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दो महान् गुरुओं की महासमाधि- नेहा प्रकाश

Mahasamadhi of two great gurus- Neha Prakash
Mahasamadhi of two great gurus- Neha Prakash

ईश्वरीय प्रकाश से दीप्तिमान गुरु को नश्वरता प्रभावित नहीं कर सकती। मृत्यु के समय पूर्ण चेतन अवस्था में वे अपनी मानवीय देह का त्याग करते हैं, इसी को महासमाधि कहते हैं।

मार्च माह क्रियायोग परम्परा के दो अद्वितीय संतों की महासमाधि की याद दिलाता है — आध्यात्मिक गौरव ग्रंथ “योगी कथामृत” के लेखक श्री श्री परमहंस योगानन्दजी, जिन्होंने 7 मार्च, 1952 को और उनके गुरु और “कैवल्य दर्शनम्” के लेखक श्री श्री स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि, जिन्होंने 9 मार्च, 1936 को महासमाधि में प्रवेश किया।

दोनों ही गुरुओं ने अपने वर्तमान समय के और भविष्य में आने वाले शिष्यों के हृदयों में सदा के लिए वास करने और उनके लिए अपनी नित्य विद्यमानता को बनाए रखने का वचन दिए बिना शरीर नहीं छोड़ा। योगानन्दजी ने सत्तानबे वर्ष पूर्व अपनी एक कविता में लिखा था, “अज्ञात मैं तुम्हारे साथ चलूँगा और अपने अदृश्य हाथों से तुम्हारी रक्षा करूँगा।”

योगानन्दजी 17 वर्ष की आयु में पहली बार बनारस में श्रीयुक्तेश्वरजी से मिले थे। उस समय उनके मन में अपने गुरु को खोजने की प्रबल इच्छा थी। और बनारस की गलियों में उन्हें प्राप्त कर लेने के बाद, योगानन्दजी अपने गुरु के कठोर अनुशासन में भी उनके साथ बने रहे। युक्तेश्वरजी ने योगानन्दजी को छोटे बालक के रूप में दस वर्षों तक प्रशिक्षित किया ताकि वे आने वाले वर्षों में एक विश्व प्रसिद्ध गुरु बन सकें। उनके महान् गुरु श्रीयुक्तेश्वर गिरिजी ने अतुलनीय महावतार बाबाजी द्वारा दिये गए उत्तरदायित्व — अर्थात् उन युवा साधु को समुद्र पार पश्चिम में क्रियायोग का प्रसार करने के लिए तैयार करना — को दिव्य रूप से पूर्ण किया; वही क्रियायोग जिसमें 30 सेकंड की एक प्रभावी क्रिया-श्वास, एक वर्ष के प्राकृतिक मानवीय क्रमविकास के बराबर होती है।

परमहंस योगानन्दजी की महासमाधि क्रियायोग के प्रभाव का सर्वोत्तम प्रमाण थी। मृत्यु के 20 दिन बाद भी उनके शरीर में क्षय के कोई चिन्ह दिखाई नहीं दिए। शवागार के निर्देशक श्री हैरी टी. रोवे ने सूचित किया था कि परमहंस योगानन्दजी की देह “निर्विकारता की एक अद्भुत अवस्था में थी।” महान् गुरु ने न केवल जीवन में अपितु मृत्यु में भी सम्पूर्ण मानवजाति के समक्ष प्रदर्शित कर दिया था कि योग और ध्यान से सृष्टि की शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है।

“योगी कथामृत” में बताया गया है कि क्रियायोग का अभ्यास हर श्वास के साथ रक्त को कार्बनरहित करता है, जिसके कारण अंत समय में शरीर में विकार नहीं होता। यह एक पुरातन विज्ञान है जो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को दिया था और तत्पश्चात पतंजलि और अन्य लोगों ने इसे जाना। वर्तमान युग में, महावतार बाबाजी ने इसे लाहिड़ी महाशय को दिया, जिन्होंने पुनः इसे योगानन्दजी के गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरिजी को प्रदान किया।

क्रियायोग की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार के लिए श्रीयुक्तेश्वरजी ने एक संस्था की स्थापना करने पर बल दिया; वास्तव में, इस ज्ञान को साझा करना आवश्यक था। इसलिए योगानन्दजी ने सन् 1917 में राँची में योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया (वाईएसएस) और सन् 1920 में लॉस एंजेलिस में सेल्फ़-रियलाइज़ेशन फ़ेलोशिप (एसआरएफ़) की स्थापना की। कोई भी व्यक्ति योगदा आश्रमों के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार हेतु गृह अध्ययन पाठमाला, जिसमें ध्यान की वैज्ञानिक प्रविधियों को भली-भाँति सीखने के लिए क्रमानुसार निर्देश प्रस्तुत किए गए हैं, के लिए पंजीकरण कर सकता है।

