक महाराणा प्रताप बस स्टेशन, नगर पालिका के वार्ड नंबर 7 व 8 में 48.45 लाख की धनराशि से निर्मित पेयजल नलकूप, ओवर हेड टेंक, पाईप लाईन कार्यों, विधानसभा क्षेत्र नानकमत्ता के अंतर्गत 490.21 लाख की धनराशि से राजस्व निरीक्षक व उपनिरीक्षक के आवासीय भवनों व 359.91 लाख की लागत से उपनिरीक्षकों के कार्यालय भवनों, खटीमा में ग्राम मझोला में झील से लेकर पॉलिगंज की ओर 225.62 लाख की लागत से नाला निर्माण कार्यों का लोकार्पण तथा खटीमा क्षेत्र में 499.65 लाख की लागत से 300 नग हेंडपम्प स्थापना कार्य, 29.65 लाख की लागत से खटीमा के नवनिर्मित बस अड्डे में महाराणा प्रताप द्वार निर्माण, 24.50 लाख की लागत से खटीमा में हाईटेक शौचालय निर्माण एवं 95 लाख की लागत से थारू इंटर कॉलेज खटीमा का पुनःनिर्माण कार्य का शिलान्यास किया।   मुख्यमंत्री ने कहा कि मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व के पावन अवसर पर 11 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित हाईटेक बस स्टैंड का शुभारंभ हो रहा है, जो पूरे क्षेत्र के लिए हर्ष का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा उन्होंने स्वयं कई बार बस स्टैंड की स्थापना के लिए प्रयास किए थे और इसकी घोषणा भी की थी। जिसका कार्य आज धरातल में उतर गया है। मुख्यमंत्री ने कहा नवनिर्मित बस स्टैंड क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुगम और सुव्यवस्थित बनाएगा साथ ही स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोज़गार के नए अवसर सृजित कर क्षेत्र के विकास को भी गति प्रदान करेगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य विकास और समृद्धि के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। शहरों से लेकर सुदूर पर्वतीय गाँवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत बन रहा है। समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार संकल्पित होकर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा खटीमा उनका घर है और सभी खटीमावासी उनके परिवार के सदस्य हैं। मुख्यमंत्री ने कहा उन्होंने खटीमा से ही जनसेवा की यात्रा आरंभ की थी। क्षेत्र की प्रत्येक गली और गाँव उनके दिल के बेहद करीब है। खटीमा की माटी और यहाँ के लोगों से उन्हें ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है, उसी के बल पर वो प्रदेश के विकास के लिए कार्य कर पा रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, खटीमा के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। खटीमा क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए गदरपुर-खटीमा बाईपास और नौसर में पुल का निर्माण, पूरे क्षेत्र में सड़कों के व्यापक नेटवर्क का विकास भी सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा खटीमा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना करने के साथ ही चकरपुर में राष्ट्रीय स्तर के आधुनिक खेल स्टेडियम का निर्माण भी कराया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा खटीमा में आधुनिक आईटीआई और पॉलीटेक्निक कॉलेज तथा 100 बेड के नए अस्पताल परिसर का निर्माण कर बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया है। विद्यार्थियों के लिए साथी केंद्र एवं औद्योगिक विकास को गति देने लिए सिडकुल की स्थापना भी की गई है। उन्होंने कहा कि हम खटीमा और टनकपुर के बीच एक भव्य सैन्य स्मारक भी बनाने जा रहे हैं, जिस पर जल्द ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा सरकार पंतनगर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के निर्माण पर कार्य कर रही हैं। जिस पर शीघ्र ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा। उन्होंने कहा राजकीय महाविद्यालय खटीमा में एमकॉम और एमएससी की