Home Blog Page 74

एमआईटी – डब्लूपीयू ने खेती के कचरे से ग्रीन हाइड्रोजन और बायो-सीएनजी बनाने के लिए कार्बन-नेगेटिव तकनीक विकसित की

MIT-WPU develops carbon-negative technology to produce green hydrogen and bio-CNG from agricultural waste
MIT-WPU develops carbon-negative technology to produce green hydrogen and bio-CNG from agricultural waste

देहरादून- 11 सितंबर 2025: एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (एमआईटी – डब्लूपीयू ) के ग्रीन हाइड्रोजन रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं ने डॉ. रत्नदीप जोशी (एमआईटी – डब्लूपीयू में ग्रीन हाइड्रोजन रिसर्च सेंटर के एसोसिएट डायरेक्टर) की अगुवाई में कार्बन-नेगेटिव प्रक्रिया विकसित की है, जो इनोवेटिव होने के साथ-साथ खेती के अलग-अलग तरह के कचरे से बायोसीएनजी और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में मददगार है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में स्वच्छ और किफायती तरीके से आत्मनिर्भर बनने की राह आसान हो गई है। ये इनोवेशन देश के आत्मनिर्भर भारत मिशन और एलआईएफई (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) के विचारों को आगे बढ़ाता है। साथ ही यह राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के भी अनुरूप है, जिसके तहत वर्ष 2030 तक सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

यह विचार किसानों के साथ लगातार हुई बातचीत से सामने आया, जो कम समय में लगातार बारिश, लंबे समय तक सूखा और बार-बार आने वाले चक्रवातों जैसे जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों के साथ-साथ भारी मात्रा में खेती के कचरे को संभालने को लेकर परेशान रहते थे। बायोमास को गैस में बदलने के पुराने तरीके उतने कारगर नहीं थे, जिससे सिर्फ 5-7 प्रतिशत गैस तैयार हो पाती थी।

डॉ. जोशी ने कहा, “पहले भी बहुत बार कोशिश की गई, जिसमें सिर्फ धान के पुआल या नेपियर घास जैसे एक ही तरह के कच्चे माल का उपयोग किया गया। लेकिन उसके विपरीत, इस रिसर्च ने बाजरे तथा दूसरी मौसमी फसलों के अलग-अलग तरह के कचरे से यह कामयाबी हासिल की है। यह तरीका ख़ास तौर पर कम बारिश और सूखे वाले इलाक़ों के लिए बहुत कारगर है। रिसर्च के दौरान, बायोमास को गैस में बदलने की क्षमता को 12% तक पहुँचाने के लिए बायो-कल्चर विकसित किया गया। एमआईटी – डब्लूपीयू के परिसर में एक पायलट प्लांट बनाया गया है जिसकी क्षमता 500 किलो/दिन है। इसे चार पेटेंट भी मिल चुके हैं और इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह तैयार बायोगैस में मीथेन की मात्रा ज़्यादा थी, जिसका इस्तेमाल ग्रीन कैटेलिटिक पायरोलिसिस प्रक्रिया के ज़रिए ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए किया गया।”

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के पीएचडी रिसर्च स्कॉलर, अनिकेत पात्रीकर ने कहा, “हमने पौधों से प्राप्त एक पायरोलिसिस कैटेलिस्ट इस्तेमाल किया है, जिससे ग्रीन हाइड्रोजन तैयार करते समय कार्बन डाइऑक्साइड बाहर नहीं निकलती है। और इसकी वजह से महंगे कार्बन कैप्चर सिस्टम की ज़रूरत नहीं रहती है। इस प्रक्रिया से बायोचार भी बनता है, जो एक फ़ायदेमंद बायप्रोडक्ट है और इसका इस्तेमाल फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक्स, खाद और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में होता है।”

 

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के पीएचडी रिसर्च स्कॉलर, अविनाश लाड ने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “दुनिया की निगाहें इलेक्ट्रोलिसिस पर टिकी हैं, पर ये अभी भी काफी महँगा है, जिसकी लागत 2 डॉलर प्रति किलोग्राम से भी ज़्यादा है। हमारी प्रक्रिया में कार्बन नहीं निकलता, जो बेहद किफायती और बड़े स्तर पर इस्तेमाल के लायक है। इसमें ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का ख़र्च घटाकर 1 डॉलर प्रति किलोग्राम तक लाने के साथ-साथ भारत में खेती के कचरे की समस्या को सुलझाने की क्षमता है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लिए 2070 तक नेट-जीरो इमिशन का लक्ष्य रखा है। ज़मीनी स्तर पर कामयाब साबित होने वाले इस तरह के इनोवेशन के साथ, भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और 2050 तक नेट-जीरो का लक्ष्य हासिल कर सकता है। इस तरह हमारा देश स्वच्छ, रिन्यूएबल और सस्टेनेबल एनर्जी के मामले में पूरी दुनिया में सबसे आगे हो सकता है।”

