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टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा आयोजित 31वीं इंटर सीपीएसयू शतरंज प्रतियोगिता सफलतापूर्वक संपन्न

The 31st Inter CPSU Chess Tournament organized by THDC India Limited has successfully concluded.
The 31st Inter CPSU Chess Tournament organized by THDC India Limited has successfully concluded.

ऋषिकेश, 01-02-2026: टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा विद्युत खेल नियंत्रण बोर्ड (पीएससीबी), विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित 31वीं इंटर–सेंट्रल पावर सेक्टर अंडरटेकिंग्स (आईसीपीएसयू) शतरंज प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक समापन दिनांक 31 जनवरी 2026 को टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड में किया गया।

टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सिपन कुमार गर्ग ने प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता टीमों एवं खिलाड़ियों को बधाई दी तथा सभी प्रतिभागियों द्वारा प्रदर्शित खेल भावना की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि टीएचडीसीआईएल खेल एवं स्वास्थ्य की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सतत रूप से प्रतिबद्ध है, जो कर्मचारियों के समग्र विकास में सहायक होने के साथ-साथ विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के मध्य आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करता है।

समापन समारोह में डॉ. ए. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन–प्रशासन एवं केंद्रीय संचार), टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने विजेता टीमों एवं खिलाड़ियों को बधाई दी तथा पूरे टूर्नामेंट के दौरान सभी टीमों द्वारा प्रदर्शित उत्साहपूर्ण सहभागिता एवं अनुकरणीय खेल भावना की प्रशंसा की।

इस प्रतियोगिता में विद्युत क्षेत्र के विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों की कुल 11 टीमों ने भाग लिया। पुरुष शतरंज चैंपियनशिप (टीम स्पर्धा) में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) द्वितीय स्थान पर रहा तथा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

पुरुष व्यक्तिगत शतरंज चैंपियनशिप में श्री सौरभ बिस्वास (ग्रिड इंडिया) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि श्री सौरभ धीमान (एसजेवीएनएल) एवं श्री नागा पवन कल्याण कुमार (पीजीसीआईएल) ने क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।

महिला शतरंज चैंपियनशिप (टीम स्पर्धा) में पीजीसीआईएल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि एनएचपीसी द्वितीय एवं ग्रिड इंडिया तृतीय स्थान पर रहा।

महिला व्यक्तिगत शतरंज चैंपियनशिप में सुश्री लिया जॉर्ज (एनएचपीसी) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि सुश्री हिमांशी (पीजीसीआईएल) एवं सुश्री कमलेश (पीजीसीआईएल) ने क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन श्री ए. के. विश्वकर्मा, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन–कल्याण) द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रतियोगिता का आयोजन स्विस प्रणाली के अंतर्गत, फीडे (एफ.आई.डी.ई.) के समस्त नियमों एवं विनियमों का पूर्णतः पालन करते हुए किया गया।

प्रतियोगिता का संचालन सुश्री स्वाति भट्ट (अंतरराष्ट्रीय निर्णायक), श्री संकल्प अरोड़ा (फीडे निर्णायक) एवं सुश्री प्रकृति मनोध्या (फीडे निर्णायक) द्वारा किया गया।

 

उक्त टूर्नामेंट में विद्युत मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सी.ई.ए.), भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बी. बी.एम.बी.), दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डी.वी.सी.), ग्रिड इंडिया, एनएचपीसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आर.ई.सी.), एसजेवीएनएल तथा टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की टीमों ने सहभागिता की।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उत्तराखण्ड की सबसे प्रभावी प्रस्तुति, 13 विषय रखे

Uttarakhand gave the most effective presentation at the Central Zonal Council meeting, presenting 13 issues.
Uttarakhand gave the most effective presentation at the Central Zonal Council meeting, presenting 13 issues.

