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उत्तराखंड प्रीमियर लीग में मचेगी धूम! सीजन 2 के लिए टीमें और रिकॉर्ड तोड़ पुरस्कार राशि हुई जारी

Uttarakhand Premier League will be a hit! Teams and record-breaking prize money for season 2 released
Uttarakhand Premier League will be a hit! Teams and record-breaking prize money for season 2 released

*7 पुरुष और 4 महिला टीमें करेंगी मुकाबला, 50 लाख रुपये की रिकॉर्ड पुरस्कार राशि का ऐलान*

देहरादून| उत्तराखंड की धरती क्रिकेट के एक नए जलवे के लिए तैयार है! उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) का दूसरा सीजन 23 सितंबर से देहरादून के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शुरू हो रहा है, और इस बार यह और भी बड़े, भव्य और रोमांचक स्वरूप में आने वाली है। पहले सीजन की जबर्दस्त सफलता के बाद, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) और आयोजक स्पार्क स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट ने आज सीजन 2 के लिए सभी प्रतिस्पर्धी टीमों और एक रिकॉर्ड तोड़ 50 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि की घोषणा कर दी है।

*बढ़ी हुई टीमें, बढ़ा हुआ रोमांच*
पहले सीजन में 5 पुरुष और 3 महिला टीमों ने दमखम दिखाया था। इस बार प्रतिस्पर्धा और स्तरीय होगी, जिसमें 7 पुरुष टीमें (देहरादून वॉरियर्स, हरिद्वार स्प्रिंग एल्मास, नैनीताल टाइगर्स, पिथौरागढ़ हरिकेंस, ऋषिकेश फाल्कन्स, टिहरी टाइटंस और यूएसएन इंडियंस) और 4 महिला टीमें (हरिद्वार स्टॉर्म, मसूरी थंडर्स, पिथौरागढ़ हरिकेंस और टिहरी क्वीन्स) राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी। ये टीमें उत्तराखंड के अलग-अलग कोनों की सांस्कृतिक विविधता और क्रिकेट के प्रति अटूट प्यार को दर्शाएंगी।

*50 लाख का जैकपॉट: हर परफॉर्मेंस होगी सम्मानित*
UPL इस बार खिलाड़ियों के प्रदर्शन को पुरस्कृत करने के लिए एक मोटी पुरस्कार राशि लेकर आया है। कुल 50 लाख रुपये की यह राशि राज्य स्तरीय टूर्नामेंटों के लिए एक मिसाल कायम करती है।

· पुरुष विजेता टीम: 25 लाख रुपये
· पुरुष उपविजेता टीम: 12 लाख रुपये
· महिला विजेता टीम: 7 लाख रुपये
· महिला उपविजेता टीम: 3 लाख रुपये
· पुरुष सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: 1 लाख रुपये
· महिला सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: 25,000 रुपये
· हर मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी: 10,000 रुपये

*क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की सचिव किरण रौतेला वर्मा ने कहा*, “भारत में किसी राज्य क्रिकेट संघ की पहली महिला सचिव बनना अत्यंत गर्व की बात है और यूपीएल के दूसरे सीजन के आयोजन का दायित्व संभालना मेरे लिए विशेष है। यह सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि प्रतिभा और अवसर के मिलन का मंच है। इस सीजन में टीमों का विस्तार उत्तराखंड क्रिकेट की समावेशी वृद्धि के हमारे दृष्टिकोण का प्रमाण है। मजबूत शेड्यूल और आकर्षक पुरस्कार राशि के साथ हम राज्य में जमीनी स्तर से लेकर पेशेवर स्तर तक क्रिकेट को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

*स्पार्क स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट के संस्थापक राजीव खन्ना ने कहा*, “उत्तराखंड प्रीमियर लीग भारत की सबसे रोमांचक राज्य स्तरीय टी20 प्रतियोगिताओं में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। सीजन 2 का विस्तृत फॉर्मेट, जिसमें 12 प्रतिस्पर्धी टीमें और मजबूत पुरस्कार ढांचा है, अधिक खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और क्षेत्र के क्रिकेट प्रेमियों का मनोरंजन करने का मौका देगा। हमें इन दो हफ्तों में प्रतिस्पर्धी क्रिकेट और सामुदायिक उत्सव की उम्मीद है।”