परमहंस योगानन्दजी ने कहा था, “मेरे जाने के बाद मेरी शिक्षाएँ ही गुरु होंगीं। शिक्षाओं के माध्यम से आप मुझसे और उन महान् गुरुओं से जिन्होंने मुझे भेजा है, समस्वर रहेंगे।”

एनएसएस समाज सेवा की भावना जाग्रत करने में सफल : अनिल भारती

NSS successful in awakening the spirit of social service Anil Bharti
NSS successful in awakening the spirit of social service Anil Bharti

रक्तदाता शिरोमणि डॉo अनिल वर्मा को 155 बार रक्तदान हेतु “एनएसएस विशेष सम्मान”

डॉo सत्यम द्विवेदी “यूथ रेडक्रॉस बैज ऑफ़ ऑनर” से सम्मानित
दूरदर्शन, उत्तराखंड के सहायक निदेशक श्री अनिल भारती ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवा छात्र छात्राओं में समाज सेवा की भावना जाग्रत करने में सफल रही है l
श्री भारती बाल भवन, रायपुर में डीएवी (पीजी) कॉलेज के छात्रों के “डी ” यूनिट के राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष वार्षिक शिविर के समापन एवं सम्मान समारोह के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि छात्रों को सम्बोधित कर रहे थे l उन्होंने कहा कि शिविरों में श्रमदान से लेकर आपदा प्रबंधन उपायों के साथ ही बस्तियों में जाकर लोगों को स्वच्छता, अंधविश्वास , विभिन्न रोगों के प्रति जागरूकता, मतदाता जागरूकता तथा नशामुक्ति अभियान के माध्यम से समाज सेवा का महत्वपूर्ण किया जाता है l
यूथ रेडक्रॉस कमेटी के मुख्य आपदा प्रबंधन अधिकारी डॉo अनिल वर्मा ने बताया कि शिविर के दौरान उनके द्वारा युद्ध अथवा शांतिकाल में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के तहत छात्रों को अग्निशमन, भूकंप,भूस्खलन, बाढ़ आदि विभिन्न आपदाओं के दौरान घायलों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक चिकित्सा तथा सीपीआर आदि के लिए ले जाने के इमरजेंसी मेथड्स आफ रेस्क्यू आदि का विधिवत् प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने छात्रों के पूर्ण अनुशासन में रहकर रूचि पूर्वक प्रशिक्षण ग्रहण करने की सराहना की। प्रशिक्षण के उपरांत एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी डाo सत्यम द्विवेदी के निर्देशन एवं टीम लीडर्स विवेक सिंह, गौरी शंकर के नेतृत्व में गौतम रावत, प्रवेश राणा, आशू धीमान दीपक चौहान, कृष , सुजल बिष्ट, संजय पाठक, हरीश जलाल, कुणाल रावत, शौर्य अमोली, अविनाश पांडे, नितिन सिंह, सत्यवान् पुंडीर, दीपक चौहान, संदीप कुमार, मोहित यादव, इज़हान आदि स्वयंसेवी छात्रों ने ह्यूमन क्रेडल, ह्यूमन क्रच, फायरमैन्स लिफ्ट, फोर एंड आफ्ट मेथड, टू-थ्री-फोर हैंड्स मेथड, टो ड्रैग, मंकी क्राल के साथ ही रोप रेस्क्यू के अंर्तगत बोलाईन ड्रैग, चेयर नाट, इम्प्रोवाईज्ड स्ट्रेचर तथा मल्टी स्टोरी बिल्डिंग से घायलों को रस्सी के सहारे ऊपर से नीचे उतारने आदि का कुशल प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉo सत्यम द्विवेदी, मुख्य अतिथि श्री अनिल भारती, डॉo विनीत विश्नोई तथा डॉ0 अमित शर्मा ने रेडक्रास सोसाइटी के आपदा प्रशिक्षण अधिकारी डॉo अनिल वर्मा को 155 बार रक्तदान करने तथा छात्रों को आपदा प्रबंधन, अग्नि शमन तथा प्राथमिक चिकित्सा का सघन प्रशिक्षण कुशलतापूर्वक प्रदान करने हेतु एनएसएस के विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया l डॉ0 अनिल वर्मा ने उन्हें सम्मानित करने के लिए डॉ0 द्विवेदी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 सत्यम द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में सात दिवसीय शिविर के दौरान रेड क्रॉस सोसाइटी एवं सिविल डिफेन्स सहित अन्य संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों की व्याख्या प्रस्तुत की।तत्पश्चात श्री अनिल भारती को शाल ओढ़ाकार, पौधा देकर तथा अपनी पर्यावरण पर आधारित पुस्तक भेंटकर सम्मानित किया। साथ ही डॉ0 हरिओम शंकर जी ने भी स्वरचित दो पुस्तकें भेंटकर सम्मानित किया।
यूथ रेडक्रास कमेटी के डॉo अनिल वर्मा द्वारा कार्यक्रम अधिकारी डॉo सत्यम द्विवेदी को शिविर के कुशल आयोजन हेतु शाल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह भेंटकर तथा “बैज ऑफ़ ऑनर” से सम्मानित किया गया। साथ ही डॉ0 अनिल वर्मा ने उनके रक्तदान अभियान में वर्षों से रक्तदान हेतु प्रेरित तथा सहयोग करने हेतु मुख्य अतिथि श्री अनिल भारती को रेडक्रास प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। शिविर में स्वादिष्ट भोजन की उत्कृष्ट व्यवस्था हेतु डॉo अनिल वर्मा ने श्री दिनेश चंद्र गौड़ को पाँच सौ रुपये का नगद पुरस्कार प्रदान करके सम्मानित किया ।
डीएवी कॉलेज प्रबंधन समिति सदस्य डॉo अरुण कुमार ने छात्रों के अनुशासन की सराहना की l बाल भवन प्रबंधन समिति की कोषाध्यक्ष डॉo आशा श्रीवास्तव, मेजर (डॉo) अतुल सिंह, डॉo प्रशांत सिंह, डॉo विनीत विश्नोई, डॉo विवेक त्यागी, डॉo अमित कुमार शर्मा, डॉ0 दीपेंद्र निगम तथा डॉo पारितोष ने भी छात्रों का अपने सम्बोधन में मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर डॉo नेहा, सिविल डिफेन्स के श्री सर्वेश कुमार एवं श्री विनय कुकसाल, श्री जगमोहन चौहान, श्री सुनील थापा,श्री शिव प्रसाद तिवारी, श्री डी के दीक्षित सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं शिविरार्थी छात्र उपस्थित थे।
कार्यक्रम का अति कुशल संचालन ड्राइंग एंड पेंटिंग विभागाध्यक्ष एवं पूर्व एन एस एस कार्यक्रम अधिकारी डॉ0 हरी ओम शंकर ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन डॉo सत्यम द्विवेदी द्वारा किया गया।