– नवा रायपुर में आयोजित स्थायी समिति की 17वीं बैठक में चार राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई विस्तृत चर्चा
देहरादून। नवा रायपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में उत्तराखण्ड राज्य ने विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को मजबूती के साथ उठाया। बैठक में उत्तराखण्ड द्वारा 13 बिंदु/विषय प्रस्तुत किए गए, जो अन्य राज्यों की तुलना में सर्वाधिक रहे। राज्य की ओर से रखे गए विषयों पर केंद्र सरकार द्वारा सकारात्मक रुख व्यक्त किया गया। मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक उत्तराखण्ड राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें न केवल राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों को केंद्र स्तर पर मजबूती से रखा गया, बल्कि इससे क्षेत्रीय सहयोग और समन्वय को भी नई गति मिलेगी। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तथा वन एवं पर्यावरण  आरके सुधांशु की अध्यक्षता में राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रतिभाग किया।  मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 17वीं बैठक में परिषद के सदस्य राज्य छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखण्ड और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में चारों राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, लंबित मामलों के समाधान और आपसी समन्वय को मजबूत करने संबंधी विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री तथा वन एवं पर्यावरण   आरके सुधांशु ने बताया कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह बैठक बेहद प्रभावी रही। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की ओर से सभी बिंदुओं को ठोस तर्कों और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया, जिस पर भारत सरकार द्वारा सकारात्मक रुख अपनाते हुए समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में वाराणसी में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठाए गए कुछ महत्वपूर्ण 11 बिन्दुओं को आगे इसकी पुनःसमीक्षा तथा भविष्य में इसकी प्रगति की समीक्षा किए जाने हेतु यथावत रखा गया था। बैठक में इन 11 बिन्दुओं से संबंधित विषयों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इन बिन्दुओं में खाद्य सुरक्षा उपायों से संबंधित कार्यवाही, महिलाओं तथा बच्चों के यौन शोषण संबंधित प्रकरणों तथा पाक्सो से संबंधित प्रकरणों पर कार्यवाही, फास्ट ट्रैक कोर्ट से संबंधित कार्यवाही, महिलाओं तथा बच्चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु उपाय, ईआरएसएस 112 से संबंधित कार्य, सहकारिता को प्रभावी बनाए जाने हेतु उपाय, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से संबंधित कार्य, सभी गांवों में पांच किमी की परिधि में बैंक की शाखाएं/आईपीपीबी (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) की स्थापना संबंधी कार्य आदि विषयों की समीक्षा शामिल थी।   बैठक के दौरान राज्यों द्वारा अपनाई जा रही नवाचारपूर्ण पहलों एवं बेस्ट प्रैक्टिसेस पर भी चर्चा की गई। उत्तराखण्ड द्वारा निम्न 03 बेस्ट प्रेक्टिसेस प्रस्तुत की गई: राज्य-से-निवेश आपूर्ति श्रृंखला योजना, डिजिटल शिक्षा प्रबंधन प्रणाली  तथा सारा द्वारा किए जा रहे जल संवर्द्धन/संरक्षण से संबंधित कार्य अन्य 03 राज्यों उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़ द्वारा भी तीन-तीन प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक में उत्तराखण्ड के प्रस्तुतीकरण को सराहा गया। बैठक में अधिकारियों ने एक-दूसरे के अनुभव साझा किए, जिससे आपसी सहयोग, नीति निर्माण की गुणवत्ता तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को नई दिशा मिलेगी।  इस बैठक में राज्य से प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण  आरके सुधांशु, सचिव  बीवीआरसी पुरुषोत्तम, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास  विनोद कुमार सुमन, सचिव सामान्य प्रशासन विभाग  राजेंद्र कुमार, विशेष सचिव गृह, श्रीमती निवेदिता कुकरेती, विशेष सचिव,  पराग मधुकर धकाते और द्वारा इस बैठक में प्रतिभाग किया गया।
बैठक से योजनाओं के क्रियान्वयन को मिलेगी गति : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की बैठक राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत करने और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने का प्रभावी मंच है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड ने इस बैठक में विकास, आधारभूत संरचना, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जनहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के साथ रखा है। परिषद के माध्यम से प्राप्त सहमति और सुझावों के आधार पर उत्तराखण्ड राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक दृष्टिकोण से नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को गति मिलती है, जिसका सीधा लाभ जनता को मिलता है।
उत्तराखण्ड द्वारा रखे जाने वाले बिन्दुओं के संबंध में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा सभी विभागों से कराई गई थी प्रभावी तैयारी :
मुख्य सचिव  आनंद बर्द्धन द्वारा विभिन्न विभागों के साथ पृथक-पृथक बैठक कर सभी बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए परिषद की बैठक में प्रस्तुत करने हेतु प्रस्ताव तैयार कराया गया था। इस बैठक में पहली बार उत्तराखण्ड से संबंधित अधिकतम 13 विषयों को प्रस्तुत किया गया, जबकि छत्तीसगढ़ द्वारा 04, मध्य प्रदेश द्वारा 05 तथा उत्तर प्रदेश द्वारा 03 विषय प्रस्तुत किए गए।
उत्तराखण्ड राज्य की ओर से सामाजिक, आधारभूत संरचना एवं आपदा-संवेदनशील परिस्थितियों से जुड़े विषय प्रमुखता से उठाए गए। इनमें प्रत्येक जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु मानकों में संशोधन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की धनराशि में वृद्धि, निराश्रित गोवंशीय पशुओं के संरक्षण, विद्युत लाइनों एवं अन्य विद्युत संरचनाओं के आपदा से क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में पुनस्र्थापन के मानक निर्धारण, मेरठ-ऋषिकेश आरआरटीएस विस्तार, हरिद्वार-हर्रावाला रेल लाइन के दोहरीकरण, आपदा से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहरों के पुनर्निर्माण मानक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय, आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास हेतु वन भूमि हस्तांतरण, वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम में शिथिलीकरण तथा टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन परियोजना से जुड़े विषय शामिल रहे।
केंद्र सरकार द्वारा रखे गए राज्य से संबंधित प्रमुख विषय :   बैठक में भारत सरकार द्वारा ई-गवर्नेंस एवं प्रशासनिक सुधार से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। इनमें सभी योजनाओं एवं ई-गवर्नेंस एप्लीकेशनों में लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी को मानक लोकेशन कोड के रूप में अपनाने, प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम, पीएम-यशस्वी योजना, राज्य स्तर पर कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट रिस्पांस टीम की स्थापना, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं साइबर अपराध से जुड़े विषय शामिल रहे। इसके अतिरिक्त शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विषयों में केंद्रीय विद्यालयों के लिए भूमि उपलब्धता, नवोदय विद्यालय योजना, आपदा के कारण क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलों के पुनस्र्थापन हेतु प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत त्वरित वित्तीय प्रावधान, जिला खनिज न्यास की स्थापना, खनिज ब्लॉकों से जुड़े मुद्दे तथा मत्स्य पालन, ट्रेसेबिलिटी एवं एक्वा पार्क/जोन को बढ़ावा देने से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया गया
परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडा तय करने का मंच :  यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि इसमें मध्य क्षेत्रीय परिषद की मुख्य बैठक से पहले एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाता है। यहां लिए गए निर्णय और सिफारिशें परिषद की आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाती हैं। बैठक में अंतर्राज्यीय लंबित मामलों के समाधान, नीतिगत समन्वय को मजबूत करने और विकास परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने पर चर्चा हुई।
विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा :   बैठक में पंचायती राज, कानून एवं न्याय, गृह, सहकारिता, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, ऊर्जा, आवास एवं शहरी विकास, ग्रामीण विकास, रेल, खान, सामाजिक न्याय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, कोयला, नागरिक उड्डयन, पर्यावरण, जल जीवन मिशन, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, वित्त सेवाएं, डाक, पशुपालन, वाणिज्य और मत्स्य पालन जैसे कई मंत्रालयों से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इन चर्चाओं का उद्देश्य विकास योजनाओं में तेजी लाना और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना रहा।

कोटद्वार में विकास और प्रकृति संरक्षण का संगम, मुख्यमंत्री ने बर्ड वाचिंग फेस्टिवल का किया शुभारंभ

A blend of development and nature conservation in Kotdwar; Chief Minister inaugurates Bird Watching Festival.
A blend of development and nature conservation in Kotdwar; Chief Minister inaugurates Bird Watching Festival.