कक्षाएं शुरू कराई गई हैं,  जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में एकलव्य विद्यालय का संचालन भी प्रारंभ किया गया है। राज्य सरकार ने जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण पुनः प्रारंभ कर पूरे तराई क्षेत्र की पेयजल और सिंचाई की समस्या का समाधान करने की दिशा में कार्य किया है। वहीं, क्षेत्र के लोगों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एम्स के सेटेलाइट सेंटर की स्थापना करने के साथ-साथ खुरपिया में इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी के माध्यम से इस पूरे क्षेत्र के विकास को गति देने का प्रयास भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आगे भी खटीमा के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जायेगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में दंगों की राजनीति करने वालों को सबक सिखाने के लिए  सख्त दंगारोधी कानून बनाकर दंगों में होने वाले नुकसान की भरपाई भी दंगाईयों से ही करने का काम किया गया है। राज्य सरकार ने राज्य में नया कानून लागू कर मदरसा बोर्ड को भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। इस कानून के लागू होने के पश्चात 1 जुलाई 2026 के बाद उत्तराखंड में केवल वही मदरसे संचालित हो पाएंगे, जिनमें हमारे सरकारी बोर्ड द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य में अवैध रूप से संचालित लगभग 250 से अधिक मदरसों को भी बंद करवाया है। हमारा प्रयास है कि राज्य में शिक्षा के मंदिर स्थापित हों, जहां तय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाए । उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में सनातन संस्कृति को बदनाम करने वाले पाखंडियों के विरुद्ध भी ऑपरेशन कालनेमि के माध्यम से भी सख्त कार्रवाई कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और नकल माफियाओं पर अंकुश लगाने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इसी का परिणाम है कि पिछले साढ़े 4 वर्षों में राज्य के लगभग 27 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है, जो अपने आप में नया रिकॉर्ड है। इस कानून के लागू होने के बाद बीते 4 वर्षों में 100 से अधिक नकल माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा हमने समाज में असमानताओं को समाप्त करने तथा सभी के लिए समान अधिकार एवं न्याय सुनिश्चित करने के लिए देश में सबसे पहले ‘समान नागरिक संहिता’ कानून को लागू करने का साहसिक कार्य भी किया है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश, देवभूमि है इसकी संस्कृति, अस्मिता और सम्मान के साथ हम किसी भी प्रकार का कोई षड्यंत्र बर्दाश्त नहीं करेंगे।  सांसद अजय भट्ट एवं पूर्व विधायक डॉ प्रेम सिंह राणा ने नवनिर्मित बस अड्डे के लोकार्पण पर सभी क्षेत्रवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा की यह बस अड्डा निर्माण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ड्रीम प्रोजेक्ट था। उन्होंने नवनिर्मित हाईटेक बस अड्डे का का नाम महाराणा प्रताप रखने पर मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री धामी के कार्यों व निर्णयों को देश के अन्य राज्य भी अनुशरण कर रहे है यह हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा की मुख्यमंत्री क्षेत्र व प्रदेश के सर्वागींण विकास के लिए कटिबद्ध है। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, विधायक शिव अरोरा, नगर पालिका अध्यक्ष खटीमा रामेश चंद्र जोशी, नगर पंचायत अध्यक्ष नानकमत्ता प्रेम सिंह टूरना, दर्जा मंत्री अनिल कपूर डब्बू, फरजाना बेगम, मंजीत सिंह, जिलाध्यक्ष कमल जिन्दल, महामंत्री रमेश जोशी, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा, एवं अन्य लोग मौजूद रहे।