टिहरी झील बनी रोमांच और पर्यटन का नया केंद्र:  सीएम

Tehri Lake has become a new centre of adventure and tourism CM
Tehri Lake has become a new centre of adventure and tourism CM

– मुख्यमंत्री धामी ने किया हिमालयन 0.2 फेस्टिवल का शुभारंभ
देहरादून।   पर्यटन, साहसिक खेल के साथ ही पर्यावरण और संस्कृति के स्पष्ट संदेश के बीच ‘हिमालयन 0.2 द टिहरी लेक फेस्टिवल’ का भव्य शुभारंभ हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को इसका उद्घाटन करते हुए विश्वास प्रकट किया कि सुंदर टिहरी झील आने वाले समय में देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में साहसिक खेलों और पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी। इस मौके पर उन्होंने घोषणा कि कोटी कालोनी-नई टिहरी रोपवे का निर्माण कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में देश-विदेश से आए खिलाड़ियों के साथ ही अन्य मेहमानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा आध्यात्मिकता और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम रही है। हमारी नदियां, हमारे पर्वत, हमारी झीलें और हमारी परंपराएं पूरे विश्व को आकर्षित करती रही हैं। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टिहरी झील के किनारे आयोजित ये महोत्सव पर्यटन, खेल और स्थानीय संस्कृति तीनों को एक मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि हिमालय की गोद में बसी टिहरी झील प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण होने के साथ- साथ साहसिक खेलों के आयोजन स्थल के रूप में तेजी से उभर रही है। यहां आयोजित होने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विभिन्न जल क्रीड़ा प्रतियोगिताएं न केवल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दे रही हैं, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने का काम भी कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने टिहरी को लेकर अपनी सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है कि टिहरी को वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर स्पोर्ट्स के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए टिहरी झील में कयाकिंग, कैनोइंग, जेट-स्की, पैरा-सेलिंग, स्कूबा डाइविंग और अन्य साहसिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। ताकि हमारे युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकें। उन्होंने कहा कि टिहरी झील के आसपास विकसित हो रहा यह खेल और पर्यटन तंत्र स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अवसर पैदा कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि टिहरी झील केवल एक पर्यटन स्थल ही न रहे, बल्कि खेल, संस्कृति और प्रकृति के संगम का वैश्विक केंद्र भी बने। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार के प्रयास जारी रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का उत्तराखंड से भावनात्मक लगाव जगजाहिर है और उन्होंने स्वयं यहां आकर हमें प्रेरित और प्रोत्साहित किया है। मुख्यमंत्री ने पर्यटन और साहसिक खेलों को प्रोत्साहन देेने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों का खास तौर पर जिक्र किया। इस क्रम में उन्होंने आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई-एल्टीट्यूड मैराथन, माणा में एमटीबी चैैलेंज, एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी जैसे बडे़ स्तर के आयोजनों की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि हमारे युवा केवल अवसरों की प्रतीक्षा न करें, बल्कि अपने सामथ्र्य और परिश्रम से नए अवसरों का सृजन भी करें। उन्होंने कहा कि आज टिहरी में 400 से अधिक युवा पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह जानकारी खुशी देने वाली है। पूर्ण विश्वास है कि ये युवा भविष्य में उत्तराखंड को वैश्विक पैराग्लाइडिंग मानचित्र पर स्थापित करने में अवश्य सफल रहेंगे। अपने संबोधन में उन्होंने टिहरी क्षेत्र में विकास कार्यों की तस्वीर को सामने रखा। उन्होंने बताया कि टिहरी क्षेत्र के के समग्र विकास हेतु लगभग 1300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर कार्य गतिमान है। इसमें टिहरी झील का विकास, रिंग रोड का निर्माण, तिमाड़ गांव को पर्यटन ग्राम के रूप में विकसित करने जैसे प्र्रमुख कार्य शामिल हैं। इसके अलावा यहां भिलंगना विकासखंड की सुनारगांव ग्राम पंचायत को एक आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है। विशिष्ट पहाड़ी शैली में एक नया आंगनबाड़ी भवन भी बनाया जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में जिले के सभी ब्लाक में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 10 कॉम्पेक्टर केंद्रों और 4267 कूड़ा संग्रहण केंद्रों की स्थापना का भी जिक्र किया।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, क्षेत्रीय सांसद   माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक किशोर उपायाय, विक्रम सिंह नेगी, विनोद कंडारी, शक्तिलाल शाह, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष संजय नेगी, जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण, जिलाधिकारी   नितिका खंडेलवाल, नगर पालिका परिषद नई टिहरी के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत व चंबा की अध्यक्ष सोबनी धनोला, भाजपा जिलाध्यक्ष उदय सिंह रावत प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इससे पहले, मुख्यमंत्री का यहां पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। सीएम ने देवडोलियों से आशीर्वाद भी लिया ।
कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का शिलान्यास:  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग का रिमोट दबाकर वर्चुअल शिलान्यास किया। यह मार्ग एशियन डेवलपमेंट बैंक के स्तर पर वित्त पोषित है,जिसकी कुल लागत 318 करोड़ है। इस मार्ग की लंबाई करीब 15 किलोमीटर है।
नौ मार्च तक होंगी विभिन्न गतिविधियां:  टिहरी लेक फेस्टिवल में नौ मार्च तक विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। साहसिक खेल व पर्यटन गतिविधियों के अलावा लोक संस्कृति से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम निर्धारित किए गए हैं।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में  हुई यूसीआरआरएफपी की बैठक