– कोटद्वार में मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात, 326 करोड़ से अधिक की 61 योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास
– कोटद्वार में बर्ड फेस्टिवल का आगाज़, करोड़ों की योजनाओं से विकास को नयी गति, बहुत बड़ी संख्या में जनसमूह रहा उपस्थित
– बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल से कोटद्वार को नई पहचान, इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री
कोटद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार में आयोजित बर्ड फेस्टिवल में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने जनपद के विभिन्न विकासखंडों के लिए करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कोटद्वार पहुंचकर सबसे पहले दिव्यांग बालक-बालिकाओं से मिलकर उनसे संवाद किया तथा उनकी शिक्षा के बारे में जाना। उसके बाद उन्होंने सिद्धबली मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात उन्होंने सनेह क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय बर्ड वाचिंग फेस्टिवल का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने मुख्यमंत्री धामी तथा अन्य अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। साथ ही राजकीय कन्या इंटर कॉलेज कोटद्वार की छात्राओं ने लोकभाषा गढ़वाली में स्वागत गान गाकर अतिथियों का अभिनंदन किया। हेरिटेज स्कूल के नन्हे मुन्ने बच्चों की पक्षी एवं प्रकृति संरक्षण पर शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। शनिवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा कुल 61 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया। इनमें 21 योजनाओं का शिलान्यास शामिल रहा, जिनकी कुल अनुमानित लागत 8,172.78 लाख रुपये रही। वहीं 40 योजनाओं का लोकार्पण किया गया, जिनकी कुल लागत 24,439.55 लाख रुपये रही। इस प्रकार कुल 32,612.33 लाख रुपये की विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास संपन्न हुआ।  मुख्यमंत्री ने फेस्टिवल परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया, जिनमें पक्षियों की फोटो प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने पक्षी पहचान एवं संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल अत्यंत सराहनीय हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वां दशक उत्तराखण्ड का दशक होगा और इसमें महिलाओं का योगदान सर्वाधिक रहेगा। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद गुणवत्ता में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों से भी बेहतर हैं। मुख्यमंत्री ने कोटद्वार क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बस टर्मिनल, आयुष चिकित्सालय, खोह नदी को प्रदूषण मुक्त करने हेतु एसटीपी की स्थापना, मालन नदी पर 26 करोड़ रुपये से अधिक लागत से पुल निर्माण तथा कोटद्वार-नजीबाबाद फोर लेन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए घोषणाएँ करते हुए कहा कि हल्दूखाता में नगरीय पेयजल योजना की खनन प्रभावित जीर्ण शीर्ण पाइपलाइन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। राजकीय इंटर कॉलेज कोटद्वार में दो कक्षा-कक्ष, पुस्तकालय, विज्ञान कक्ष, कंप्यूटर कक्ष तथा चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। कोटद्वार में खोह नदी के दायें तट पर स्थित जीतपुर गांव में बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जाएंगे। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र झंडीचौड़ में 108 एम्बुलेंस सेवा की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। साथ ही राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में चहारदीवारी का निर्माण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक पक्षी प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बर्ड फेस्टिवल कोटद्वार क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता की दृष्टि से देश के समृद्ध राज्यों में शामिल है, जहाँ लगभग 71 प्रतिशत भूभाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। राज्य पर्यावरण संरक्षण में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां प्रतिवर्ष लाखों प्रवासी पक्षी आते हैं तथा देश में पाई जाने वाली लगभग 1300 पक्षी प्रजातियों में से 400 से अधिक दुर्लभ एवं सुंदर प्रजातियाँ उत्तराखण्ड में पाई जाती हैं। मुख्यमंत्री ने सुरख़ाब पक्षी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सुनहरे पंखों वाला दुर्लभ पक्षी सर्दियों के मौसम में उत्तराखण्ड आता है, जिस पर प्रचलित कहावत है कि “सुरख़ाब के पंख लगे हैं क्या”। उन्होंने कहा कि पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ बीज प्रसार एवं पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत सरकार के सहयोग से राज्य में वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है तथा इस उद्देश्य से वन विभाग को आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जा रहा है। सरकार ड्रोन पायलट, इको-टूरिज्म एवं वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी को प्रोत्साहित कर रही है तथा विद्यार्थियों को शैक्षिक यात्राओं में सहयोग प्रदान कर रही है। घायल पशु-पक्षियों के उपचार हेतु कालागढ़ में विशेष व्यवस्था की गई है। विधानसभा अध्यक्षा एवं स्थानीय विधायक ऋतु खण्डूरी भूषण ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखण्ड में पायी जाने वाली लगभग 700 पक्षी प्रजातियों में से करीब 400 प्रजातियाँ कोटद्वार क्षेत्र में पायी जाती हैं, जो यहां की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है। उन्होंने बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल को इको-टूरिज़्म एवं बर्ड-टूरिज़्म को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि इस आयोजन को प्रदेश सरकार के वार्षिक कैलेंडर में शामिल कर प्रत्येक वर्ष 31 जनवरी को ‘बर्ड फेस्टिवल दिवस’ के रूप में मनाया जाए, जिससे देश विदेश के पक्षी एवं प्रकृति प्रेमी कोटद्वार की ओर आकर्षित हों। विधानसभा अध्यक्षा ने कहा कि ऐसे आयोजनों से कोटद्वार को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में क्षेत्र को मिली करोड़ों रुपये की विकास योजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे जनपद के समग्र विकास को नयी गति मिलेगी। जिलाधिकारी ने उपस्थित जनसमूह का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि जैव विविधता, प्रकृति और जीवन के प्रति संवेदनशीलता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि बर्ड फेस्टिवल अपने आप में एक अनूठी पहल है, जो न केवल पक्षियों के संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी के क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार भी खोलता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से कोटद्वार क्षेत्र को पर्यटन के नए आयाम मिलेंगे और यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों की पहचान बनेगा। जिलाधिकारी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि जब भी हम किसी पक्षी को खुले आकाश में उड़ते हुए देखते हैं, तब हमें स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। स्वतंत्रता केवल मनुष्य का अधिकार नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों और सम्पूर्ण प्रकृति का भी उतना ही मौलिक अधिकार है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह फेस्टिवल आने वाले समय में प्रकृति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का सशक्त माध्यम बनेगा और जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नयी दिशा देगा।
दो दिवसीय बर्ड वाॅचिंग फेस्टिवल के पहले दिन लगभग 2500 से अधिक लोगों ने प्रतिभाग किया। इसमें 300 छात्र-छात्राएं, 800 युवा, 400 महिलाएं, 100 बर्ड वाॅचर तथा 900 से अधिक अन्य लोग शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित मैराथन दौड़, पेंटिंग, क्विज एवं निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं को फेस्टिवल के अंतिम दिन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
मंच संचालन डॉ. . पद्मेश बुड़ाकोटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विधायक लैंसडाउन महंत दिलीप सिंह रावत, उत्तराखण्ड गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष पं. राजेद्र अणथ्वाल, उपाध्यक्ष सिंचाई समिति ऋषि कंडवाल, जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, मेयर नगर निगम कोटद्वार शैलेंद्र सिंह रावत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार, मुख्य विकास अधिकारी गिरीश गुणवंत, डीएफओ लैंसडाउन जीवन मोहन दगाड़े, मण्डी समिति के अध्यक्ष सुमन कोटनाला, नगर आयुक्त कोटद्वार पीएल शाह, उपजिलाधिकारी कोटद्वार चतर सिंह चौहान, जिला पर्यटन विकास अधिकारी खुशाल सिंह नेगी, जिला अध्यक्ष भाजपा राज गौरव नौटियाल, पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह रावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बर्ड वॉचर तथा आम नागरिक उपस्थित रहे।