*आइकॉन खिलाड़ियों की धूम, शनिवार को होगा महा ड्राफ्ट*
टूर्नामेंट की असली चिंगारी इस शनिवार को लगने वाले है जब सभी टीमें प्लेयर ड्राफ्ट में अपना-अपना दस्ता पूरा करेंगी। इस सीजन के आइकॉन खिलाड़ियों की लिस्ट भी जारी कर दी गई है। पुरुष वर्ग में अवनीश सुधा, युवराज चौधरी, जगदीश सुचित, प्रशान्त चोपड़ा, भूपेन लालवानी, कुणाल चंदेला और राजन कुमार जैसे दिग्गज शामिल हैं। वहीं, महिला वर्ग की कमान मानसी जोशी, नीलम भारद्वाज, स्वेता वर्मा और कंचन परिहार जैसी धाकड़ खिलाड़ियों के हाथों में होगी। बता दें कि आइकॉन खिलाड़ियों की कीमत इस बार 1.5 लाख रुपये तय की गई है।

*सीजन 1 के सितारे जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बजाया था डंका*
UPL सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का एक सुनहरा मौका है। पिछले सीजन ने इसके कई जीवंत उदाहरण पेश किए:
· यूएसएन इंडियंस के युवराज चौधरी, जिन्होंने 322 रन बनाकर आगज़नी मचाई, उन्हें IPL 2025 में लखनऊ सुपर जायंट्स ने खरीदा।
· मसूरी थंडर्स की नंदिनी कश्यप (123 रन) WPL 2025 में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा बनीं और भारत की टी20I टीम में भी जगह बनाई।
· अवनीश सुधा के शानदार शतक (118*) और सन्कर रावत (191 रन, 13 छक्के) जैसे खिलाड़ियों ने IPL टीमों का ध्यान खींचा।
· प्रशान्त चौहान और देवेंद्र बोरा जैसे गेंदबाजों ने अपनी धारदार गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया।

*उत्तराखंड प्रीमियर लीग के बारे में:*
उत्तराखंड प्रीमियर लीग राज्य की प्रमुख टी20 प्रतियोगिता है, जिसका आयोजन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड द्वारा किया जाता है। इसका पहला सीज़न सितंबर 2024 में आयोजित हुआ था, जिसमें पाँच पुरुषों और तीन महिलाओं की टीमें शामिल थीं, और सभी मैच राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, देहरादून में खेले गए थे। लीग का उद्देश्य राज्य के उभरते क्रिकेटरों को मंच देना है, जहाँ वे भारतीय टीम और विभिन्न आईपीएल व डब्ल्यूपीएल फ्रैंचाइज़ी के खिलाड़ियों के साथ खेल सकते हैं।

*क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के बारे में:*
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड राज्य की क्रिकेट गतिविधियों और उत्तराखंड क्रिकेट टीम का संचालन करने वाली मुख्य संस्था है।

*स्पार्क स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट के बारे में:*
स्पार्क एक रचनात्मक खेल इवेंट एजेंसी है, जो अपने ग्राहकों को खेल संचालन और ग्रोथ एक्सेलेरेशन प्रोग्राम्स में नवाचारों के माध्यम से मदद करती है। खेल प्रबंधन के विभिन्न क्षेत्रों में सत्रह साल के अनुभव के साथ स्पार्क ने ग्लोबल T10, राजस्थान रॉयल्स, बीसीसीआई, जयपुर पिंक पैंथर्स, रेड बुल, लिजेंड्स लीग क्रिकेट, राजस्थान स्टेट स्पोर्ट्स काउंसिल और यूएई रॉयल्स जैसी प्रमुख संस्थाओं के साथ कार्य किया है।

30 से ज्यादा मैचों वाला यह महाकुम्भ 23 सितंबर से शुरू होगा। क्रिकेट प्रेमी तैयार रहें, क्योंकि उत्तराखंड की धरती एक बार फिर क्रिकेट के जुनून से गूंजने वाली है!

