
*आयोग ने खारिज किया लीक का दावा, पुलिस जांच में कोई गैंग नहीं*
देहरादून| उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में कथित पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बीच प्रदेश के बेरोजगार युवा रविवार को सड़कों पर उतर आए। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने परीक्षा में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए परेड ग्राउंड से सचिवालय की ओर कूच किया, जिससे राजधानी की प्रमुख सड़कें जाम हो गईं। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग की, बल्कि सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने की भी अपील की। वहीं, आयोग और पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह संगठित लीक का मामला नहीं है, बल्कि एक केंद्र से तीन पेजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, और जांच जारी है।
*परीक्षा का विवरण और लीक के आरोप*
यूकेएसएसएससी की यह स्नातक स्तरीय परीक्षा विभिन्न विभागों में ग्रुप-सी पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेशभर के 445 परीक्षा केंद्रों पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तीन घंटे की लिखित परीक्षा चली। लगभग 2.5 लाख उम्मीदवारों ने इसमें भाग लिया, जो विभिन्न पदों जैसे पटवारी, लेखपाल, वीडीओ आदि के लिए आवेदन कर चुके थे। आयोग के अनुसार, परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, और मोबाइल जेमर्स के उपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी।
हालांकि, उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने दावा किया कि परीक्षा शुरू होने के मात्र 35 मिनट बाद, यानी सुबह 11:35 बजे, एक सेट के तीन पेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि हरिद्वार के एक परीक्षा केंद्र से यह पेपर लीक हुआ, जहां से तस्वीरें खींचकर बाहर भेजी गईं। कंडवाल ने कहा, “लीक हुए पेजों और परीक्षा में वितरित प्रश्न पत्रों का मिलान करने पर कई प्रश्न एक जैसे पाए गए। यह परीक्षा की गोपनीयता और निष्पक्षता पर सीधा सवाल है। युवाओं का खून उबल रहा है, क्योंकि हम सालों की मेहनत को इस तरह बर्बाद होते नहीं देख सकते।” संघ ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने प्रदेश में चल रही आपदा (हालिया भारी बारिश और बाढ़) को देखते हुए परीक्षा स्थगित करने की उनकी मांग को नजरअंदाज किया, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आयोग अध्यक्ष से मुलाकात भी की थी।
प्रदर्शन के दौरान, परेड ग्राउंड में एकत्र युवाओं ने आंदोलन की रणनीति बनाई। राम कंडवाल के नेतृत्व में हजारों युवा सचिवालय की ओर बढ़े, नारे लगाते हुए “पेपर लीक माफ नहीं करेंगे”, “सीबीआई जांच हो” और “परीक्षा रद्द करो” गूंजे। मार्च के दौरान एकत्र युवाओं ने चक्का जाम कर दिया, जिससे देहरादून-मसूरी मार्ग सहित प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक ठप हो गया। प्रदर्शन में विभिन्न जिलों से युवा शामिल हुए, जिनमें कई महिलाएं भी थीं। संघ ने मांग की कि परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की जाए, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा।
*आयोग का पक्ष: “यह पेपर लीक नहीं, तीन पेजों की तस्वीरें वायरल*
यूकेएसएसएससी के अध्यक्ष गणेश सिंह मार्टोलिया ने रविवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह पेपर लीक का मामला नहीं है। परीक्षा के एक सेट के मात्र तीन पेज किसी केंद्र से बाहर चले गए, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। पूरी परीक्षा में 100 प्रश्न थे, और लीक केवल आंशिक था। हमने सभी केंद्रों पर मोबाइल जammers लगाए थे, फिर भी यह कैसे हुआ, इसकी आंतरिक जांच चल रही है।” मार्टोलिया ने स्पष्ट किया कि आयोग ने देहरादून के एसएसपी और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को पत्र लिखकर तत्काल जांच के लिए कहा है। “यदि कोई दोषी पाया गया, तो सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन परीक्षा रद्द करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि यह संगठित षड्यंत्र नहीं लगता।”
आयोग ने यह भी बताया कि परीक्षा से पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें सीसीटीवी निगरानी और मजिस्ट्रेटों की तैनाती शामिल थी। मार्टोलिया ने युवाओं से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और जांच का इंतजार करें। आयोग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह संभवतः किसी उम्मीदवार या स्टाफ की व्यक्तिगत लापरवाही है, न कि माफिया का हाथ। हमने पहले भी 2022 के लीक कांड से सबक लिया है, जब परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।”
*पुलिस प्रशासन का पक्ष: कोई गैंग नहीं, दो संदिग्ध हिरासत में*
देहरादून पुलिस ने रविवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कथित लीक की जांच में अब तक कोई संगठित गैंग का हाथ नहीं मिला है। एसएसपी कमलकांत ध्यानी ने कहा, “हमने हरिद्वार केंद्र से जुड़े सबूत जुटाए हैं। दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ चल रही है। यह व्यक्तिगत स्तर पर तस्वीरें शेयर करने का मामला लगता है। एसटीएफ को भी शामिल किया गया है, और जल्द ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी।” पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण रुख अपनाया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि हिंसा हुई तो कार्रवाई होगी।
प्रशासन ने बताया कि प्रदर्शन के कारण ट्रैफिक डायवर्जन किया गया, और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों का स्रोत ट्रेस करने का दावा किया, और कहा कि यदि लीक की पुष्टि हुई तो आरोपी के खिलाफ कड़ी धारा (जैसे उत्तराखंड पब्लिक एग्जामिनेशन (एंटी-चीटिंग) एक्ट 2023 के तहत) लगाई जाएगी।
*राजनीतिक प्रतिक्रिया और पृष्ठभूमि*
इस घटना ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, प्रदेश अध्यक्ष करण महार ने कहा, “धामी सरकार पेपर लीक माफिया को रोकने में नाकाम रही। सख्त कानून होने के बावजूद यह क्यों हो रहा? युवाओं का गुस्सा जायज है।” वहीं, भाजपा ने आरोपों को “राजनीतिक साजिश” करार दिया। प्रदेश मीडिया इंचार्ज मनवीर सिंह चौहान ने कहा, “यह सरकार को बदनाम करने की कोशिश है। धामी सरकार ने 30,000 से अधिक नौकरियां दी हैं, और 200 से ज्यादा चीटिंग करने वालों को जेल भेजा। हम पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।”
गौरतलब है कि उत्तराखंड में पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं। 2022 में भी यूकेएसएसएससी की परीक्षा लीक हुई थी, जिसके बाद एसटीएफ ने 35 लोगों को गिरफ्तार किया और परीक्षा रद्द कर दी गई। तब सरकार ने ग्रुप-सी परीक्षाओं को उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को सौंप दिया था, लेकिन अब फिर यूकेएसएसएससी ही आयोजन कर रहा है। बेरोजगार संघ ने कहा कि आपदा संकट के बीच परीक्षा आयोजित करना ही गलत था, क्योंकि कई केंद्रों पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में उम्मीदवारों को पहुंचने में दिक्कत हुई।
प्रदर्शन के बाद बेरोजगार संघ ने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक जांच रिपोर्ट नहीं आई और कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन तेज होगा। आयोग ने कहा कि आंतरिक जांच पूरी होने पर उम्मीदवारों को अपडेट दिया जाएगा। पुलिस ने अपील की कि युवा शांत रहें और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करें। यह घटना न केवल भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि राज्य सरकार के लिए नया राजनीतिक विवाद भी खडा कर दे रही है।
