हरिद्वार में हुई एचआरडीए के कार्यों की अहम समीक्षा बैठक

A crucial review meeting of HRDA's work was held in Haridwar.
A crucial review meeting of HRDA's work was held in Haridwar.

– प्रधानमंत्री आवास और शहरी विकास को मिलेगी नई गति, आवास, मास्टर प्लान और यूनिटी मॉल पर सरकार का फोकस, डॉ. आर. राजेश कुमार ने एचआरडीए को दिए स्पष्ट निर्देश
देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सुनियोजित शहरी विकास, पारदर्शी आवास व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में शासन स्तर पर विकास प्राधिकरणों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि योजनाओं का लाभ आम जनता तक समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पहुँच सके। सचिव आवास विकास एवं राज्य सम्पत्ति उत्तराखण्ड, डॉ. आर. राजेश कुमार ने शुक्रवार को हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) के सभागार में समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने एचआरडीए द्वारा एकत्र किए गए राजस्व, एकल एवं गैर-एकल आवासीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। सचिव ने निर्देश दिए कि आवासीय आवेदनों पर शासन स्तर से लगाई गई आपत्तियों का त्वरित निस्तारण कर उन्हें तत्काल शासन को प्रेषित किया जाए।
प्रधानमंत्री आवास योजना में गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर:   समीक्षा के दौरान सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्माणाधीन आवासों में पूर्ण पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल निर्माण नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित और टिकाऊ आवास उपलब्ध कराना है।
मास्टर प्लान, सौंदर्यकरण और थर्ड पार्टी ऑडिट पर फोकस :    डॉ. आर. राजेश कुमार ने विगत वर्षों में किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए पार्किंग स्थलों, सड़क किनारे सौंदर्यकरण, गमलों के रखरखाव और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। साथ ही मास्टर प्लान को प्राथमिकता बताते हुए कार्यों में कमियों की पुनरावृत्ति रोकने और थर्ड पार्टी एजेंसी से गुणवत्ता जांच कराने पर जोर दिया।
यूनिटी मॉल का स्थलीय निरीक्षण, काम में तेजी के निर्देश :   बैठक के बाद सचिव ने निर्माणाधीन यूनिटी मॉल का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि यह प्रधानमंत्री की प्राथमिक परियोजना है, जिस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष फोकस है। वर्तमान में लगभग 45 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। भारत सरकार से प्राप्त किस्त जारी कर दी गई है, शेष एस्केलेशन प्रस्ताव शीघ्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कार्य में तेजी लाई जा सके।
‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ को मिलेगा नया मंच :   एचआरडीए सचिव मनीष कुमार सिंह ने जानकारी दी कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना के तहत हरिद्वार जनपद का चयन किया गया है। यूनिटी मॉल में 54 शॉप और 3 मल्टी कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं, जहां देश के सभी राज्यों और उत्तराखंड के 13 जनपदों के स्थानीय उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे।
डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान :   मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि शहरी विकास योजनाएं पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनहित के साथ लागू हों। एचआरडीए द्वारा किए जा रहे कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण, समयबद्ध क्रियान्वयन और जनआवश्यकताओं को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यूनिटी मॉल जैसी परियोजनाएं न केवल स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय मंच देंगी, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगी। सभी विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मास्टर प्लान के अनुरूप कार्य करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

