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शूलिनी शोधकर्ता ने प्रमाणित किए हिमालयी पौधों के औषधीय गुण—अस्थमा, बुखार, पीलिया व संक्रमण में उपयोगी

Shoolini researcher proved the medicinal properties of Himalayan plants- useful in asthma, fever, jaundice and infections
Shoolini researcher proved the medicinal properties of Himalayan plants- useful in asthma, fever, jaundice and infections

देहरादून- 29 अगस्त 2025– हिमालयी औषधीय पौधे, जिन्हें पीढ़ियों से आदिवासी समुदाय पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग करते आए हैं, अब वैज्ञानिक रूप से उनके स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रमाणित किए जा रहे हैं। इन पौधों के औषधीय महत्व को अस्थमा, बुखार, पीलिया, शारीरिक दर्द, श्वसन संबंधी समस्याओं और संक्रमण जैसी स्थितियों के प्रबंधन में कारगर पाया गया है। शूलिनी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज की सहायक प्रोफेसर एवं हर्बेरियम व ड्रग म्यूज़ियम की प्रभारी डॉ. राधा के व्यापक शोध से पता चला है कि इनमें से कई पौधे एंटीऑक्सीडेंट, एंटीमाइक्रोबियल, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-डायबिटिक, एंटी-कैंसर और यकृत संरक्षण (हेपाटोप्रोटेक्टिव) गुणों से भरपूर हैं। वर्ष 2025 में उन्होंने चार पेटेंट दर्ज कराए हैं, जो पारंपरिक ज्ञान को फंक्शनल फूड्स और प्राकृतिक एंटीमाइक्रोबियल उत्पादों में बदलने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है।

अध्ययन किए गए पौधों में सेमलके फूल विशेष रूप से आशाजनक पाए गए हैं। पारंपरिक रूप से इनके शीतल और पुनर्स्थापनात्मक गुणों को महत्व दिया जाता रहा है। वैज्ञानिक परीक्षणों में यह फूल आहार फाइबर, फिनॉल्स और फ्लेवोनॉयड्स से भरपूर पाया गया है, जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गतिविधियों में सहायक हैं तथा पोषण की कमी को दूर करने में मददगार हैं। इसी आधार पर डॉ. राधा ने सेमल के फूल और सेब से बना पोषक तत्वों से युक्त जैम तथा एक रेडी-टू-सर्व ड्रिंक तैयार की है, जिसमें सभी सक्रिय यौगिक (बायोएक्टिव कम्पाउंड्स) सुरक्षित रहते हैं। इन दोनों उत्पादों में कृत्रिम संरक्षक या रंग का प्रयोग नहीं किया गया है। वैज्ञानिक समीक्षाओं ने इस फूल में एंटी-डायबिटिक, एंटी-कैंसर, एंटीमाइक्रोबियल और यकृत-संरक्षण की क्षमता को भी रेखांकित किया है।

प्रयोगशाला अध्ययनों में दो अन्य हिमालयी पौधों ने भी मजबूत एंटीमाइक्रोबियल गतिविधि दिखाई। प्रिंसेपिया यूटिलिस (हिमालयी चेरी), जिसका भारतीय और चीनी पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से उपयोग होता रहा है, फिनोलिक एसिड, फ्लेवोनॉयड्स और ट्राइटरपेनॉयड्स से भरपूर पाया गया। परीक्षणों में इस पौधे के अर्क ने क्लेब्सिएला न्यूमोनिया और स्ट्रेप्टोकोकस पायोजीनस जैसे जीवाणुओं को, जिनमें प्रतिरोधी स्ट्रेन भी शामिल थे, रोकने की क्षमता दिखाई—यह इस पौधे की एंटीमाइक्रोबियल क्षमता का पहला वैज्ञानिक प्रमाण है। इसी प्रकार, गिलोय, जिसका आयुर्वेद में प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए व्यापक उपयोग होता है, को पर्यावरण-अनुकूल अल्ट्रासोनिक पद्धति से प्रसंस्कृत किया गया, जिसमें 13 सक्रिय एंटीमाइक्रोबियल यौगिक सुरक्षित रहे। इसके अर्क ने बहु-दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया पर प्रभावी कार्य किया, जिससे इसके प्राकृतिक एंटीमाइक्रोबियल एजेंट के रूप में महत्व की पुष्टि हुई।

 

डॉ. राधा ने कहा, “हिमालय की जनजातियाँ पारिस्थितिक ज्ञान का जीवित भंडार हैं। अस्थमा, पीलिया, बुखार और संक्रमण के लिए उनकी कई पारंपरिक औषधियाँ अब प्रयोगशाला में औषधीय क्षमता के साथ प्रमाणित हो चुकी हैं। हमारा लक्ष्य इस पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक साक्ष्यों से जोड़ना है ताकि यह निवारक स्वास्थ्य देखभाल में योगदान दे सके और जैव-विविधता की रक्षा भी सुनिश्चित हो।”

