स्याल्दे/भिकियासैंण। जय महाकाल सेवा समिति भरसोली द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के नवम दिवस के मुख्य यजमान चन्दन सिंह बंगारी उनकी धर्मपत्नी गोपुली देवी बंगारी द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना की गई तत्पश्चात कथा व्यास नन्दा वल्लभ पन्त द्वारा शिव महापुराण कथा के माध्यम से भगवान शिव के काल भैरव अवतार का सुन्दर वर्णन किया। उन्होने बताया कि एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ, विवाद बढ़ने पर उसके बीच तब एक विशाल ज्योति स्तंभ प्रकट हुआ ब्रह्मा जी ने अहंकार वश भगवान शिव के बारे में कुछ अपमानजनक शब्द कहे, जिससे भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हुए जिससे महाकाल भैरव स्वरूप प्रकट हुआ। ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं थी, उसे पांचवें सिर को काल भैरव ने अपनी बाएं हाथ के सबसे छोटी उंगली से नख से ब्रह्मा जी के पांचवा सिर को काट दिया, जिससे उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए काल भैरव जी ने काशी को प्रस्थान किया, और वही वास किया तभी उन्हें काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। आयोजन को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष प्रताप सिंह ड़गवाल,त्रिलोक सिंह पटवाल,महेन्द्र सिंह बंगारी,आनन्द सिंह रावत,रामदत्त दत्त ढौडियाल,बालम सिंह बंगारी,कैलाश ढौडियाल,हीरा सिंह बंगारी,कुन्दन सिंह महेत्ता,लक्की प्रताप सिंह बंगारी,खुशहाल सिंह बंगारी,इंद्र सिंह महेरा,बचें सिंह बंगारी,मनोज चन्द्र जोशी आदि जुटे रहे।
















