Home उत्तराखंड एनीमिया के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है : डॉ. अनिल वर्मा

एनीमिया के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है : डॉ. अनिल वर्मा

Awareness about anemia is crucial Dr. Anil Verma
Awareness about anemia is crucial Dr. Anil Verma

भाविप “द्रोण” द्वारा एनीमिया जांच शिविर आयोजित
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भारत विकास परिषद् “द्रोण” शाखा द्वारा सुविख्यात समाजसेवी संस्था वीरा फाउंडेशन के सौजन्य तथा भगवान बुद्ध चैरिटेबल ब्लड सेंटर , सेलाकुई के सहयोग से डीएवी (पी जी ) कॉलेज चौक स्थित हनुमान मंदिर में एनीमिया जाँच एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में डीएवी (पीजी) कॉलेज के छात्र- छात्राओं, स्थानीय महिलाओं व पुरुषों तथा द्रोण शाखा सदस्यों ने एनीमिया की जांच करवाई तथा एनीमिया से पीड़ित लोगों को शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर ठीक बनाए रखने के लिए सुझाव दिये गए।
शिविर का शुभारंभ करते हुए भारत विकास परिषद् के पूर्व प्रांतीय संगठन मंत्री व 150 बार रक्तदान कर चुके रक्तदाता शिरोमणि डॉ.अनिल वर्मा ने कहा कि रक्त हमारे शरीर की जीवन गंगा है। अच्छे स्वास्थ हेतु हीमोग्लोबिन स्तर सही होना बेहद जरूरी है। एनीमिया के प्रति आम लोगों में जागरूकता लाना बेहद जरूरी है। एनीमिया रक्त में हीमोग्लोबिन यानी रेड ब्लड सेल्स की कमी को कहते हैं। देश में 5 वर्ष से कम आयु के 70 प्रतिशत बच्चे और 50 प्रतिशत किशोरियां तथा युवा महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं।
एनीमिया के कारण मां एवं शिशु के स्वास्थ पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। एनीमिया के लक्षणों में शरीर में थकान व कमजोरी, त्वचा व नाखून का रंग सफेद पड़ना,दिल की धड़कन बढ़ना, साँस लेने में कठिनाई होना, हाथ – पैर ठंडे पड़ना, सिरदर्द और चक्कर आना, त्वचा में आसानी से नील पड़ना कान में घंटी जैसा बजना, बालों का झड़ना आदि हैं।
डॉ. वर्मा ने बताया कि 40 प्रतिशत महिलाओं की गर्भावस्था व प्रसव के दौरान मृत्यु एनीमिया के कारण होती है। एनीमिया के कारण मां के स्वास्थ्य पर तो विपरीत प्रभाव पड़ता ही है आयरन की कमी से शिशु के विकास पर अनेक गंभीर प्रभाव पड़ते हैं । इसमें मानसिक विकास बाधित हो जाने के कारण फिर वह ठीक नहीं होता जिसके कारण अनेक बच्चे अपनी सम्पूर्ण क्षमता से कार्य करने में आजीवन वंचित रह जाते हैं। अतः एनीमिया के इस दुष्चक्र को तोड़ने के लिए गर्भावमवस्था से पूर्व किशोरियों व युवा महिलाओं में एनीमिया का निवारण मां एवं शिशु के स्वास्थ्य के लिये पहला अति आवश्यक कदम है। उन्होंने बताया कि सामान्यतया हीमोग्लोबिन की मात्रा महिलाओं में 12 से 16 ग्राम वी गर्भवती महिलाओं में 13 से 15 ग्राम तथा पुरुषों में 13 से 17 ग्राम प्रति डेसी लीटर होती है।
डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि सामान्यतः 12.5 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन को हल्का एनीमिया जबकि 8 ग्राम से कम हीमोग्लोबिन को गंभीर एनीमिया माना जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकतर एनीमिया आयरन व फोलिक एसिड तथा विटामिन बी -12 की कमी आदि से होता है। अतः सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लें। कोई अन्य कारण ना होने पर शरीर में प्राथमिक उपचार आयरन एवं फोलिक एसिड देकर किया जाता है। क्योंकि केवल आहार से कमी का पूरा होना संभव नहीं होता। साथ ही सबसे पहले भोजन लोहे के बर्तन में पकाएं । आहार में गेहूं, बाजरे की रोटी, अंकुरित दाल व अनाज, राजमा, लोबिया, गुड़ व भुना चना, पालक, चौलाई, सरसों व बथुए का साग, चुकंदर, अनार, पपीता व आंवला – नींबू, संतरा आदि विटामिन सी वाले खट्टे फलों का सेवन करें। परंतु भोजन के साथ चाय या कॉफी बिल्कुल ना लें। अपने हीमोग्लोबिन स्तर की नियमित जाँच कराकर चिकित्सक के अनुसार आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने स्वैच्छिक रक्तदान करने एवं थैलेसीमिया मुक्त उत्तराखंड के प्रति भी युवाओं को प्रेरित व जागरूक किया।
डॉ. अनिल वर्मा ने द्रोण शाखा अध्यक्ष यामा शर्मा एवं सचिव कंचन गुनसोला को शिविर के सफल आयोजन हेतु बधाई देते हुए उन्हें सम्मानित करने हेतु हृदय से आभार व्यक्त किया।
शिविर आयोजक भा.वि.प. द्रोण शाखा की अध्यक्ष श्रीमती यामा शर्मा ने शिविर की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हीमोग्लोबिन का अर्थ है शरीर के हर सेल में ऑक्सीजन की कमी। एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं की गर्भावस्था व प्रसव में रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप व संक्रमण होने से मृत्यु की आशंका बढ़ जाती है। 8 ग्राम से कम कम हीमोग्लोबिन होने पर शिशु की मृत्यु होने की आशंका 2 से 3 गुना बढ़ जाती है। मां के दूध में आयरन की कमी के कारण 6 माह की आयु तक शिशु में भी आयरन की कमी हो जाती है। अतः आम जनता विशेषकर किशोरियों एवं महिलाओं को एनीमिया के प्रति जागरूक करने व समय पर उचित कदम उठाकर अपना समुचित ईलाज करा सकें को दृष्टिगत रखते हुए इस विशेष शिविर का आयोजन किया गया। हम जनहित में आगे भी इस प्रयास को जारी रखेंगे।
उन्होंने परिषद् की ओर से शिविर संयोजक रक्तदाता शिरोमणि डॉ.अनिल वर्मा , वीरा फाउंडेशन के सह संस्थापक यशवीर राणा,पर्यावरण प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रेरणा प्रजापति तथा ब्लड बैंक इंचार्ज मोहम्मद अली को अंगवस्त्र पहनाकर व प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। इसके साथ ही समस्त अतिथियों को द्रोण अध्यक्ष यामा शर्मा ने अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया।
भा.वि.प.द्रोण शाखा सचिव कंचन गुनसोला ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संयोजक डॉ.अनिल वर्मा, वीरा फाउंडेशन की सी ई ओ रितु डोभाल, चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफिसर विनोद डोभाल, मीडिया प्रभारी यशवीर राणा, पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रेरणा प्रजापति, ब्लड बैंक अधिकारियों मोहम्मद अली, के सी जोशी व राहुल , हनुमान मंदिर के पंडित विशाल मिश्रा, द्रोण आयोजन समिति में विशेष सहयोगी श्री अनिल कुमार शर्मा, मेजर प्रेम लता वर्मा, श्रीमती पूर्णिमा कपूर, शैल बिष्ट, निशा अतुल्य, शारदा त्रिपाठी का शिविर संचालन में सहयोग हेतु आभार व्यक्त किया।