इन खोजों से आगे बढ़ते हुए, डॉ. राधा के एथ्नोबॉटनिकल सर्वेक्षण में 1,600 से अधिक हिमालयी पौधों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जिनमें से कई का फाइटोकेमिकल और औषधीय विश्लेषण किया गया। उनकी महत्वपूर्ण शोध कृति “ए सर्वे ऑन एथ्नोवेटरिनरी मेडिसिन्स यूज्ड बाय द ट्राइबल माइग्रेटरी

 

शेफर्ड्स ऑफ नॉर्थवेस्टर्न हिमालय” इस क्षेत्र की पहली ऐसी विस्तृत रिपोर्ट है, जिसमें प्रवासी गद्दी-बकरवाल चरवाहों द्वारा पशुधन रोगों के उपचार हेतु प्रयुक्त 181 पौधों का विवरण दर्ज किया गया।

हालांकि, जड़ों और छाल की अस्थिर कटाई से कई स्थानिक और संकटग्रस्त हिमालयी पौधों—जैसे कुटकी (Picrorhiza kurroa), भारतीय जेंटियन (Gentiana kurroo), श्वेत हिमालयी कुमुदिनी (Lilium polyphyllum) और हिमालयी जंगली जौ (Elymus himalayanus)—के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इस कारण पारंपरिक ज्ञान का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और संरक्षण अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

यह शोध कार्य एडवांस्ड नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के सहयोग से किया गया है तथा बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया (देहरादून), डॉ. वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (नौनी), शूलिनी विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी विश्वविद्यालयों—स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, ईस्ट कैरोलिना यूनिवर्सिटी, क्लेमसन यूनिवर्सिटी, टेक्सास टेक यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ वीगो (स्पेन)—के साथ मिलकर संचालित है।

हिमालयी पौधों के औषधीय गुणों को रेखांकित कर और उन्हें पेटेंट दाखिलियों से प्रमाणित करके डॉ. राधा का कार्य यह दर्शाता है कि किस प्रकार पारंपरिक औषधियाँ आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रमाण-आधारित नवाचारों को जन्म दे सकती हैं, साथ ही जैव-विविधता संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता पर भी बल देती हैं।

20 महिलाओं को जूट बैग सिलाई प्रशिक्षण प्रमाण पत्र बांटे

Jute bag sewing training certificates distributed to 20 women
Jute bag sewing training certificates distributed to 20 women

ऋषिकेश। भारतीय ग्रामोत्थान संस्था की ओर से गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने बीस महिलाओं को जूट बैग, सिलाई प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र वितरित किया। ये महिलाएं पिछले एक माह से प्रशिक्षण ले रही थीं। गुमानीवाला स्थित रूषा फार्म में समापन समारोह का शुभारंभ पूर्व मंत्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल ने किया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को आगे भी इस कार्य में निरंतरता बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया। कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर वोकल का मंत्र चरितार्थ होता है। जिस प्रकार से अमेरिका के टैरिफ को पीएम मोदी ने साधते हुए स्वदेशी अपनाओ का अभियान चलाया है, यह कार्यक्रम उनके अभियान को गति देगा। भारतीय ग्रामोत्थान संस्था के प्रभारी अनिल चंदोला ने बताया कि यह प्रशिक्षण जेआरसीपीसी स्कीम के तहत कराया गया, जो तीन चरणों बेसिक, एडवांस और डिजाइन में संचालित हुआ। बेसिक और एडवांस प्रशिक्षण मास्टर ट्रेनर विमला नेगी द्वारा दिया गया, जबकि डिजाइन का प्रशिक्षण नेशनल जूट बोर्ड, कोलकाता की डिजाइनर माधवी विश्वास ने दिया। मौके पर क्षेत्र पंचायत सदस्य रूकम व्यास, सेवानिवृत्त प्रबंधक उद्योग विभाग सुरेन्द्र सिंह नेगी, संस्था के जनसंपर्क अधिकारी नरेन्द्र कुकशाल, राम सेवक रतूड़ी, बीना भट्ट, शशि सेमल्टी, ममता नेगी आदि उपस्थित रहे।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की बैठक जसपुर एवं गदरपुर में संपन्न हुई।

The meeting of Lok Janshakti Party (Ram Vilas) was held in Jaspur and Gadarpur.
The meeting of Lok Janshakti Party (Ram Vilas) was held in Jaspur and Gadarpur.