UCRRFP meeting held under the chairmanship of Chief Secretary
UCRRFP meeting held under the chairmanship of Chief Secretary

– हाई पावर कमेटी ने 187.11 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को दी मंजूरी
– अद्यतन भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा
देहरादून।  मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में शुक्रवार को उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (UCRRFP) की हाई पावर कमेटी (HPC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना की अद्यतन भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा करते हुए वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 187.11 करोड़ रुपये की वार्षिक कार्ययोजना को अनुमोदित किया गया।
2025–26 की संशोधित कार्ययोजना को भी स्वीकृति:  यूसीआरआरएफपी की चतुर्थ हाई पावर कमेटी की बैठक में समिति ने वित्तीय वर्ष 2025–26 की 62.19 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित वार्षिक कार्ययोजना को भी स्वीकृति प्रदान की। इसके साथ ही परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए तैयार परियोजना संचालन दिग्दर्शिका, फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम मैनुअल तथा विभिन्न प्रपत्रों और दिशानिर्देश पुस्तिकाओं का अनुमोदन किया गया।
ग्राम स्तर तक पहुंचाया जाए परियोजना का लाभ:  मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ग्राम स्तर पर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार की जाएं, ताकि ग्रामीणों को परियोजना का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए परियोजना के माध्यम से बारानी कृषि को अधिक सक्षम और टिकाऊ बनाया जाना आवश्यक है।
बैठक में सचिव/मुख्य परियोजना निदेशक दिलीप जावलकर, सचिव सी रविशंकर, परियोजना निदेशक हिमांशु खुराना, अपर सचिव अपूर्वा पांडेय, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी सारा कहकशां नसीम, संयुक्त निदेशक डा. ए.के. डिमरी, मुख्य वित्त अधिकारी दीपक भट्ट, उप निदेशक डा. एस.के. उपाध्याय, डा. डी.एस. रावत, डा. सिद्धार्थ श्रीवास्तव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

सारा (SARA) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक सम्पन्न

SARA's high powered committee meeting concludes
SARA's high powered committee meeting concludes

