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October 13, 2026
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उत्तराखंड

बिनसर महादेव में 11 दिवसीय श्री विष्णु पुराण का समापन

Conclusion of the 11-day Shri Vishnu Puran at Binsar Mahadev

रानीखेत (अल्मोड़ा)। विकासखंड ताड़ीखेत के सौनी के कुछ ही किलोमीटर आगे स्थित पौराणिक सुप्रसिद्ध स्वर्गाश्रम बिनसर महादेव गीता भवन दत्तात्रेय मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं प्रवचन कार्यक्रम पूर्णाहुति और विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया। धार्मिक आयोजन 19 जून से शुरू होकर 29 जून तक चला, जिसमें अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने पूर्णाहुति में भाग लेकर भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम का आयोजन बिनसर महादेव पीठाधीश्वर गोवर्धन गिरि महाराज की अध्यक्षता में किया गया। यह आयोजन ब्रह्मलीन नागाबाबा मोहनगिरि महाराज एवं ब्रह्मलीन रामगिरि महाराज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संपन्न हुआ। मंदिर समिति के पदाधिकारी गिरीश कड़ाकोटी ने बताया कि यज्ञाचार्य के रूप में हरिद्वार के पंडित राजेंद्र प्रसाद शास्त्री उपस्थित रहे, जबकि व्यासपीठ से दिल्ली एवं बदरीनाथ धाम से पधारे आचार्य नागेंद्र तिवाड़ी ने संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का वाचन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के यजमान हुकम सिंह कड़ाकोटी एवं तुलसीदत्त पांडे शामिल रहे। धार्मिक आयोजन के दौरान पूरे क्षेत्र में इन दिनो मेले जैसा माहौल रहा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस-प्रशासन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। मेले में झूले, चरखी, स्थानीय दुकानों के साथ-साथ रोजमर्रा के उपयोग के सामानों की दुकानें भी आकर्षण का केंद्र रहीं। आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं की श्रद्धालुओं ने सराहना की। स्थानीय लोगों ने भी आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया। रामनगर के भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि बिनसर महादेव धाम पिछले छह दशकों से निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रह्मलीन मोहन गिरि महाराज के अथक प्रयासों से यह स्थल आज उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दिल्ली सहित अन्य राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है,और हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्रबंधन से जुड़े पृथ्वीपाल सिंह रौतेला ने बताया कि वर्ष 1958 के बाद स्थापित छोटा मंदिर आज विस्तृत बिनसर महादेव स्वर्गाश्रम परिसर का रूप ले चुका है। यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। उन्होंने बताया कि आयोजन के सभी 11 दिनों तक भंडारा चलता रहा, जबकि अंतिम दिन देर शाम तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें प्रसाद ग्रहण करने के लिए लगी रहीं।
भागवत कथा पुराण के अन्तिम दिन सैकड़ो लोगो ने भंडारे का प्रशाद ग्रहण किया।

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