
– कर्नाटक भ्रमण के दौरान उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री ने की प्रशंसा, कहा – ‘ऐसे मॉडल से उत्तराखंड में भी होगा सहकारिता नवाचार को नया विस्तार’
देहरादून। उत्तराखंड के माननीय सहकारिता मंत्री ने आज कर्नाटक राज्य के उडुपी जिले में स्थित पदुबिद्री सहकारी कृषि समिति (उत्तरी) का भ्रमण कर समिति की कार्यप्रणाली, नवाचारों तथा ग्रामीण सहभागिता आधारित विकास के मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। वह कर्नाटक राज्य के विभिन्न सहकारी समितियों और संस्थाओं के दो दिवसीय कर्नाटक भ्रमण पर है
1958 में स्थापित इस सहकारी संस्था नेनदसालु, हेजमाडी, पालिमार, थेनका यरमल, नंदिकूर और पदेबेट्टू जैसे छह ग्रामों में 12,207 से अधिक सदस्यों को जोड़ते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण और सहकारी समर्पण की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत की है।
मुख्य सेवाएँ व नवाचार: फिक्स्ड डिपॉजिट पर 8.5% तक ब्याज, बचत खातों पर 4% ब्याज
आवास, वाहन, शिक्षा, समूह ऋण, और एमकेसीसी/एमटीएनएपी जैसे किसानों के लिए विशेष ऋण
एनईएफटी/आरटीजीएस बैंकिंग सेवा, उर्वरक व बीज वितरण, कृषि उपकरण विक्रय केंद्र, स्वर्ण शुद्धता परीक्षण, और सभा भवन किराया सेवा
सहकारिता मंत्री उत्तराखंड का वक्तव्य:
“पदुबिद्री सहकारी समिति की कार्यप्रणाली देखकर गहरी प्रेरणा मिली है। ग्राम्य भारत में सहकारिता के माध्यम से किस प्रकार सतत विकास, पारदर्शिता और लोक-विश्वास की स्थापना की जा सकती है — इसका यह जीवंत उदाहरण है। समिति द्वारा अपनाए गए तकनीकी और व्यावहारिक नवाचार निश्चित ही उत्तराखंड राज्य में भी सहकारिता की नई दिशा तय करने में सहायक होंगे।”
“उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में यदि ऐसी योजनाएँ स्थानीय आवश्यकता अनुसार ढाली जाएँ, तो युवाओं, किसानों और महिला समूहों के लिए एक नई आर्थिक शक्ति का उदय हो सकता है।”
समिति के पदाधिकारियों ने मंत्री महोदय को संस्था की कार्यप्रणाली, पारदर्शी लेखा प्रणाली, लाभांश वितरण, और सामुदायिक भागीदारी के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। मंत्री ने समिति द्वारा ‘सहकारिता को सेवा, नवाचार और आत्मनिर्भरता के साथ जोड़ने’ के दृष्टिकोण की सराहना की।
यह भ्रमण उत्तराखंड राज्य की सहकारिता नीति में व्यापक नवाचार और टेक्नोलॉजी-संवर्धित मॉडल लाने के लिए सारगर्भित अनुभवों और दिशा-निर्देशों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
