मुस्कान लौटाने वाली मेहनत—दून पुलिस का सराहनीय अभियान

Hard work to bring back smiles - Doon Police's commendable campaign
Hard work to bring back smiles - Doon Police's commendable campaign

देहरादून| देहरादून की साइबर क्राइम सेल ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि तकनीक और संवेदनशीलता जब साथ मिलती हैं, तो जनसेवा की नई मिसालें कायम होती हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर साइबर सेल की टीम ने अथक प्रयासों और आधुनिक सर्विलांस तकनीकों के माध्यम से ₹53,53,546 मूल्य के कुल 228 स्मार्ट मोबाइल फोन बरामद किए, जो जनपद देहरादून के विभिन्न स्थानों से गुम हुए थे।

12 सितंबर 2025 को पुलिस कार्यालय देहरादून में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में एसएसपी देहरादून ने इन मोबाइलों को उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपा। अपने खोये हुए मोबाइलों को पुनः प्राप्त कर नागरिकों के चेहरों पर जो मुस्कान लौटी, वह दून पुलिस की मेहनत और ईमानदारी का जीवंत प्रमाण थी। लोगों ने खुले दिल से पुलिस टीम की सराहना की और आभार व्यक्त किया।

इस अभियान में साइबर क्राइम सेल की टीम ने CEIR पोर्टल पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की। यह टीम न केवल तकनीकी रूप से दक्ष रही, बल्कि उन्होंने संवेदनशीलता और जनसेवा की भावना के साथ कार्य किया। उनकी मेहनत ने यह साबित किया कि पुलिस केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझने और समाधान देने वाली एक भरोसेमंद साथी भी है।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति से बिना वैध बिल और पहचान पत्र के मोबाइल फोन न खरीदें। ऐसा करना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि चोरी या गुमशुदा मोबाइलों के अवैध व्यापार को बढ़ावा देता है।

बस 1200 करोड़ ?आपदा राहत से लेकर मलिन बस्तियों तक, सरकार कांग्रेस के निशाने पर

Just 1200 crores From disaster relief to slums, the government is on Congress's target
Just 1200 crores From disaster relief to slums, the government is on Congress's target

देहरादून| उत्तराखंड में हाल ही में आई भीषण आपदा को लेकर केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1200 करोड़ रुपये की राहत राशि को कांग्रेस ने बेहद निराशाजनक बताया है। कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखे प्रहार किए। नेताओं ने कहा कि राहत राशि राज्य में हुई वास्तविक क्षति और पीड़ितों की उम्मीदों के मुकाबले बहुत कम है।

*प्रीतम सिंह – 5702 करोड़ के प्रस्ताव को किया नजरअंदाज*
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि आपदा से राज्य में व्यापक जनहानि और धनहानि हुई है। राज्य सरकार ने केंद्र को 5702 करोड़ रुपये की क्षति का आकलन रिपोर्ट सौंपी थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने मात्र 1200 करोड़ रुपये की घोषणा की, जो बेहद अपर्याप्त है।
उन्होंने 2013 की आपदा का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस सरकार ने आपदा राहत मानकों में संशोधन कर पीड़ितों का पुनर्वास और विस्थापन सुनिश्चित किया था। आज की सरकार इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रही है।

प्रीतम सिंह ने मलिन बस्तियों के मुद्दे पर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एलिवेटेड रोड परियोजना के नाम पर मलिन बस्तियों को उजाड़ने का प्रयास हो रहा है। जबकि कांग्रेस सरकार के समय 582 मलिन बस्तियों को चिन्हित कर उन्हें मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की गई थी और यह विधानसभा से पारित कानून द्वारा सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार का रवैया गरीबों और वंचितों के खिलाफ है।

*हरीश रावत – ‘प्रधानमंत्री से उम्मीदें टूटीं, राष्ट्रीय नीति की जरूरत*
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आपदा प्रभावितों और पूरे राज्य की बड़ी अपेक्षा थी कि प्रधानमंत्री पर्याप्त सहायता राशि की घोषणा करेंगे और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रही आपदाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय रणनीति पर विचार रखेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री न तो राहत राशि पर संवेदनशील दिखे और न ही जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्या पर कोई ठोस नीति सामने रखी।

रावत ने कहा कि बादल फटना, ग्लेशियर पिघलना और जलवायु परिवर्तन जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिनका असर न केवल पहाड़ बल्कि मैदानी क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है। बावजूद इसके प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधी। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार ने यूपीए सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘मध्य हिमालय मिशन’ जैसी योजनाओं को क्यों ठंडे बस्ते में डाल दिया है?