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के एग्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट, डॉ. राहुल कराड ने कहा, “एमआईटी – डब्लूपीयू का मानना है कि यूनिवर्सिटी का काम बस छात्रों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे समाधान भी तैयार करने चाहिए जो सीधे तौर पर समाज और देश के काम आएँ। ये रिसर्च हमारे लिए बड़े गौरव की बात है, जिससे जाहिर होता है कि किस तरह रिसर्च, इनोवेशन और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी के सही तालमेल से जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है। मुझे सबसे ज़्यादा ख़ुशी इस बात की है कि, यह इनोवेशन सिर्फ़ लैब में किया जाने वाला प्रयोग नहीं है; बल्कि यह बड़े स्तर पर काम में आने लायक, उपयोगी और भारत की ज़मीनी हक़ीक़त से जुड़ा हुआ है। मैं इसे एक बड़ा कदम मानता हूँ, जो किसानों को सक्षम बनाएगा, सस्टेनेबल इंडस्ट्री को सहारा देगा और हमारे छात्रों को तैयार करेगा कि वे आने वाले समय में भारत को हरा-भरा और आत्मनिर्भर बनाएँ।”

इस प्रक्रिया में बायप्रोडक्ट के तौर पर बायोफर्टिलाइज़र भी तैयार होते हैं, जिनका इस्तेमाल खेती में यूरिया की जगह किया जा सकता है। टीम को ग्रीन-कोटेड, और धीरे-धीरे रिलीज़ होने वाले बायोफर्टिलाइज़र के लिए दो पेटेंट मिले हैं, जो यूरिया जैसे केमिकल वाले खाद पर निर्भरता कम करने और मिट्टी में नमक की मात्रा कम करके खेती को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, क्योंकि मिट्टी में ज़्यादा नमक की मौजूदगी भारतीय खेती के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है जो लंबे समय से बरकरार है।

यूरिया पानी सोखता है और मॉनसून में देरी होने पर फ़सल की जड़ों से पानी खींच लेता है, लेकिन उसके मुक़ाबले ये बायोफर्टिलाइज़र केवल पानी मौजूद होने पर ही एनपीके न्यूट्रिएंट्स रिलीज़ करते हैं। इससे किसानों को मदद मिलेगी और देश के ग्रामीण इलाकों में फसल की पैदावार बढ़ेगी, और साथ ही उन्हें ऐसी अर्थव्यवस्था का फायदा भी मिलेगा जिसमें कचरा फिर से इस्तेमाल हो सकता है। प्रो. जोशी ने बताया, “बायोफर्टिलाइज़र का उपयोग करके, हम कार्बन को सोखने में मदद कर रहे हैं और ग्रीनहाउस गैसों के निकलने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम कर रहे हैं।”

इस इंडस्ट्रियल इनोवेशन ने ऊर्जा क्षेत्र का ध्यान पहले ही अपनी ओर खींच लिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियों द्वारा हज़ारों सीबीजी और हाइड्रोजन यूनिट्स स्थापित करने की योजना को देखते हुए, कई जाने-माने एंटरप्रेन्योर्स ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए एमआईटी – डब्लूपीयू के साथ साझेदारी में दिलचस्पी दिखाई है। यूनिवर्सिटी उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग का भी स्वागत करती है, जिससे छात्रों को इंडस्ट्री के लिए तैयार किया जाता है और हुनरमंद युवा देश को मजबूत बनाने में योगदान दे पाते हैं।

केंद्र सरकार की अन्तर-मंत्रालयी टीम ने सीएम धामी से की भेंट

Inter-ministerial team of central government met CM Dhami
Inter-ministerial team of central government met CM Dhami