भारत में टेक्नोलॉजी को पसंद करने वाली जेन ज़ी कैसे बीमा जगत को नया रूप दे रही है- जैक्सन जैकब, चीफ़ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर, ज़ूनो जनरल इंश्योरेंस

How tech-savvy Gen Z in India is reshaping the insurance industry - Jackson Jacob, Chief Distribution Officer, Zuno General Insurance
How tech-savvy Gen Z in India is reshaping the insurance industry - Jackson Jacob, Chief Distribution Officer, Zuno General Insurance

भारत में टेक्नोलॉजी को पसंद करने वाले जेन ज़ी युवाओं की संख्या है। 30 वर्ष से कम उम्र की आधी से अधिक आबादी वाली यह पीढ़ी सामाजिक रूप से जागरूक और आर्थिक रूप से बेहद समझदार है जो हर उद्योग के साथ-साथ बीमा क्षेत्र में भी बदलाव ला रही है। तो सवाल यह है कि क्या बीमा क्षेत्र इस पीढ़ी की तेज़ रफ्तार, हर चीज में आसानी और कारगर सेवाओं की उम्मीदों पर खरा उतर पाएगा?

उपभोक्ताओं की उम्मीदों को नया रूप देने वाली जेन ज़ी

उपयोग-आधारित बीमा, वियरेबल्स को इसमें शामिल करने तथा मॉड्यूलर प्लान अब कोई नई बात नहीं रह गए हैं। ये लोगों की बदलती उम्मीदों को पूरा करने के लिए जरूरी साधन बन चुके हैं।
भारत में जेन ज़ी के युवा तो ज़्यादातर ऑनलाइन रहते हैं। हाल के ट्रेंड्स बताते हैं कि, 64% आबादी जानकारी के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करती है, जबकि 63% लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। लेकिन बात सिर्फ डिजिटल आदतों की नहीं है, बल्कि इसमें बुनियादी सोच भी मायने रखती है। जेन ज़ी के 80% से ज़्यादा युवा ऐसे ब्रांड्स के साथ जुड़ना पसंद करते हैं जो किसी सामाजिक उद्देश्य से जुड़े हों, वहीं 88% युवा मूल्य को अहमियत देते हुए हर लेनदेन में पारदर्शिता और सही कीमत की उम्मीद रखते हैं।
इस पीढ़ी के युवाओं को ऐसी सेवाएं चाहिए जो उनके फोन पर उपलब्ध हो, उनकी जरूरतों के हिसाब से बनी हो और उनके लाइफस्टाइल में आसानी से फिट हो। लिहाजा, अब इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स का मतलब सिर्फ कवरेज नहीं रह गया है बल्कि उसमें एक नेक इरादे, बदलाव के हिसाब से ढलने की क्षमता और सादगी का होना भी जरूरी है।

एक संरचनात्मक चुनौती: बाजार में कम पैठ और पुरानी व्यवस्था

भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल बदलाव के बावजूद, बीमा की पहुँच अब भी काफी कम है— जो जीडीपी का लगभग 4% है, जबकि वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसका वास्तविक उपयोग घटकर 3.7% रह गया। डिस्ट्रीब्यूशन के पुराने तरीके और प्रोडक्ट्स को जरूरत के हिसाब से नहीं ढाल पाना, इस दिशा में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है। बहुत लंबी-चौड़ी कागजी कार्रवाई और ‘सबके लिए एक जैसे’ प्लान की उपलब्धता असल में उन युवाओं को पसंद नहीं आतीं, जो आसान, टेक्नोलॉजी पर आधारित और अपनी जरूरत के हिसाब से बनी सेवाओं की उम्मीद करते हैं।
वैसे तो इस इंडस्ट्री में बदलाव हो रहा है, लोगों की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट्स बनाए जा रहे हैं, डिजिटल माध्यमों को अपनाया जा रहा और कागजी कार्रवाई कम हो गई है, फिर भी डिजिटल तकनीक को पसंद करने वाले आज के ग्राहकों की उम्मीद पर पूरी तरह खरा उतरने के लिए अभी भी काफी काम करना बाकी है।

एक नए इंश्योरेंस मॉडल का निर्माण: डिजिटल तकनीक, जरूरतों के अनुरूप और सबको शामिल करने वाला
भारत में बीमा क्षेत्र का नियामक निकाय, आईआरडीएआई अब एक पूरी तरह डिजिटल साधनों पर आधारित इंश्योरेंस इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। ई-केवाईसी, डिजिटल पॉलिसी जारी करने और आने वाले बीमा सुगम प्लेटफॉर्म जैसे कदम नए बदलावों का रास्ता खोल रहे हैं। आने वाला समय डेटा पर आधारित उन लचीली पॉलिसियों का है, जो ग्राहकों की आदतों, लाइफ़स्टाइल के विकल्पों और वास्तविक समय के जोखिमों के हिसाब से बदल सकती हैं।

बीमा कंपनियों को अब क्या करना चाहिए: जेन ज़ी ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने का ब्लूप्रिंट
हमेशा उपयोगी और भरोसेमंद बने रहने के लिए, बीमा कंपनियों को सिर्फ बिक्री के बजाय समाधान उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। इस बदलाव का स्वरूप कुछ इस प्रकार होना चाहिए:

मोबाइल पर केंद्रित इकोसिस्टम: ऐसे आसान और शुरू से अंत तक की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म, जहाँ ग्राहक प्लान्स की तुलना करने, तुरंत दावा करने, पॉलिसी रिन्यू करने और एआई सहायता जय सिंह सेवाओं का लाभ उठा सकें। इस तरह हर कदम पर आने वाली परेशानी दूर हो जाती है।