*राहत और पुनर्वास में उदासीनता*
हरीश रावत ने कहा कि आपदा प्रभावितों को राहत राशि समय पर नहीं मिल रही है। जिन किसानों और ग्रामीणों के खेत, बगीचे और होमस्टे तबाह हो गए हैं, वे कर्ज में डूबे हुए हैं। राज्य सरकार को सबसे पहले आपदा पीड़ितों का कर्ज माफ करना चाहिए और उनकी आजीविका को पुनर्जीवित करने की योजना बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 2013 की आपदा में 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था, लेकिन आज 12 साल बाद भी वही राशि लागू है, जबकि महंगाई और निर्माण लागत कई गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में राहत मानकों को तुरंत संशोधित करने की जरूरत है।

*लाल निशान का आतंक – मलिन बस्तियों पर बड़ा आरोप*
मलिन बस्तियों के मुद्दे पर हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने समिति बनाकर सर्वे कर बस्तियों को नियमित करने का कानून विधानसभा में पास किया था। लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार उस कानून को दरकिनार कर एक अध्यादेश लाकर मलिन बस्तियों को हटाने का षड्यंत्र कर रही है।

उन्होंने कहा कि आज अधिकारी मलिन बस्तियों में जाकर लोगों को धमका रहे हैं, उगाही कर रहे हैं और घरों पर लाल निशान लगाकर दहशत का माहौल बना रहे हैं। यह पूरी तरह से असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कदम है। कांग्रेस ने साफ कहा कि यदि सरकार ने मलिन बस्तियों के लोगों को उनका मालिकाना हक और संरक्षण नहीं दिया तो पार्टी राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन करेगी।

*कांग्रेस का दोहरा हमला*
संयुक्त प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने दो प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेरा –

1. आपदा राहत राशि को लेकर केंद्र सरकार की उदासीनता और अपर्याप्त सहायता।

2. मलिन बस्तियों के मुद्दे पर राज्य सरकार की ‘मनमानी और असंवैधानिक कार्रवाई’।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आपदा पीड़ितों और मलिन बस्तियों के निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस हर स्तर पर संघर्ष करेगी और यदि जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर आंदोलन भी किया जाएगा।

एएसआई के अधीन संरक्षित क्षेत्रों दूरी को कम किया जाये: महाराज

The distance between protected areas under ASI should be reduced Maharaj
The distance between protected areas under ASI should be reduced Maharaj

केन्द्रीय मंत्री शेखावत से मुलाकात कर मूर्तिविहीन मंदिरों में मूर्ति स्थापित करने का अनुरोध

देहरादून/दिल्ली। प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोकनिर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम, मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से नई दिल्ली स्थित कार्यालय पर शिष्टाचार भेंट कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आने वाले संरक्षित क्षेत्रों की प्रतिषिद्ध दूरी एवं मानकों के साथ-साथ जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।

प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोकनिर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम, मंत्री सतपाल महाराज ने शुक्रवार केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से नई दिल्ली स्थित उनके कार्यालय पर शिष्टाचार भेंट कर उनसे अनुरोध किया कि देश में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आने वाले संरक्षित क्षेत्रों की प्रतिषिद्ध दूरी को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा अपने मानकों के अनुरूप 100 मीटर रखा गया है। जबकि हमारे देश में शहरी एवं पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न-भिन्न हैं और पर्वतीय राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उपरोक्त मानकों का पालन किये जाने में अत्यन्त कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से लिखित रूप अनुरोध किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्थान की कमी के कारण 100 मीटर की परिधि में स्थानीय लोगों के आवासीय भवन आदि निर्मित होते हैं जिसमें एक बड़ी आबादी निवास करती है। इसलिए इस विषय पर गौर करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन आने वाले संरक्षित क्षेत्रों की प्रतिषिद्ध दूरी को जनहित में 100 मीटर के स्थान पर 30-40 मीटर किया जाये।

श्री महाराज ने केन्द्रीय मंत्री को बताया कि उत्तराखंड के अल्मोड़ा जनपद में स्थित कटारमल सूर्य मंदिर में गुम्बद नहीं है और देशभर में कई मन्दिर मूर्तिविहीन है जो कि हमारी संस्कृति के विपरीत है। अतः अंग्रेजों के समय से मूर्तिविहीन मन्दिरों में मूर्तियों की स्थापना करवाया जाना अनिवार्य किया जाय। उन्होंने कहा कि प्रायः देखा जाता है कि देशभर में होटल और पेट्रोल पम्पों में बने शौचालयों में स्वच्छता का पालन नहीं किया जाता है तथा होटलों के बाहर किसी प्रकार का साइन बोर्ड नहीं लगाया जाता है जिससे पर्यटकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। अतः देशभर में बने होटलों के बाहर साइन बोर्ड जिसमें Western Commode availabe इंगित हो, लगवाये जाने एवं पेट्रोल पम्पों में आम नागरिकों तथा विशिष्ट व्यक्तियों (VIPs) के लिए पृथक-पृथक टायलेट्स बनवाये जाने तथा उनमें स्वच्छता का कड़ाई से पालन करवाया जाना अनिवार्य करवाया जाय।