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राज्य में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आई भारत सरकार की अन्तर-मंत्रालयी टीम ने भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आपदा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। मानसून अवधि में राज्य को अतिवृष्टि के कारण भूस्खलन, बाढ और जल भराव की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूस्खलन से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों को मिलकर पूर्वानुमान प्रणाली को और अधिक विकसित करने की दिशा कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष अत्यधिक वर्षा के कारण राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। जनहानि के साथ ही परिसंपत्तियों को भी अत्यधिक क्षति पहॅुंची है। उन्होंने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में बादल फटने व भूस्खलन की घटनाओं से जमीन का स्थाई नुकसान होता है, ऐसी जगहों को दोबारा खेती-बाड़ी या निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त करना संभव नहीं हो पाता है। इसके लिए प्रभावी कार्ययोजना पर भी उन्होंने बल दिया।
भारत सरकार की अंतर मंत्रालयी टीम के सदस्यों ने उत्तरकाशी, रूद्रप्रयाग, पौड़ी गढवाल, चमोली, बागेश्वर एवं नैनीताल जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के बाद बुधवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री से भेंट की। गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना के नेतृत्व में आई इस टीम में अनु सचिव शेर बहादुर, अधीक्षण अभियंता सुधीर कुमार, उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह, निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह शामिल थे। अंतर मंत्रालयी टीम ने आपदा प्रभावितों से बातचीत कर मिले फीड बैक का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में संचालित राहत कार्यों को सराहनीय बताया। आपदा प्रभावितों के लिए राहत शिविरों में रहने व भोजन की समुचित व्यवस्था, मौके पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था को भी केन्द्रीय टीम ने बेहतर बताया।
केन्द्रीय टीम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा आपदा में मृतकों के परिजनों तथा जिनके घर पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनको रू. पॉंच लाख की तात्कालिक सहायता राशि दिए जाने से भी प्रभावितों को काफी राहत मिली है। राज्य में सभी गर्भवती महिलाओं का संपूर्ण डाटा जिला प्रशासन के पास उपलब्ध होने एवं उनके स्वास्थ्य व सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था हेतु निरंतर संपर्क रखने की पहल की भी केन्द्रीय टीम ने सराहना की। टीम के सदस्यों ने कहा कि इस तरह की महत्वपूर्ण पहल को अन्य राज्यों में भी अपनाने के लिए अपना सुझाव प्रस्तुत करेगी। केन्द्रीय टीम ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में भूस्खलन व बाढ़ से नदियों में अत्यधिक मात्रा में सिल्ट भर जाने के कारण जल स्तर ऊपर उठने से भविष्य में नुकसान की संभावना को भी भ्रमण के दौरान उनके संज्ञान में लाया गया है। इस अवसर पर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, अपर मुख्य सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनन्द स्वरूप उपस्थित थे।

एमडीडीए की बड़ी कार्रवाई, एक माह में 150 बीघा अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त, एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों समेत दर्जनों निर्माण सील

MDDA takes a big action, 150 bighas of illegal plotting demolished in a month, dozens of constructions including more than a dozen multi-storey buildings sealed
MDDA takes a big action, 150 bighas of illegal plotting demolished in a month, dozens of constructions including more than a dozen multi-storey buildings sealed

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों पर उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी की अगुवाई में मसूरी- देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध निर्माण के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया है। बीते एक माह के भीतर प्राधिकरण ने लगभग 150 बीघा अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया और ऋषिकेश सहित विभिन्न स्थानों पर एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों समेत दर्जनों निर्माणों को सील किया है।

कहाँ-कहाँ हुई बड़ी कार्रवाई

डोईवाला के झाबरावाला में 18 बीघा, रानीपोखरी के डांडी गांव में 10 से 12 बीघा, भानियावाला के बक्सारवाला में 25 बीघा और देहरादून के हरिद्वार रोड (साईं मंदिर के निकट) में 40 बीघा अवैध प्लॉटिंग को ध्वस्त किया गया। इसके अतिरिक्त शीशमबाड़ा क्षेत्र में 10 बीघा और रूपनगर बद्रीपुर में 5 बीघा अवैध प्लॉटिंग को भी गिराया गया। माजरी ग्रांट, हरिद्वार रोड, नेहरू कॉलोनी, सहस्त्रधारा रोड और शिमला बाईपास हिन्दुवाला क्षेत्र में कई अवैध निर्माणों पर सीलिंग की कार्यवाही की गई। सबसे बड़ी कार्रवाई ऋषिकेश में देखने को मिली, जहाँ निर्मल बाग, वीरभद्र रोड, गली नंबर 10–11, कोयल ग्रांट और प्राधिकरण क्षेत्र के अन्य हिस्सों में एक दर्जन से अधिक बहुमंजिला इमारतों को सील किया गया।

एमडीडीए की जीरो टॉलरेंस की नीति

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंशा स्पष्ट है। प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग और नियम विरुद्ध निर्माण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होंगे और यह कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। उन्होंने दोहराया कि आज की कार्रवाई आख़िरी कदम नहीं है, बल्कि यह सिलसिला आगे भी लगातार जारी रहेगा। प्राधिकरण हर उस जगह पहुँचेगा जहाँ मानकों के विरुद्ध ढांचा खड़ा किया गया है।

आम जनता को किया जा रहा जागरूक

प्राधिकरण आम जनता को भी लगातार जागरूक कर रहा है कि वह भू-माफियाओं के झांसे में न आएँ। किसी भी प्लॉट या निर्माण की वैधता की पुष्टि प्राधिकरण से अवश्य करें। बिना एमडीडीए से अनुमति की प्लॉटिंग या निर्माण आम जनमानस के लिए भविष्य में न केवल आर्थिक नुकसान बल्कि कानूनी संकट भी खड़ा कर सकते हैं।

योजनाबद्ध विकास पर जोर

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कहना है कि उत्तराखंड की खूबसूरती और योजनाबद्ध विकास को बचाने के लिए कठोर फैसले लेना बेहद आवश्यक है। अवैध निर्माण न केवल पर्यावरण और भूगोल को नुकसान पहुँचाते हैं बल्कि प्रदेश की पहचान और भविष्य के लिए भी खतरा हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री धामी ने साफ निर्देश दिए हैं कि कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