मॉड्यूलर, व्यवहार पर आधारित प्रोडक्ट्स: असल जिंदगी की जरूरतों के हिसाब से फ्लेक्सिबल प्लान पेश करना— जैसे सिर्फ़ वीकेंड के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस, पे-हाऊ-यु-ड्राइव वाहन बीमा, या फ्रीलांसरों और कामगारों की जरूरतों के लिए खास हेल्थ राइडर्स।

वियरेबल्स के ज़रिए स्वास्थ्य सेवाओं को शामिल करना: फिटनेस डेटा के आधार पर प्रीमियम तय करना, रिवॉर्ड देना और बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रोत्साहित करना, जिससे पॉलिसी जारी करने के बाद भी ग्राहकों से लगातार जुड़ाव बना रहे।

विश्वसनीय संचार: सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और पीयर रिव्यू के ज़रिए जेन ज़ी से जुड़ना। पॉलिसी के नियमों और शर्तों को पूरी तरह स्पष्ट और पारदर्शी बनाना।

गेम्स के ज़रिए वित्तीय समझ को बढ़ावा: उपयोगकर्ताओं को ऐसे आकर्षक टूल्स उपलब्ध कराना, जो बीमा से संबंधित मुश्किल बातों को समझना आसान बनाएं और उन्हें भविष्य की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए प्रेरित करें।

भरोसा, उपयोगिता और आगे की राह

जागरूकता और भरोसे की कमी आज भी एक बड़ी चुनौती है। जेन ज़ी के ज्यादातर युवा तो बीमा को मुसीबत के वक्त का सहारा भर मानते हैं, लंबे समय का साथी नहीं। वे धीरे-धीरे नौकरीपेशा बन रहे हैं और आर्थिक रूप से आजाद हो रहे हैं, लिहाजा बीमा के साथ उनका पहला अनुभव ही आने वाले कई दशकों तक उनकी सोच पर हावी रहेगा। इस भरोसे को दोबारा जीतने के लिए, कंपनियों को केवल न सिर्फ़ “संकट के अंतर” को खत्म करना होगा, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बीमा की भूमिका के बारे में भी फिर से सोचना होगा। इसके लिए डेटा का नैतिक तरीके से इस्तेमाल, सरकारी नियमों का पालन, तथा एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से हर व्यक्ति तक पहुंच बनाना शामिल है, ताकि हर किसी को उसकी जरूरत के हिसाब से तुरंत सेवाएं मिल सके।

एक सामूहिक दायित्व
यह बेहद अहम पड़ाव है। बीमा क्षेत्र को जेन ज़ी की ज़रूरतों के हिसाब से ढलना होगा और एक मजबूत भविष्य के लिए जल्द और स्पष्ट विजन के साथ काम करना होगा, ताकि वे अधिक समावेशी, आधुनिक और मजबूत बन सकें।
भारत में बीमा का भविष्य पुरानी पॉलिसीज़ से नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की उम्मीदों से तय होगा। अब निर्णायक और आपसी सहयोग के साथ बदलाव लाने का समय आ गया है।

सूबे में 365 मेडिकल फैकल्टी की होगी भर्ती: डाॅ. धन सिंह रावत

365 medical faculty members will be recruited in the state Dr. Dhan Singh Rawat
365 medical faculty members will be recruited in the state Dr. Dhan Singh Rawat

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने शासन को भेजा भर्ती प्रस्ताव

मेडिकल काॅलेजों में दूर होगी असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी

देहरादून, 13 जनवरी 2026
सूबे के चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित राजकीय मेडिकल काॅलेजों में शीघ्र ही 365 असिस्टेंट प्रोफेसर की और भर्ती होगी। विभाग ने संकायवार रोस्टर सहित भर्ती प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। शीघ्र ही शासन स्तर से शीघ्र ही उक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिये अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेज दिया जायेगा।

सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य सभी राजकीय मेडिकल काॅलेजों में शत-प्रतिशत स्थाई फैकल्टी की नियुक्ति करना है, जिसके क्रम में सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि राजकीय मेडिकल काॅलेजों श्रीनगर, हल्द्वानी, देहरादून, अल्मोड़ा, हरिद्वार, रूद्रपुर तथा पिथौरागढ़ में कुल 27 संकायों के अंतर्गत असिस्टेंट प्रोफेसरों के रिक्त 365 पदों पर शीघ्र भर्ती की जायेगी। विभाग द्वारा तैयार संकायवार रोस्टर में बैकलाॅक के रिक्त पदों को भी शामिल किया गया है। जिसमें अनुसूचित जाति के 115, अनुसूचित जनजाति 10, अन्य पिछड़ा वर्ग 67, आर्थिक रूप से कमजोर 37 तथा अनारक्षित के 136 पद शामिल है। उक्त भर्ती प्रस्ताव को विभाग द्वारा शासन को भेज दिया गया है। शीघ्र ही शासन स्तर से असिस्टेंट प्रोफेसर की सीधी भर्ती हेतु अधियाचन उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को भेजा जायेगा, इसके लिये विभागीय अधिकारियों को निर्देश दे दिये गये हैं। डाॅ. रावत ने बताया कि वर्तमान में राजकीय मेडिकल काॅलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 567 पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष कुल 202 स्थाई असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत है जबकि 365 पद रिक्त हैं। उक्त रिक्त पदों पर चयन बोर्ड द्वारा शीघ्र ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी। डाॅ. रावत ने कहा कि नये असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति से राजकीय मेडिकल काॅलेजों में संकाय सदस्यों की कमी दूर होगी तथा अध्ययनरत छात्रों को अनुभवी एवं योग्य फैकल्टी का लाभ मिलेगा। जिससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा।

बाॅक्स

इन विभागों में होगी मेडिकल फैकल्टी की भर्ती
प्रदेश के सात राजकीय मेडिकल काॅलेजों में विभिन्न संकायों में 365 असिस्टेंट प्रोफेसरों की शीघ्र ही भर्ती होगी। जिसमें एनाटाॅमी, बायोकैमिस्ट्री, ब्लड बैंक व फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त कुल 8 पदों पर भर्ती होगी। इसी प्रकार फिजियोलाॅजी में 13, पैथोलाॅजी 18, माइक्रोबायोलाॅजी व डमेटोलाॅजी 6-6, फार्माकोलाॅजी 12, कम्युनिटी मेडिसिन 21, जनरल मेडिसिन 49, टीबी एण्ड चेस्ट व आॅप्थलमोलाॅजी 5-5, साइकेट्री व डेंटिस्ट्री 3-3, पीडियाट्रिक्स 19, जनरल सर्जरी 44, आॅर्थोपेडिक्स व रेडियोडायग्नोसिस 17-17, ईएनटी, ईमरजेंसी मेडिसिन, फिजिकसल मेडिसिन एंड रिहैब्लिटेशन व वायरोलाॅजी 7-7, आॅब्स एंड गायनी 37, रेडियोथेरेपी 8, एनेस्थीसियोलाॅजी 20 तथा स्टेटिशियन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रिक्त 2 पदों पर सीधी भर्ती होगी।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग “AA+” में हुई अपग्रेड

THDC India Limited's credit rating has been upgraded to AA+.
THDC India Limited's credit rating has been upgraded to AA+.

ऋषिकेश, 13-01-2026: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को वित्तीय मजबूती और निरंतर विकास की महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में, मेसर्स आईसीआरए लिमिटेड, मेसर्स केयर लिमिटेड और मेसर्स इंडिया रेटिंग से क्रेडिट रेटिंग में अपग्रेड रेटिंग प्राप्त हुई है। रेटिंग एजेंसियों ने निरंतर राजस्व वृद्धि, बेहतर लाभप्रदता और मजबूत बैलेंस शीट का हवाला देते हुए कंपनी की लंबी अवधि की क्रेडिट रेटिंग को ‘स्थिर’ आउटलुक के साथ “AA” से बढ़ाकर “AA+” कर दिया है।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और निदेशक (वित्त), श्री सिपन कुमार गर्ग ने पूरी टीएचडीसीआईएल टीम को बधाई दी और कहा कि क्रेडिट रेटिंग में सुधार कंपनी की मजबूत वित्तीय प्रगति और अनुशासित रणनीतिक क्रियान्वयन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बेहतर रेटिंग, परिचालन दक्षता, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और मजबूत पूंजी संरचना के रखरखाव पर टीएचडीसीआईएल के निरंतर ध्यान का एक बाहरी प्रमाण है।

बेहतर क्रेडिट रेटिंग से टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की पूंजी बाजारों तक पहुंच और मजबूत होने, उधार लेने की लागत में संभावित कमी आने और निवेशकों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है। इससे भविष्य में विकास के अवसरों और रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ाने के लिए कंपनी की वित्तीय क्षमता को भी मजबूती मिलती है।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में से एक है, जिसका 3,657 मेगावाट का विविध परिचालन पोर्टफोलियो है, जिसमें जलविद्युत, पवन, सौर, पंप स्टोरेज और थर्मल पावर आदि परियोजनाएं शामिल हैं।