प्रवासी उत्तराखण्डियों से संवाद का सशक्त मंच बना ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी–02’

'Uttarakhand Mahotsav Rohini-02' became a powerful platform for interaction with migrant Uttarakhandis.
'Uttarakhand Mahotsav Rohini-02' became a powerful platform for interaction with migrant Uttarakhandis.

– लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार निरंतर कार्यरत : मुख्यमंत्री धामी
– महिला सशक्तिकरण, पर्यटन और संस्कृति के संरक्षण से मजबूत हो रहा नया उत्तराखण्ड
– प्रधानमंत्री के ‘विकास भी, विरासत भी’ मंत्र पर आगे बढ़ रहा राज्य
देहरादून।  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिल्ली के रोहिणी में ‘हम सबका उत्तराखण्ड’ संस्था द्वारा आयोजित ‘उत्तराखण्ड महोत्सव रोहिणी सीजन–02’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डी, लोक कलाकार, युवा एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उत्तराखण्ड की संस्कृति, परंपराओं एवं लोक विरासत को समर्पित इस आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा ‘उत्तराखण्ड के सितारे’ सम्मान से सुप्रसिद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सौरभ जोशी, हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज गोरखेला तथा लोक गायिका कल्पना चौहान को सम्मानित किया गया।  मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन लोक कलाकारों को मंच और सम्मान देने के साथ-साथ समाज को सेवा और संस्कारों की भावना से भी जोड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति आज भी अपने गीतों, वेशभूषा और परंपराओं के माध्यम से जीवंत है तथा देश-विदेश में रहने वाले उत्तराखण्डी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने यह उल्लेख किया कि पारंपरिक गीत-संगीत और वेशभूषा के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से सामने आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इससे बच्चों और युवाओं में अपनी बोली, संस्कृति और परंपराओं के प्रति गर्व की भावना विकसित होती है। लोकनृत्य और लोकगीत राज्य की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने देवभूमि उत्तराखण्ड को आस्था, तप, त्याग और साधना की भूमि बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगा-यमुना एवं आदि कैलाश जैसे पवित्र स्थलों के कारण विश्वभर में विशेष पहचान रखता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि स्वयं पहाड़ से जुड़े होने के कारण लोकसंस्कृति उनकी जीवनशैली और संस्कारों का अभिन्न हिस्सा रही है, इसी सोच के साथ राज्य सरकार संस्कृति को विकास से जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों का पुनर्विकास इसी दृष्टिकोण से किया जा रहा है। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों से न केवल आस्था को मजबूती मिली है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी नया आयाम मिला है। मंदिर माला मिशनों के माध्यम से धार्मिक स्थलों का संरक्षण और विकास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उत्तराखण्ड आज वेडिंग डेस्टिनेशन, एडवेंचर टूरिज्म और फिल्म शूटिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। विंटर टूरिज्म, ‘वेड इन उत्तराखण्ड’ और होम-स्टे जैसी पहलों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। कृषि, दुग्ध उत्पादन, मधु उत्पादन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण आजीविका को सशक्त किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ योजना और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड से राज्य के उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की गुणवत्ता की उन्होंने विशेष सराहना की।   मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड ने सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, बजट, बिजली उत्पादन और स्वास्थ्य सुविधाओं में निरंतर सुधार हुआ है। पलायन रोकने, किसानों की आय बढ़ाने और युवाओं को रोजगार देने में राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि सख्त कानूनों, पारदर्शी शासन और समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सुशासन स्थापित हुआ है। प्रधानमंत्री द्वारा बताए गए “उत्तराखण्ड का दशक” को साकार करने के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।   कार्यक्रम में संस्था पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कलाकार एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

सेवा सप्ताह के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को श्रम-न्यूनीकरण उपकरण एवं पशु सखियों को स्मार्टफोन किए वितरित

As part of the service week, labor-saving tools were distributed to women from self-help groups and smartphones were given to livestock assistants.
As part of the service week, labor-saving tools were distributed to women from self-help groups and smartphones were given to livestock assistants.