देहरादून।  मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी (SARA) की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्व बैंक पोषित जलागम विकास, जल निकायों के पुनर्जीवन, वृक्षारोपण, पारंपरिक नौलों-धारों के संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
सॉन्ग और कमल नदी परियोजनाओं की समीक्षा:   बैठक में देहरादून की सॉन्ग नदी तथा उत्तरकाशी की कमल नदी से संबंधित दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त 23 अप्रैल 2025 को आयोजित सारा की पिछली बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा भी की गई।
सॉन्ग नदी परियोजना के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना :  मुख्य सचिव ने सॉन्ग नदी से जुड़े क्षेत्रों का विस्तृत चिन्हीकरण करने के निर्देश दिए, जहाँ सुधार एवं हस्तक्षेप (इंटरवेंशन) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि चिन्हित क्षेत्रों के अनुसार आवश्यक कार्यों का निर्धारण कर संबंधित कार्यदायी संस्था द्वारा उनकी डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार कराई जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि परियोजना के क्रियान्वयन के बाद उसके प्रभाव (इंपैक्ट) का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी किया जाए। इसके लिए आईआईटी रुड़की जैसे तकनीकी संस्थानों के सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा गया।
जल संरक्षण और पारंपरिक स्रोतों के पुनर्जीवन पर जोर :  मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि सारा की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएं तथा वाटर रिचार्ज, वनीकरण और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण से जुड़े कार्यों की गति तेज की जाए।
उन्होंने सभी जनपदों को निर्देश दिए कि पौराणिक और पारंपरिक नौलों-धारों का चिन्हीकरण कर उनकी नैसर्गिक संरचना को सुरक्षित रखते हुए वैज्ञानिक तरीकों से आवश्यक उपचार किया जाए, ताकि उनकी प्राकृतिकता बनी रहे और पारिस्थितिकी तंत्र पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
वन क्षेत्र में कैंपा फंड के माध्यम से जल संरक्षण :  मुख्य सचिव ने वन क्षेत्रों में CAMPA फंड के माध्यम से कन्वर्जेंस  करते हुए जल संरक्षण से जुड़े  संबंधित कार्यों को  संपादित करें। बैठक में सचिव दिलीप जावलकर, सी रविशंकर, अपर सचिव हिमांशु खुराना, अपूर्वा पांडेय, कहकशां नसी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमिता को गति देने हेतु पंजाब नेशनल बैंक ने ‘पी.एन.बी. डिजी श्रेष्ठा डिजिटल ऋण योजना शुरू की

Punjab National Bank launches 'PNB Digi Shrestha Digital Loan Scheme' to boost women-led rural entrepreneurship
Punjab National Bank launches 'PNB Digi Shrestha Digital Loan Scheme' to boost women-led rural entrepreneurship

देहरादून – 06 मार्च 2026: पंजाब नेशनल बैंक भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए “पी.एन.बी. डिजी श्रेष्ठा डिजिटल ऋण योजना” की शुरुआत की है। यह योजना विशेष रूप से उन महिला ग्राहकों के लिए बनाई गई है जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की सदस्य हैं।
यह पहल ‘लखपति दीदी’ बनाने और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जुड़ी है। डिजी श्रेष्ठा योजना डिजिटल बैंकिंग को अपनाने को प्रोत्साहित करती है और महिलाओं को तेज़, पारदर्शी और सहज तरीके से संस्थागत ऋण तक पहुँच प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत ₹5 लाख तक का ऋण, पूरी तरह डिजिटल स्वीकृति और खाता खोलने की प्रक्रिया, सरल आवेदन और न्यूनतम दस्तावेज़ीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
डिजी श्रेष्ठा ऋण के माध्यम से, पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण भारत में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को मज़बूत बना रहा है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे रहा है और सतत सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है। इस महिला दिवस पर, बैंक देशभर की महिलाओं के साहस, महत्वाकांक्षा और नेतृत्व का उत्सव मनाता है तथा उनके विकास यात्रा के हर कदम पर साथ देने का संकल्प दोहराता है।

जल जीवन मिशन की प्रगति पर सर्वोच्च समिति की समीक्षा

Apex Committee reviews progress of Jal Jeevan Mission
Apex Committee reviews progress of Jal Jeevan Mission

– मुख्य सचिव ने दिए जल गुणवत्ता परीक्षण और रिपोर्टिंग सुदृढ़ करने के निर्देश
– जल जीवन मिशन की वार्षिक कार्ययोजना 2026-27 पर भी हुई चर्चा
देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में जल जीवन मिशन से संबंधित सर्वोच्च समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में मिशन की प्रगति, वित्तीय स्थिति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पानी की गुणवत्ता परीक्षण में रासायनिक तथा बैक्टीरियोलॉजिकल दोनों प्रकार के परीक्षण अनिवार्य रूप से किए जाएं तथा संबंधित पेयजल परीक्षण की जानकारी संबंधित प्रोजेक्ट में तिथि सहित सार्वजनिक हित में स्पष्ट रूप से अंकित की जाए।
बैठक में GIS मैपिंग, PM गतिशक्ति पोर्टल पर पाइपलाइन नेटवर्क अपलोड की प्रगति, सुजल गांव आईडी निर्माण, वित्तीय समन्वय तथा तकनीकी निरीक्षण की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने इन सभी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना, सामाजिक अंकेक्षण तथा तृतीय-पक्ष निरीक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को इन विषयों पर अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार से संबंधित सभी बिंदुओं पर समयबद्ध रिपोर्टिंग तैयार कर प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हर घर जल योजना के अंतर्गत जिन गांवों में फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) की प्रगति दर्शाई गई है, उनका शत-प्रतिशत सर्टिफिकेशन भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्टिंग और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच किसी भी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए।
बैठक में सचिव दिलीप जावलकर एवं रणवीर सिंह, हॉफ वन विभाग रंजन मिश्र, अपर सचिव रोहित मीणा, अपूर्वा पांडेय सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। उत्तराखंड से संबंधित  राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के भारत सरकार के निदेशक प्रदीप सिंह वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े रहे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई व्यय-वित्त समिति की बैठक, विभिन्न विकास योजनाओं को स्वीकृति