देहरादून: बिंदाल पुल पर महाराणा प्रताप प्रतिमा की दुर्दशा, कांग्रेस नेता ने स्वयं उठाया झाडू

Dehradun Maharana Pratap statue on Bindal bridge in a bad condition, Congress leader himself picked up the broom
Dehradun Maharana Pratap statue on Bindal bridge in a bad condition, Congress leader himself picked up the broom

देहरादून| कैंट व मसूरी विधानसभाओं की सीमा पर चकराता रोड स्थित बिंदाल पुल के किनारे लगी महाराणा प्रताप की प्रतिमा के आसपास गंदगी व झाड़ियों के अंबार को प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना और कांग्रेस श्रम प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने साफ किया। पितृ पक्ष के अवसर पर मूर्ति के आसपास पार्क में पौधारोपण कर उन्होंने पौधों की उचित देखभाल की शपथ ली। इस दौरान उन्होंने महापुरुषों की प्रतिमाओं की देखभाल पर उदासीनता पर चिंता व्यक्त की और संबंधित विधायकों व महापौर को जल्द ही पत्र लिखकर संघर्ष करने का भी संकेत दिया।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि तेज़ी से बढ़ती आबादी और निर्माण कार्य के कारण देहरादून की कृषि भूमि लगातार घट रही है, साथ ही वृक्षों की कटाई हो रही है, जिससे शहर की हवा दूषित हो रही है और प्रदूषण बढ़ रहा है। पर्यावरण सुरक्षा के लिए आम नागरिकों, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों को जिम्मेदारी से आगे आना होगा। उन्होंने बताया कि देहरादून के मूल स्वरूप का संरक्षण न हो पाने और नदियों, नालों, खालों पर हो रहे अतिक्रमण के कारण प्रदूषण का स्तर चिंताजनक हो गया है।

उन्होंने गहरा दुख प्रकट करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप जी की प्रतिमा की दुर्दशा चिंता जनक है। प्रतिमा के आसपास न केवल झाड़ियां उग आई हैं, बल्कि गंदगी भी जमा हो गई है। यहां प्रदेश के मंत्री द्वारा प्रतिमा का अनावरण किया गया था, लेकिन साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा गया। धस्माना ने कहा कि इसी क्षेत्र में कैंट और मसूरी विधानसभाओं की सीमा पर स्वर्गीय हरबंस कपूर जी का स्मृति द्वार और एक शहीद द्वार भी स्थित हैं, लेकिन विधायकों और नगर निगम प्रशासन की ओर से इनकी देखभाल नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि वे संबंधित विधायकों और महापौर को पत्र लिखकर समस्या दूर करने का आग्रह करेंगे, अन्यथा धरना प्रदर्शन की भी योजना है।

इस अवसर पर प्रदेश श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, उपाध्यक्ष चंद्रपाल, महानगर अध्यक्ष हरेंद्र बेदी, किशोर उनियाल, मनीष गर्ग, कृष्णा और अर्जुन शर्मा सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे। उन्होंने पौधारोपण अभियान का संयोजन किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

एमडीडीए की सख़्त कार्रवाई: देहरादून में अवैध निर्माणों पर तोड़फोड़, कई भवन सील

MDDA takes strict action Demolition on illegal constructions in Dehradun, many buildings sealed
MDDA takes strict action Demolition on illegal constructions in Dehradun, many buildings sealed

देहरादून| मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सहस्त्रधारा रोड, एकता विहार और वन विहार सहित शहर के विभिन्न इलाकों में कई अवैध व्यावसायिक एवं आवासीय भवनों को सील कर दिया गया।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि नियम विरुद्ध निर्माण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री जी के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश में नियोजनहीन और अवैध निर्माण को रोकने के लिए सख़्त कार्रवाई की जाए। नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।”

इस कार्रवाई के तहत सहस्त्रधरा रोड पर टीम ने तीन आवासीय भवनों को जोड़कर किए जा रहे अवैध निर्माण को सील किया। इसी तरह, एकता विहार और वन विहार इलाके में बिना मानचित्र स्वीकृति के चल रहे कई अन्य अवैध निर्माणों पर भी सील लगा दी गई।

