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मणिपाल हॉस्पिटल ने उन्नत ईसीएमओ सपोर्ट के जरिए गंभीर फेफड़ों की विफलता से जूझ रही 60 वर्षीय महिला की जान बचाई

Manipal Hospital Saves the Life of a 60-Year-Old Woman Battling Severe Lung Failure Through Advanced ECMO Support.
Manipal Hospital Saves the Life of a 60-Year-Old Woman Battling Severe Lung Failure Through Advanced ECMO Support.

देहरादून – 15 मई 2026: एक गंभीर सीने के संक्रमण से शुरू हुई बीमारी जल्द ही जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी में बदल गई, जिससे कोलकाता की 60 वर्षीय महिला बहु-अंग विफलता के कगार पर पहुंच गईं। मरीज लंबे समय से सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) से पीड़ित थीं, जो एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही अंगों और ऊतकों पर हमला करने लगती है। लंबे समय तक स्टेरॉयड थेरेपी लेने के कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर हो चुकी थी। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण उन्हें तेजी से बढ़ते निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो गया, जो एक गंभीर स्थिति है, जिसमें फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने में असमर्थ हो जाते हैं।

जब उनकी सांस लेने की समस्या लगातार बढ़ने लगी, तब मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे के डॉक्टरों ने उन्हें उन्नत ईसीएमओ (एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन) सपोर्ट पर रखने का निर्णय लिया। यह एक अत्यधिक उन्नत और जीवनरक्षक तकनीक है, जिसका उपयोग केवल अत्यंत गंभीर मरीजों के लिए किया जाता है। इस जटिल मामले का सफल प्रबंधन मणिपाल हॉस्पिटल, ब्रॉडवे के आईसीयू एवं क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख डॉ. सुष्रुत बंद्योपाध्याय, कार्डियक एनेस्थीसिया एवं कार्डियक क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख डॉ. अशोक वर्मा और इंटरनल मेडिसिन विभाग के कंसल्टेंट डॉ. शंभु विशाल के नेतृत्व में एक बहु-विषयक टीम द्वारा किया गया।

मरीज को अस्पताल के आपातकालीन विभाग में अत्यंत गंभीर और अस्थिर अवस्था में लाया गया। उन्हें लगातार तेज बुखार, गंभीर सांस लेने में तकलीफ, पेट के ऊपरी हिस्से में तेज दर्द और खून की खांसी हो रही थी। अस्पताल पहुंचने पर पाया गया कि वह सर्कुलेटरी शॉक में थीं, जो एक खतरनाक स्थिति है, जिसमें अत्यधिक निम्न रक्तचाप के कारण महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्रिटिकल केयर टीम ने तुरंत रक्तचाप को स्थिर करने के लिए आपातकालीन दवाएं शुरू कीं और साथ ही उन्नत श्वसन सहायता भी दी।

आक्रामक उपचार के बावजूद अगले कुछ घंटों में उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ती गई। शुरुआत में उन्हें नॉन-इनवेसिव श्वसन सहायता दी गई, लेकिन ऑक्सीजन स्तर लगातार गिरने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। यहां तक कि प्रोन वेंटिलेशन जैसी उन्नत तकनीक, जिसमें मरीज को पेट के बल लिटाकर ऑक्सीजन स्तर सुधारने की कोशिश की जाती है, भी प्रभावी साबित नहीं हुई। जब गंभीर सूजन के कारण उनके फेफड़े और अधिक प्रभावित होने लगे, तब डॉक्टरों ने तत्काल बहु-विषयक मूल्यांकन किया और परिवार को स्थिति की गंभीरता समझाने के बाद वीवी ईसीएमओ (वेनो-वीनस ईसीएमओ) शुरू किया।

ईसीएमओ को गंभीर श्वसन विफलता में अंतिम जीवनरक्षक विकल्प माना जाता है। इसमें शरीर के बाहर एक कृत्रिम फेफड़े की मदद से रक्त में ऑक्सीजन मिलाई जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड को हटाकर रक्त को वापस शरीर में पहुंचाया जाता है। इससे क्षतिग्रस्त फेफड़ों को आराम और ठीक होने का समय मिलता है। मरीज लगभग दो सप्ताह तक ईसीएमओ सपोर्ट पर रहीं। इस दौरान डॉक्टरों ने फेफड़ों को और नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षित वेंटिलेटर सेटिंग्स बनाए रखीं और लगातार निगरानी, लक्षित एंटीबायोटिक तथा चौबीसों घंटे व्यापक क्रिटिकल केयर उपचार जारी रखा।

इस मामले पर बात करते हुए डॉ. सुष्रुत बंद्योपाध्याय ने कहा, “मरीज की स्थिति ऐसी हो गई थी कि अधिकतम वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन बनाए रखना संभव नहीं हो रहा था। यह समय के खिलाफ एक कठिन लड़ाई थी। ईसीएमओ ने हमें वह महत्वपूर्ण समय दिया, जिससे फेफड़ों को आराम और ठीक होने का मौका मिला, जबकि हम संक्रमण के खिलाफ लगातार इलाज जारी रख सके। ऐसे गंभीर मरीज का उपचार लगातार निगरानी, त्वरित निर्णय और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की मांग करता है। उन्हें स्वस्थ होकर घर लौटते देखना पूरी टीम के लिए बेहद संतोषजनक रहा।”

डॉ. अशोक वर्मा ने कहा, “ईसीएमओ गंभीर फेफड़ों की विफलता वाले मरीजों के लिए जीवनरक्षक उपचार का सबसे उन्नत रूपों में से एक है, जब पारंपरिक इलाज असर नहीं करता। इस मरीज के मामले में गंभीर सूजन, अस्थिर रक्तचाप, बार-बार संक्रमण, एनीमिया और ईसीएमओ के दौरान रक्तस्राव तथा रक्त के थक्के बनने के जोखिम के कारण उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण था। सही एंटीकोआग्यूलेशन बनाए रखना और शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और अत्यंत सटीक देखभाल की आवश्यकता थी। लंबे समय तक सुरक्षित और आरामदायक वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए मरीज की ट्रेकियोस्टॉमी भी की गई। यह सफल रिकवरी हमारी बहु-विषयक टीमवर्क, समय पर हस्तक्षेप और उन्नत क्रिटिकल केयर सुविधाओं का प्रमाण है।”

डॉ. शंभु विशाल ने कहा, “मरीज हमारे पास बेहद गंभीर स्थिति में आई थीं, उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ और गंभीर संक्रमण था। उनकी पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली ने उपचार को और कठिन बना दिया। गहन उपचार और वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद उनकी स्थिति बिगड़ती रही, जिसके बाद जीवन बचाने के लिए वीवी ईसीएमओ शुरू किया गया। लगातार निगरानी, समर्पित क्रिटिकल केयर सपोर्ट और पूरी टीम के समन्वित प्रयासों से मरीज धीरे-धीरे स्वस्थ हुईं और अंततः बिना किसी बाहरी सहायता के स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी पा सकीं। यह परिणाम मरीज के धैर्य और हमारी पूरी मेडिकल टीम के समर्पित प्रयासों को दर्शाता है।”