उधम सिंह नगर – 28 अगस्त 2025- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की बैठक कुमाऊं मंडल जिला उधम सिंह नगर के विधानसभा जसपुर एवं गदरपुर में प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव शर्मा द्वारा ली गई। इस बैठक में गणमान्य व्यक्तियों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस बार 2027 में उत्तराखंड के सभी विधानसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशियों को चुनाव में उतरने जा रही है। इस बैठक में पार्टी के सदस्यता लेने वाले लोगों में दीपक कुमार शर्मा, सुरेंद्र सिंह चौहान, श्रवण कुमार जैन, जितेंद्र कुमार, भीम सिंह, सफीक अहमद, रूप सिंह, हरपाल सिंह, दिनेश कुमार प्रजापति, विपिन कुमार, उषा यादव, जितेंद्र कश्यप, विजयपाल सिंह, बलदेव सिंह, सैमसंग दयाल, सुरेंद्र सागर, संतोष सिंह, डेनियल मसीह, सतीश सिंह, गुड्डू सिंह बिष्ट, धर्मेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह एवं विनोद मसीह उपस्थित रहे।

एसबीआई कार्ड और फ्लिपकार्ट ने साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण साझेदारी की; फ्लिपकार्ट एसबीआई को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड को लॉन्च किया  

SBI Card and Flipkart come together for a milestone partnership; launch Flipkart SBI Co-branded Credit Card
SBI Card and Flipkart come together for a milestone partnership; launch Flipkart SBI Co-branded Credit Card

देहरादून – 28 अगस्त, 2025: भारत में क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली सबसे बड़ी कंपनी, एसबीआई कार्ड ने भारत के घरेलू ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस, फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर ‘फ्लिपकार्ट एसबीआई क्रेडिट कार्ड’ के लॉन्च की घोषणा की। ये इस तरह का पहला और अनोखा को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड है, जिसे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अध्यक्ष, श्री चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी और एसबीआई के मैनेजिंग डायरेक्टर, श्री अश्विनी कुमार तिवारी की मौजूदगी में लॉन्च किया गया। फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड को बड़ी ही सावधानी से कैशबैक के फ़ायदों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, ताकि ग्राहकों को उनकी ज़्यादातर ख़रीदारी पर एक बेहतरीन अनुभव मिल सके। इस लॉन्च से जाहिर होता है कि, एसबीआई कार्ड और फ्लिपकार्ट ग्राहकों को ज़्यादा फ़ायदा, सुविधा और क्रेडिट की सुविधा देकर उनके ख़रीदारी के सफर को और बेहतर बनाने की कोशिश में लगातार जुटे हैं। ग्राहक फ्लिपकार्ट ऐप और एसबीआई कार्ड स्प्रिंट के ज़रिए, या फिर एसबीआई कार्ड की वेबसाइट SBICard.com पर जाकर डिजिटल तरीके से इस क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

 

फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड के ज़रिए मिंत्रा पर ख़रीदारी करने वाले ग्राहक 7.5% कैशबैक, जबकि फ्लिपकार्ट, शॉप्सी और क्लियरट्रिप पर ख़रीदारी करने वाले ग्राहक 5% कैशबैक का लाभ उठा सकते हैं। ग्राहक इस आकर्षक प्रस्ताव का फ़ायदा उठाकर फ्लिपकार्ट पर कई तरह के प्रोडक्ट्स एवं सेवाओं की ख़रीदारी कर सकते हैं, जिसमें मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रोसरी, फैशन, फ़र्नीचर, अप्लायंसेस, होम फ़र्निशिंग, और ट्रैवल बुकिंग के अलावा बहुत कुछ शामिल हैं। इतना ही नहीं, ग्राहकों को ज़ोमैटो, उबर, नेटमेड्स और पीवीआर जैसे चुनिंदा ब्रांड पर खर्च करने पर 4% का कैशबैक मिलेगा, जबकि कैशबैक के योग्य अन्य सभी खर्चों पर 1% का अनलिमिटेड कैशबैक दिया जाएगा। फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड में कैशबैक की ऑटो-क्रेडिट सुविधा उपलब्ध है, जिसके तहत स्टेटमेंट जनरेट होने के सिर्फ़ दो दिनों के अंदर ही कैशबैक की रकम आपके एसबीआई कार्ड अकाउंट में अपने आप जमा हो जाती है, और ग्राहकों के लिए ये प्रक्रिया बहुत आसान बन जाती है।

 