बुलडोज़र बना सख्ती का प्रतीक

बुलडोज़र और पुलिस बल की मौजूदगी में की गई इन कार्रवाइयों ने अवैध निर्माण और प्लॉटिंग माफियाओं को कड़ा संदेश दिया है। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है क्योंकि अवैध गतिविधियों से बुनियादी ढाँचा और संसाधन बुरी तरह प्रभावित हो रहे थे।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि देहरादून जनपद प्राधिकरण क्षेत्रांगर्त हुई यह कार्रवाई प्रदेशभर में यह संदेश देती है कि उत्तराखंड अब अवैध प्लॉटिंग और नियमविरुद्ध निर्माण के खिलाफ पूरी तरह एक्शन मोड में है।

आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान में ऑनलाइन संगोष्ठी का हुआ आयोजन

Online seminar organized at ICFRE-Forest Research Institute
Online seminar organized at ICFRE-Forest Research Institute

देहरादून। हिमालय दिवस के समारोह के रूप में, आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून के विस्तार प्रभाग ने एक वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें डॉ. कलाचंद सैन (सेवानिवृत्त), पूर्व निदेशक, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून द्वारा “हिमालय में जलवायु-प्रेरित भूवैज्ञानिक आपदाएँ और उनके उपचार” पर एक ऑनलाइन प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत में ऋचा मिश्रा, भारतीय वन सेवा, प्रमुख विस्तार प्रभाग, वन अनुसंधान संस्थान ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में, उन्होंने बताया कि हिमालय सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी कई नदियों का उद्गम स्थल है, जो इन नदी घाटियों में बसे लोगों की जीवन रेखाएँ हैं। उन्होंने बताया कि हम अपने अस्तित्व और आजीविका के लिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर हैं। मानवजनित दबाव के कारण प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने एक भयावह स्थिति पैदा कर दी है। पर्वत श्रृंखलाओं पर विभिन्न प्रकार के दबाव भूकंप, बाढ़ और सूखे का कारण बन रहे हैं। स्वागत भाषण के बाद, उन्होंने डॉ. रेनू सिंह, भारतीय वन सेवा, निदेशक, आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून को उद्घाटन भाषण के लिए आमंत्रित किया। डॉ. रेनू सिंह ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर बात की और बताया कि हिमालय न केवल शक्ति का स्रोत है, बल्कि एक वैश्विक धरोहर भी है जिसका संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने बाढ़ के परिणामस्वरूप उत्तराखंड के धराली और अन्य स्थानों पर आई आपदा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन को बनाए रखने के लिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
तकनीकी सत्र के दौरान, डॉ. कलाचंद सैन ने एक प्रस्तुति दी और बताया कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र कमजोर हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों का पिघलना, हिमरेखा और वृक्षरेखा का ऊपर की ओर खिसकना जैसे कुछ स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। ये संकेत पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर बना रहे हैं और बाढ़, सूखा, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हिमालयी क्षेत्र में विकास के नाम पर मानव निर्मित गतिविधियों के कारण कई आपदाएँ आ रही हैं। एवं हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा और प्रकृति को बनाए रखने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली के साथ एक व्यवस्थित योजना और रणनीति होनी चाहिए। कार्यक्रम का समापन संस्थान के विस्तार प्रभाग के वैज्ञानिक-एफ डॉ. चरण सिंह द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में आईसीएफआरई-एफआरआई के विभिन्न अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों, आईसीएफआरई के अंतर्गत अन्य सहयोगी संगठनों और अन्य संस्थानों तथा एफआरआई डीम्ड विश्वविद्यालय, देहरादून और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों सहित 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के वैज्ञानिक-ई रामबीर सिंह और विस्तार प्रभाग के सहायक कर्मचारियों सहित सभी टीम सदस्यों ने सराहनीय कार्य किया।

मणिपाल अस्पताल में नई तकनीक से ३० वर्षीय माँ की जान और मातृत्व दोनों सुरक्षित

New technology at Manipal Hospital saves both life and motherhood of a 30-year-old mother
New technology at Manipal Hospital saves both life and motherhood of a 30-year-old mother

देहरादून – 10 सितंबर 2025 : मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर, जो मणिपाल हॉस्पिटल्स ग्रुप का हिस्सा है, वहाँ ३० साल की एक महिला की जान एक कठिन लेकिन आधुनिक इलाज से बचाई गई। गर्भपात के बाद उन्हें बहुत ज़्यादा और खतरनाक रक्तस्राव हो रहा था। यह इलाज डॉ. पार्थ प्रतिम सामुई, सीनियर कंसल्टेंट और इंचार्ज, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी की देखरेख में किया गया।

