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उत्तराखंड

अगामी कैबिनेट में रखा जायेगा ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का प्रस्तावः डॉ. धन सिंह रावत

Proposal for ‘fully literate’ state to be tabled in upcoming cabinet meeting Dr. Dhan Singh Rawat

शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश, शासन को शीघ्र भेजें प्रस्ताव

कहा, भारत सरकार द्वारा निर्धारित साक्षरता मानकों पर उतरे हैं खरे

देहरादून, 17 जून 2026
सूबे को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य घोषित करने के लिये शीघ्र ही आगामी कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा। इसके लिये विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पूर्ण साक्षर राज्य से सम्बंधित प्रस्ताव शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिये गये हैं। केन्द्र सरकार की उल्लास (अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी) कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को राज्य पूरा कर रहा है।

सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड एक और कामयाबी हासिल करने से महज एक कदम दूर है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही प्रदेश को ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य का दर्जा मिल जायेगा। इसके लिये आगामी कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव लाया जायेगा, और इस विषय पर चर्चा की जायेगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जायेगा। उन्होंने इस संबंध में विद्यालयी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शीघ्र प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दे दिये गये हैं। डॉ. रावत ने कहा कि भारत सरकार के अंडरस्टैंडिंग लाइफलॉन्ग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसाइटी (उल्लास) कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को राज्य में पूरा कर लिया गया है। वर्तमान में राज्य की साक्षरता दर 98 फीसदी से अधिक है। उन्होंने कहा कि उल्लास कार्यक्रम के तहत प्रदेश में वयस्कों के लिये बुनियादी साक्षरता, महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया। इसके लिये विद्यालयी शिक्षा विभाग के तहत सामाजिक संस्थाओं, कॉरपोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लिया गया और निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाया गया। जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समूहों को शामिल गया गया। योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी। डॉ. रावत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को अब तक पांच राज्य हासिल कर चुके हैं जिनमें मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल है।

क्या होता है ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य?
‘पूर्ण साक्षर’ का दर्जा केंद्र सरकार के उल्लास कार्यक्रम के तहत तय किया जाता है। जिसका फोकस 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की एजुकेशन पर होता है। सरकार के मुताबिक जब किसी राज्य में एडल्ट्स की एजुकेशन की दर करीब 95 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ या फुल्ली लिटरेट राज्य माना जाता है।

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