इस मौके पर एसबीआई कार्ड की मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, सलिला पांडे, ने कहा, “एसबीआई कार्ड में, हम लगातार यही कोशिश करते हैं कि अपने ग्राहकों को उनकी बदलती ज़रूरतों और उम्मीदों के अनुरूप सबसे बेहतर प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराएँ। फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर लॉन्च किया गया फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड भी इसी दिशा में एक और कदम है। भारत में ई-कॉमर्स का तेजी से विकास हो रहा है, जिसे देखते हुए ग्राहक अब हर ख़रीदारी में आसान और फ़ायदेमंद अनुभव की तलाश में रहते हैं। फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड को काफी सोच-समझकर डिज़ाइन किया गया है, ताकि ग्राहक बिना किसी परेशानी के भुगतान कर सकें और साथ ही उन्हें इसका फायदा भी मिले।”

 

फ्लिपकार्ट ग्रुप के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, कल्याण कृष्णमूर्ति, ने कहा, “फ्लिपकार्ट में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें हम हमेशा ग्राहकों को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं। हमने हमेशा इस बात पर ध्यान दिया है कि, हम बड़े पैमाने पर इस इकोसिस्टम को सभी के लिए फायदेमंद बना सकें। बीते कुछ सालों में, हमने कई ऐसे नए फाइनेंशियल ऑफर पेश किए हैं, जो सच में काफी इनोवेटिव हैं। एसबीआई कार्ड के सहयोग से इस को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड की पेशकश करना, इसी दिशा में उठाया गया एक और महत्वपूर्ण कदम है। इससे जाहिर होता है कि, हम औपचारिक ऋण को भारत में जन-जन के लिए सुलभ बनाने और उसकी पैठ बढ़ाने के इरादे पर अटल हैं। हम ऐसे समाधान लेकर आए हैं जो ज़्यादा-से-ज़्यादा फ़ायदा देते हैं और इसके जरिए हम भारत के लाखों परिवारों को सक्षम बनाना चाहते हैं, ताकि वे बुलंद हौसले के साथ अपने अरमानों को पूरा कर सकें।”

 

फ्लिपकार्ट एसबीआई कार्ड लेने और हर साल उसे रिन्यू कराने का शुल्क ₹500 है, जिस पर लागू टैक्स अलग से  लिया जाएगा। आवेदन सफल रहने पर, कार्डधारकों को वेलकम बेनिफिट्स के तौर पर ₹1,250 तक के लाभ मिल सकते हैं। इसके अलावा, अगर कार्डधारक कार्ड की सदस्यता वाले साल के दौरान ₹3,50,000 के सालाना खर्च के पड़ाव तक पहुँचते हैं, तो उन्हें ₹500 के रिन्यूअल शुल्क में छूट का भी फायदा मिलेगा। इस क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से आप हर स्टेटमेंट साइकिल के दौरान फ्यूल सरचार्ज पर 1% की छूट पा सकते हैं। ये कॉन्टैक्टलेस कार्ड है जो मास्टरकार्ड के साथ-साथ वीज़ा पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म पर भी उपलब्ध है।

 

इस लॉन्च के उपलक्ष्य में, फ्लिपकार्ट और एसबीआई कार्ड ने एक सीमित अवधि के लिए लॉन्च ऑफर* की पेशकश की है, जिसके तहत फ्लिपकार्ट ऐप पर कार्ड हेतु आवेदन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले ग्राहकों को हर दिन 10 सैमसंग गैलेक्सी स्मार्टवॉच और 100 एम्ब्रेन वायरलेस पावर बैंक जीतने का मौका मिलेगा।

खंडूरी का निधन पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति: महाराज

Khanduri's death is an irreparable loss to the world of journalism Maharaj
Khanduri's death is an irreparable loss to the world of journalism Maharaj

देहरादून। प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अमर उजाला के राज्य ब्यूरो और वरिष्ठ पत्रकार राकेश खंडूरी के असामायिक निधन पर दुःख जताते हुए अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है।

प्रदेश के लोक निर्माण, पर्यटन, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण, जलागम, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अमर उजाला के राज्य ब्यूरो और वरिष्ठ पत्रकार राकेश खंडूरी के निधन को सम्पूर्ण पत्रकारिता जगत की एक अपूर्णीय क्षति बताते हुए कहा कि उत्तराखंड की पत्रकारिता ने एक अनमोल धरोहर को खो दिया है। उन्होंने कहा कि राकेश खंडूड़ी जनसरोकारों से जुड़े होने के साथ साथ पहाड़ के हर छोटे-बड़े मुद्दे पर गंभीरता से अपनी कलम चलाते रहे। उनकी लेखनी सदैव निष्पक्ष, ईमानदार और समाज के हितों के लिए समर्पित रही। प्रदेश के पत्रकारिता जगत में उनकी कमी हमेशा महसूस की जाती रहेगी।