महिला कोलकाता की रहने वाली हैं और ५ साल के बच्चे की माँ हैं। दूसरी बार गर्भवती होने पर २२वें हफ्ते में उनका गर्भपात हो गया। इसके बाद अचानक बहुत खून बहने लगा और उन्हें तुरंत अस्पताल लाना पड़ा। गर्भपात के बाद भी प्लेसेंटा गर्भाशय में गहराई से फंसा हुआ रह गया, जिसे प्लेसेंटा इन्क्रेटा कहते हैं। यह एक बहुत ही दुर्लभ और गंभीर स्थिति है।

पहली बार प्लेसेंटा निकालने की कोशिश में और ज्यादा खून बहने लगा। उस समय डॉक्टरों ने अस्थायी रूप से खून रोकने के लिए बलून टैम्पोनैड तकनीक का इस्तेमाल किया। फिर तुरंत एमआरआई स्कैन किया गया, जिससे समस्या साफ हो गई।

इसके बाद डॉक्टरों ने यूटेराइन आर्टरी एम्बोलाइजेशन नाम की तकनीक अपनाई। इसमें एक पतली नली (कैथेटर) से गर्भाशय की धमनियों को बंद कर दिया गया, ताकि खून प्लेसेंटा तक न पहुँचे। इससे खून बहना रुक गया और गर्भाशय भी सुरक्षित रहा। इस प्रक्रिया में न तो बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा और न ही बेहोशी (जनरल एनेस्थीसिया) की ज़रूरत हुई।

डॉक्टरों की टीम—इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसियोलॉजिस्ट—ने मिलकर यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। महिला जल्दी ही स्वस्थ होने लगीं, २ दिन बाद उन्हें आईसीयू से बाहर लाया गया और ५ दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल गई।

डॉ. पार्थ प्रतिम सामुई ने कहा, “यह माँ हमारे पास बहुत गंभीर हालत में आई थीं। उनका खून लगातार बह रहा था और प्लेसेंटा गर्भाशय में फंसा था। ऐसे मामलों में अक्सर खून रोकना मुश्किल होता है और कभी-कभी गर्भाशय निकालना भी पड़ जाता है। लेकिन हमने बिना बड़ा ऑपरेशन किए, एम्बोलाइजेशन से खून रोक दिया और गर्भाशय सुरक्षित रखा। इसका मतलब है कि उनकी जान बची और भविष्य में भी माँ बनने की संभावना बनी रही। डॉक्टर के लिए इससे बड़ी खुशी कुछ नहीं हो सकती।”

यह इलाज न सिर्फ इस महिला की जान बचाने में सफल रहा बल्कि उनका गर्भाशय भी सुरक्षित रहा। मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर में पहली बार इस तरह का मामला सफल हुआ, जो उन्नत मातृत्व सेवाओं में एक अहम उपलब्धि है।

हिमालय संरक्षण के लिए सरकार प्रतिबद्ध, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और सस्टेनेबल टूरिज्म पर जोर – मुख्यमंत्री

Government is committed to protect the Himalayas, emphasis on digital monitoring system and sustainable tourism - Chief Minister
Government is committed to protect the Himalayas, emphasis on digital monitoring system and sustainable tourism - Chief Minister

देहरादून| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य सरकार हिमालय के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्य में हम सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मंगलवार को आईआरडीटी सभागार में हिमालय दिवस समारोह में बोलते हुए धामी ने कहा कि हिमालय सिर्फ बर्फीली चोटियों का समूह नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का जीवन स्रोत है।
हिमालय का महत्व और खतरे
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय भारत के लिए एक प्रहरी की तरह है और यहां से निकलने वाली नदियां करोड़ों लोगों की जीवनधारा हैं। उन्होंने हिमालय के महत्व को बताते हुए कहा कि इसकी जैव विविधता और दुर्लभ जड़ी-बूटियां आयुर्वेद का आधार हैं।
हालांकि, धामी ने इस अमूल्य धरोहर पर मंडरा रहे खतरों के बारे में भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनियंत्रित विकास और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन इसके संतुलन को बिगाड़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और जल संकट की चुनौती बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच समन्वय बनाना बेहद जरूरी है।
सरकार के प्रयास और नई पहलें
धामी ने बताया कि सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं:
* उच्च स्तरीय समिति: पिछले साल एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के निर्देश दिए गए थे।
* विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन: इस साल नवंबर में राज्य में जलवायु परिवर्तन पर ‘विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा।
* डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम: हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए यह प्रणाली शुरू की गई है।
* डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम: प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए इस पहल से 72 टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ है।
* हिमालय जनजागरुकता सप्ताह: हर साल 2 से 9 सितंबर तक यह सप्ताह मनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने सस्टेनेबल टूरिज्म पर भी जोर दिया, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पर्यटन का विकास किया जा सके। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में अनियंत्रित और असंवेदनशील गतिविधियां हिमालय के लिए हानिकारक साबित हो रही हैं।
जनभागीदारी की अपील
धामी ने कहा कि हिमालय की सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। उन्होंने लोगों से पानी बचाने, पेड़ लगाने और प्लास्टिक का कम से कम उपयोग करने जैसे छोटे-छोटे प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करना और उसे पर्यावरण संरक्षण नीतियों में शामिल करना भी जरूरी है।
इस मौके पर पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि साल-दर-साल मानसून काल में आ रही आपदाओं को देखते हुए हिमालय के पर्यावरण को बचाने के लिए नए सिरे से सोचने की जरूरत है। समारोह में विधायक किशोर उपाध्याय, मेयर सौरभ थपलियाल, मधु भट्ट, महानिदेशक यूकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, सूर्यकांत धस्माना सहित अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे।

अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल ने पौड़ी में किया आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण

Inter-ministerial central team conducted on-site inspection of disaster affected areas in Pauri
Inter-ministerial central team conducted on-site inspection of disaster affected areas in Pauri

सैंजी गांव में ग्रामीणों से संवाद; राहत कार्यों की सराहना
आपदा की क्षति का केंद्रीय स्तर पर आकलन, भारत सरकार को भेजी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
पौड़ी| मानसून के दौरान उत्तराखंड में आयी दैवीय आपदा से हुए नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा गठित अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल ने मंगलवार को जनपद पौड़ी गढ़वाल का दौरा कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दल ने तहसील पौड़ी अंतर्गत सैंजी गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया तथा राहत कार्यों, आवश्यकताओं और समस्याओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

दल ने क्षतिग्रस्त घरों, सड़कों, पुलों, सार्वजनिक भवनों, पेयजल योजनाओं, विद्युत लाइनों, कृषि भूमि, फसलों, पशुधन, आजीविका से जुड़े संसाधनों की क्षति तथा व्यक्तिगत क्षति का गहन अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान दल ने आपदा के समय उपलब्ध कराई गई खाद्यान्न सामग्री, पेयजल, चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रयों, बचाव कार्यों तथा अन्य मूलभूत सेवाओं की जानकारी प्राप्त की। साथ ही उन्होंने गांव में हुई क्षति का ड्रोन से किए गए सर्वे का अवलोकन किया। दल ने प्रशासन द्वारा राहत कार्यों में की गई त्वरित कार्रवाई की भी सराहना की और संतोष व्यक्त किया।

केंद्रीय दल के नेतृत्वकर्ता संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने बताया कि यह निरीक्षण आपदा से हुई वास्तविक क्षति का तथ्यात्मक आकलन करने तथा एक विस्तृत प्रतिवेदन केंद्र सरकार को सौंपने के लिए किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आवश्यक राहत पैकेज एवं पुनर्वास योजनाओं के लिए सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण तथा जनजीवन सामान्य करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि दल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे। यह प्रयास केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाकर पुनर्निर्माण कार्यों को गति प्रदान करेगा।

केंद्रीय दल का नेतृत्व भारत सरकार के संयुक्त सचिव आर. प्रसन्ना ने किया। दल में उप निदेशक विकास सचान, मुख्य अभियंता पंकज सिंह तथा वित्त निदेशक शैलेश कुमार शामिल थे।

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी अनिल गर्ब्याल, जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर, पुलिस क्षेत्राधिकारी त्रिवेंद्र सिंह राणा एवं संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्तराखंड के लिए ₹20,000 करोड़ का राहत पैकेज: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने पीएम मोदी से की मांग

₹20,000 crore relief package for Uttarakhand Congress state president Karan Mahara demands from PM Modi
₹20,000 crore relief package for Uttarakhand Congress state president Karan Mahara demands from PM Modi