देहरादून।  कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के जन्मदिवस (31 जनवरी) के अवसर पर जनसेवा की भावना से समर्पित “सेवा सप्ताह” के अंतर्गत आज देहरादून के एक निजी होटल में ग्राम्य विकास विभाग द्वारा ग्रामोत्थान परियोजना (रिप) के तहत ड्रजरी न्यूनीकरण उपकरण एवं स्मार्टफोन वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी द्वारा 8 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) एवं 45 ग्राम संगठनों से जुड़ी महिलाओं को कुल 1575 श्रम-न्यूनीकरण उपकरण वितरित किए गए। साथ ही देहरादून जनपद की 26 तथा हरिद्वार जनपद की 16 पशु सखियों को स्मार्टफोन प्रदान किए गए। कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी का केक काटकर जन्मदिवस मनाया गया तथा उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु की कामना की गई। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं कृषि, पशुपालन एवं घरेलू कार्यों में प्रतिदिन अत्यधिक शारीरिक श्रम करती हैं। आज भी निराई-गुड़ाई, चारा संग्रहण एवं प्रसंस्करण जैसे कार्य पारंपरिक तरीकों से किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज वितरित किए गए श्रम-न्यूनीकरण उपकरण महिलाओं के श्रम को कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, समय की बचत करने के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य एवं सम्मान की रक्षा में सहायक सिद्ध होंगे। इससे महिलाएं अपनी ऊर्जा आय-वर्धक गतिविधियों, बच्चों की शिक्षा तथा परिवार के समग्र विकास में अधिक प्रभावी रूप से लगा सकेंगी। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि पशु सखियां ग्रामीण पशुपालन व्यवस्था की मजबूत रीढ़ हैं, जो पशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार एवं पशुपालकों को वैज्ञानिक परामर्श देने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। स्मार्टफोन उपलब्ध होने से पशु सखियां रियल-टाइम रिपोर्टिंग, ऑनलाइन प्रशिक्षण, विभागीय समन्वय एवं प्रभावी मॉनिटरिंग कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण पशुपालन सेवाओं को डिजिटल, पारदर्शी एवं अधिक प्रभावी बनाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रामोत्थान परियोजना केवल एक विकास कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की सशक्त यात्रा है। उन्होंने कहा कि आज वितरित किए गए उपकरण और स्मार्टफोन इस यात्रा को गति देने वाले सशक्त साधन हैं। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार समूहों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने और आजीविका संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश में 1.72 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी है।
इस अवसर पर रिप परियोजना निदेशक झरना कमठान, उपायुक्त नरेश कुमार, महेंद्र सिंह यादव, विक्रम सिंह, सोनम गुप्ता सहित विभिन्न समूह की बहिनें उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को ज़मीन पर उतारने में जुटा आवास विभाग  

The housing department is working to implement Chief Minister Pushkar Singh Dhami's vision on the ground.
The housing department is working to implement Chief Minister Pushkar Singh Dhami's vision on the ground.

-सचिवालय में आधुनिक कार्यालय भवन निर्माण को मिली रफ्तार, औचक निरीक्षण में आवास सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने दिए सख्त निर्देश
-आवास सचिव का साफ संदेश-निर्माण कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता और समय-सीमा पर जोर
देहरादून।  आवास विभाग, राज्य सम्पत्ति विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार विभागीय कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को ज़मीन पर उतारने और सरकारी कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से डॉ. राजेश कुमार ने आज सचिवालय परिसर स्थित निर्माणाधीन आधुनिक कार्यालय भवन के कार्यों की समीक्षा की।  इस दौरान उनके साथ एसएस रावत संयुक्त सचिव, राज्य संपत्ति, नीरज कुमार त्रिपाठी, अधिशाषी अभियंता लोकनिर्माण विभाग, संदीप वर्मा, अपर सहायक अभिंयता सिविल, गाविंद सिंह, सहायक अभियंता विधुत सहित ठेकेदार शिव कुमार अग्रवाल मौजूद रहे।
राज्य सम्पत्ति विभाग एवं निर्माण से जुड़े संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सचिव ने निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तार से जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा :  राज्य सम्पत्ति विभाग के नियंत्रणाधीन सचिवालय परिसर, देहरादून में विश्वकर्मा भवन के समीप 6 मंजिला (जी5 एवं एक बेसमेंट सहित) आधुनिक कार्यालय भवन का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह भवन राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के लिए आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक कार्यालय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया जा रहा है। इस परियोजना को शासनादेश दिनांक 26 मार्च 2025 के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की गई है। भवन निर्माण की कुल लागत ₹5934.71 लाख है, जिसमें सिविल कार्य एवं विद्युतीकरण कार्य शामिल हैं। अब तक इस परियोजना पर लगभग ₹1400 लाख की धनराशि का आंवटन किया जा चुका है।
निर्माण एजेंसी और समय-सीमा:  भवन के सिविल निर्माण कार्य का अनुबंध मैसर्स शिव कुमार अग्रवाल को दिया गया है। निर्माण कार्य को डेढ़ वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि 24 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है।
भवन की प्रमुख विशेषताएं:  यह भवन 34×74 मीटर के प्लॉट पर निर्मित किया जा रहा है, जिसका कुल क्षेत्रफल 2516 वर्ग मीटर है। सभी मंजिलों को मिलाकर भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 1,04,480 वर्ग फीट होगा। भवन के बेसमेंट में 25 कार पार्किंग और 100 दोपहिया वाहन पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे सचिवालय परिसर में पार्किंग की समस्या से राहत मिलेगी। ग्राउंड फ्लोर पर एसबीआई बैंक, पोस्ट ऑफिस, प्रवेश लॉबी और वेटिंग एरिया का प्रावधान किया गया है। ऊपरी मंजिलों पर सचिव, अपर सचिव, उप सचिव, संयुक्त सचिव, अनुसचिव, स्तर के कार्यालय व उनके स्टाफ कक्ष, वेटिंग लॉबी और मीटिंग हॉल बनाए जा रहे हैं।
निर्माण की वर्तमान स्थिति:  निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति के अनुसार भवन का फाउंडेशन कार्य पूर्ण हो चुका है। बेसमेंट का सिविल कार्य पूरा कर लिया गया है तथा ग्राउंड फ्लोर का कार्य प्रगति पर है, जिसे 10 फरवरी 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में परियोजना की भौतिक प्रगति लगभग 15 प्रतिशत है। राज्य सम्पत्ति विभाग द्वारा निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि यह भवन सचिवालय की कार्यक्षमता बढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं आधुनिक बनाएगा।
गुणवत्ता से समझौता नहीं- डॉ आर राजेश कुमार:   सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने कहा सचिवालय परिसर में निर्माणाधीन यह आधुनिक कार्यालय भवन राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप हम सभी निर्माण कार्यों को समयबद्ध, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़े। यह भवन भविष्य में बेहतर कार्यसंस्कृति और सुगम प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सीएम धामी ने सिंचाई परियोजनाओं के अन्तर्गत रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की

Chief Minister Dhami reviewed the progress of river protection work and desilting under irrigation projects.
Chief Minister Dhami reviewed the progress of river protection work and desilting under irrigation projects.