उत्तराखंड में छात्र-छात्राओं के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण अनिवार्य हो : डॉ० अनिल वर्मा

Disaster management training should be compulsory for students in Uttarakhand: Dr Anil Verma
Disaster management training should be compulsory for students in Uttarakhand: Dr Anil Verma

यूथ रेडक्रास ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कन्या गुरुकुल परिसर, देहरादून में नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया
यूथ रेडक्रास सोसायटी के मास्टर ट्रेनर आपदा प्रबंधन डॉ० अनिल वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। जहां बादल फटने के कारण त्वरित बाढ़ से आजकल अनेक जगह भयंकर तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है वहीं उत्तराखंड में 08 रिक्टर स्केल का खतरनाक भूकंप किसी भी क्षण आ सकता है, जिससे बड़ी तबाही की आशंका है। भूकंप की न तो भविष्यवाणी की जा सकती है, न ही उसे रोका जा सकता है परन्तु पूर्व तैयारी , प्रशिक्षण और जागरूकता से जान – माल की हानि को सीमित किया जा सकता है।
अतः प्राकृतिक आपदाएं हों अथवा शत्रु देश से युद्धकालीन स्थिति, दोनों से निबटने में प्रशासन की मदद हेतु स्कूल – कालेज- यूनिवर्सिटी के युवा छात्र – छात्राओं को दुर्घटनास्थल से घायलों को सुरक्षित निकालकर ले जाने के बचाव के आपातकालीन तरीकों तथा प्राथमिक चिकित्सा आदि का विधिवत् प्रशिक्षण देकर तैयार रखने से अनेक जानें बचाई जा सकती हैं।
उक्त विचार डा० वर्मा ने नागरिक सुरक्षा संगठन के उपनियंत्रक एस० के० साहू के निर्देशन तथा सिविल डिफेंस की पोस्ट संख्या -3 के पोस्ट वार्डन विपिन चाचरा के संयोजन में गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, कन्या गुरुकुल परिसर, सेवक आश्रम रोड में 150 छात्राओं , फैकल्टी, प्रशासनिक अधिकारियों तथा सिविल डिफेंस वार्डनों के लिए चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में यूथ रेडक्रास सोसायटी द्वारा आयोजित आपदा प्रबंधन , फर्स्ट एड तथा जागरूकता शिविर के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य प्रशिक्षक व्यक्त किए।
शिविर निदेशक सिविल डिफेंस के डिप्टी कन्ट्रोलर एस के साहू ने कहा कि आपदा नियंत्रण का मुख्य दायित्व सरकारी होने के बावजूद इसके कुशल नियंत्रण हेतु शासन की मशीनरी के साथ ही शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका बहुत कारगर साबित होगी। उन्होंने डॉ० अनिल वर्मा द्वारा प्रदान किये गये प्रशिक्षण की विशेष सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
कैम्प को-आर्डिनेटर प्रोफेसर (डॉ०) हेमन‌ पाठक ने बताया कि यूथ रेडक्रास के दो दिवसीय प्रशिक्षण में डॉ० वर्मा ने भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, त्वरित बाढ,बिजली गिरना आदि की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। सर्च एंड रेस्क्यू में इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू के फ्री हैंड्स में टो-ड्रैग, मंकी क्राल , टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट, फायरमेंस लिफ्ट, फोर एंड आफ्ट मेथड आदि तथा रोप रेस्क्यू के चेयरनाट,
ड्रा-हिच, बो-लाईन ड्रैग आदि तथा प्राथमिक चिकित्सा में हार्ट अटैक के दौरान मृतप्राय व्यक्ति को पुनर्जीवित करने के उपाय “सीपीआर” का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ० अर्चना डिमरी ने बताया कि विशेष जागरूकता अभियान के तहत् डॉ० वर्मा द्वारा नशामुक्ति, एड्स, टी०बी०,डॉग बाईट, स्नेक बाईट,एड्स नियंत्रण, रक्तदान- नेत्रदान – देहदान , ईट राईट इंडिया, एनीमिया, रक्तरोग थैलीसीमिया, डेंगू तथा सड़क सुरक्षा आदि विषयों पर भी व्याख्यान दिये गये।
शिविर संयोजक पोस्ट संख्या -03 उत्तर प्रभाग के पोस्ट वार्डन विपिन चाचरा के नेतृत्व में छात्राओं अनीषा पंत, शिवानी राणा, प्रेरणा सिंह, प्रतीक्षा, हर्षिता,पलक, कुमकुम, शिल्पी, साम्भवी, गौरवी, रोशनी तथा सिविल डिफेंस वार्डनों महेश गुप्ता, मेहराज मोहन, सुमन सिंह, नीलम वर्मा, सुनीता भट्ट, शिव सिंह,मनोज कुमार, कमल शर्मा ने इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू , रोप रेस्क्यू तथा सीपीआर का कुशल प्रदर्शन किया।
शिविर संचालन में प्रोफेसर (डॉ०) हेमन पाठक, डॉ० निपुर, डॉ० हेमलता अय्यर, डॉ० रेनू शुक्ला, डॉ० नीना गुप्ता , डॉ० अर्चना डिमरी ने विशेष सहयोग दिया।
कार्यक्रम का कुशल‌‌ संचालन प्रोफेसर (डॉ०) अर्चना डिमरी तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर(डॉ०) रेनू शुक्ला ने किया।

