Home उत्तराखंड भगवान शिव हलाहल कालकूट बिष पीकर बने नीलकंठ

भगवान शिव हलाहल कालकूट बिष पीकर बने नीलकंठ

Lord Shiva became Neelkanth after consuming the Halahal-Kalkut poison.
Lord Shiva became Neelkanth after consuming the Halahal-Kalkut poison.

रिया सोलीवाल, भिकियासैंण

स्याल्दे/भिकियासैंण। जय महाकाल सेवा समिति भरसोली द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस पर मुख्य यजमान महेन्द्र सिंह बंगारी उनकी धर्मपत्नी मीनाक्षी देवी बंगारी द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। तत्पश्चात कथा व्यास नन्दा वल्लभ पन्त द्वारा शिव महापुराण कथा के माध्यम से बताया कि समुद्र मंथन के दौरान सबसे पहले हलाहल कालकूट बिष निकला, भयंकर बिष की तीव्रता से संपूर्ण सृष्टि और सभी देवता-दानव जलने लगे तब संकट से रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे बिष को अपने कंठ में धारण किया, जिससे बिष के तेज से उनका कंठ नीला पड़ गया, तभी से उनका नाम नीलकंठ पड़ा का सुंदर वर्णन किया। आयोजन को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष प्रताप सिंह, रामदत्त दत्त ढौडियाल, बालम सिंह बंगारी,कैलाश ढौडियाल,हीरा सिंह बंगारी,कुन्दन सिंह महेत्ता,लक्की प्रताप सिंह बंगारी,खुशहाल सिंह बंगारी,इंद्र सिंह महेरा,बचें सिंह बंगारी,मनोज चन्द्र जोशी आदि जुटे रहे।