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October 17, 2026
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ग्रामीण युवाओं के विदेश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड ने एनएसडीसी के सोशल स्टॉक एक्सचेंज निर्गम में ₹4 करोड़ का किया निवेश

To promote overseas employment for rural youth, NABARD has invested ₹4 crore in the Social Stock Exchange issuance by the NSDC.

देहरादून- 16 अक्टूबर, 2026: राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए पहले ज़ीरो कूपन ज़ीरो प्रिंसिपल (जेडसीजेडपी) निर्गम में ₹4 करोड़ की पूरी राशि का अभिदान किया है। यह भारत में परिणाम-आधारित सामाजिक वित्तपोषण के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ₹11.25 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित 600 ग्रामीण युवाओं के लिए विदेश में स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करना है।

यह पहल एनएसडीसी द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से लागू की जा रही है। इसे एक नवोन्मेषी वित्तपोषण ढाँचे के अंतर्गत तैयार किया गया है, जिसमें वित्तीय सहायता को मापनीय सामाजिक परिणामों से जोड़ा गया है। इस मॉडल के तहत नाबार्ड जेडसीजेडपी निर्गम में अभिदान के माध्यम से योगदान दे रहा है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित रोजगार परिणाम प्राप्त होने पर ₹5.60 करोड़ की परिणाम-आधारित वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने की अपेक्षा है। शेष राशि की व्यवस्था लाभार्थियों के योगदान के माध्यम से प्रस्तावित है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के लिए आवश्यक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करना है। लाभार्थियों को भाषा प्रशिक्षण, तकनीकी कौशल विकास, प्रमाणन, सांस्कृतिक अभिमुखीकरण तथा विदेश में नियुक्ति के लिए दस्तावेज़ीकरण और तैनाती संबंधी सहायता सहित व्यापक सहयोग दिया जाएगा। इस पहल का लक्ष्य वैश्विक श्रम बाजारों तक पहुँच उपलब्ध कराकर ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करना और उनकी आय की संभावनाओं को बेहतर बनाना है।

इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता गतिविधियों के बजाय परिणामों पर इसका ध्यान केंद्रित करना है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण पूरा करने तक सीमित न रहकर सत्यापित विदेशी रोजगार और आजीविका में दीर्घकालिक सुधार सुनिश्चित करना है। यह साक्ष्य-आधारित विकास वित्तपोषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जिसमें सामाजिक प्रभाव को कार्यक्रम की योजना और क्रियान्वयन के केंद्र में रखा गया है।

यह लेन-देन मापनीय विकास परिणामों के लिए संसाधन जुटाने के मंच के रूप में सोशल स्टॉक एक्सचेंज की बढ़ती संभावनाओं को भी प्रदर्शित करता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियामकीय ढाँचे के अंतर्गत स्थापित एसएसई का उद्देश्य संस्थानों, परोपकारी संगठनों, फाउंडेशनों, कॉरपोरेट संस्थाओं और अन्य हितधारकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है, ताकि पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्थाओं के माध्यम से सामाजिक पहलों के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराया जा सके। जेडसीजेडपी एक ऐसा नवोन्मेषी वित्तीय साधन है, जिसके माध्यम से कार्यान्वयन करने वाली संस्थाओं पर मूलधन चुकाने का दायित्व डाले बिना सामाजिक परियोजनाओं के लिए धन जुटाया जा सकता है।

नाबार्ड की भागीदारी सोशल स्टॉक एक्सचेंज इकोसिस्टम को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास की जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए नवोन्मेषी वित्तपोषण तंत्रों को तलाशने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। किसी एक परियोजना को सहायता देने से आगे बढ़कर, इस पहल से परिणाम-आधारित विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने, उन्हें लागू करने और उनकी निगरानी करने तथा बड़े स्तर पर सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए पूँजी का प्रभावी उपयोग करने का अनुभव प्राप्त होने की उम्मीद है।

यह परियोजना सहयोगात्मक वित्तपोषण मॉडल की संभावनाओं को भी प्रदर्शित करती है, जिसमें विकास वित्तीय संस्थान, सरकारी एजेंसियाँ और विशेषज्ञ कार्यान्वयन भागीदार स्पष्ट एवं मापनीय परिणामों के लिए एक साथ काम करते हैं। ऐसे मॉडल जवाबदेही बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और वंचित समुदायों तक विकास कार्यक्रमों की पहुँच का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं।

ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाओं को वैश्विक रोजगार अवसरों से जोड़कर और पूँजी को सत्यापन योग्य सामाजिक परिणामों के साथ संबद्ध करके, यह पहल दर्शाने का प्रयास करती है कि नवोन्मेषी वित्तीय साधन समावेशी एवं सतत ग्रामीण परिवर्तन में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। नाबार्ड को उम्मीद है कि इस कार्यक्रम से प्राप्त अनुभव और सीख विभिन्न विकास क्षेत्रों में सोशल स्टॉक एक्सचेंज आधारित वित्तपोषण मॉडलों को व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

नाबार्ड के बारे में..

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) भारत की प्रमुख विकास वित्तीय संस्था है, जो सतत और समानतापूर्ण कृषि विकास तथा ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। 12 जुलाई, 1982 को स्थापित और मुंबई में मुख्यालय वाला नाबार्ड वित्तीय समावेशन, ग्रामीण अवसंरचना विकास, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, आजीविका संवर्धन और नवोन्मेषी वित्तपोषण पहलों के माध्यम से ग्रामीण भारत में परिवर्तन को बढ़ावा देता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सके।

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