Home उत्तराखंड सीएसआईआर की पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ को ‘कीर्ति पुरस्कार’

सीएसआईआर की पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ को ‘कीर्ति पुरस्कार’

डॉ. मनीष मोहन गोरे
पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से समाज में ज्ञान-विज्ञान का प्रसार होता है। देश की अनेक पत्रिकाओं के प्रकाशन ने पाठकों में वैज्ञानिक चेतना फैलाने में अहम भूमिका निभाई है। कुछ पत्रिकाओं का प्रकाशन किन्हीं बाधाओं के आने से अवरुद्ध हो जाता है, वहीं कुछ पत्रिकाएं लम्बे समय तक अबाध प्रकाशित होती रहती हैं। विज्ञान लोकप्रियकरण की स्वैच्छिक संस्था विज्ञान परिषद प्रयाग की ‘विज्ञान’ पत्रिका विगत 107 वर्षों से अनवरत प्रकाशित हो रही है। वहीं वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की मासिक विज्ञान पत्रिका ‘विज्ञान पत्रिका’ भी विगत सात दशकों से निरंतर प्रकाशित हो रही है। आरम्भ में इस पत्रिका में सीएसआईआर की प्रौद्योगिकियों और उद्योगों के साथ उनके एकाकार से संबंधित लेख प्रकाशित किए जाते थे। मगर कुछ वर्षों के बाद समाज में वैज्ञानिक जागरूकता के उद्देश्य से इसे एक विज्ञान लोकप्रियकरण पत्रिका का स्वरूप दे दिया गया।
आज विज्ञान प्रगति अपने स्वरूप में पूरे देश के पाठकों के बीच विशेष स्थान रखती है। भारत में सर्वाधिक बोली, पढ़ी और समझी जाने वाली हिंदी भाषा में इस पत्रिका को राजभाषा विभाग (गृह मंत्रालय) का कीर्ति पुरस्कार इसके महत्व की अभिवृद्धि करता है।

विज्ञान प्रगति की विषय सामग्री बच्चों व युवा विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति कौतूहल जगाने के साथ उनमें विज्ञान के अध्ययन-अनुसंधान की प्रेरणा का संचार करती है।

 

सीएसआईआर के नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (निस्पर) से प्रकशित होने वाली इस लोकप्रिय मासिक विज्ञान पत्रिका श्विज्ञान प्रगतिश् को राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा वर्ष 2021-2022 के लिए प्रतिष्ठित कीर्ति पुरस्कार (प्रथम स्थान) प्रदान किया गया। 14 सितंबर 2022 को सूरत (गुजरात) में आयोजित दूसरे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में प्रो. रंजना अग्रवाल, निदेशक, सीएसआईआर-निस्पर ने यह सम्मान ग्रहण किया। यह महत्वपूर्ण पुरस्कार माननीय केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह, गुजरात के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल और माननीय केन्द्रीय गृह राज्य मंत्रीगण श्री अजय कुमार मिश्रा तथा श्री निशिथ प्रामाणिक के हाथों प्रदान किया गया।
विज्ञान प्रगति वर्ष 1952 से जन-जन की भाषा हिंदी में वैज्ञानिक जागरूकता का विकास करने में अहम भूमिका निभा रही है। यह पत्रिका भारत के कोने-कोने में बच्चों, शोधार्थियों, शिक्षकों और आमजन के द्वारा बड़े चाव से पढ़ी जाती है। यह पत्रिका सरल भाषा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी जानकारी को आम जनमानस तक पहुंचाने का काम करती है। इस पत्रिका की विषय सामग्री बच्चों व युवा विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति कौतूहल जगाने के साथ उनमें विज्ञान के अध्ययन-अनुसंधान की प्रेरणा का संचार करती है। प्रतियोगी परीक्षार्थी भी इस पत्रिका की सामग्री को प्रामाणिक स्रोत के रूप में उपयोग करते हैं।
भारतीय संविधान में निहित अनुच्छेद 51 ।ख्ी, सभी भारतीय नागरिकों को एक ऐसा मौलिक कर्तव्य का संबल प्रदान करता है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण, खोजबीन, सुधार और मानवता की भावनाओं के विकास का समर्थन करता है।

इस अवसर पर सीएसआईआर-निस्पर की निदेशक प्रो. रंजना अग्रवाल ने कहा कि लोकप्रिय पत्रिका ‘विज्ञान प्रगति’ को मिला यह राजभाषा कीर्ति पुरस्कार दरअसल सीएसआईआर सहित इस पत्रिका के पाठकों, लेखकों और संपादकों का सम्मान है।

डॉ. मनीष मोहन गोरे
वैज्ञानिक, सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान और
संपादक, विज्ञान प्रगति,
डॉ. के.ए. कृष्णन मार्ग, नई दिल्ली 110012