ज्ञान के तेजमण्डल से आलोकित – श्री श्री स्वामी श्रीयुक्तेश्वरजी – श्रीमती मंजुलता
“श्रीयुक्तेश्वरजी के पवित्र चरणों का स्पर्श करते समय मैं सदा ही रोमांचित हो उठता था।…उनकी ओर से एक सूक्ष्म विद्युत धारा प्रवाहित होती थी।…मैं जब भी अपने गुरु के चरणों पर माथा टेकता था, मेरा सम्पूर्ण शरीर जैसे एक मुक्तिप्रदायक तेज से भर जाता था।” प्रस्तुत पंक्तियाँ परमहंस योगानन्दजी ने......