उत्तराखंड में छात्र-छात्राओं के लिए आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण अनिवार्य हो : डॉ० अनिल वर्मा

Disaster management training should be compulsory for students in Uttarakhand Dr Anil Verma
Disaster management training should be compulsory for students in Uttarakhand Dr Anil Verma

यूथ रेडक्रास ने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कन्या गुरुकुल परिसर, देहरादून में नागरिक सुरक्षा प्रशिक्षण दिया

यूथ रेडक्रास सोसायटी के मास्टर ट्रेनर आपदा प्रबंधन डॉ० अनिल वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है। जहां बादल फटने के कारण त्वरित बाढ़ से आजकल अनेक जगह भयंकर तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है वहीं उत्तराखंड में 08 रिक्टर स्केल का खतरनाक भूकंप किसी भी क्षण आ सकता है, जिससे बड़ी तबाही की आशंका है। भूकंप की न तो भविष्यवाणी की जा सकती है, न ही उसे रोका जा सकता है परन्तु पूर्व तैयारी , प्रशिक्षण और जागरूकता से जान – माल की हानि को सीमित किया जा सकता है।
अतः प्राकृतिक आपदाएं हों अथवा शत्रु देश से युद्धकालीन स्थिति, दोनों से निबटने में प्रशासन की मदद हेतु स्कूल – कालेज- यूनिवर्सिटी के युवा छात्र – छात्राओं को दुर्घटनास्थल से घायलों को सुरक्षित निकालकर ले जाने के बचाव के आपातकालीन तरीकों तथा प्राथमिक चिकित्सा आदि का विधिवत् प्रशिक्षण देकर तैयार रखने से अनेक जानें बचाई जा सकती हैं।
उक्त विचार डा० वर्मा ने नागरिक सुरक्षा संगठन के उपनियंत्रक एस० के० साहू के निर्देशन तथा सिविल डिफेंस की पोस्ट संख्या -3 के पोस्ट वार्डन विपिन चाचरा के संयोजन में गुरूकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, कन्या गुरुकुल परिसर, सेवक आश्रम रोड में 150 छात्राओं , फैकल्टी, प्रशासनिक अधिकारियों तथा सिविल डिफेंस वार्डनों के लिए चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर में यूथ रेडक्रास सोसायटी द्वारा आयोजित आपदा प्रबंधन , फर्स्ट एड तथा जागरूकता शिविर के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य प्रशिक्षक व्यक्त किए।
शिविर निदेशक सिविल डिफेंस के डिप्टी कन्ट्रोलर एस के साहू ने कहा कि आपदा नियंत्रण का मुख्य दायित्व सरकारी होने के बावजूद इसके कुशल नियंत्रण हेतु शासन की मशीनरी के साथ ही शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं की भूमिका बहुत कारगर साबित होगी। उन्होंने डॉ० अनिल वर्मा द्वारा प्रदान किये गये प्रशिक्षण की विशेष सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।
कैम्प को-आर्डिनेटर प्रोफेसर (डॉ०) हेमन‌ पाठक ने बताया कि यूथ रेडक्रास के दो दिवसीय प्रशिक्षण में डॉ० वर्मा ने भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, त्वरित बाढ,बिजली गिरना आदि की महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। सर्च एंड रेस्क्यू में इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू के फ्री हैंड्स में टो-ड्रैग, मंकी क्राल , टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट, फायरमेंस लिफ्ट, फोर एंड आफ्ट मेथड आदि तथा रोप रेस्क्यू के चेयरनाट,
ड्रा-हिच, बो-लाईन ड्रैग आदि तथा प्राथमिक चिकित्सा में हार्ट अटैक के दौरान मृतप्राय व्यक्ति को पुनर्जीवित करने के उपाय “सीपीआर” का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ० अर्चना डिमरी ने बताया कि विशेष जागरूकता अभियान के तहत् डॉ० वर्मा द्वारा नशामुक्ति, एड्स, टी०बी०,डॉग बाईट, स्नेक बाईट,एड्स नियंत्रण, रक्तदान- नेत्रदान – देहदान , ईट राईट इंडिया, एनीमिया, रक्तरोग थैलीसीमिया, डेंगू तथा सड़क सुरक्षा आदि विषयों पर भी व्याख्यान दिये गये।
शिविर संयोजक पोस्ट संख्या -03 उत्तर प्रभाग के पोस्ट वार्डन विपिन चाचरा के नेतृत्व में छात्राओं अनीषा पंत, शिवानी राणा, प्रेरणा सिंह, प्रतीक्षा, हर्षिता,पलक, कुमकुम, शिल्पी, साम्भवी, गौरवी, रोशनी तथा सिविल डिफेंस वार्डनों महेश गुप्ता, मेहराज मोहन, सुमन सिंह, नीलम वर्मा, सुनीता भट्ट, शिव सिंह,मनोज कुमार, कमल शर्मा ने इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू , रोप रेस्क्यू तथा सीपीआर का कुशल प्रदर्शन किया।
शिविर संचालन में प्रोफेसर (डॉ०) हेमन पाठक, डॉ० निपुर, डॉ० हेमलता अय्यर, डॉ० रेनू शुक्ला, डॉ० नीना गुप्ता , डॉ० अर्चना डिमरी ने विशेष सहयोग दिया।
कार्यक्रम का कुशल‌‌ संचालन प्रोफेसर (डॉ०) अर्चना डिमरी तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर(डॉ०) रेनू शुक्ला ने किया।

