एन०सी०सी० कैडेट्स को यूथ रेडक्रास ने दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण
यूथ रेडक्रास कमेटी के मास्टर ट्रेनर डिजास्टर मैनेजमेंट अनिल वर्मा ने कहा कि उत्तराखंड राज्य प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। एन०सी०सी० कैडेट्स आपदा प्रबंधन का विधिवत् प्रशिक्षण प्राप्त करके आपदा के दौरान सरकार की मदद करने में बहुत सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
श्री वर्मा ने रेडक्रास की स्टेट डिजास्टर रिस्पांस टीम सदस्या मेजर प्रेमलता वर्मा के सहयोग से एनसीसी की 11- यू०के० बटालियन के दून यूनिवर्सिटी में आयोजित दस दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के दौरान 700 छात्रा कैडेट्स , एसोसिएट एन सी सी ऑफीसर्स,जीसीआई तथा पीआई स्टाफ को आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण के तहत “इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू” , फर्स्ट एड ट्रेनिंग तथा स्वास्थ्य जागरूकता आदि का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि समस्त उत्तराखंड राज्य भूकंप, भूस्खलन,त्वरित बाढ़,बादल फटना, वनाग्नि आदि विभिन्न प्रकार की आपदाओं के प्रति बहुत संवेदनशील है। लोगों की सोच कि आपदा प्रबंधन मात्र सरकारी दायित्व है ,सरासर गलत है।आपदाओं के नियंत्रण में आम जनता का सहयोग भी बेहद जरूरी है। विशेषकर एनसीसी कैडेट्स जैसे शिक्षित, साहसी एवं अनुशासित युवाओं को यदि आपदा प्रबंधन का विधिवत् प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से प्रदान किया जाये तो युवाओं की बड़ी संख्या आपदा नियंत्रण में बहुत ही कारगर साबित होगी।
डॉ० अनिल वर्मा ने विशेष प्रशिक्षण के अंतर्गत घायलों को आपदा के दौरान सर्च एंड रेस्क्यू के तहत् घायलों अथवा रोगियों को सुरक्षित निकाल कर ले जाने हेतु ” इमरजेंसी मेथड्स ऑफ रेस्क्यू” के “फ्री हैंड्स टेक्निक्स” में ह्यूमन क्रेडल, ह्यूमन क्रच, फायरमैंस लिफ्ट, क्लाॅथ लिफ्ट,फोर एंड आफ्ट मेथड, पिक-अबैक,रिवर्स पिक – अबैक,टो- ड्रैग,टू-थ्री-फोर हैंडेड सीट तथा “रोप रेस्क्यू प्रशिक्षण ” के तहत् रस्सियों के माध्यम से क्लब्ड हैंड्स, बो-लाईन ड्रेग , ड्रा- हिच , चेयर नाॅट रेस्क्यू तथा इंप्रोवाइज्ड स्ट्रेचर आदि का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
” फर्स्ट एड ट्रेनिंग” के अंतर्गत हार्ट अटैक पड़ने पर मरीज के बचाव हेतु सी०पी०आर० ( कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन )
का विधिवत् व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।
इसके अतिरिक्त जागरूकता हेतु डेंगू फीवर से बचाव , नशामुक्ति, जीते जी रक्तदान- मरने के बाद नेत्रदान व देहदान के साथ ही नियमित रक्तदान करने से रक्तदाता को होने वाले अनेक फायदों की जानकारी दी।गंभीर रक्तरोग थैलीसीमिया मुक्त भारत बनाने हेतु “जन्म कुण्डली नहीं,रक्त कुण्डली ” मिलान करने के बाद ही विवाह करें, इसकी विस्तृत जानकारी प्रदान की ।
बटालियन की प्रशासनिक अधिकारी मेजर शशि मेहता ने डॉ० अनिल वर्मा तथा सहयोगी मेजर प्रेमलता वर्मा का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आपदा प्रबंधन , फर्स्ट एड प्रशिक्षण व स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम को बहुत ही उपयोगी एवं प्रशंसनीय करार दिया। उन्होंने यूथ रेडक्रास के रक्तदाता शिरोमणि डॉ० अनिल वर्मा को बटालियन की तरफ से शील्ड प्रदान करके विशेष रूप से सम्मानित किया।
प्रशिक्षण के उपरांत दून यूनिवर्सिटी की एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट (डॉ०) स्मिता त्रिपाठी तथा सीनियर जीसीआई सिव्या गुप्ता के कुशल नेतृत्व में सीनियर अण्डर ऑफीसर संतोषी ,अंडर ऑफीसर गीतांजलि भाटिया, अंडर ऑफीसर निशा पंवार सार्जेंट अमिशा, सार्जेंट तनु राणा तथा सार्जेंट राखी नेगी ने युद्ध अथवा आपदा के दौरान घायलों का रेस्क्यू ऑपरेशन तथा सीपीआर देने का प्रायोगिक प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर बटालियन की प्रशासनिक अधिकारी मेजर शशि मेहता , सूबेदार (ऑनरेरी कैप्टन) कृष्णा तड़ियाल,नायक गणेश,, हवलदार पाटिल त्रयंबक, सीनियर जीसीआई मंजू कैंतुरा, सीनियर जीसीआई सिव्या गुप्ता, सीनियर जीसीआई पूनम जोशी, सीटीओ सुगंधा ममगाईं तथा सीटीओ मेधा पेटवाल सहित 700 कैडेट उपस्थित थे।

