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सचिवालय में सिंचाई परियोजनाओं के अन्तर्गत रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मानसून सीजन में बाढ़ की आशंकाओं को देखते हुए सभी कार्य समय से कर दिए जाएं।  बैठक में अधिकारियों ने बताया कि लघु सिचांई विभाग द्वारा जल संरक्षण, संवर्द्धन एवं संभरण योजनाओं के तहत चेक डैम निर्माण, रिचार्ज शॉफ्ट निर्माण एवं तालाब निर्माण किये जा रहे हैं। विभाग द्वारा राज्य में 708 चेक डैम बनाये गये हैं। विभाग द्वारा ऊधम सिंह नगर, नैनीताल एवं हरिद्वार में कुल 419 रिचार्ज शॉफ्ट की स्थापना की गयी है। जिससे वार्षिक लगभग 108.94 करोड़ लीटर ग्राउंड वाटर रीचार्ज हो सकेगा। अधिकारियों ने बताया कि 09 वन प्रभागों में पेयजल विभाग व सारा के माध्यम से 14 जल स्रोतों के उपचार के लिए जल संरक्षण के कार्य किये जा रहे हैं। कैम्पा योजना के अन्तर्गत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जल धाराओं का उपचार किया जा रहा है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वन विभाग को वनाग्नि की रोकथाम के लिए अभी से पूरी तैयारी करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वनाग्नि रोकथाम के लिए मानव संसाधन के साथ ही आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन पंचायतों और वन क्षेत्र के आस-पास के लोगों से विभाग का नियमित समन्वय बनाये रखें। वन संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वालों को प्रोत्साहित भी किया जाए, फायर लाइन की समय रहते सफाई की जाए। साथ ही वनभूमि पर होने वाले अतिक्रमण को भी प्राथमिकता पर हटाया जाए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव शैलेश बगोली, युगल किशोर पंत एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

रूद्रपुर व पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का शीघ्र शुरू होगा संचालन

The Rudrapur and Pithoragarh medical colleges will start functioning soon.
The Rudrapur and Pithoragarh medical colleges will start functioning soon.

एमबीबीएस की 100-100 सीटों के लिये एनएमसी में किया आवेदन

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज संचालन को विभागीय तैयारियां पूरी

देहरादून, 30 जनवरी 2026
चिकित्सा शिक्षा विभाग शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर व पिथौरागढ़ के संचालन को पूरी तरह से तैयार है। विभाग ने दोनों मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100-100 सीटों की स्वीकृति के लिये नेशनल मेडिकल काउंसिल को प्रस्ताव भेज दिया है। एनएमसी से स्वीकृति मिलने के उपरांत रूद्रपुर व पिथौरागढ़ में प्रदेश के युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा साथ ही तराई-भाबर व सीमांत ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ हो सकेगी।

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सूबे के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में लगातार विस्तार किया जा रहा है साथ ही युवाओं को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा व आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। इसी कड़ी में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा ऊधमसिंह नगर व पिथौरागढ़ जनपद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई है। जिनके संचालन के लिये विभाग द्वारा सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर व पिथौरागढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 में एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालन के लिये विभाग द्वारा एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) को प्रस्ताव भेज दिया गया है। जिसमें दोनों मेडिकल कॉलेज के लिये एमबीबीएस की 100-100 सीटों के संचालन को आवेदन किया गया है। एनएमसी से स्वीकृत मिलने के उपरांत दोनों मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कक्षाएं विधिवत शुरू कर दी जायेगी। मेडिकल कॉलेजों के शुरू होने से न केवल प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि तराई-भाबर सहित सीमांत क्षेत्रों के लोगों को अपने ही जनपद में उच्चस्तरीय व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी, साथ ही प्रदेश के युवाओं को मेडिकल की पढ़ाई का अवसर भी मिल सकेगा।

बॉक्स
चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित हुआ रूद्रपुर जिला चिकित्सालय
ऊधमसिंह नगर के जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय रूद्रपुर को चिकित्सा शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। यह फैसला पंडित रामसुमेर शुक्ल राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर के सुचारू संचालन के लिये लिया गया है। जिसका शासनदेश जारी कर दिया गया है। जिसके तहत जिला अस्पताल का प्रशासनिक व वित्तीय नियंत्रण अब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के अधीन होगा। इसके साथ ही अस्पताल में एनएमसी के मानकों के अनुसार मेडिकल उपकरण व औषधियों की व्यवस्था चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा की जायेगी।

बॉक्स-01
रूद्रप्रयाग नर्सिंग कॉलेज का संचालन शीघ्र
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रूद्रप्रयाग में राजकीय नर्सिंग कॉलेज का संचालन इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू कर दिया जायेगा। इसके लिये विभाग द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। अधिकारियों ने बताया कि रूद्रप्रयाग नर्सिंग कॉलेज के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा 20.4416 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई थी। जिसके तहत कॉलेज में सभी निर्माण कार्य सम्पन्न कर दिये गये हैं। शासन द्वारा नर्सिंग कॉलेज हेतु बीएससी पाठ्यक्रम हेतु अनिवार्य प्रामण पत्र व पदों का सृजन कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 30 सीटों पर नर्सिंग कक्षाओं का संचालन किया जायेगा। इसके लिये हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की काउंसिलिंग के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जायेगा।

बयान-
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राजकीय मेडिकल कॉलेज रूद्रपुर व पिथौरागढ़ में एमबीबीएस कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जायेगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा दोनों मेउकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100-100 सीटें की स्वीकृति के लिये एनएमसी को प्रस्ताव भेज दिया गया है। – डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराख्ांड।

जब जन्मदिन बना उम्मीद का उत्सव, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास के बच्चों के बीच पहुंचे बंशीधर तिवारी

When a birthday became a celebration of hope, Banshidhar Tiwari reached out to the children of Netaji Subhash Chandra Bose Residential Girls' Hostel.
When a birthday became a celebration of hope, Banshidhar Tiwari reached out to the children of Netaji Subhash Chandra Bose Residential Girls' Hostel.

