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‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के वीर नायक राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी की जयंती पर परमार्थ निकेतन की  गंगा आरती उन्हें समर्पित

Ganga Aarti of Parmarth Niketan dedicated to the brave hero of 'Kakori Train Action' Rajendranath Lahiri on his birth anniversary
Ganga Aarti of Parmarth Niketan dedicated to the brave hero of 'Kakori Train Action' Rajendranath Lahiri on his birth anniversary

ऋषिकेश।  आज महान स्वतंत्रता सेनानी, ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के वीर नायक राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती उन्हें समर्पित कर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने श्रद्धाजंलि अर्पित की।
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी उन अमर बलिदानियों में से हैं, जिनके त्याग और साहस की अग्निशिखा आज भी राष्ट्रप्रेम की लौ जलाए हुए है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए युवावस्था का प्रत्येक क्षण समर्पित किया जा सकता है।
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी ने बहुत ही कम आयु में अपने प्रखर राष्ट्रप्रेम, तेजस्विता और अदम्य साहस से यह सिद्ध कर दिया कि एक सच्चा युवा वही है जो अपने देश, संस्कृति और मूल्यों के लिए जीना और मरना जानता हो। वे केवल क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि एक आध्यात्मिक योद्धा थे, जिनके भीतर सत्य, न्याय और स्वतंत्रता की ज्वाला प्रज्ज्वलित थी।
1925 में काकोरी में जब ब्रिटिश खजाना लूटा गया, वह केवल एक ट्रेन डकैती नहीं थी, बल्कि ब्रिटिश सत्ता की नींव को हिलाने वाला क्रांतिकारी कदम था। उसमें राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की भूमिका निर्णायक थी। उनका साहस, रणनीति और नेतृत्व कौशल ने आजादी की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्हें मात्र 24 वर्ष की आयु में फाँसी दी गई वह भी नियत तिथि से दो दिन पहले ताकि देश में विद्रोह न भड़क उठे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जिस राष्ट्र में राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जैसे सपूत जन्म लेते हैं, वह राष्ट्र न कभी गुलाम रह सकता है और न ही आत्मबल खो सकता है। आज जब भारत ‘अमृत काल’ में प्रवेश कर रहा है, तब हमें यह विचार करना होगा कि क्या हम लाहिड़ी जी के सपनों का भारत बना पाए हैं? आज का युवा यदि डिजिटल सशक्तिकरण के साथ नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना से जुड़ जाए, तो भारत फिर से विश्वगुरु बन सकता है।
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी का जीवन आज के युवाओं के लिए कर्तव्यपरायणता, साहस और आत्मबल का मार्गदर्शक दीप है। उन्होंने हमें सिखाया कि क्रांति केवल हथियारों से नहीं होती, विचारों, समर्पण और सेवा से होती है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, अशफाकउल्ला खान, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरों का स्मरण केवल इतिहास नहीं, आत्मा का शुद्धिकरण है। ये स्मृतियाँ हमें आत्मगौरव, आत्मबल और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ती हैं।
हम इन बलिदानियों को केवल नमन करें इतना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी जी की जयंती केवल एक तारीख नहीं, उस महान यज्ञ की अग्नि का स्मरण है जिसमें हजारों युवाओं ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।
हम सब मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण करें जो न्याय, समरसता, सेवा और स्वाभिमान पर आधारित हो। वही लाहिड़ी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।