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झूठे आश्वासन नहीं, अब चाहिए ठोस निर्णय, समायोजन, सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए अस्थायी शिक्षकों का शिष्टमंडल ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौपा ज्ञापन

A delegation of temporary teachers submitted a memorandum to the Higher Education Minister, demanding concrete decisions, regularization, respect, and a secure future—rejecting empty assurances.
A delegation of temporary teachers submitted a memorandum to the Higher Education Minister, demanding concrete decisions, regularization, respect, and a secure future—rejecting empty assurances.

रिया सोलीवाल, भिकियासैंण

देहरादून। उच्च शिक्षा विभाग के प्रभावित एवं कार्यरत अस्थायी शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से उनके यमुना कॉलोनी, देहरादून स्थित आवास पर भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने समायोजन, सेवा सुरक्षा, वेतन वृद्धि तथा सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों से संबंधित अपनी प्रमुख मांगों को विस्तार से मंत्री के समक्ष रखा।

प्रतिनिधिमंडल ने अवगत कराया कि पिछले लगभग दो वर्षों से प्रभावित अस्थायी शिक्षक न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक ज्ञापनों, बैठकों और आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं कार्यरत अस्थायी शिक्षक भी अत्यंत अल्प वेतन पर सेवाएं देने को विवश हैं। ऐसी स्थिति में सभी अस्थायी शिक्षकों के लिए न्यायसंगत एवं स्थायी नीति का निर्माण तथा वेतन वृद्धि समय की आवश्यकता है।

शिक्षक प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। इस बार सरकार से समयबद्ध, तथ्यपरक एवं ठोस निर्णय की अपेक्षा है, क्योंकि यह विषय केवल रोजगार का नहीं, बल्कि हजारों शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

बैठक के दौरान माननीय मंत्री ने प्रतिनिधि मंडल द्वारा प्रस्तुत पत्र पर निदेशक, उच्च शिक्षा को पदों एवं अन्य पदों के सापेक्ष रिक्तियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने के निर्देश अंकित किए। साथ ही दूरभाष के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए, जिससे उक्त विषय पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

प्रतिनिधिमंडल ने सभी साथियों से अधिक से अधिक संख्या में एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। यदि सरकार द्वारा समायोजन, वेतन वृद्धि एवं भविष्य की सुरक्षा के संबंध में शीघ्र कोई सकारात्मक एवं ठोस निर्णय नहीं लिया जाता है, तो सभी प्रभावित एवं कार्यरत अस्थायी शिक्षक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन की आगामी रणनीति बनाने के लिए बाध्य होंगे।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग के सभी कार्यरत एवं प्रभावित अस्थायी शिक्षकों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य का संघर्ष है। सभी साथियों से संगठित होकर अपने अधिकारों की इस लड़ाई को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया गया।
प्रतिनिधिमंडल में डॉ. रोहित, डॉ. मोहित, डॉ. मनोज, डॉ. शैलेश, डॉ. सरन, डॉ. प्रवेश, डॉ. चिंतामणि, डॉ. राकेश, डॉ. ममता, डॉ. जयहरी, डॉ. रणजीत, डॉ. ब्रह्मराज, डॉ. बबलू, डॉ. बिपिन, डॉ. प्रियंका, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. ममता सहित अन्य शिक्षक शामिल रहे।