नई दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के सभागार में 25 देशों की सहभागिता के बीच मिला सम्मान।
रिया सोलीवाल, भिकियासैंण
नैनीताल। शिक्षा, शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के नरतोला गाँव निवासी एवं गणित के प्राध्यापक. डॉ सुरेंद्र विक्रम सिंह पड़ियार को प्रतिष्ठित ‘वैश्विक शिक्षक रत्न अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें रविवार, 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जयंती समापन समारोह में प्रदान किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय के सभागार में अंतर्राष्ट्रीय समरसता मंच द्वारा आयोजित इस गरिमामय समारोह में 25 देशों की सहभागिता रही। सर्वोच्च न्यायालय के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में देशभर से चयनित 51 प्राध्यापकों को उनके शैक्षणिक, शोध एवं अकादमिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
डॉ. पड़ियार का चयन उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों, विद्यार्थियों के प्रति समर्पण, शोध कार्यों, नवाचार तथा शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के आधार पर किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. पड़ियार ने कहा कि यह पुरस्कार उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ विद्यार्थियों, सहकर्मियों और उन सभी लोगों के विश्वास एवं सहयोग का सम्मान है, जिन्होंने उनकी शैक्षणिक यात्रा में निरंतर प्रोत्साहन दिया।
डॉ. पड़ियार शिक्षण कार्य के साथ-साथ शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय हैं। उनके 50 से अधिक शोध-पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। उनके नाम 10 पेटेंट एवं 5 पुस्तकें भी दर्ज हैं। शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें अब तक 8 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
इनमें मुख्य सचिव, उत्तराखंड द्वारा प्रदान किया गया ‘उत्तराखंड बेस्ट टीचर अवाॅर्ड’, और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदान किया गया ‘देवभूमि शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार’, के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय विशिष्ट अचीवर अवाॅर्ड’ अंतर्राष्ट्रीय यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड सहित विभिन्न सम्मान शामिल हैं।
डॉ. पड़ियार शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, शोध, नवाचार, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। उनका मानना है कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और समाज की दिशा निर्धारित करने वाला मार्गदर्शक होता है।
समारोह में ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, ‘ग्लोबल विलेज’ एवं ‘सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’ की भावना को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा के माध्यम से सामाजिक समरसता, विश्व बंधुत्व, मानवीय मूल्यों एवं वैश्विक शांति को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. पड़ियार को अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए नेपाल के काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम हेतु भी आमंत्रित किया गया है।
नैनीताल और उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण:
डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह पड़ियार को वैश्विक शिक्षक रत्न अवाॅर्ड मिलने से नैनीताल सहित उत्तराखंड के शैक्षणिक जगत में हर्ष का माहौल है। उन्हें उच्च शिक्षा के प्राध्यापकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी।
यह सम्मान डॉ. पड़ियार की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ नैनीताल और उत्तराखंड की शैक्षणिक प्रतिभा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली एक महत्वपूर्ण पहचान के रुप में देखा जा रहा है। शिक्षा, शोध और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में उनके निरंतर प्रयासों को इस सम्मान ने एक नई अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान की है।
