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इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

Convocation ceremony of the 2024 batch of Indian Forest Service probationers concludes at the Indira Gandhi National Forest Academy.
Convocation ceremony of the 2024 batch of Indian Forest Service probationers concludes at the Indira Gandhi National Forest Academy.

– केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रदान किए प्रमाणपत्र एवं पदक
– ⁠आज पास आउट होने वाले युवा अधिकारी 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे : श्री भूपेंद्र यादव
– ⁠एक अच्छा अधिकारी वही है जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो : श्री भूपेंद्र यादव
– 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों एवं भूटान के 2 अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने पूर्ण किया 20 माह का प्रशिक्षण
– राजस्थान संवर्ग की सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले रहीं बैच की टॉपर
देहरादून(आरएनएस)।   इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में प्रशिक्षणरत 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह शनिवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे तथा उन्होंने सफल परिवीक्षार्थियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।
दीक्षांत समरोह में बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें देश की एक प्रतिष्ठित अकादमी से तकनीकी एवं नेतृत्व संबंधी उत्कृष्ट प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब ये अधिकारी अपने सेवा जीवन के सर्वश्रेष्ठ दौर में होंगे, तब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा होगा और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अधिकारियों के समक्ष जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के क्षरण तथा मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियाँ होंगी। इन चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार, आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा जनभागीदारी को समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल आँकड़ों के संग्रह एवं विश्लेषण तक सीमित न रहकर मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने में होना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि एक सफल लोकसेवक के लिए नैतिकता और कार्यकुशलता सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं। उच्च नैतिक मूल्यों, समय के सदुपयोग तथा सीमित संसाधनों में अधिकतम परिणाम देने की क्षमता ही किसी अधिकारी की वास्तविक पहचान बनाती है। उन्होंने अधिकारियों से केवल सक्षम प्रशासक बनने तक सीमित न रहकर प्रभावी नेतृत्व विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा कि त्याग, करुणा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता ही एक अधिकारी को सच्चा नेता बनाती है। नेतृत्व का उद्देश्य केवल प्रशासन करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करना है।उन्होंने अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि एक अच्छा अधिकारी वही है जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो। उन्होंने अधिकारियों से आत्ममूल्यांकन और आत्मबोध को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक अधिकारी की जीवन यात्रा अलग होगी और उन्हें अपने अनुभवों से निरंतर सीखते हुए समाज एवं राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देना होगा। अंत में उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं तथा उनके परिजनों को शुभकामनाएँ दीं।
इससे पहले इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि पूर्व में इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज और वर्तमान में इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के रूप में यह संस्थान वर्ष 1938 से देश की सेवा कर रहा है। स्वतंत्र भारत के सभी भारतीय वन सेवा अधिकारियों तथा 14 मित्र देशों के 369 वन अधिकारियों ने अब तक इस संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप संशोधित पाठ्यक्रम पर आधारित 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के 2024 बैच के 109 परिवीक्षाधीन अधिकारियों तथा भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने भाग लिया। इनमें से 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा अर्जित किया।उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षीय अध्ययन के साथ-साथ वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी तथा नेतृत्व विकास पर विशेष बल दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत भाग देश के विविध पारिस्थितिक क्षेत्रों में आयोजित क्षेत्रीय अभ्यासों, अध्ययन भ्रमणों एवं साहसिक गतिविधियों को समर्पित रहा। परिवीक्षार्थियों ने विशेष वैकल्पिक पाठ्यक्रमों, स्वतंत्र शोध तथा वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अभ्यासों में भी भाग लिया, जिसमें देश के अग्रणी संस्थानों का सहयोग एवं विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने पास आउट होने वाले अधिकारियों से पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए वनाश्रित समुदायों की आजीविका एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पुरस्कार एवं पदक प्रदान किए गए। राजस्थान संवर्ग की सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले बैच की टॉपर रहीं। अन्य पुरस्कार एवं पदक विजेताओं की सूची पृथक रूप से संलग्न की गई है।
दीक्षांत समारोह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव श्री सुशील कुमार अवस्थी, चेयरमैन-सीईसी श्री सी.पी. गोयल, अपर वन महानिदेशक श्री संतोष तिवारी, अपर वन महानिदेशक श्री रमेश कुमार पाण्डेय, अपर सचिव श्री अमनदीप गर्ग, महानिदेशक, आईसीएफआरई श्रीमती कंचन देवी, निदेशक, आईजीएनएफए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया, अपर निदेशक, आईजीएनएफए श्री एन.सी. सरवणन, वन महानिरीक्षक डॉ. वी. क्लेमेंट बेन, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान डॉ. जी.एस. भारद्वाज, निदेशक, एफआरआई सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, देहरादून स्थित वानिकी एवं अन्य संस्थानों के प्रमुख, आईजीएनएफए एवं केंद्रीय अकादमी राज्य वन सेवा के संकाय सदस्य एवं कर्मचारी, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारी तथा 2024 बैच के पास आउट अधिकारियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।