एमडीडीए की टीम ने चेतावनी दी है कि ऐसी सख़्त कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।

पीएम ने प्रदेश को 1200 करोड़ की तात्कालिक वित्तीय सहायता की घोषणा की

PM announced immediate financial assistance of Rs 1200 crore to the state
PM announced immediate financial assistance of Rs 1200 crore to the state

– उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने आज खराब मौसम की वजह से हवाई सर्वे नहीं किया
देहरादून(आरएनएस)। हिमाचल,पंजाब और उत्तराखंड पर इस बार का मॉनसून का कहर बनकर टूटा। हिमाचल में भूस्खलन, बाढ़ की तबाही ने वो मंजर दिखाया जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती। उत्तराखंड में बादल फटने, दरकते पहाड़ों ने लोगों को जिंदगी तहस-नहस कर दी तो वहीं पंजाब में कई गांवों को बाढ़ ने डुबो दिया। हिमाचल, पंजाब के बाद आज पीएम मोदी उत्तराखंड पहुंचे थे। पीएम ने मौसम की मार झेले लोगों से मुलाकात की और प्रदेश के लिए 1200 करोड़ के आर्थिक मदद की घोषणा की। हिमाचल को 1600, पंजाब को 1500 करोड़ की मदद पीएम पहले ही देने की बात कह चुके हैं। पीएम ने इसके अलावा अनाथ बच्चों का विशेष ख्याल रखने की बात कही है।
उत्तराखंड के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी ने आज खराब मौसम की वजह से हवाई सर्वे नहीं किया, हालांकि उन्होंने मॉनसूनी तबाही से पीड़ित लोगों से जरूर बात की। इसके अलावा उन्होंने प्रजेंटेशन के जरिए बाढ़ से हुए नुकसान की भी समीक्षा की। इस दौरान उनके साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी और बाकी मंत्री,अधिकारी मौजूद रहे। पीएम मोदी ने प्रदेश को आपदा राहत के लिए 1200 करेाड़ रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया है।
मोदी ने आपदा में अपनों को खोने वाले परिवारजनों को केंद्र सरकार की तरफ से दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने का वादा किया है।
अनाथ हुए बच्चों के विशेष ख्याल के लिए पीएम केयर फॉर चिल्ड्रंस स्कीम के तहत सहारा दिया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार से हर मुमकिन सहयोग का आश्वासन भी दिया। पीएम ने इस दौरान धराली की त्रासदी झेल रहे पीड़ितों से भी बात की।
उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बैठक में मौजूद थे। इसके अलावा, पीएम मोदी ने उत्तराखंड में बचाव और राहत कार्यों का जायजा लेते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के कर्मियों के साथ भी बातचीत की। इससे पहले पीएम मोदी को रिसीव करने के लिए खुद प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी पहुंचे थे। देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर सीएम ने उनका स्वागत किया जिसके बाद वह आगे के कार्यक्रम के लिए निकले।

कांग्रेस ने पीएम मोदी को सौंपा 20,000 करोड़ के आपदा राहत पैकेज का ज्ञापन

Congress submitted a memorandum to PM Modi demanding a disaster relief package of Rs 20,000 crore
Congress submitted a memorandum to PM Modi demanding a disaster relief package of Rs 20,000 crore

देहरादून| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे के मौके पर प्रदेश कांग्रेस ने बुधवार को एक बड़ी मांग रखी। पार्टी ने राज्य में आई प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से 20,000 करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की मांग करते हुए जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।

प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष (संगठन) सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में एक कांग्रेसी delegation ने यह ज्ञापन ADM को सौंपा। ज्ञापन में उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी और पिथौरागढ़ जिलों में हुई आपदाओं का जिक्र करते हुए प्रभावितों को पर्याप्त मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता की मांग की गई है।

श्री धस्माना ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि यह मांग पत्र प्रधानमंत्री तक अवश्य पहुंचाया जाए। इस मौके पर पार्टी प्रवक्ता सुजाता पॉल, डॉ. प्रतिमा सिंह, सोनिया आनंद तथा श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

आपदा पीड़ितों के घाव पर नमक छिड़कना है 1200 करोड़ का पैकेज : धस्माना

The package of Rs 1200 crore is like rubbing salt on the wounds of disaster victims Dhasmana
The package of Rs 1200 crore is like rubbing salt on the wounds of disaster victims Dhasmana