Expenditure-Finance Committee meeting chaired by Chief Secretary, approval given to various development schemes
Expenditure-Finance Committee meeting chaired by Chief Secretary, approval given to various development schemes

देहरादून। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में व्यय-वित्त समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विभिन्न जनपदों से संबंधित महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं पर विचार करते हुए उन्हें अनुमोदन प्रदान किया गया।
निम्नलिखित प्रमुख योजनाओं को स्वीकृति दी गई-
– अमृत 2.0 के ट्रांच-2 के अंतर्गत सहस्त्रधारा पेयजल योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। इस योजना का क्रियान्वयन उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा किया जाएगा।
– जनपद पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल/एकेश्वर विकास खंड के अंतर्गत सतपुली बैराज के निर्माण (पुनरीक्षित) प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
– जनपद नैनीताल के हल्द्वानी स्थित फायर स्टेशन में टाइप-द्वितीय, टाइप-तृतीय तथा टाइप-चतुर्थ श्रेणी के कुल आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई।
– जनपद देहरादून के डांडा लखौंड क्षेत्र में सहस्त्रधारा रोड पर शहरी विकास निदेशालय के कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया।
– नगर निगम रुद्रपुर के मुख्य कार्यालय भवन के पुनर्निर्माण के कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर मुख्य सचिव के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन व्यवहारिक, मितव्ययी, पारदर्शी तथा गुणवत्ता-परक तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं के कार्य निर्धारित समयसीमा में तेजी से पूर्ण किए जाएं।
उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान पारिस्थितिकी संतुलन का विशेष ध्यान रखने तथा योजनाओं को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ (सस्टेनेबल) बनाने के उद्देश्य से कार्य करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में सचिव नितेश झा, शैलेश बगौली, एस.ए. अदांकी, युगल किशोर पंत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने फरवरी 2026 में 5.67 लाख यूनिट बिक्री के साथ मजबूत वृद्धि दर्ज की

Honda Motorcycle and Scooter India Registers Strong Growth with Sales of 5.67 Lakh Units in February 2026
Honda Motorcycle and Scooter India Registers Strong Growth with Sales of 5.67 Lakh Units in February 2026

पिछले वर्ष की तुलना में कुल बिक्री में 34% की सालाना वृद्धि दर्ज की।

देहरादून – 05 मार्च 2026:  होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने फरवरी 2026 में कुल 5,67,351 यूनिट की बिक्री दर्ज की। इसमें 5,13,190 यूनिट घरेलू बाजार में और 54,161 यूनिट निर्यात के रूप में शामिल हैं। कंपनी ने फरवरी 2025 की तुलना में 34% की सालाना (YOY) वृद्धि दर्ज की। यह प्रदर्शन घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में एचएमएसआई के उत्पाद पोर्टफोलियो की मजबूत मांग को दर्शाता है।

 

वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026) की वर्ष-से-तारीख (YTD) अवधि के दौरान, एचएमएसआई ने कुल 58,20,556 यूनिट की बिक्री दर्ज की। इसमें 52,37,169 यूनिट घरेलू बिक्री और 5,83,387 यूनिट निर्यात शामिल हैं।

 

फरवरी 2026 में एचएमएसआई की प्रमुख उपलब्धियां:

सड़क सुरक्षा: “सबके लिए सुरक्षा” के अपने विज़न के अनुरूप, एचएमएसआई ने अजमेर, पुणे, नासिक, नारनौल, वडोदरा, हिसार, गोरखपुर, कटिहार, औरंगाबाद, मैंगलोर, छिंदवाड़ा और कोच्चि सहित देशभर के विभिन्न शहरों में सड़क सुरक्षा अभियान आयोजित किए। इन पहलों के माध्यम से जिम्मेदार राइडिंग व्यवहार को बढ़ावा दिया गया और सुरक्षित सड़कों के लिए सामुदायिक जागरूकता को मजबूत किया गया।