कंपनी के पोर्टफोलियो में भारत का पहला वेरिएबल स्पीड पंप्ड स्टोरेज प्लांट भी शामिल है। मजबूत परिसंपत्ति आधार, स्थिर नकदी प्रवाह और विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के बल पर टीएचडीसीआईएल भारत की ऊर्जा सुरक्षा में अपनी भूमिका को मजबूत कर रहा है, और साथ ही देश के ऊर्जा परिवर्तन में भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है।

जल जीवन मिशन कार्यालय पर ठेकेदारों ने जड़ा ताला

Contractors locked the Jal Jeevan Mission office.
Contractors locked the Jal Jeevan Mission office.

प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन मे ठेकेदारों की धन की मांग।

ठेकेदारों ने मिशन डायरेक्टर (आईएएस) विशाल मिश्रा को दिया ज्ञापन।

देहरादून- 12 जनवरी 2026: देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन, देहरादून की ओर से जल जीवन मिशन कार्यालय इंदर रोड में धरना प्रदर्शन किया एवं ठेकेदारों ने जल जीवन मिशन कार्यालय में ताला जड़ दिया एवं अपनी बात रखी। इस धरणा का मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन से जुड़े हुए ठेकेदारों के भुगतान में हो रही देरी एवं उनके ऊपर विभागों द्वारा अत्याचार, ग्राम प्रधानों द्वारा योजना को वेरिफाई कराने से संबंधित रहा। वहीं ठेकेदारों ने मिशन डायरेक्टर (आईएएस) विशाल मिश्रा को ज्ञापन दिया। इस धारणा में जेपी अग्रवाल, ध्रुव जोशी, यशपाल चौहान, सुनील गुप्ता, सचिन मित्तल, अंकित सालार, जगजीत सिंह एवं पीड़ित ठेकेदारों का समूह भी शामिल रहे।

ज्ञापन: यह सर्वविदित है कि उत्तराखंड राज्य में माननीय प्रधानमंत्री जी के महत्वाकांक्षी ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन को धरातल पर उतारने हेतु राज्य के ठेकेदारों ने अपनी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक तन, मन एवं धन लगाकर अत्यंत जिम्मेदारी एवं निष्ठा के साथ कार्य किया है। परंतु अत्यंत खेद के साथ अवगत कराना पड़ रहा है कि ठेकेदारों को समय-समय पर यह आश्वासन दिया गया कि जियो-टैगिंग पूर्ण होने के पश्चात भुगतान किया जाएगा। तत्पश्चात यह कहा गया कि के.एम.एल. फाइल तैयार होने पर धनराशि आवंटित होगी। अब यह सूचित किया जा रहा है कि Unique ID (Mapping पूर्ण होने के बाद) बनने पर ही भुगतान संभव होगा।  इस प्रकार ठेकेदारों को विगत दो वर्षों से भुगतान नहीं किया गया है, जिससे सरकार की मंशा स्पष्ट प्रतीत नहीं हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

यह अवगत कराना आवश्यक हो गया है कि योजनाओं की निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो जाने के उपरांत भी ठेकेदारों को उनका रखरखाव एवं संचालन जारी रखने के लिए बाध्य किया जा रहा है। वर्तमान में योजनाओं की मॉनिटरिंग भी ठेकेदारों द्वारा ही करवाई जा रही है।जिन स्थानों पर अभी तक जलापूर्ति प्रारंभ नहीं हो पाई है, वहां स्थानीय जनता द्वारा कनेक्शन उखाड़ दिए गए हैं। इसके बावजूद ठेकेदारों से योजनाओं का संचालन जारी रखने की अपेक्षा की जा रही है।योजनाओं के निरंतर संचालन के बावजूद फाइनल बिल, एक्स्ट्रा आइटम, वेरिएशन आदि तैयार नहीं किए जा रहे हैं, जिसके कारण योजनाओं की एफसीआर स्वीकृत नहीं हो पा रही है।ठेकेदारों को भुगतान प्रक्रिया के स्थान पर किसी न किसी जांच, आईडी निर्माण अथवा फाइल तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक रूप से उलझाकर रखा जा रहा है, जो कि उचित एवं न्यायसंगत नहीं है।