जब एक IAS अधिकारी बना अभिभावक, बालिकाओं संग सादगी से मनाया अपना जन्मदिन

हर साल वही जगह, वही मुस्कानें-बच्चियों के बीच जन्मदिन मनाने की परंपरा

देहरादून। जब प्रशासनिक पद, प्रोटोकॉल और औपचारिकता की दीवारें टूटती हैं, तब शासन का एक मानवीय चेहरा सामने आता है। ऐसा ही दृश्य एक बार फिर देहरादून के बनियावाला क्षेत्र में देखने को मिला, जहां अपर सचिव मुख्यमंत्री, उपाध्यक्ष मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) एवं महानिदेशक सूचना एवं लोकसम्पर्क विभाग IAS बंशीधर तिवारी ने अपना जन्मदिन किसी शान-शौकत या भव्य आयोजन के बजाय नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास की
बालिकाओं के साथ सादगी एवं संवेदना के साथ मनाया। यह कोई एक दिन की औपचारिकता नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही एक परंपरा है, जिसे वे हर साल चुपचाप सादगी के साथ निभाते हैं।

इसी क्रम में सहसपुर विधानसभा के विकासखंड बनियावाला क्षेत्र में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास में IAS बंशीधर तिवारी ने अपने परिजनों के साथ इन बच्चों के बीच समय बिताया। बच्चों ने अतिथियों के स्वागत में गीत प्रस्तुत किए, जिनमें जीवन, उम्मीद और संघर्ष की सच्ची झलक दिखाई दी। गीतों के बीच तालियों और मुस्कान से भरा यह माहौल किसी सरकारी कार्यक्रम जैसा नहीं, बल्कि एक परिवारिक उत्सव जैसा प्रतीत हो रहा था। यह छात्रावास उन बालिकाओं का आश्रय है, जिन्होंने जीवन की शुरुआत ही कठिन परिस्थितियों से की है। इनमें कई बालिकाएं निराश्रित हैं, कुछ के पास एकल अभिभावक हैं और कई ऐसी हैं जो भीख मांगने या कूड़ा बीनने जैसे हालातों से निकलकर यहां तक पहुंची हैं। ऐसे बच्चों के बीच किसी वरिष्ठ IAS अधिकारी का बार-बार पहुंचना उनके लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह विश्वास दिलाने वाला संदेश है कि समाज और व्यवस्था उन्हें भूली नहीं है। वह हर कदम उनके साथ खड़ी है।

IAS बंशीधर तिवारी ने छात्रावास पहुंचकर न तो कोई औपचारिक भाषण दिया और न ही पद की दूरी बनाए रखी। वे बच्चों के साथ जमीन पर बैठे, उनके साथ केक काटा, उपहार वितरित किए और सहज संवाद किया। उन्होंने बच्चियों से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में बातचीत की। यह संवाद औपचारिक सवाल- जवाब नहीं, बल्कि अपनत्व से भरी बातचीत थी।

इस अवसर पर परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया। इसे केवल एक पर्यावरणीय गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य के प्रति एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा गया। उन्होंने कहा कि जैसे एक पौधा समय के साथ बड़ा होकर छाया और फल देता है, वैसे ही यदि इन बालिकाओं को सही शिक्षा, मार्गदर्शन और स्नेह मिले, तो वे समाज को मजबूत दिशा देने वाली बन सकती हैं।

बालिकाओं से अभिभावक के रूप में बात करते हुए बंशीधर तिवारी ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य तय करना बेहद जरूरी है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि आत्मविश्वास और ईमानदारी बनी रहे, तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। उन्होंने बच्चियों को केवल सफल होने तक सीमित न रहने, बल्कि नेतृत्व करने और दूसरों के लिए उदाहरण बनने की प्रेरणा दी। उनका कहना था कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो अपने साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाए।

इस दौरान मौजूद लोगों ने कहा कि आज के दौर में, जब जन्मदिन अक्सर दिखावे और खर्चीले आयोजनों तक सीमित हो गए हैं, ऐसे में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का हर साल अपना जन्मदिन अनाथ बच्चों के साथ मनाना समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। यह पहल न केवल बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाती है, बल्कि प्रशासन की संवेदनशील सोच को भी दर्शाती है। यह आयोजन किसी मंच, बैनर या प्रचार का हिस्सा नहीं था, बल्कि उन बच्चों के साथ बिताए गए कुछ घंटे थे, जो उनके जीवन में लंबे समय तक यादगार रहेंगे। यह उदाहरण साबित करता है कि सच्चा प्रशासन वही है, जो फाइलों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझे और सच्चा उत्सव वही, जिसमें अपनी खुशी बांटकर किसी और के जीवन में उम्मीद की रोशनी जलाई जाए।

Sensation after woman's body found in ditch in Sudhowala

सुद्धोवाला में खाई से महिला का शव मिलने से सनसनी

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देहरादून।  बाला सुंदरी प्राचीन मंदिर के पास खाई में एक महिला का तीन-चार दिन पुराना शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। शव...
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