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October 13, 2026
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उत्तराखंड

पीडब्लू की लापरवाही से ठप्प हुई भाबर पेयजल योजना, 5 दिन से पानी को तरस रहे ग्रामीण

Bhabhar drinking water scheme stalled due to PWD negligence; villagers deprived of water for five days.

रिया सोलीवाल, भिकियासैंण

बिना एनओसी सड़क निर्माण के दौरान तोड़ी मुख्य पाइपलाइन, बहाल न होने पर आंदोलन की चेतावनी

स्याल्दे/भिकियासैंण। जिला पंचायत अल्मोड़ा के उपाध्यक्ष सुरेंद्र नेगी व मीडिया प्रभारी सुमित मनराल ने लोक निर्माण विभाग जल संस्थान के बीच समन्वय की कमी के चलते क्षेत्र की जनता को हो रही भारी परेशानी पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि विकास खंड स्याल्दे के देघाट क्षेत्र अंतर्गत मल्ली चमयाड़ी, तली चमयाड़ी और मोहनीढैया सहित कई गांवों के ग्रामीणों द्वारा लगातार दूरभाष एवं अन्य माध्यमों से शिकायतें मिल रही हैं, कि भाबर पेयजल योजना से पिछले पांच दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप्प है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब इसकी जांच की गई तो पता चला कि करीब पांच दिन पूर्व पीडब्लू विभाग ने जल संस्थान से बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए और बिना किसी पूर्व सूचना के सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इस दौरान लापरवाही के चलते भाबर पेयजल योजना की मुख्य पाइपलाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। जल संस्थान के स्थानीय अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि पीडब्लूडी द्वारा नियमों के विपरीत बिना किसी जानकारी के यह कार्य किया गया।

मीडिया प्रभारी सुमित मनराल ने कहा कि भीषण गर्मी के इस मौसम में ग्रामीणों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को पानी के लिए दो से तीन किलोमीटर दूर प्राकृतिक स्रोतों तक जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दो विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा निर्दोष जनता भुगत रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुमित मनराल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में अधिशासी अभियंता, जल संस्थान रानीखेत को आधिकारिक पत्र भेजकर मांग की है कि, अगले 24 घंटे के भीतर यीडब्लू विभाग से समन्वय स्थापित कर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत कर जलापूर्ति तत्काल बहाल की जाए। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारी अल्मोड़ा से मांग की है कि बिना एनओसी कार्य कराने वाले दोषी ठेकेदार अथवा अधिकारी से ही मरम्मत का पूरा खर्च वसूला जाए।

वहीं जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुरेंद्र नेगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे ग्रामीणों के साथ संबंधित विभागों के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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