एमडीडीए की कड़ी कार्रवाई, नेहरू कॉलोनी में अवैध निर्माण सील, चेतावनी जारी

MDDA takes strict action, seals illegal construction in Nehru Colony, issues warning
MDDA takes strict action, seals illegal construction in Nehru Colony, issues warning

मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ अपने सख्त रुख को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। प्राधिकरण ने आज प्राधिकरण क्षेत्रान्तर्गत नेहरू कॉलोनी, देहरादून में दो अवैध व्यावसायिक निर्माणों को सील कर दिया। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कर रहे हैं।

अभियान के तहत आकाश दीप भारद्वाज एवं अनीता वर्मा द्वारा किए गए अवैध व्यावसायिक निर्माणों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। इस दौरान सहायक अभियंता राजेन्द्र बहुगुणा, अवर अभियंता मुनेश राणा, विजय सिंह एवं सुपरवाइजर सहित एमडीडीए की पूरी टीम मौके पर मौजूद रही।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी के निर्देश पर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रदेशभर में अभियान तेज कर दिया गया है। देहरादून को योजनाबद्ध एवं स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता से अपील है कि वे निर्माण कार्य प्राधिकरण की अनुमति एवं स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही करें। नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। एमडीडीए का यह कदम शहर को नियोजित एवं सुरक्षित विकास की दिशा में ले जाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्य सचिव ने की  आपदा प्रभावितों क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा

Chief Secretary reviewed the relief and rehabilitation work in the disaster affected areas.
Chief Secretary reviewed the relief and rehabilitation work in the disaster affected areas.

देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने बुधवार को सचिवालय में प्रदेश में आपदा प्रभावितों क्षेत्रों, विशेषकर धराली आपदा प्रभावितों के लिए राहत एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने सचिव आपदा एवं आयुक्त गढ़वाल से धराली में राहत एवं रेस्टोरेशन कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने सचिव लोक निर्माण विभाग और सचिव सिंचाई को प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के अस्थायी झील में डूबे हिस्से के लिए तत्काल वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र के लिए अन्य पैदल और वैकल्पिक मार्गों को भी दुरूस्त किया जाए। उन्होंने सर्च ऑपरेशन्स को निरन्तर जारी रखते हुए नवीनतम तकनीक का उपयोग कर सर्च कार्यों में तेजी लाए जाने के भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावितों के लिए रहने और खाने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्य सड़क मार्ग बाधित होने से प्रभावित क्षे़त्र के साथ ही उससे आगे के पूरे क्षेत्र में फल एवं सब्जी उत्पादकों को अपने उत्पादों के लिए बाजार की समस्या खड़ी हो गयी है। उन्होंने सचिव कृषि को निर्देश दिए कि उत्तराखण्ड हॉर्टीकल्चर बोर्ड और मंडी परिषद द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करायी जाए। साथ ही, जीएमवीएन एवं केएमवीएन के बाजार प्रकोष्ठ को भी सक्रिय कर बाजार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने इन क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रभावितों की आजीविका की दिशा में भी कार्य किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐप्पल मिशन, कीवी मिशन और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, होम स्टे जैसी विभिन्न योजनाओं को लेकर प्रभावितों की आजीविका में सहायता के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने आपदा में हुयी पशुधन हानि से सम्बन्धित मुआवजा तत्काल वितरित किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव ने प्रभावित क्षेत्र में स्कूल, अस्पताल और आंगनवाड़ी केन्द्र के लिए तत्काल प्रीफैब भवन तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा से लोगों के प्रमाणपत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज भी नष्ट हो गए होंगे। इसके लिए शीघ्र मल्टीपरपज कैम्प लगाकर तत्काल प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाएं।
मुख्य सचिव ने लापता लोगों के लिए सिविल डेथ के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को भी शीघ्र शुरू किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी लापता लोगों (नेपाली मूल के श्रमिक एवं विदेशी पर्यटक) के लिए भी सिविल डेथ के प्रमाणीकरण की निर्धारित प्रक्रिया शीघ्र शुरू कर ली जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि सम्पत्ति क्षति मुआवजा का आंकलन करने के लिए आधुनिकतम तकनीक और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग किया जाए। इसके लिए यूकॉस्ट की सहायता से शीघ्र आंकलन किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि यूएसडीएमए द्वारा पिछले वर्षों में किए गए सभी अध्ययनों एवं संकलित डाटा का विश्लेषण करा कर भी उपयोग में लाया जाए। उन्होंने डीजी यूकॉस्ट को प्रदेश की सभी ग्लेशियरों और ग्लेशियर झीलों और उनके रास्ते में पड़ने वाले मोरेन और बोल्डर्स आदि का तत्काल विश्लेषण करते हुए, उनसे सम्भावित खतरे का आंकलन के लिए मॉड्यूल तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए इससे सम्बन्धित सभी वैज्ञानिक संगठनों को शामिल कर टीम तैयार किए जाने के भी निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर सचिव शैलेश बगोली, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, सचिव डॉ. सुरेन्द्र नारायण पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, अपर सचिव डॉ. अहमद इकबाल, आनन्द स्वरूप, आशीष चौहान एवं हिमांशु खुराना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम धामी ने स्यानाचट्टी में आपदा प्रभावित क्षेत्र का किया स्थलीय निरीक्षण

CM Dhami did a field inspection of the disaster affected area in Syanachatti
CM Dhami did a field inspection of the disaster affected area in Syanachatti

देहरादून। मुख्यमंत्री धामी ने आज जनपद के स्यानाचट्टी में आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री आपदा प्रभावित लोगों से मिले तथा उनकी समस्याएं सुनकर हर संभव सहायता दिए जाने का आश्वासन दिया।
स्यानाचट्टी के पास यमुना नदी में गडगाड गदेरे से मलबा आने से यमुना का प्रवाह अवरुद्ध होने के कारण अस्थाई झील निर्मित हुई थी। मुख्यमंत्री ने स्यानाचट्टी में बनी अस्थाई झील का निरीक्षण किया और नदी मार्ग में जमा हुई गाद को हटाने और झील के मुहाने को चौड़ा करके त्वरित जल निकासी बढ़ाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी को जल भराव और मलबा आने से स्थानीय लोगों का हुए नुकसान का तत्काल आंकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा आवाजाही बाधित होने के कारण आलू की फसल की उचित मूल्य पर खरीद की व्यवस्था करने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान कुपड़ा कुंशाला पुल का स्थलीय निरीक्षण कर जल्द से जल्द कार्यदायी संस्था नामित कर निर्माण कार्य शुरू करने और आवाजाही बहाल होने तक वैकल्पिक पैदल मार्ग को व्यवस्थित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि जगह जगह भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध होने से बाधित हुई आवाजाही को बहाल किया जाए और यमुनोत्री मार्ग को सुचारू कर यात्रा के लिए जल्द खोला जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा संकट की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ है तथा प्रभावित लोगों को हुए नुकसान का आंकलन कर जल्द से जल्द हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
इस दौरान पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, जिलाध्यक्ष बीजेपी नागेंद्र चौहान, जिला पंचायत अध्यक्ष रमेश चौहान, प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान,गढ़वाल समन्वयक किशोर भट्ट , जिलाधिकारी प्रशांत आर्य, पुलिस अधीक्षक सरिता डोभाल, कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी, एडीएम मुक्ता मिश्र, एसडीएम बृजेश तिवारी, पुलिस उपाधीक्षक देवेंद्र सिंह नेगी एवं जनक सिंह पंवार उपस्थित रहे ।

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