कांग्रेस ने पीएम मोदी के उत्तराखंड राहत पैकेज पर उठाए सवाल

देहरादून: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तराखंड की आपदा राहत के लिए घोषित 1200 करोड़ रुपये के पैकेज को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस घोषणा को “उत्तराखंड की जनता के साथ निराशा” और “ऊंट के मुंह में जीरा” बराबर बताया।

श्री धस्माना ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम पहाड़ के लोगों के घावों पर नमक छिड़कने के समान है। उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने राज्य को 21,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था, जबकि मोदी सरकार ने इस बार की भीषण आपदा के बाद महज 1200 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह राशि न केवल नाकाफी है, बल्कि उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री के दावों की “पोल भी खोलती है”। धस्माना ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे राज्य के हितों की पैरवी करने में “नाकामयाब” रहे हैं।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से महाराज की शिष्टाचार भेंट

Maharaj's courtesy call on Union Environment Minister
Maharaj's courtesy call on Union Environment Minister

प्राकृतिक रूप से बने ग्लेशियरों और बड़े तालाबों के अध्ययन का किया अनुरोध

देहरादून/दिल्ली। प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोकनिर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम, मंत्री सतपाल महाराज ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से शिष्टाचार भेंट कर मौसम विभाग एवं पृथ्वी विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों को पर्वतीय क्षेत्रों में संवेदनशील और ऊँचाई वाले स्थानों पर प्राकृतिक रूप से बने ग्लेशियरों और बड़े तालाबों का अध्ययन करवाने का अनुरोध किया है ताकि आने वाले समय में इनसे होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोकनिर्माण, सिंचाई, पंचायतीराज, ग्रामीण निर्माण एवं जलागम, मंत्री सतपाल महाराज ने गुरुवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय भवन में शिष्टाचार भेंट कर बातचीत के दौरान उनसे कहा कि हमारे देश के विभिन्न पहाडी व संवेदनशील क्षेत्रों में प्रायः प्रकृतिक आपदायें जैसे भूस्खलन, बादल फटना व बाढ़ जैसी कठिनाईयां आती रहती हैं। इन भीषण घटनाओं से आम जनमानस को भारी नुकसान पहुँचता है तथा बेकसूर प्राणियों का जीवन संकट में पड़ जाता है। हाल ही में उत्तराखण्ड के जनपद उत्तरकाशी, पौड़ी और चमोली एवं हिमांचल प्रदेश के अनेक स्थानों पर अचानक बादल फटने की घटना से लोगों का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और लोगों को प्राण रक्षा करने तक का अवसर नहीं मिल पाया। इसलिए यदि समय रहते हमें इन आपदाओं की सटीक व त्वरित जानकारी उपलब्ध होती तो इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे देश के पास उन्नत उपग्रह तकनीक और मौसम पूर्वानुमान प्रणाली उपलब्ध है जिनकी मदद से अत्यधिक वर्षा या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के आने की पूर्व सूचना दी जा सकती है किन्तु इस तकनीक को और सुदृढ और सटीक बनाने की अत्यन्त आवश्यकता है। मौसम विभाग एवं पृथ्वी विज्ञान से जुड़े वैज्ञानिकों को पर्वतीय क्षेत्रों में संवेदनशील और ऊँचाई वाले स्थानों पर प्राकृतिक रूप से बने ग्लेशियरों और बड़े तालाबों का अध्ययन करने की सशक्त आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में इनसे होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

श्री महाराज ने कहा कि उपग्रह आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को सृदृढ किये जाने, बादल फटने व अन्य आपदाओं की सटीक जानकारी तुरंत सम्बन्धित राज्यों और स्थानीय प्रशासन तक पहुँचाये जाने तथा मोबाइल नेटवर्क, रेडियो, टी०वी० तथा अन्य संचार माध्यमों से आम जनता तक चेतावनी संदेश पहुँचाये जाने की तकनीकी पर भी त्वरित कार्य करवाये जाने की नितान्त आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस घोर संकट से निपटा जा सके। उन्होंने केन्द्रीय मंत्री श्री यादव से अनुरोध करते हुए कहा कि मानवीय मूल्यों से जुड़े इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देते हुए सम्बन्धित विभाग को यथाशीघ्र त्वरित एवं सकारात्मक कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देश दिए जायें।

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