*राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली में किया गौरवांवित*
नई दिल्ली/चंपावत( हमारी चौपाल) उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र चंपावत जिले की मंजूबाला को उनके असाधारण शिक्षण कार्य के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान 2025 से नवाजा गया है। शुक्रवार को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में मंजूबाला को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। इस सम्मान के साथ मंजूबाला न केवल अपने क्षेत्र बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय बनी हैं, क्योंकि वे इस वर्ष राज्य से इस पुरस्कार को पाने वाली एकमात्र शिक्षिका हैं।
*दुर्गम परिस्थितियों में शिक्षा का अलख* मंजूबाला वर्तमान में चंपावत जिले के बाराकोट ब्लॉक स्थित च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। यह स्कूल सड़क मार्ग से लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां पहुंचना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। 2005 से इस स्कूल में सेवारत मंजूबाला ने अपने समर्पण और मेहनत से इस दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 2011 में उन्होंने इस स्कूल को जिले का पहला अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बनाने का कीर्तिमान स्थापित किया, जो उनके नवाचार और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है।
*शिक्षा के साथ सामाजिक जागरूकता*
मंजूबाला केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने बच्चों को कुमाऊनी भाषा और संस्कृति से भी जोड़ा। इसके अलावा, उन्होंने नियमित कक्षाओं के साथ इवनिंग क्लासेस की शुरुआत की, जहां वे बच्चों को अतिरिक्त पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल भी सिखाती हैं। उनके प्रयासों का परिणाम यह है कि उनके पढ़ाए कई छात्रों ने सेना, एसएसबी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में सफलता हासिल की है। इसके साथ ही वे स्काउट एंड गाइड में गाइड कैप्टन के रूप में भी सक्रिय हैं और स्थानीय समुदाय को जागरूक करने में योगदान दे रही हैं।
*राष्ट्रपति का संदेश और सम्मान*
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, “शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार यह है कि उनके छात्र जीवन भर उन्हें याद रखें और समाज व देश के लिए योगदान दें।” उन्होंने मंजूबाला जैसे शिक्षकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करने वाले शिक्षक देश के भविष्य को संवार रहे हैं। मंजूबाला को इस अवसर पर प्रशस्ति पत्र, 50,000 रुपये नकद और एक रजत पदक से सम्मानित किया गया।
*पिछले सम्मानों की झलक*
मंजूबाला का यह पहला सम्मान नहीं है। इससे पहले उन्हें शैलेश मटियानी पुरस्कार, तीलू रौतेली पुरस्कार, आयरन लेडी पुरस्कार और मानव संसाधन विकास मंत्रालय का टीचर ऑफ द ईयर अवार्ड जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इन उपलब्धियों ने उनके शिक्षण के प्रति समर्पण को और मजबूती दी है।
*स्थानीय प्रभाव और प्रेरणा*
च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय में वर्तमान में केवल छह छात्र हैं, फिर भी मंजूबाला हर दिन पैदल कई किलोमीटर चलकर बच्चों को पढ़ाने पहुंचती हैं। उनका कहना है, “मेरा लक्ष्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देना है।” उनके इस प्रयास ने न केवल स्थानीय समुदाय में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है, बल्कि अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के अंतर्गत एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है, जिसमें शिक्षक की शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की प्रशंसा की जाती है। इसके साथ ही 50,000 रुपये की राशि भी पुरस्कार स्वरूप दी जाती है। इस पुरस्कार के तहत शिक्षक को एक पदक भी प्रदान किया जाता है। यह कार्यक्रम देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित होता है, जहां पूरे देश के शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है।
मंजूबाला की इस उपलब्धि से चंपावत जिला गौरवान्वित है, और उनका सफर दूरस्थ गांव से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का एक प्रेरक उदाहरण है।

