महोदय जल जीवन मिशन के अंतर्गत अधिकारियों एवं शासन की कार्यप्रणाली के कारण ठेकेदारों को ऐसी स्थिति में डाल दिया गया है कि वे बैंक ब्याज के अत्यधिक भार के चलते दिवालियापन की कगार पर पहुँच चुके हैं। यह स्थिति अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक है। जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश में हाल ही में धन आवंटन किया गया है तथा केरल में 100% भुगतान किसी वैकल्पिक योजना के माध्यम से किया जा चुका है, वहीं उत्तराखंड में इस प्रकार की व्यवस्था क्यों नहीं की जा सकती—यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में कई जाँच एजेंसियाँ अपने-अपने स्तर पर जाँच कर चुकी हैं। इसके बावजूद, प्रदेश में कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ किए गए हैं। जो कार्य शेष हैं, वे ठेकेदारों की लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि वन भूमि, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) एवं अन्य हाईवे संबंधी आपत्तियों के कारण बाधित हैं।अतः निवेदन है कि परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए उत्तराखंड में भी वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि ठेकेदारों को अनावश्यक आर्थिक संकट से राहत मिल सके और योजना के उद्देश्यों की पूर्ति हो सके।

उत्तराखंड में किए गए समस्त कार्य जल निगम एवं जल संस्थान की देखरेख में संपादित हुए हैं, जिनकी गुणवत्ता की जांच थर्ड पार्टी एजेंसी द्वारा भी की गई है। ऐसी स्थिति में गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न कैसे लगाया जा सकता है? यदि इसके बावजूद किसी योजना में गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी केवल ठेकेदार पर ही क्यों डाली जा रही है? यह भी विचारणीय है कि कार्य के दौरान संबंधित पेयजल निगम एवं जल संस्थान के अभियंता अपनी पर्यवेक्षणीय भूमिका में कहाँ थे।

क्या संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के लिए उनकी तनख्वाह रोकी गई है अथवा उनके विरुद्ध कोई विभागीय कार्रवाई की गई है?यदि ठेकेदारों ने मनमाने ढंग से नियमों के विपरीत कार्य किया है, तो फिर उनके साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई?इस विषय में निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच आवश्यक है, जिससे वास्तविक दोषियों की जिम्मेदारी तय की जा सके।

महोदय हम आपके संज्ञान में यह तथ्य लाना चाहते हैं कि जहाँ कार्य में त्रुटियाँ पाई गई हैं, वहाँ भुगतान रोका जाना समझ से परे नहीं है, परंतु जिन कार्यों में कोई आपत्ति नहीं है, उनके भुगतान को रोके जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। इस विषय में हमारी एसोसिएशन द्वारा पूर्व में भी लगभग 12–13 बार पत्राचार के माध्यम से आपको अवगत कराया जा चुका है, किंतु अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। हम उत्तराखंड सरकार एवं सभी उच्चाधिकारियों से विनम्र अनुरोध करते हैं कि वे प्राथमिकता के आधार पर ठेकेदारों की लंबित बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित करें तथा ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किए जाने एवं जमा धनराशि की जब्ती जैसी कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाई जाए।

महोदय, आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे आज के धरने को केवल एक विरोध प्रदर्शन के रूप में न देखते हुए, इससे जुड़े श्रमिक परिवारों एवं सप्लायरों के परिवारों की गंभीर समस्याओं को संवेदनशीलता एवं गहनता से समझते हुए इसकी समीक्षा करें। ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न न हों कि ठेकेदार आर्थिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर पहुँच जाएँ और कोई दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाने को विवश हों। यदि ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं संबंधित अधिकारियों की होगी।साथ ही, हम आपको यह भी सूचित करना चाहते हैं कि आज के धरने के उपरांत ठेकेदार आगे किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करेंगे। परिणामस्वरूप यदि योजनाओं में देरी होती है अथवा कार्यस्थल पर किसी प्रकार की क्षति होती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं संबंधित विभाग की होगी।

जनदर्शन; जनमानस के प्रति जिला प्रशासन का विश्वासी कमिटमेंट; समाधान से लेकर सुधार तक

Public interaction; the district administration's committed approach towards the public; from problem-solving to reform.
Public interaction; the district administration's committed approach towards the public; from problem-solving to reform.