देहरादून| उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने राज्य में आई आपदाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ₹20,000 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने यह मांग प्रधानमंत्री को लिखे 5 सितंबर के पत्र में भी दोहराई है। माहरा का कहना है कि राज्य को हुए भारी नुकसान को देखते हुए, पहले मांगी गई ₹10,000 करोड़ की राशि अब नाकाफी है। उन्होंने यह भी कहा कि धामी सरकार ने केंद्र से केवल ₹5,700 करोड़ की मांग की है, जबकि अकेले जोशीमठ के पुनर्निर्माण के लिए ही लगभग ₹6,000 करोड़ की आवश्यकता होगी।
अकेले जोशीमठ के लिए ₹6,000 करोड़ की जरूरत
माहरा ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हुए नुकसान का हवाला देते हुए कहा कि कई प्रभावित क्षेत्रों में अब तक कोई भी आर्थिक मदद नहीं पहुंची है। उन्होंने कर्णप्रयाग के बहुगुणा ग्राम का जिक्र किया, जहां 35 मकान क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन परिवारों को कोई सहायता नहीं मिली। इसके अलावा, गोपेश्वर, नैनीताल (बलिया नाला), खटिया, खाती गांव, भराड़ी, सौंग और धारचूला जैसे इलाकों में भी भूस्खलन और आपदाओं के कारण भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गांवों के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम ₹20,000 करोड़ की आर्थिक सहायता बहुत ज़रूरी है।
वैज्ञानिकों की टीम भेजने की मांग
आकलन के लिए सरकारी टीम भेजने के बजाय, माहरा ने वैज्ञानिकों, भूवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीमों को भेजने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि ये टीमें भविष्य में होने वाली संभावित आपदाओं का सही आकलन कर सकती हैं और राज्य को ऐसी चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने की रूपरेखा तैयार कर सकती हैं।
प्रमुख मांगें
करन माहरा ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री मोदी से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं:
* उत्तराखंड में आई मौजूदा आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
* केंद्र सरकार तुरंत ₹20,000 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी करे।
* प्रत्येक आपदा पीड़ित परिवार को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से ₹10-10 लाख की तत्काल सहायता दी जाए।
* क्षतिग्रस्त मकानों और भवनों का उचित आकलन कर प्रभावितों को मुआवजा दिया जाए।
* प्रभावित लोगों का विस्थापन टिहरी बांध विस्थापितों की तरह सुरक्षित स्थानों पर एकमुश्त किया जाए।
माहरा ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाया, और IIRS (Indian Institute of Remote Sensing) की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया गया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से इन मांगों को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि आपदा पीड़ितों को वास्तविक राहत मिल सके और उत्तराखंड भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।

पीएनबी ने एशिया कप 2025 की उपलब्धियों के लिए हॉकी ओलंपियन्स व अर्जुन पुरस्कार विजेताओं अभिषेक एवं सुखजीत सिंह को सम्मानित किया

PNB felicitates Hockey Olympians and Arjuna Award winners Abhishek and Sukhjeet Singh for their achievements at Asia Cup 2025
PNB felicitates Hockey Olympians and Arjuna Award winners Abhishek and Sukhjeet Singh for their achievements at Asia Cup 2025

देहरादून – 09 सिंतबर 2025: सार्वजिनक क्षेत्र में भारत के अग्रणी बैंकों में से एक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने भारत के दो हॉकी सितारों – ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता श्री अभिषेक और श्री सुखजीत सिंह – को सम्मानित करने के लिए एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया। श्री अभिषेक को हाल ही में एशिया कप 2025 में प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट भी चुना गया। दोनों खिलाड़ी पीएनबी के सम्मानित कर्मचारी और पीएनबी हॉकी टीम के वरिष्ठ सदस्य हैं। बैंक हॉकी प्रतिभाओं का एक समूह तैयार करने के लिए एक हॉकी अकादमी भी चलाता है।

यह समारोह पीएनबी कॉर्पोरेट कार्यालय, द्वारका, सेक्टर 10, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जहाँ पीएनबी के एमडी एवं सीईओ श्री अशोक चंद्र ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में दोनों हॉकी चैंपियनों के साथ एक इंटरैक्टिव सत्र भी शामिल था।

हॉकी सितारों के बारे में:

श्री अभिषेक: पेरिस 2024 ओलंपियन, राष्ट्रमंडल खेल 2022 के रजत पदक विजेता, एशियाई खेल 2022 के स्वर्ण पदक विजेता और एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी 2024 के स्वर्ण पदक विजेता रहे अभिषेक भारत के सबसे डॉयनमिक फॉरवर्ड खिलाड़ियों में से एक के रूप में उभरे हैं। हाल ही में एशिया कप 2025 में ‘प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ का ताज पाने वाले, उनके शानदार प्रदर्शन ने भारतीय हॉकी में गौरव बढ़ाना जारी रखा है।

श्री सुखजीत सिंह: पेरिस 2024 ओलंपियन, राष्ट्रमंडल खेल 2022 के रजत पदक विजेता, एशियाई खेल 2022 के स्वर्ण पदक विजेता और लगातार एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (2023 और 2024) के स्वर्ण पदक विजेता रह चुके सुखजीत ने खुद को राष्ट्रीय टीम के लिए एक भरोसेमंद स्ट्राइकर के रूप में स्थापित किया है। उनकी लगातार गोल करने की क्षमता और दृढ़ संकल्प भारत की एशिया कप 2025 की जीत में महत्वपूर्ण थी।

सम्मान समारोह में बोलते हुए, पीएनबी के एमडी एवं सीईओ, श्री अशोक चंद्र ने कहा: “पीएनबी को हमारे हॉकी सितारों की उपलब्धियों का जश्न मनाने पर बहुत गर्व है। एशिया कप में अभिषेक और सुखजीत की सफलता उनकी प्रतिभा, जुझारूपन और खेल के प्रति समर्पण का प्रमाण है। उनके उल्लेखनीय प्रदर्शन ने न केवल भारतीय हॉकी, बल्कि पूरे पीएनबी परिवार का गौरव बढ़ाया है। हम उनका सम्मान कर सम्मानित महसूस कर रहे हैं और भारतीय खेलों और एथलीटों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।”