एचएमएसआई ने ग्वालियर, कोच्चि, आगरा और मदुरै में सड़क सुरक्षा सम्मेलनों का भी आयोजन किया, जिसमें प्राचार्यों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही। इसका उद्देश्य बच्चों में कम उम्र से ही सुरक्षित सड़क व्यवहार की आदत विकसित करना था। साथ ही, एचएमएसआई ने चेन्नई और जयपुर स्थित अपने ट्रैफिक ट्रेनिंग पार्कों की वर्षगांठ मनाई, जो राइडर शिक्षा और सुरक्षित राइडिंग व्यवहार को बढ़ावा देने की उसकी निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

नेटवर्क विस्तार: होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया ने तिनसुकिया में एक नए अधिकृत डीलरशिप का उद्घाटन कर अपने नेटवर्क को और मजबूत किया। विशेष रूप से प्रशिक्षित सेल्स और सर्विस टीम के साथ यह डीलरशिप ग्राहकों को व्यक्तिगत और बेहतर सेवा प्रदान करेगी, जिससे एचएमएसआई की ग्राहक-केंद्रित मोबिलिटी समाधानों के प्रति प्रतिबद्धता और सुदृढ़ होगी।

सुरक्षित और बेहतर कल की दिशा में:

एचएमएसआई के लिए मोबिलिटी सिर्फ एक साधन नहीं, बल्कि लोगों को सशक्त बनाने, समुदायों को जोड़ने और जीवन को बेहतर बनाने का जरिया है। हमारा हर प्रोडक्ट सुरक्षित, स्वच्छ और ज्यादा सुलभ मोबिलिटी की दिशा में एक मजबूत कदम है, ताकि लाखों भारतीय पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह हमारे “सबके लिए सुरक्षा” विज़न के अनुरूप है, जो सिर्फ राइडर्स ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों, समुदायों और पूरे रोड इकोसिस्टम को ध्यान में रखता है। एबीएस, सीबीएस और राइडर-असिस्ट फीचर्स जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ हम हर राइड को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

लोग हमारी सोच और काम के केंद्र में हैं। होंडा सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि भारत की ग्रोथ स्टोरी का एक भरोसेमंद पार्टनर है। सुरक्षित और हरित भविष्य की दिशा में हमारा फोकस और प्रयास लगातार जारी है।

टेक्सेला और जीआरडी ग्रुप के संस्थापक अध्यक्ष सरदार राजा सिंह ओबराय का निधन, दूनवासियों के दिलों में उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

