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चार महीनों में बदलती तस्वीर: ‘फार्मर्स मार्केट’ ने किसानों को दिया नया भरोसा

A Changing Landscape in Four Months ‘Farmers’ Market’ Instills New Confidence in Farmers

देहरादून, 23 अप्रैल 2026: शिलॉंग की एक साधारण-सी पहल आज किसानों की ज़िंदगी में बड़ा बदलाव ला रही है। जनवरी 2026 में शुरू हुआ मासिक ‘फार्मर्स मार्केट’ अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीद, मेहनत और आत्मनिर्भरता की नई कहानी बन चुका है।

इन चार महीनों में इस बाजार ने कई रंग देखे हैं। जनवरी में संतरे और कद्दू से शुरुआत हुई, फरवरी में स्ट्रॉबेरी और काली मिर्च ने बाजार को महकाया, मार्च में केले और तिल ने जगह बनाई, और अप्रैल में आलू, धनिया और ‘जिल्लांग’ ने ग्राहकों का दिल जीत लिया। हर महीने बदलती फसलों के साथ किसानों के चेहरे पर बढ़ता आत्मविश्वास भी साफ नजर आया।

करीब 600 लोगों की मौजूदगी वाला अप्रैल का बाजार इस बात का प्रमाण है कि लोग अब सीधे किसानों से जुड़ना चाहते हैं। यह जुड़ाव सिर्फ खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि भरोसे और सम्मान का रिश्ता भी बना रहा है।

यह पहल माननीय मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के. संगमा की उस सोच के अनुरूप आगे बढ़ रही है, जिसका उद्देश्य किसानों की आजीविका को मजबूत करना, बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और राज्य में एक सशक्त व आत्मनिर्भर कृषि अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।

री-भोई जिले की किसान बंसरालिन मुखिम इस बदलाव को अपने अनुभव से महसूस करती हैं। उन्होंने बताया कि यह उनका पहला मौका था जब उन्होंने इस बाजार में हिस्सा लिया और यहाँ उन्हें अपने उत्पाद को एक बड़े मंच पर दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सरकार से मिले पौधों और सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया है, और अब वे पारंपरिक बाजार के साथ-साथ ऐसे मंचों पर भी अपनी पहचान बना रही हैं।

ईस्ट जैंतिया हिल्स की डोना डखार के लिए भी यह बाजार नई उम्मीद लेकर आया है। वह कहती हैं कि पहले उनकी बिक्री सिर्फ गाँव के बाजार तक सीमित थी, लेकिन अब उन्हें अपने ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए बेहतर दाम और ज्यादा ग्राहक मिल रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे प्लेटफॉर्म न सिर्फ आय बढ़ाते हैं, बल्कि किसानों का मनोबल भी बढ़ाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

बाजार में आने वाले ग्राहकों के लिए भी यह अनुभव खास है। एक नियमित ग्राहक ने खुशी जताते हुए कहा कि यहाँ उन्हें अलग-अलग जिलों से आए ताज़ा और ऑर्गेनिक उत्पाद मिलते हैं, जो अन्य बाजारों में आसानी से नहीं मिलते। वहीं कोलकाता से आए एक पर्यटक ने इसे “पहला और अनोखा अनुभव” बताते हुए कहा कि बांस में स्मोक्ड मछली जैसे उत्पाद उनके शहर में नहीं मिलते और यह पहल किसानों के लिए बेहद सराहनीय है।

इस पहल को और मजबूती दे रहा है ‘SOMOI’- एक स्थानीय डिजिटल प्लेटफॉर्म, जो किसानों से सीधे उत्पाद खरीदकर बाजार की पहुंच को बढ़ा रहा है। इसके जरिए किसानों को बड़ी मात्रा में बिक्री का मौका मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी और स्थिर हो रही है।

चार महीनों में ‘फार्मर्स मार्केट’ ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मंच मिले, तो किसान सिर्फ उपज ही नहीं, अपनी पहचान भी उगा सकते हैं। यह बाजार अब एक ऐसी उम्मीद बन चुका है, जो हर महीने नई फसल के साथ नई कहानियाँ भी लेकर आता है।

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