Home उत्तराखंड उत्तराखंड की पुकार, अब तो सुनो सरकार ! – सूर्यकांत धस्माना

उत्तराखंड की पुकार, अब तो सुनो सरकार ! – सूर्यकांत धस्माना

Uttarakhand's call, now listen to the government! - Suryakant Dhasmana
Uttarakhand's call, now listen to the government! - Suryakant Dhasmana

*उत्तराखंड आपदा में त्रस्त, केंद्र की चुप्पी पर बरसे कांग्रेसी: धस्माना ने मांगा विशेष पैकेज और श्वेत पत्र*

देहरादून( हमारी चौपाल ) उत्तराखंड में बार-बार आ रही प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की भारी हानि के बीच केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर कांग्रेस ने जमकर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने केंद्र सरकार पर उत्तराखंड की “घोर उपेक्षा” का आरोप लगाते हुए पूरे राज्य को आपदाग्रस्त घोषित करने की मांग की है।

धस्माना ने देहरादून में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आपदाओं ने तबाही मचा रखी है। उत्तरकाशी के धराली, हरसिल, यमुनोत्री, सियाणा चट्टी, राणा चट्टी और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग आपदा की चपेट में हैं। चमोली के थराली, देवाल और बद्रीनाथ में भी जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। रुद्रप्रयाग और पौड़ी जिले में भी कई लोगों की मौतें हुईं, जबकि कुमाऊं के पिथौरागढ़ में आपदा ने कहर बरपाया है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “चुनावी फायदे के लिए केदारनाथ-बद्रीनाथ का नाम जपने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उत्तराखंड को भूल गए हैं। वे बिहार चुनाव और विदेशी दौरों में व्यस्त हैं, लेकिन आपदा से जूझ रहे उत्तराखंडियों की सुध लेने के लिए न तो कोई केंद्रीय मंत्री भेजा गया और न ही नुकसान के आकलन के लिए कोई दल।”

धस्माना ने मांग की कि केंद्र सरकार तत्काल उत्तराखंड को आपदाग्रस्त राज्य घोषित करे और राहत, पुनर्वास व पुनर्निर्माण के लिए विशेष आर्थिक पैकेज दे। उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने तुरंत उच्चस्तरीय केंद्रीय दल भेजा था और 21,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आपदा से हुए नुकसान पर श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में संयुक्त निगरानी के तहत राहत कार्य शुरू हो सके।

उत्तराखंड की पुकार, अब तो सुनो सरकार !- धस्माना ने कहा कि आपदा से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे, वरना जनता का गुस्सा भाजपा को भारी पड़ सकता है।