टूर ऑपरेटर अपने ऑफिस उत्तराखंड में भी खोलें: महाराज

Tour operators should also open their offices in Uttarakhand Maharaj
Tour operators should also open their offices in Uttarakhand Maharaj

उत्तरा सम्मेलन में टूर ऑपरेटर्स को बताया राज्य का पर्यटन ब्रांड एम्बेसडर

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जहां के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर वर्षभर सबसे अधिक यात्री आते हैं। टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों के कार्यालय राजधानी दिल्ली में खुले हैं और वहीं वह जीएसटी भी काटते हैं। जब यात्रा उत्तराखंड की है तो जीएसटी भी उत्तराखंड में कटनी चाहिए। इसलिए टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों को उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अपने कार्यालय उत्तराखंड में भी खोलने चाहिए ताकि उत्तराखंड को जीएसटी का लाभ मिल सके।

उक्त बात प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने उत्तराखंड टूरिज्म रिप्रेजेंटेटिवस (उत्तरा) एसोसिएशन एवं उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को एक स्थानीय होटल में आयोजित उत्तरा सम्मेलन में प्रतिभाग करने आये टूर ऑपरेटर, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों, उद्यमियों और संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कही। Tour Operator: The Force Behind सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने आयोजनकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड, जिसे हम देवभूमि कहते हैं, केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह रोमांच, साहसिक पर्यटन, वेलनेस मेडिकल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी अपार संभावनाएँ समेटे हुए है। इसलिए आज जब हम इस आयोजन के अवसर पर पर्यटन के भविष्य की चर्चा कर रहे हैं, तो हमें यह भी स्मरण रखना चाहिए कि पर्यटन केवल अर्थव्यवस्था का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारी परंपराओं और हमारी धरोहर को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का भी एक सशक्त माध्यम है।

पर्यटन मंत्री श्री महाराज ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जहां के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर वर्षभर सबसे अधिक यात्री आते हैं। टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों के कार्यालय राजधानी दिल्ली में खुले हैं और वहीं वह जीएसटी भी काटते हैं। जब यात्रा उत्तराखंड की है तो जीएसटी भी उत्तराखंड में कटनी चाहिए। इसलिए टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों को उत्तराखंड की यात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए अपने कार्यालय उत्तराखंड में भी खोलने चाहिए ताकि उत्तराखंड को जीएसटी का लाभ मिल सके और हमारी सरकार टूर ऑपरेटर्स की जो भी समस्याएं हैं उनका समाधान कर उन्हें लाभ दे सके। उन्होंने कहा Tour Operator: The Force Behind न केवल समयानुकूल है आयोजन है बल्कि यह हमें यह भी याद दिलाता है कि किसी भी पर्यटन गंतव्य की सफलता में टूर ऑपरेटरों की भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि सभी टूर ऑपरेटर हमारे राज्य के पर्यटन ब्रांड एम्बेसडर हैं, जो हर पर्यटक को उत्तराखण्ड की असली छवि दिखाने के साथ-साथ उन्हें गंतव्य तक पहुंचाने का काम करते हैं।

श्री महाराज ने कहा कि हमारी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप कार्य करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र के सतत विकास और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पर्यटन विभाग की योजनाएँ, प्रोत्साहन पैकेज और नई नीतियाँ इस दिशा में ठोस कदम हैं। हमारे प्रयास हैं कि हम राज्य को साहसिक पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, मेडिकल पर्यटन, वेलनेस पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन का वैश्विक केन्द्र बना सकें। सतत विकास और संकट की तैयारी (Sustainability & Crisis Preparedness) आज की प्रमुख आवश्यकताएँ हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी समान महत्व मिले।

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के आयोजन संवाद और सहयोग राज्य को एक नई दिशा देंगे। इससे न केवल पर्यटन क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान निकलेंगे बल्कि नई संभावनाओं के द्वार भी खुलेंगे और उत्तराखण्ड को पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।

पर्यटन विभाग के एसीईओ बी.एल. राणा, अपर निदेशक पूनम चंद, आईएटीओ के अध्यक्ष पूर्व राजीव मेहरा, एडीटीओआई के अध्यक्ष वेद खन्ना, वैभव काला, प्रशांत मैठाणी, सुनील सिंह राणा सहित अनेक लोग मौजूद थे।

Dr. Anil Verma Honored with the NSS Maha Raktdani Award for Donating Blood 155 Times.

डॉo अनिल वर्मा 155 बार रक्तदान हेतु “एनएसएस महा रक्तदानी अवार्ड...

0
एनएसएस निःस्वार्थ समाजसेवा का मंच है : प्रोफेसर (डॉo) सुनयना रावत डॉo बिद्युत बोस " रेडक्रास बैज ऑफ़ ऑनर" से सम्मानित राष्ट्रीय सेवा योजना युवा छात्र-...
romabet romabet romabet
deneme bonusu veren siteler