टिहरी गढवाल निवासी उमा रानी को कैंसर के उपचार हेतु रायफल फंड से सहायता; सुनिता की बेटी के विवाह को आर्थिक सहायता

82 वर्षीय बुजुर्ग संतोष को परिजनों सम्पति अपने नाम करा छोड़ा लावारिस; डीएम ने दर्ज कराया भरणपोषण एक्ट में वाद दर्ज

एकल माता मोनिका की 2 बेटियों वं विधवा रेनू की 1 बेटी की शिक्षा नंदा-सुनंदा से होगी पुनर्जीवित; बालक की फीस माफी हेतु स्कूल प्रबन्धन को पत्र

18 माह से दाखिला खारिज को भटक रहे गौरव पंवार; डीएम ने मांगी आख्या; 1 दिन आख्या प्राप्त न होने की दशा में पटवारी निलम्बन पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश

मा0 मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन का जनदर्शन आर्थिक सहायता से लेकर उपचार तक; शिक्षा से लेकर रोजगार तक

देहरादून, दिनांक 12 जनवरी 2026(सू.वि.)जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में आज आयोजित जन दर्शन कार्यक्रम में कुल 130 से अधिक शिकायतें/प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। जनपद के साथ-साथ प्रदेश के अन्य जनपदों से भी फरियादी अपनी शिकायतों एवं समस्याओं के निस्तारण हेतु जन दर्शन में उपस्थित हुए।
जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन दर्शन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण एवं संवेदनशीलता के साथ निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक शिकायत के निस्तारण के उपरांत संबंधित शिकायतकर्ता को अवश्य सूचित किया जाए, ताकि जनमानस का प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हो।
जन दर्शन कार्यक्रम में सहारनपुर रोड निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग महिल संतोष ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि पति की मृत्यु के बाद उन्होंने अपनी संपत्ति पुत्र के नाम गिफ्ट डीड कर दी थी। पुत्र की भी मृत्यु हो चुकी है, तथा बहू द्वारा देखभाल नहीं की जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भरण-पोषण अधिनियम के अंतर्गत वाद दर्ज कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
ओगल भट्टा निवासी एकल माता मोनिका की दो बेटियों की शिक्षा पुनर्जीवित करने हेतु प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत सहयोग प्रदान किए जाने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को कमेटी के माध्यम से परीक्षण कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करने को कहा।
झंडा मोहल्ला निवासी विधवा रेणु देवी की पुत्री अनुष्का की शिक्षा प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के अंतर्गत तथा पुत्र अर्णीत की फीस माफी के लिए विद्यालय प्रबंधन से समन्वय स्थापित कर सहयोग करने के निर्देश दिए गए।
ग्राम चमेली, नरेंद्रनगर (टिहरी गढ़वाल) निवासी उमा रानी ने बताया कि उनका पीजीआई चंडीगढ़ में विगत 5 वर्षों से उपचार चल रहा है तथा चिकित्सकों द्वारा कैंसर की पुष्टि की गई है। उन्होंने आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। जिलाधिकारी ने राइफल क्लब फंड से आर्थिक सहायता हेतु प्रभारी अधिकारी शस्त्र को पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
गांधीग्राम निवासी सुनीता देवी ने बताया कि उनके पति विगत 10 वर्षों से बीमार हैं तथा आगामी मार्च माह में पुत्री का विवाह प्रस्तावित है। जिलाधिकारी ने पुत्री के विवाह हेतु शासन की सहायता योजनाओं से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश समाज कल्याण विभाग को दिए।
मालदेवता निवासी गौरव पवार ने 18 माह से लंबित दाखिल-खारिज प्रकरण की शिकायत की। मामला जन दर्शन में तहसील स्तर पर चिह्नित होने के बावजूद पटवारी स्तर पर लंबित पाया गया। जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए अगले दिन तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए तथा चेतावनी दी कि अनुपालन न होने की स्थिति में संबंधित पटवारी के निलंबन की पत्रावली प्रस्तुत की जाए।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जन समस्याओं के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, तथा प्रशासन का प्रत्येक अधिकारी जनहित के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी प्रतिबद्धता के साथ करे।
इस अवसर पर विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी सदर हरिगरि, उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी, उप नगर आयुक्त संतोष कुमार, मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल सहित विद्युत, एमडीडीए, पेयजल, लोनिवि आदि सम्बन्धित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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