Sardar Raja Singh Oberoi, Founder Chairman of Texella and GRD Group, passes away; his legacy will always live on in the hearts of the people of Doon.
Sardar Raja Singh Oberoi, Founder Chairman of Texella and GRD Group, passes away; his legacy will always live on in the hearts of the people of Doon.
देहरादून| प्रतिष्ठित टेलीविजन ब्रांड टेक्सला टीवी के संस्थापक महान उद्यमी राजा सिंह का 28 फरवरी को लुधियाना में निधन हो गया। एक शरणार्थी बच्चे से भारत के सबसे प्रभावशाली इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं में से एक बनने तक की उनकी यात्रा दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता की एक प्रेरक कहानी है।
1980 और 1990 के दशक में केबल टेलीविजन बूम के दौरान, टेक्सला भारत के सबसे पहचानने योग्य टेलीविजन ब्रांडों में से एक बन गया। कंपनी के किफायती टीवी सेटों ने देश भर में मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए टेलीविजन को सुलभ बना दिया, खासकर दिल्ली और पंजाब राज्य में।
शुरुआती संघर्ष और शुरुआत
राजा सिंह का जन्म 19 फरवरी, 1936 को रावलपिंडी के पास मीरपुर के हिलन गाँव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। उनका बचपन भारत के बंटवारे से बहुत प्रभावित हुआ, जिसकी वजह से उनके परिवार को तब भारत आना पड़ा जब वे सिर्फ़ 11 साल के थे।
दिल्ली में बसने के बाद, उन्होंने एक सब्ज़ी बेचने वाले के यहाँ मज़दूर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। औपचारिक शिक्षा न मिलने के बावजूद, उनमें एक मज़बूत उद्यमी भावना थी।
1961 में, उन्होंने ज्यूपिटर रेडियोज़ की स्थापना की, जो किफ़ायती रेडियो और ट्रांजिस्टर सेट बनाती थी। बिज़नेस तेज़ी से बढ़ा, आखिरकार हर साल लगभग 1.5 लाख रेडियो सेट का प्रोडक्शन होने लगा और आम भारतीय ग्राहकों के बीच लोकप्रियता हासिल हुई।
टेक्सला टीवी का उदय
1972 में, राजा सिंह ने टेक्सला के साथ टेलीविज़न मार्केट में कदम रखा। कंपनी ने अपने पहले साल में लगभग 2,500 टीवी सेट बनाकर मामूली शुरुआत की। समय के साथ, ब्रांड तेज़ी से बढ़ा और मार्केट में एक बड़ा नाम बन गया।  1988-89 तक, टेक्सला हर साल लगभग तीन लाख ब्लैक-एंड-व्हाइट और कलर टेलीविज़न बना रहा था। उनके बेटे सरदार इंदरजीत सिंह ओबेरॉय के अनुसार, 1980 के दशक के आखिर से 2000 के दशक की शुरुआत तक पंजाब में टेलीविज़न मार्केट में टेक्सला का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा था।
इंद्रजीत ने कहा, “मेरे पिता ने कभी औपचारिक शिक्षा नहीं ली, लेकिन कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के माध्यम से उन्होंने भारत में आम लोगों के लिए रेडियो और टेलीविजन को सुलभ बनाया।” वह वर्तमान में देहरादून में रहते हैं, जबकि उनके भाई कंवलजीत सिंह ओबेरॉय और सुखविंदर सिंह ओबेरॉय लुधियाना में पारिवारिक व्यवसाय के कुछ हिस्सों का प्रबंधन करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का विस्तार
राजा सिंह ने अपने विनिर्माण कार्यों को मजबूत करने के लिए कई संबंधित उद्यम स्थापित किए। 1979 में, उन्होंने टेलीविजन के लिए लकड़ी के कैबिनेट बनाने के लिए दिल्ली में राजकमल इंडस्ट्रीज की स्थापना की।
टेक्सला ने 1982 में 50,000 इकाइयों की वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ अपनी रंगीन टेलीविजन रेंज लॉन्च की। एक साल बाद, कंपनी ने कम लागत वाले पोर्टेबल ब्लैक-एंड-व्हाइट टीवी सेट पेश किए, जिससे टेलीविजन तकनीक आम घरों की पहुंच में आ गई।
बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, लुधियाना में प्रति वर्ष दो लाख टीवी सेट की क्षमता वाली एक नई विनिर्माण इकाई स्थापित की गई।  1986 में, राजा सिंह ने लुधियाना के नंदपुर में पिक्चर ट्यूब्स के निर्माण के लिए मुलार्ड ट्यूब्स लिमिटेड की स्थापना करके व्यवसाय का और विस्तार किया।
1987 में, उनके नेतृत्व में एक और कंपनी, बेस्टाविजन इलेक्ट्रॉनिक्स ने नोएडा में 50,000 सेट सालाना की क्षमता के साथ टेलीविजन का उत्पादन शुरू किया। बाद में 1988 में पटना में एक दूसरी इकाई स्थापित की गई।
कंपनी ने 1989 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की जब टेक्सला को एक ही वर्ष में तीन लाख टेलीविजन सेट बनाने के बाद राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार मिला।
परोपकार और सामाजिक योगदान
औपचारिक शिक्षा की कमी के बावजूद, राजा सिंह सीखने की शक्ति में दृढ़ता से विश्वास करते थे।
शिक्षा क्षेत्र में योगदान
बाद में उन्होंने गुरु राम दास एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना की, जो लुधियाना और देहरादून में जीआरडी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, राजपुर रोड, देहरादून और जीआरडी अकादमी स्कूलों सहित कई शैक्षणिक संस्थान चलाता है। उन्होंने सरब सांझी गुरबानी भी बनाई, जो ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, प्रकाशनों और भक्ति कार्यक्रमों के माध्यम से गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक पहल है।
राजा सिंह 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान उनके मानवीय कार्यों के लिए भी जाने जाते थे, जब उन्होंने कई पीड़ितों को रोजगार और सहायता की पेशकश की थी, जिन्होंने अपनी आजीविका खो दी थी।
लीगेसी को आगे बढ़ाना
इन सालों में, परिवार ने दूसरे सेक्टर में भी काम किया। उनके कामों में कंगनवाल में टेक्सला प्लास्टिक्स एंड मेटल्स के ज़रिए प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग, डार्क आई ब्रांड नाम से रोड सेफ्टी प्रोडक्ट्स और निर्वाण लग्जरी होटल के साथ हॉस्पिटैलिटी सेक्टर शामिल हैं।
आज, परिवार नोएडा में एक टेलीविज़न प्रोडक्शन यूनिट चलाता है और साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, एजुकेशन और हॉस्पिटैलिटी में अपने अलग-अलग बिज़नेस भी मैनेज करता है।
एक हमेशा रहने वाली लेगेसी
राजा सिंह की ज़िंदगी इस बात का एक ज़बरदस्त उदाहरण है कि कैसे पक्के इरादे और कड़ी मेहनत मुश्किल हालात को कामयाबी में बदल सकती है। बिना किसी फॉर्मल एजुकेशन वाले एक रिफ्यूजी बच्चे से लेकर भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के पायनियर तक, उनके योगदान ने लाखों घरों तक सस्ती टेक्नोलॉजी पहुंचाई।
राजा सिंह की लेगेसी उन लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी जिन्होंने उनके काम की तारीफ़ की और उनके विज़न से फ़ायदा उठाया।
NSS is a national organization dedicated to social service Dr. Anil Verma

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